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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ज्योति कुलस्ते को दिया सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंडला जिले के विधानसभा निवास के ग्राम जेवरा में सांसद  फग्गन सिंह कुलस्ते की सुपुत्री ज्योति कुलस्ते के वैवाहिक समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की भी विशेष मौजूदगी रही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ज्योति कुलस्ते को सुखद एवं समृद्ध वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं देते हुए उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने स्मृति स्वरूप उपहार भेंट कर उन्हें जीवन के नए अध्याय के लिए मंगलकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुलस्ते परिवार के सदस्यों से भी आत्मीय भेंट कर शुभकामनाएं व्यक्त कीं। समारोह में छत्तीसगढ़ के वन एवं सहकारिता मंत्री  केदार कश्यप, केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री  तोखन साहू, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती सम्पतिया उइके, नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री मती प्रतिमा बागरी, सहित अन्य विशिष्ट जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अमला गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।  

विवाह निमंत्रण पत्र की ये चूक बन सकती है वैवाहिक जीवन में बाधा

शादी का कार्ड सिर्फ एक निमंत्रण पत्र नहीं होता, बल्कि यह आपके नए जीवन की शुरुआत का पहला औपचारिक संदेश होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, विवाह पत्रिका में रंग, शब्द और प्रतीकों का सही चयन घर में सुख-समृद्धि लाता है। अगर कार्ड बनवाते समय वास्तु के नियमों की अनदेखी की जाए, तो यह वैवाहिक जीवन में अनचाही बाधाएं पैदा कर सकता है। वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, आइए जानते हैं कि शादी के कार्ड में क्या चीजें होनी चाहिए और क्या नहीं- रंगों का चुनाव वास्तु के अनुसार, शादी के कार्ड के लिए लाल, पीला, केसरिया या क्रीम रंग सबसे शुभ माने जाते हैं। लाल रंग: प्रेम और ऊर्जा का प्रतीक है। पीला रंग: ज्ञान और नई शुरुआत का सूचक है। क्या न करें: शादी के कार्ड में कभी भी काले या गहरे भूरे (Dark Brown) रंग का इस्तेमाल मुख्य रंग के तौर पर नहीं करना चाहिए, क्योंकि इन्हें नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। शुभ प्रतीकों का महत्व कार्ड पर देवी-देवताओं और मंगल प्रतीकों का होना सकारात्मक ऊर्जा फैलाता है। गणेश जी की प्रतिमा: किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से होती है, इसलिए कार्ड पर उनकी छवि अनिवार्य है। स्वास्तिक और कलश: ये चिन्ह सुख और वैभव का प्रतिनिधित्व करते हैं। ध्यान दें: आजकल मॉडर्न दिखने के चक्कर में लोग अजीबोगरीब आकृतियां बनवाते हैं, जिनसे बचना चाहिए। शब्दों और भाषा की शुद्धता 1. कार्ड पर लिखे शब्दों का प्रभाव गहरा होता है। 2. निमंत्रण की भाषा सौम्य और आदरपूर्ण होनी चाहिए। 3. ध्यान रखें कि कार्ड पर अपशब्द या भारी-भरकम शब्द न हों जो पढ़ने में नकारात्मक लगें। किन चीजों से बचें? नुकीले किनारे: वास्तु के अनुसार, कार्ड के कोने बहुत ज्यादा नुकीले नहीं होने चाहिए। गोलाई वाले या चौकोर किनारे बेहतर माने जाते हैं। अधूरी जानकारी: कार्ड पर शुभ मुहूर्त और तिथि साफ-साफ लिखें। अधूरी जानकारी भ्रम और वास्तु दोष पैदा करती है। चित्रों का चयन: कार्ड पर युद्ध, सूखे पेड़ या किसी भी उदास कर देने वाले चित्र का प्रयोग भूलकर भी न करें। वितरण का सही समय वास्तु शास्त्र कहता है कि शादी का पहला कार्ड हमेशा अपने कुलदेवता या भगवान गणेश को अर्पित करना चाहिए। इसके बाद ही सगे-संबंधियों को बांटना शुरू करें। शादी का कार्ड आपके खुशहाल भविष्य की नींव है। वास्तु के इन छोटे-छोटे बदलावों को अपनाकर आप अपने विवाह उत्सव को और भी मंगलमय बना सकते हैं।