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मखाना खेती की नई तकनीक सीखने पहुंचे MP के किसान, लिंगाडीह में हुआ प्रशिक्षण

रायपुर मध्यप्रदेश के किसानों का ग्राम लिंगाडीह आरंग में मखाना खेती भ्रमण एवं प्रशिक्षण संपन्न धान के कटोरे कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में अब एक नई फसल अपनी पहचान बना रही है – सुपर फूड मखाना, जिसे काला हीरा भी कहा जाता है। स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर मखाने की खेती अब राज्य में आधुनिक तकनीक और नवाचार के साथ हो रही है। मखाना उत्पादन पर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष  चंद्रहास चंद्राकर एवं अध्यक्ष जनपद सदस्य आरंग,  रिंकू चंद्राकर ने की. मध्य प्रदेश के किसानो  सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि  चंद्रहास चंद्राकर ने कहा की केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों के  आर्थिक उन्नति के लिए विशेष रूप से कार्य कर रही है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी के प्रयासों से छत्तीसगढ़ मखाना बोर्ड सेन्ट्रल सेक्टर स्कीम में शामिल हुआ है इसके लिए हम उनका आभार व्यक्त करते हैं.हमारे मुख्य मंत्री  विष्णु देव साय कृषि मंत्री  राम विचार नेताम जी के द्वारा मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने विशेष प्रयास किया जा रहा है  चंद्राकर ने कहा की छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम व्यवसायिक उत्पादन आरंग ब्लॉक के ग्राम लिंगाडीह के किसान स्व.  कृष्ण कुमार चंद्राकर द्वारा प्रारंभ किया गया था। राज्य का प्रथम मखाना प्रसंस्करण केंद्र का उद्घाटन 5 दिसंबर 2021 को ग्राम लिंगाडीह में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। अब मखाना उत्पादन में प्रदेश में आरंग का नाम अपनी अलग पहचान बना चुका है.   कार्यक्रम के अध्यक्ष जनपद सदस्य  रिंकू चंद्राकर ने कहा किया हमारे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश का प्रथम मखाना उत्पादन एवं संस्करण केंद्र हमारे क्षेत्र ग्राम लिंगाडीह में स्थापित हुआ है.छटेरा, निसदा एवं अन्य गांव में भी इसके विस्तार हेतु प्रयास किया जा रहे हैं हमारे इस केंद्र में न केवल हमारे प्रदेश के बल्कि अन्य प्रदेश के लोग भी यहां मखाना की खेती सीखने आ रहे हैं जो हमारे प्रदेश के लिए गर्व की बात है.  मध्य प्रदेश के उमरिया जिला से 50 किसानों का एक भ्रमण दल कृषि विभाग के द्वारा मखाना की खेती के भ्रमण हेतु रायपुर जिला के आरंग ब्लॉक स्थित ओजस फॉर्म का भ्रमण किया। इस दौरान किसानों ने मखाना की खेती के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की और अपने अनुभव साझा किए। राष्ट्रीय मखाना महोत्सव 2024 एवं 2025 में सम्मानित मखाना उत्पादक किसान  एवं ओजस फार्म दाऊजी मखाना के प्रबंधक  संजय नामदेव ने मखाना की खेती के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रति एकड़ में 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है और उत्पादन लगभग 10 क्विंटल के आसपास प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि 6 माह की अवधि वाले फसल में किसी भी प्रकार का कीट व्याधि का प्रकोप नहीं होता है और न ही किसी प्रकार की चरी और चोरी की समस्या रहती है। इंदिरा गाँधी कृषि विश्व विद्यालय के सब्जी विज्ञान के पी एच डी छात्र डॉ योगेंद्र चंदेल ने किसानों को मखाना की खेती के लिए आवश्यक तकनीक और संसाधनों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मखाना की खेती तालाब एवं खेत दोनों विधि से की जाती है अधिकतम उत्पादन के लिए धान की तरह खेत की मताई 1 मीटर की दुरी पर 55 दिन के नर्सरी की 4000 पौधो की रोपाई एक मीटर पौधा से पौधा एवं कतार से कतार की दुरी पर रोपाई समय समय पर नींदाई  खाद प्रबंधन वैज्ञानिक तरीके से करने पर अधिकतम उत्पादन मिलता है मखाना की खेती प्रसंसकरण एवं विपणन के लिए हमारे द्वारा किसानों को  प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की जाती है। ICAR-CIPHET (केंद्रीय कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान), लुधियाना, पंजाब से प्रशिक्षण प्राप्त शिव नारायण साहू ने मखाना के प्रोसेसिंग की जानकारी देते हुए बताया कि 1 किलो मखाना के बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप प्राप्त होता है, जिसकी बाजार में कीमत ₹700 से लेकर ₹1000 तक होती है। उन्होंने बताया कि यदि किसान मखाना का उत्पादन कर स्वयं प्रसंस्करण कर पैकेजिंग करके भेजते हैं तो प्रति एकड़ अधिकतम लाभ प्राप्त हो सकता है। इस भ्रमण के दौरान किसानों ने मखाना की खेती के बारे में   शिव साहू से विस्तृत जानकारी प्राप्त की और अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि मखाना की खेती से उन्हें अच्छा मुनाफा हो सकता है और यह उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकता है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मखाना बोर्ड से इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को मखाना की खेती के लिए प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की जाती है, और उन्हें इसके लिए सब्सिडी भी दी जाती है। इस भ्रमण में मध्य प्रदेश के किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग से भ्रमण दल प्रभारी  दहायत एवं भ्रमण दल में शामिल किसानों ने बताया कि वे मखाना की खेती के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए उत्साहित हैं और इसे अपने खेतों में अपनाने के लिए तैयार हैं।

MP में मखाना उत्पादन को बढ़ावा: 150 हेक्टेयर क्षेत्र में पायलट प्रोजेक्ट लागू

भोपाल बिहार की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी मखाना की खेती होगी। प्रदेश के चार जिलों में पायलट प्रोजेक्ट लागू किया जाएगा। 150 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को 75 हजार प्रति हेक्टेयर या लागत का 40 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। इस योजना के तहत एमपी के 99 कृषकों ने ऑनलाइन आवेदन किए हैं। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि मध्यप्रदेश में भी बिहार की तर्ज पर मखाना की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रदेश के 4 जिलों नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी में मखाना खेती क्षेत्र विस्तार को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा रहा है। अब मध्य प्रदेश में भी बिहार की तर्ज पर मखाना की खेती की जाएगी। राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से चार जिलों नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी में मखाना उत्पादन को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत प्रदेश में 150 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना खेती विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। मध्य प्रदेश के 4 जिलों से शुरुआत  मध्य प्रदेश के चार जिलों से मखाने की खेती की शुरुआत होने वाली है, उद्यानिकी विभाग ने मखाना उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी जिले में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरु करने की योजना बनाई है. उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं, मंत्री का कहना है कि मखाना खेती से किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी और प्रदेश में जल संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा, इसलिए इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है.  कृषकों को सरकार की ओर से 75 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर या लागत का 40% तक अनुदान मिलेगा। फिलहाल इस योजना के अंतर्गत 99 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन कर चुके हैं। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि मध्यप्रदेश की जलवायु मखाना उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त है। बिहार में जिस तरह से मखाना खेती ने किसानों की आमदनी बढ़ाई है, उसी मॉडल को अब मध्यप्रदेश में लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मखाना उत्पादन छोटे तालाबों और जलाशयों में सिंघाड़े की तरह किया जा सकता है, जिससे जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग होगा। मंत्री कुशवाह ने किसानों से इस योजना से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि भारत सरकार द्वारा मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मखाना बोर्ड का गठन भी किया गया है। मध्यप्रदेश इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। आयुक्त उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण अरविंद दुबे ने बताया कि परियोजना पर लगभग 45 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ बीज, प्रशिक्षण और प्रसंस्करण सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। मखाने की देश और विदेश (अरब देशों व यूरोप) में उच्च मांग को देखते हुए यह योजना प्रदेश के किसानों के लिए नए अवसर लेकर आ सकती है। किसानों को अनुदान भी मिलेगा मखाना खेती को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को 75 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर या कुल लागत का 40 प्रतिशत तक अनुदान भी सरकार की तरफ से दिया जाएगा. इससे किसानों को नई फसल को अपनाने में मदद मिलेगी, बता दें कि मखाने का उत्पादन सिंघाड़े की तरह छोटे-छोटे तालाबों में किया जाता है, इसी को ध्यान में रखते हुए चारों जिलों में लगभग 150 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना उत्पादन विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है. इस परियोजना पर करीब 45 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे. जिसके लिए सरकार की तरफ से उद्यानिकी विभाग को बजट भी मिलेगा.  किसानों से लिए जा रहे आवेदन  योजना की शुरुआत के बाद प्रदेश के 99 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया है, विभाग का कहना है कि सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद इसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी विस्तारित किया जाएगा. सरकार को उम्मीद है कि मखाना खेती प्रदेश के किसानों के लिए एक नई आजीविका का स्रोत बनेगी और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.  

बिहार के बाद अब मध्य प्रदेश में मखाना क्रांति, किसानों को मिलेगा नया विकल्प

नर्मदापुरम  गेहूं, चना, धान के साथ नर्मदापुरम जिले में मखाने की खेती (makhana cultivation) करने का प्रयोग पहली बार किया जा रहा है। उद्यानिकी विभाग सब्सिडी देकर किसानों को इस खेती के लाभ बता रहा है। अभी तक 150 किसानों ने अपनी सहमति दे दी हैं। उन्हें मखाने उत्पादन का दरभंगा में प्रशिक्षण दिया जाएगा। उद्यानिकी फसलों में विस्तार करते हुए मखाने को भी जोड़ा जा रहा है। पहले चरण में जिलेभर में लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाने लगाए जाएंगे। मखाने की खेती पहली बार की जाएगी। इसे लेकर किसान असमंजस में हैं। इसलिए उद्यानिकी विभाग के अधिकारी उन्हें मखाने के उत्पादन से लेकर लाभ तक की जानकारी दे रहे हैं। किसानों की बढ़ेगी आय बाजार में 2 हजार रुपए क्विंटल बिकने वाले मखाने की खेती होने वाली अतिरिक्त आय के बारे में बताया जा रहा है। किसान को बताया जा रहा है कि इसमें खेत का उपयोग नहीं करना है। किसान अपने तालाब में सिंघड़ा की खेती की तरह ही मखाने की फसल लगा सकता है। अभी तक 150 किसानों को चिह्नित किया गया है। इन किसानों को दरभंगा रिसर्च सेंटर में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए जल्दी ही एक दल रवाना होगा।  किसानों को शासन करेगा मदद मखाना की खेती (makhana cultivation) के लिए शासन किसानों को सब्सिडी देगा, इसमें कितनी राशि होगी। इसका निर्धारण होना अभी की स्थिति में बाकी है। इसके लिए शासन स्तर से योजना की नीति आने वाली है। इसके हिसाब से जिले में मखाना खेती की योजना संचालित होगी। उद्यानिकी अधिकारी भी जाएंगे दरभंगा किसानों की तरह उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को भी मखाने लगाने की जानकारी दी जाएगी। इसके लिए अधिकारियों की टीम दरभंगा जाएगी। यह टीम वहां मखाने की खेती में तकनीक का उपयोग कैसे किया जाता है, इसका प्रशिक्षण लेगी। प्रयोग किया जा रहा है जिले में पहली बार मखाने की खेती करने का प्रयोग किया जा रहा है। इसके लिए अभी तक 150 किसान ने सहमति दी है। जल्द ही इन्हें दरभंगा में खेती करने को प्रशिक्षण दिलाएंगे। अधिकारियों को भी प्रशिक्षण मिलेगा।- रीता उईके, उप संचालक उद्यानिकी नर्मदापुरम