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मान सरकार का संवेदनशील फैसला: शहीद अध्यापक परिवार को वित्तीय सहायता और शिक्षा का पूरा खर्च

चंडीगढ़  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों के साथ हर सुख-दुख में एक मज़बूत चट्टान की तरह खड़ी है। मोगा जिले में चुनाव ड्यूटी के दौरान एक दर्दनाक सड़क हादसे में अपनी जान गंवाने वाले अध्यापक दंपति के प्रति गहरी संवेदना और सम्मान प्रकट करते हुए, राज्य सरकार ने न केवल 20 लाख रुपये की कुल वित्तीय सहायता राशि तुरंत जारी कर दी है, बल्कि पीड़ित परिवार के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की भी बड़ी घोषणा की है। यह हृदयविदारक घटना उस समय घटी जब सरकारी अध्यापक जसकरण सिंह अपनी पत्नी कमलजीत कौर को चुनाव ड्यूटी पर छोड़ने जा रहे थे।  मोगा के बाघापुराना क्षेत्र में घने कोहरे और कम दृश्यता के कारण उनकी गाड़ी अनियंत्रित होकर एक गहरी खाई में गिर गई। इस दुखद हादसे में दोनों अध्यापकों की असामयिक मृत्यु ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने तुरंत कदम उठाए और पंजाब विधानसभा के स्पीकर स. कुलतार सिंह संधवा स्वयं पीड़ित परिवार के घर पहुंचे।  परिवार के साथ दुख साझा करते हुए स्पीकर संधवा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में सरकार इन बच्चों को कभी बेसहारा नहीं छोड़ेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार इन बच्चों की शिक्षा का सारा खर्चा वहन करेगी ताकि उनके माता-पिता का सपना अधूरा न रहे। मुख्यमंत्री के निर्देशों पर जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। पंजाब सरकार द्वारा दी गई यह त्वरित सहायता और बच्चों की शिक्षा का संकल्प केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह अपने कर्मयोगियों के प्रति सरकार के अटूट सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया को सफल बनाने में शिक्षकों का योगदान अतुलनीय है और उनके बलिदान को प्रदेश कभी नहीं भुला सकता। विपक्षी दलों की केवल हवाई बयानबाजी के विपरीत, मान सरकार ने धरातल पर ठोस काम करके दिखाया है कि आम आदमी की सरकार वास्तव में जनता और कर्मचारियों के हितों के प्रति जवाबदेह है। संकट की इस घड़ी में सरकार की ओर से दिखाए गए इस मानवीय और संवेदनशील रुख ने राज्य के लाखों कर्मचारियों के भीतर यह विश्वास और गहरा किया है कि उनकी सेवा और सुरक्षा पंजाब सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुलाजिमों की छुट्टी पर मान सरकार का आदेश, नए निर्देश जारी

लुधियाना  नगर निगम में फर्जी तरीके से ए.टी.पी. व एम.टी.पी. की कुर्सी पर बैठने वालों की छुट्टी होगी, जिसके तहत सरकार ने सी.डी.सी. चार्ज वापस लेने का आदेश जारी कर दिया है। इस मामले में खुलासा हुआ है कि नगर निगम में सरकार की मंजूरी के बिना एस.ई. रंजीत सिंह को एम.टी.पी. का चार्ज दिया गया है। इसके अलावा 4 रैगुलर ए.टी.पी. खाली बैठे होने के बावजूद इंस्पैक्टर गुरविंद्र सिंह लक्की, कुलजीत मांगट, नवनीत खोखर व हैड ड्राफ्ट्समैन जगदीप सिंह को ए.टी.पी. का चार्ज दिया गया है। यह हालात खाली बैठे रैगुलर ए.टी.पी. राज कुमार, रणधीर सिंह, सुनील कुमार, निरवाण को तो मजाक का पात्र बना ही रहे हैं, इससे करैंट ड्यूटी चार्ज देने बारे सरकार के निर्देशों का भी उल्लंघन हो रहा है जिसके मद्देनजर लोकल बॉडीज विभाग द्वारा नगर निगम प्रशासन को फटकार लगाई गई है। इस संबंध में जारी सर्कुलर में साफ कहा है कि किसी भी मुलाजिम को करैंट डयूटी चार्ज देने के लिए पर्सोनल विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन किया जाए जिसके आधार पर किसी भी मुलाजिम को सी.डी.सी. चार्ज देने पर रोक लगा दी गई है और जिन मुलाजिमों को एडीशनल चार्ज दिया गया है, उसे तुरंत वापस लेने के निर्देश दिए गए हैं। इस आर्डर में यह भी क्लीयर कर दिया गया है कि किसी मुलाजिम को सी.डी.सी. चार्ज देने वाले आफिसर की जिम्मेदारी होगी। अब देखना यह है कि गलत तरीके से दिया गया ए.टी.पी. व एम.टी.पी. का चार्ज वापस लेने के मामले में कमिश्नर द्वारा क्या फैसला किया जाएगा। नेताओं की सिफारिश पर तोड़े जा रहे हैं नियम जहां तक नगर निगम में ए.टी.पी. व एम.टी.पी. को सी.डी.सी. चार्ज देने के नियमों के उल्लंघन का सवाल है, उसके लिए नेताओं की सिफारिश का हवाला दिया जाता है जिसका सबूत यह है कि नगर निगम में मुलाजिमों की पोस्टिंग जोन की जगह हल्का वाइज की जा रही है और नेताओं की पसंद के मुताबिक ही कुछ देर बाद मुलाजिमों की ट्रांसफर कर दी जाती है। इस दौर में अब सी.डी.सी. चार्ज देने बारे सरकार के ऑर्डर लागू करने के मामले में अफसरों के सामने नेताओं की सिफारिश को नजरअंदाज करने की चुनौती भी आ गई है।

मान सरकार का बड़ा कदम: स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए हजारों एएनएम और नर्सों की भर्ती मंजूर

चंडीगढ़ प्रदेश के स्वास्थ्य देखभाल ढांचे को मजबूत एवं बेहतर बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने घोषणा की कि वित्त विभाग ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एन.एच.एम.) के अंतर्गत ए.एन.एम. एवं स्टाफ नर्सों के 1,568 रिक्त पदों को भरने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। भर्ती अभियान के बारे में अधिक जानकारी देते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि इस मंजूरी के तहत ए.एन.एम. के कुल 2,000 स्वीकृत पदों में से 729 रिक्त पदों एवं स्टाफ नर्सों की 1896 स्वीकृत पदों में से 839 रिक्त पदों को भरा जाएगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि स्टाफ की कमी के कारण स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में कोई रुकावट न आए और इसलिए इन ठेका-आधारित पदों को भरने को प्राथमिकता दी गई है। इस पहल के प्रति मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार की वित्तीय प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि इन भर्तियों से वार्षिक कुल 48.88 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रभाव पड़ने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ए.एन.एम. पदों के लिए वार्षिक 18.98 करोड़ रुपये एवं स्टाफ नर्स के लिए 29.90 करोड़ रुपये का खर्च वहन करेगी। उन्होंने बताया कि स्वीकृत वेतन संरचना के तहत ए.एन.एम. के लिए 21,700 रुपये एवं स्टाफ नर्सों के लिए 29,700 रुपये प्रति माह वेतन निर्धारित किया गया है। वित्त मंत्री चीमा ने आगे बताया कि योग्यता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भर्ती प्रक्रिया बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, फरीदकोट द्वारा लिखित परीक्षा के माध्यम से करवाई जाने का प्रस्ताव है। उन्होंने आगे कहा कि वित्त विभाग ने यह मंजूरी इस शर्त पर दी है कि स्वास्थ्य विभाग इन नियुक्तियों के बारे में पर्सनल विभाग से आवश्यक सहमति सुनिश्चित करे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की स्वास्थ्य देखभाल एवं शिक्षा को प्राथमिकता देने की दृढ़ प्रतिबद्धता को उजागर करते हुए वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इस फैसले से प्रदेश सरकार अपने स्वास्थ्य देखभाल कार्यबल को मजबूत करेगी ताकि पंजाब के लोगों के लिए और बेहतर एवं मानक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकें। उन्होंने कहा कि इन रिक्त पदों को भरने से निस्संदेह राज्य की प्रभावी एवं कुशल स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं प्रदान करने की क्षमता में वृद्धि होगी, जो वर्तमान प्रदेश सरकार की अपने नागरिकों की भलाई के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मान सरकार का बड़ा फैसला: 1,568 एएनएम व स्टाफ नर्स पदों पर भर्ती से स्वास्थ्य ढांचा होगा सशक्त

चंडीगढ़ प्रदेश के स्वास्थ्य देखभाल ढांचे को मजबूत एवं बेहतर बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने घोषणा की कि वित्त विभाग ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एन.एच.एम.) के अंतर्गत ए.एन.एम. एवं स्टाफ नर्सों के 1,568 रिक्त पदों को भरने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। भर्ती अभियान के बारे में अधिक जानकारी देते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि इस मंजूरी के तहत ए.एन.एम. के कुल 2,000 स्वीकृत पदों में से 729 रिक्त पदों एवं स्टाफ नर्सों की 1896 स्वीकृत पदों में से 839 रिक्त पदों को भरा जाएगा।  उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि स्टाफ की कमी के कारण स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में कोई रुकावट न आए और इसलिए इन ठेका-आधारित पदों को भरने को प्राथमिकता दी गई है। इस पहल के प्रति मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार की वित्तीय प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि इन भर्तियों से वार्षिक कुल 48.88 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रभाव पड़ने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ए.एन.एम. पदों के लिए वार्षिक 18.98 करोड़ रुपये एवं स्टाफ नर्स के लिए 29.90 करोड़ रुपये का खर्च वहन करेगी। उन्होंने बताया कि स्वीकृत वेतन संरचना के तहत ए.एन.एम. के लिए 21,700 रुपये एवं स्टाफ नर्सों के लिए 29,700 रुपये प्रति माह वेतन निर्धारित किया गया है। वित्त मंत्री चीमा ने आगे बताया कि योग्यता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भर्ती प्रक्रिया बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, फरीदकोट द्वारा लिखित परीक्षा के माध्यम से करवाई जाने का प्रस्ताव है। उन्होंने आगे कहा कि वित्त विभाग ने यह मंजूरी इस शर्त पर दी है कि स्वास्थ्य विभाग इन नियुक्तियों के बारे में पर्सनल विभाग से आवश्यक सहमति सुनिश्चित करे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की स्वास्थ्य देखभाल एवं शिक्षा को प्राथमिकता देने की दृढ़ प्रतिबद्धता को उजागर करते हुए वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इस फैसले से प्रदेश सरकार अपने स्वास्थ्य देखभाल कार्यबल को मजबूत करेगी ताकि पंजाब के लोगों के लिए और बेहतर एवं मानक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकें। उन्होंने कहा कि इन रिक्त पदों को भरने से निस्संदेह राज्य की प्रभावी एवं कुशल स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं प्रदान करने की क्षमता में वृद्धि होगी, जो वर्तमान प्रदेश सरकार की अपने नागरिकों की भलाई के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पंजाब सरकार ने बाढ़ प्रभावित किसानों को दिया ऐतिहासिक राहत पैकेज, अब तक की सबसे बड़ी मदद

चंडीगढ़  इस वर्ष आई बाढ़ ने पंजाब के कई जिलों में व्यापक तबाही मचाई, जिससे किसानों, ग्रामीण परिवारों और खेतिहर मजदूरों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। लेकिन संकट की इस घड़ी में पंजाब सरकार ने रिकॉर्ड स्तर का राहत पैकेज जारी किया, जिसे राज्य का अब तक का सबसे बड़ा और सर्वाधिक प्रभावी मुआवजा प्रयास बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट किया कि “किसानों की मुश्किल में सरकार उनके साथ खड़ी है, सिर्फ कागजों पर नहीं, जमीन पर कार्रवाई के साथ।” “जिसका खेत, उसदी रेत” योजना के तहत बाढ़ के बाद खेतों में आई भारी मात्रा में रेत हटाने के लिए किसानों को 7,200 रुपये प्रति एकड़ की विशेष सहायता दी जा रही है। साथ ही फसल क्षति के मुआवजे को भी नई परिभाषा दी गई है—अब 26–33% नुकसान पर 10,000 रुपये, 33–75% नुकसान पर 10,000 रुपये और 75–100% नुकसान पर 20,000 रुपये प्रति एकड़ सहायता प्रदान की जा रही है। इनमें से 14,900 रुपये प्रति एकड़ राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे हैं, जो देश में सबसे अधिक माना गया है। घर टूटने की स्थिति में भी मुआवजे को कई गुना बढ़ा दिया गया है। पहले सिर्फ 6,500 रुपये मिलते थे, अब पूरी तरह क्षतिग्रस्त घरों के लिए 1.20 लाख रुपये और आंशिक नुकसान के लिए 35,100 रुपये स्वीकृत किए गए हैं। नदी कटाव से प्रभावित किसानों को 47,500 रुपये प्रति हेक्टेयर (18,800 रुपये प्रति एकड़) दिए जाएंगे। इसके अलावा सेम प्रभावित क्षेत्रों के लिए 4.50 करोड़ रुपये का पैकेज भी जारी हुआ है। राज्य सरकार ने केंद्र से सहायता राशि बढ़ाकर 50,000 रुपये प्रति एकड़ करने की मांग की है, जबकि केंद्र द्वारा घोषित 1,600 करोड़ रुपये को राज्य ने अपर्याप्त बताया है। यह राहत पैकेज न केवल तत्काल सहायता उपलब्ध कराता है, बल्कि यह पंजाब में मानवीय और जवाबदेह आपदा प्रबंधन की मिसाल स्थापित कर रहा है।

पशुपालकों के लिए संजीवनी बनी राहत योजना: 59 लाख रुपये से डेयरी सेक्टर को सहारा

चंडीगढ़ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हाल ही में घोषित इस योजना के तहत होशियारपुर और तारागढ़ गांव के पशुपालकों और डेयरी किसानों को कुल 59 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। यह पहल पंजाब में पशुपालन और डेयरी उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के सरकार के दृष्टिकोण का हिस्सा है। इस योजना के अंतर्गत राजपुरा में 17 लाख रुपये और तारागढ़ में 42 लाख रुपये की राशि वितरित की जाएगी, जिससे स्थानीय पशु चिकित्सालयों का आधुनिकीकरण और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। पंजाब सरकार ने पशुपालकों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए इस वर्ष 204 डेयरी किसानों को 3 करोड़ रुपये की सहायता राशि वितरित की है। यह राशि 2 से 20 पशुओं वाली डेयरी इकाइयों की स्थापना के लिए दी गई है। इसके अलावा, 9,150 बेरोज़गार युवाओं को डेयरी प्रशिक्षण प्रदान किया गया है ताकि वे स्वरोज़गार के अवसर प्राप्त कर सके। प्रदेश भर में 47 राज्य और ज़िला स्तरीय सेमिनार और शिविर आयोजित किए गए है, जिनमें पशुधन किसानों को बीमा योजना के लाभ, दावा प्रक्रिया और पशु स्वास्थ्य प्रबंधन के बारे में शिक्षित किया गया है। यह पहल भागीदारी और विश्वास को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री लाल चंद कटारूचक ने हाल ही में एक समीक्षा बैठक में बताया कि सरकार ने गेहूं खरीद सीज़न के दौरान 8 लाख से अधिक किसानों की सुविधा के लिए व्यापक तैयारी की है। उन्होंने कहा कि होशियारपुर ज़िले में 3.14 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं आने की उम्मीद है, जबकि जालंधर, कपूरथला और शहीद भगत सिंह नगर क्रमशः 5.25 लाख, 3.61 लाख और 2.64 लाख मीट्रिक टन का योगदान देंगे। मंत्री ने किसानों द्वारा लाए गए प्रत्येक अनाज को खरीदने की सरकार की प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया और कहा कि खरीद प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान के दूरदर्शी नेतृत्व में पंजाब का डेयरी उद्योग उल्लेखनीय परिवर्तन देख रहा है। माझा क्षेत्र में 135 करोड़ रुपये की एक बड़ी परियोजना शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य स्टरलाइज्ड फ्लेवर्ड दूध और लस्सी तथा दही जैसे किण्वित डेयरी उत्पादों के उत्पादन की क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाना है। यह साहसिक कदम उच्च गुणवत्ता वाले दूध उत्पादन में अग्रणी राज्य के रूप में पंजाब की स्थिति को मजबूत करता है। स्थानीय दूध संयंत्र में अपग्रेड की गई सुविधाएं उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाएंगी, जो क्षेत्र और उससे आगे बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए मूल्य वर्धित दूध उत्पादों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी। पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव राहुल भंडारी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 30,000 पशुओं का बीमा किया गया है और किसानों को 7 करोड़ रुपये की सहायता राशि वितरित की गई है। इस योजना के तहत, पशुओं की मृत्यु या बीमारी की स्थिति में किसानों को तुरंत वित्तीय सहायता मिलती है, जिससे उन्हें अपने परिवार का भरण-पोषण जारी रखने में मदद मिलती है। सरकार ने युवाओं को डेयरी खेती के बारे में सक्रिय रूप से शिक्षित करने और विभागीय योजनाओं के बारे में सूचित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं ताकि अधिकतम लाभ जमीनी स्तर तक पहुंच सके। पशु चिकित्सालयों के आधुनिकीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। केंद्र सरकार की योजना के तहत, मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों की खरीद और अनुकूलन के लिए 100% वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। यह सेवा किसानों के दरवाजे पर टोल-फ्री नंबर के माध्यम से उपलब्ध है, जिसमें रोग निदान, उपचार, टीकाकरण, छोटी शल्य चिकित्सा हस्तक्षेप और विस्तार सेवाएं शामिल हैं। पंजाब में वर्तमान में पशु चिकित्सा उपचार की सुविधाएं मजबूत की जा रही हैं, जिससे पशुधन रोगों का शीघ्र पता लगाने और प्रबंधन की क्षमता बढ़ रही है। वेरका ब्रांडेड उत्पादों को अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लॉन्च किया जा रहा है, जिससे दूध, दही और लस्सी जैसे प्रतिष्ठित उत्पाद वैश्विक उपभोक्ताओं तक पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में, सेलिब्रिटी ब्रांड एंबेसडर की शुरुआत और एक नए शुभंकर ‘वीरा’ सहित नवीन ब्रांडिंग प्रयास उपभोक्ता जुड़ाव को बढ़ाने और वैश्विक मंच पर ब्रांड दृश्यता को ऊंचा करने के लिए तैयार है। राज्य पारंपरिक पसंदीदा जैसे रबड़ी और काजू बादाम दूध सहित नए डेयरी उत्पादों को भी पेश कर रहा है। ये परिवर्धन उपभोक्ता स्वाद की गहरी समझ और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि पिछले डेढ़ साल में पंजाब को 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि पंजाब में पूर्ण सांप्रदायिक सद्भाव है और औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण है, जो राज्य के समग्र विकास और समृद्धि को गति दे रहा है। नीदरलैंड स्थित डी ह्यूस कंपनी द्वारा राजपुरा में 138 करोड़ रुपये के पशु आहार संयंत्र की स्थापना इस बात का उदाहरण है कि पंजाब किस प्रकार निवेशकों के लिए पसंदीदा गंतव्य बन रहा है। यह संयंत्र किसानों को उच्च गुणवत्ता वाला पशु आहार प्रदान करेगा और उनकी आय बढ़ाने में मदद करेगा। 

किसानों के लिए खुशखबरी, मान सरकार ने 11 लाख से अधिक को MSP का लाभ पहुँचाया

मान सरकार की बड़ी उपलब्धि: 11 लाख से ज्यादा किसानों को मिला MSP का लाभ किसानों के लिए खुशखबरी, मान सरकार ने 11 लाख से अधिक को MSP का लाभ पहुँचाया एमएसपी के जरिए 11 लाख से ज्यादा किसानों को राहत, मान सरकार का दावा चंडीगढ़ धान की सुचारू खरीद सुनिश्चित करने में कोई कसर न छोड़ते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के दूरदर्शी नेतृत्व में पंजाब सरकार की सक्रिय पहल के चलते 12 नवंबर तक 11,31,270 किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) का लाभ प्राप्त हुआ है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री लाल चंद कटारूचक के नेतृत्व में खरीद, उठान और भुगतान की प्रक्रिया जोर-शोर से जारी है। अब तक 96,920 किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिलने के साथ पटियाला जिला राज्य में सबसे आगे है। उल्लेखनीय है कि 12 नवंबर की शाम तक राज्यभर की मंडियों में कुल 1,54,78,162.41 मीट्रिक टन धान की आमद हुई है। इनमें से 1,53,89,039.51 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है, जो कुल फसल का 99 प्रतिशत है। कुल उठान का आंकड़ा 1,41,09,483.18 मीट्रिक टन है, जो अब तक खरीदी गई फसल का 91 प्रतिशत बनता है।

मान सरकार ने दी बड़ी सौगात, हजारों कर्मचारियों के लिए मंजूर हुआ अहम प्रोजेक्ट

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने मोहाली जिले के डेराबस्सी के गांव मुबारकपुर में 100 बिस्तरों वाले आधुनिक ई.एस.आई. (Employee State Insurance Corporation) अस्पताल के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह अस्पताल अंग्रेजों के समय के बने पी.डब्ल्यू.डी. रेस्ट हाउस की लगभग साढ़े चार एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा। इसके बनने से डेराबस्सी क्षेत्र के करीब 50,000 औद्योगिक और निजी क्षेत्र के कामगारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। गौरतलब है कि डेराबस्सी और लालडू क्षेत्र में 500 से अधिक छोटे-बड़े और मध्यम स्तर के उद्योग हैं, जहां लगभग 40,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। इसके अलावा निर्माण क्षेत्र से जुड़े हजारों मजदूर अलग हैं। फिलहाल जिले में केवल एक ही ई.एस.आई. अस्पताल है, जो मोहाली में स्थित है और उसमें सिर्फ 50 बिस्तरों की क्षमता है। अक्सर मरीजों को वहां भर्ती या ऑपरेशन के लिए बिस्तर नहीं मिल पाता। इसी कारण डेराबस्सी क्षेत्र में ई.एस.आई. अस्पताल बनाने की मांग पिछले दो दशकों से चल रही थी। अप्रैल महीने में गांव मुबारकपुर-मीरपुर की जमीन रिकार्ड (साल 2022-23) के अनुसार 4 एकड़ 4 कनाल 11 मरले जमीन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग को अस्पताल निर्माण हेतु ट्रांसफर करने की मंजूरी दी गई थी। मजदूर वर्ग को सस्ता और उच्च गुणवत्ता वाला इलाज मिलेगा यह प्रोजेक्ट डेराबस्सी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगा और यहां के लोगों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। डेराबस्सी हलका तेज़ी से विकसित हो रहा औद्योगिक इलाका है, जहां हजारों मजदूर अपनी रोज़ी-रोटी कमाते हैं। इस ई.एस.आई. अस्पताल के बनने से मजदूर वर्ग को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।अस्पताल में जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य सेवा, आपातकालीन उपचार, डायग्नोस्टिक सुविधाएं और स्पेशलिस्ट ओ.पी.डी. सेवाएं उपलब्ध होंगी। इसके चलते यह इलाका एक आदर्श स्वास्थ्य केंद्र के रूप में उभरेगा। अस्पताल का नाम जैन मुनि नेमचंद के नाम पर रखने की मांग डीसी के आदेशों पर साइट सिलेक्शन कमेटी ने रामगढ़-ढकोली रोड पर स्थित मुबारकपुर रेस्ट हाउस का निरीक्षण किया था। डेराबस्सी से सड़क कनेक्टिविटी, आसान पहुंच और औद्योगिक क्षेत्र के नज़दीक होने के कारण इस जगह को सबसे उपयुक्त माना गया। हालांकि, जैन सभा मुबारकपुर ने मांग की है कि इस अस्पताल का नाम जैन मुनि नेमचंद जी के नाम पर रखा जाए।

CM फ्लाइंग स्क्वाड से ग्रामीण सड़क परियोजनाओं की सख्त जांच, मान सरकार सुधार में जुटी

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में राज्य के गांवों को जोड़ने वाली लिंक सड़कों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष सीएम फ्लाइंग स्क्वाड का गठन किया है। यह अनूठी पहल पंजाब के ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इस स्क्वाड में पंजाब मंडी बोर्ड और लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जो निर्माणाधीन और मरम्मत के दौरान सड़कों का सक्रिय निरीक्षण करेंगे। मुख्यमंत्री भगवंत मान की दूरदर्शी सोच और जनता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता इस योजना में साफ झलकती है, जो यह सुनिश्चित करती है कि हर रुपया जनता की भलाई में सही तरीके से खर्च हो। सीएम फ्लाइंग स्क्वाड में दोनों विभागों के अधीक्षण इंजीनियर शामिल हैं और इसका प्राथमिक उद्देश्य मालवा, माझा और दोआबा सहित सभी क्षेत्रों में ग्रामीण लिंक सड़कों की मरम्मत और उन्नयन कार्य का निरीक्षण, सत्यापन और गुणवत्ता बनाए रखना है। यह टीम पूरे पंजाब में सक्रिय रूप से काम करेगी ताकि सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर होने वाले खर्च में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। इस पहल से न केवल सड़कों की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि ठेकेदारों पर भी सख्त निगरानी रखी जाएगी। पंजाब सरकार का यह फैसला दर्शाता है कि भगवंत मान की सरकार जनता के हर पैसे की कीमत समझती है और उसे सही जगह इस्तेमाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। पंजाब एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुज़र रहा है, जहां 19,491 किलोमीटर से अधिक ग्रामीण लिंक सड़कों की मरम्मत और उन्नयन का काम चल रहा है, जिसकी लागत 4,150.42 करोड़ रुपये है। यह परियोजना राज्य भर में लगभग 7,373 लिंक सड़कों को कवर करती है और सबसे खास बात यह है कि ठेकेदारों को अगले पांच वर्षों तक इन सड़कों का रखरखाव करना होगा, जो पंजाब के इतिहास में पहली बार हो रहा है। पंजाब में लिंक सड़कों का कुल नेटवर्क लगभग 64,878 किलोमीटर है, जिसमें मंडी बोर्ड 33,492 किलोमीटर और लोक निर्माण विभाग 31,386 किलोमीटर सड़कों का प्रबंधन करता है। यह विशाल परियोजना दिखाती है कि मान सरकार ग्रामीण पंजाब के विकास को कितनी गंभीरता से ले रही है।  

मान सरकार का ऐतिहासिक फैसला: राज्य के लिए नया अध्याय शुरू

कोटकपूरा गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शताब्दी समारोह को समर्पित पंजाब विधानसभा का एक विशेष सत्र 24 नवंबर को चंडीगढ़ के बाहर आयोजित किया जा रहा है। श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी समारोह मुख्य रूप से 23 नवंबर से शुरू हो रहा है और 24 नवंबर शहीदी दिवस है। इतिहास में यह पहली बार होगा जब पंजाब सरकार राजधानी के बाहर श्री आनंदपुर साहिब में विधानसभा का सत्र आयोजित कर रही है। पंजाब सरकार ने इस सत्र की तैयारियां शुरू कर दी हैं और इस सरकारी प्रस्ताव पर मंथन के लिए बैठकों का दौर चल रहा है। सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस संबंध में एक विशेष बैठक बुलाई है। स्पीकर कार्यालय के अनुसार भारतीय संविधान के मुताबिक विधानसभा का सत्र कहीं भी आयोजित किया जा सकता है और राज्यपाल की स्वीकृति से पंजाब सरकार 24 नवंबर को श्री आनंदपुर साहिब स्थित बाबा जीवन सिंह मेमोरियल पार्क में यह सत्र आयोजित करने की तैयारी कर रही है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान 5 अक्टूबर को श्री आनंदपुर साहिब स्थित बाबा जीवन सिंह मेमोरियल पार्क का उद्घाटन करेंगे। विधानसभा स्पीकर कार्यालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को श्री आनंदपुर साहिब में पंजाब विधानसभा का सत्र आयोजित करने के लिए एक बैठक बुलाई है जिसमें सत्र के प्रारूप पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पंजाब विधानसभा सचिवालय के साथ पत्राचार किया जा रहा है।