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ग्वालियर शहर का मास्टर प्लान तैयार, 3 दिशा में बढ़ेगी सीमा, 600 करोड़ की लागत अनुमानित

ग्वालियर  ग्वालियर विकास प्राधिकरण (जीडीए ) ने नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपने विकास का रोडमैप तैयार कर लिया है। मंगलवार को संभागीय आयुक्त मनोज खत्री की अध्यक्षता में आयोजित संचालक मण्डल की बैठक में 241 करोड़ का बजट पेश किया गया। बजट का फोकस शहर के बाहरी इलाकों को मास्टर प्लान- 2035 के अनुसार मुख्य शहर से जोडऩे और नई आवासीय योजनाओं को विकसित करने पर है। खास बात यह है कि प्राधिकरण ने रुद्रपुरा और बड़ागांव के रूप में दो नई बड़ी योजनाओं को हरी झंडी दे दी है, जिससे आने वाले समय में शहर का दायरा और बढ़ेगा। वहीं पूर्व में स्वीकृत 363 करोड़ से एयरपोर्ट कॉरिडोर को हरी झंडी मिलने से इस तरफ के 15 गांवों में नए आवासीय शहर बस सकेंगे। झांसी बायपास और मुरैना रोड की ओर शहर का दबाव शिफ्ट होगा। शहर का विस्तार, तीन दिशाओं में खुलेंगे विकास के द्वार ग्वालियर अब अपनी पुरानी सीमाओं को तोड़कर बाहर की ओर बढ़ रहा है। जीडीए ने नए आवासीय क्षेत्रों के लिए तीन प्रमुख रूट्स को चिन्हित किए हैं, जहाँ आने वाले समय में टाउनशिप और सरकारी आवासीय योजनाएं नजर आएंगी:     मुरैना रोड (उत्तर दिशा): इस रूट पर पुरानी छावनी, खिरियाभाग, बदनापुरा व अन्य क्षेत्रों को नए आवासीय हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां औद्योगिक और आवासीय विकास का संगम दिखेगा। 2. झांसी बायपास (दक्षिण दिशा): शहर का सबसे प्रीमियम विस्तार इसी ओर हो रहा है। वीरपुरा, खरियामोदी, रमौआ, गणेशपुरा और बन्हारपुरा क्षेत्रों में मास्टर प्लान के तहत नई कॉलोनियां विकसित होंगी।     डबरा रोड (दक्षिणपूर्व दिशा): तुरारी, बागौर और भाटखेड़ी क्षेत्रों को नए रिहायशी जोन के रूप में मंजूरी मिली है। यहाँ की कनेक्टिविटी मास्टर प्लान की प्रस्तावित सड़कों से सीधे बायपास से होगी। एक साल बाद बैठक, दो नई नगर विकास योजनाओं को स्वीकृति     टीडीएस-07 (रुद्रपुरा): एयरपोर्ट से साडा लिंक रोड के पास 165.40 हेक्टेयर में विकसित होने वाली इस योजना पर 238 करोड़ खर्च होंगे, जबकि इससे 366 करोड़ के मुनाफे का अनुमान है।     टीडीएस-08 (बड़ागांव): मुरैना-झांसी बायपास को जोडऩे वाली इस योजना में 164.33 हेक्टेयर जमीन विकसित होगी। 181 करोड़ की लागत के मुकाबले 374 करोड़ के लाभ की उम्मीद है। दोनों योजनाओं के लिए प्लानिंग और बिल्डिंग टीमें तैनात कर दी गई हैं। मेला प्राधिकरण और अनुकंपा नियुक्ति व्यापार मेला: ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिससे शहर की व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी। हेल्थ सेक्टर: शताब्दीपुरम फेज-2 और यातायात नगर योजना में हेल्थ सेंटर और हेल्थ ब्लॉक के निर्माण को हरी झंडी मिली। इन सड़कों से सुधरेगी शहर की 'रफ्तार' मास्टर प्लान-2035 के तहत प्रस्तावित कई महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण को बजट में जगह मिली है : भाटखेड़ी-रमौआ मार्ग: ग्राम भाटखेड़ी से ग्राम रमौआ तक विकास कार्य। ललियापुरा अंडरपास: झांसी रोड से ब्लू लोटस कॉलोनी तक नई सड़क का निर्माण। झांसी बायपास कनेक्टिविटी: सिरोल तिराहे से झांसी बायपास तक 30 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण। एयरपोर्ट-साड़ा कोरिडोर: टीडीएस-04 योजना के तहत इस लिंक कोरिडोर के विकास कार्यों के लिए 363.66 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। ये पहले से स्वीकृत है। एयरपोर्ट-साडा लिंक कॉरिडोर को मंजूरी के लाभ ट्रैफिक व्यवस्था और पर्यटन को नई गति देने के लिए नगर विकास योजना टीडीएस-04 (एयरपोर्ट साडा लिंक कॉरिडोर) भविष्य के लिए बेहतर योजना है। फायदा: यह कॉरिडोर शहर के मुख्य हिस्सों को सीधे एयरपोर्ट से जोड़ेगा, जिससे वीआइपी मूवमेंट और आम यात्रियों के समय की भारी बचत होगी। सड़कों का जाल: मास्टर ह्रश्वलान 2035 के तहत सिरोल तिराहे से झांसी बायपास और भाटखेड़ी से रामिया तक 30 मीटर चौड़ी सड़कों के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए कुछ स्थानों पर 60 मीटर चौड़ी सड़कों के निर्माण पर भी मुहर लगी है, जो लिंक रोड की तर्ज पर शहर के बाहरी ट्रैफिक को नियंत्रित करेंगी। शताब्दीपुरम फेज-4: अब जमीन के बदले प्लॉट नहीं जीडीए की योजनाओं में अब तक 'आपसी सहमति' से जमीन के बदले भूखंड देने की जो परंपरा चली आ रही थी, उस पर अब पूरी तरह रोक लगा दी गई है। विशेष रूप से शताब्दीपुरम योजना फेज-4 के तहत अब तक किसानों या जमीन मालिकों को उनकी जमीन के बदले विकसित भूखंड दे दिए जाते थे। मंगलवार को हुई बैठक में स्पष्ट किया गया कि अब ऐसी किसी भी फाइल पर स्थानीय स्तर पर निर्णय नहीं होगा। अब जमीन के बदले मुआवजे या भूखंड के सभी प्रस्ताव 'राज्य शासन' को भेजे जाएंगे।   

मध्यप्रदेश के गांव बनेंगे स्मार्ट! 23 हजार पंचायतों में शहरी ढांचे की होगी शुरुआत

भोपाल  मध्य प्रदेश के गांवों की तस्वीर जल्द ही बदलने वाली है. आने वाले सालों में एमपी के गांव विकास के मामले में शहरों को टक्कर देंगे. एमपी की हर पंचायत के लिए एक मास्टर प्लान बनाया जाएगा जिसमें शहरों जैसी तमाम सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी. इस मास्टर प्लान के तहत रोजगार और पर्यटन पर ज़्यादा फोकस रहेगा. फिलहाल दो पंचायतों पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जबकि आने वाले समय में कुल 23 हज़ार पंचायतों को कवर करने की योजना है. क्या है ये मास्टर प्लान अक्सर शहरों को डेवलप करने के लिए मास्टर प्लान तैयार किए जाते हैं लेकिन मध्य प्रदेश ग्रामीण विकास की ये पहल प्रदेश के गांवों को नई दिशा प्रदान करेगी. इस मास्टर प्लान के तहत रोजगार और पर्यटन पर फोकस किया जाएगा जिससे लोग अपने स्तर पर कमाई को रास्ते खोज सकें. फिलहाल पंचायत  बिलकिसगंज, जिला सीहोर और पंचायत मुरवास, जिला विदिशा में इस मास्टर प्लान की नींव रखी जा चुकी है. ऐसे ही बाकी पंचायतों के लिए भी प्लान तैयार किए जाएंगे. किन बिंदुओं पर केंद्रित होगा प्लान इस मास्टर प्लान के तहत गांव में सड़क, बिजली, पानी, इंटरनेट और cctv कैमरे जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. साथ ही साथ साफ-सफाई, और वेस्ट मैनेजमेंट पर भी ध्यान रखा जाएगा. हेल्थ, एजुकेशन, हाउसिंग और एंटरटेंमेंट के  लिए भी पूरी व्यवस्थाएं रखी जाएंगी. शहरों की तरह गांव की जमीन के हिसाब से सेक्टर भी मार्क किया जाएगा.   किस स्तर तक पहुंची मास्टर प्लान की गाड़ी फिलहाल बिलकिसगंज और मुरवास, दोनों पंचायतों में सीसीटीवी लगाए जाने, लेक फ्रंट, नया बाजार, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, ग्रे वॉटर और ड्रेनेज सिस्टम, प्लास्टिक कलेक्शन सेंटर, नट उत्पादन, खेती, गौशाला निर्माण करने की योजना बनाई जा रही है. ये मेगा प्लान दो चरणों में काम करेगा. पहला चरण साल 2026 से 2030 और दूसरा चरण साल 2030 से 2035 तक चलेगा.  भोपाल के स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर द्वारा दोनों पंचायतों का प्लान तैयार किया गया है.  प्लान में हुई शामिल बातें     गांव में सड़क, बिजली, पानी, इंटरनेट और सीसीटीवी जैसी सुविधाएं। साफ-सफाई, सॉलिड और लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट की व्यवस्था।     हेल्थ, एजुकेशन, हाउसिंग और मनोरंजन के लिए अलग क्षेत्र तय। गांव की जमीन के हिसाब से सेक्टर चिह्नित किए गए हैं। गांवों में भी लेक फ्रंट, स्थानीय व्यापार पर जोर     इस प्लान के तहत दो चरणों में काम होगा। पहला चरण 2026 से 2030 और दूसरा चरण 2030 से 2035 तक चलेगा।     बिलकिसगंज के लिए 11 और मुरवास के लिए 7 खास प्रोजेक्ट बनाए गए हैं, जैसे- लेक फ्रंट, नया बाजार, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, ग्रे वॉटर और ड्रेनेज सिस्टम, प्लास्टिक कलेक्शन सेंटर, गो-काष्ठ निर्माण, नट उत्पादन और खेती, गौशाला निर्माण। प्लान की जरूरत क्यों पड़ी? अभी इनमें रोजगार, छोटे कारोबार और वेस्ट मैनेजमेंट जैसी जरूरतें नहीं हैं। गांवों व जंगलों को साफ-सुथरा और टिकाऊ बनाए रखना जरूरी है। क्या संभावना है? : अगर लोगों को सही ट्रेनिंग दी जाए, तो वे अपने स्तर पर कमाई के रास्ते खोज सकते हैं। गांवों में चल रहे स्वयं सहायता समूह और पर्यटन से भी आमदनी बढ़ सकती है। आईआईटी बना रहा प्लान : योजना को लेकर भोपाल में दो दिन तक अफसरों और विशेषज्ञों की बैठक हुई। इसमें गांवों के सरपंच भी थे। योजना केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसमें 14 राज्यों की 36 पंचायतें शामिल हैं। योजना आईआईटी व एसपीए जैसे संस्थान बना रहे हैं।