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बुध की बदली चाल का असर: 21 मार्च से इन राशियों को रहना होगा सतर्क

ज्योतिष शास्त के अनुसार, जब कोई ग्रह अपनी गति बदलता है तो उसका प्रभाव सभी राशियों के जीवन पर पड़ता है. इसी कड़ी में बुध ग्रह की चाल में बदलाव फिर से कुछ राशि वालों पर अलग- अलग प्रकार से प्रभाव डाल सकता है. आपको बता दें 26 फरवरी 2026 से बुध की उल्टी चाल यानी वक्री अवस्था शुरू हुई थी, जो 21 मार्च 2026 को समाप्त होने जा रही है. इस दिन से ही बुध फिर से सीधी चाल चलेंगे यानी मार्गी होने वाले हैं. मान्यता के अनुसार, बुध का मार्गी होना सामान्य रूप से शुभ माना जाता है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह कुछ राशियों के लिए चुनौतियां भी लेकर आ सकता है. आइए सबसे पहले समझते हैं बुध के व्रकी और मार्गी होने क्या राशियों पर क्या प्रभाव पड़ता है. बुध के मार्गी होने का ज्योतिषीय महत्व ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क, व्यापार, संचार, तकनीक और गणना का कारक ग्रह माना जाता है. जब बुध की चाल बदलती है तो इसका सीधा असर व्यक्ति की सोच, निर्णय क्षमता, बातचीत और कामकाज पर पड़ सकता है. वक्री अवस्था में जहां कई काम अटक सकते हैं, वहीं मार्गी होने पर अक्सर चीजें धीरे-धीरे सामान्य होने लगती हैं. हालांकि यदि ग्रह की स्थिति कमजोर हो या वह अशुभ प्रभाव में हो तो मार्गी अवस्था में भी कुछ राशियों के लिए तनाव और रुकावटें बनी रह सकती हैं. इन राशियों के लिए बढ़ सकती हैं परेशानियां! तुला राशि     तुला राशि के जातकों के लिए बुध की सीधी चाल कुछ मामलों में चुनौतीपूर्ण हो सकती है.     कार्यक्षेत्र में गलतफहमियां बढ़ सकती हैं.     सहकर्मियों के साथ संवाद में सावधानी रखें.     व्यापार से जुड़े लोगों को कागजी कार्यों में विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी.     आर्थिक फैसले सोच-समझकर लें. कुंभ राशि     कुंभ राशि वालों के लिए यह समय थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है.     कामकाज में अचानक बाधाएं आ सकती हैं.     योजनाएं पूरी होने में देरी हो सकती है.     तकनीकी या ऑनलाइन कार्यों में परेशानी आ सकती है.     यात्रा से जुड़े मामलों में भी विलंब संभव है. मीन राशि     मीन राशि के जातकों को इस दौरान मानसिक दबाव महसूस हो सकता है.     निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति बन सकती है.     धन से जुड़े मामलों में सावधानी जरूरी है.     किसी बात को लेकर गलतफहमी या विवाद की स्थिति बन सकती है.     कामकाज में ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है.  

बुध ग्रह की उल्टी चाल शुरू: करियर, व्यापार और संबंधों पर क्या होगा प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्ध और वाणी का कारक माना गया है, जो कि कन्या और मिथुन राशि के स्वामी हैं. जिस व्यक्ति की कुंडली में बुध की स्थिति मजबूत होती है, वह व्यक्ति कारोबार और संचार के क्षेत्र में खूब तरक्की करता है. 9 नवंबर को बुध देव वृश्चिक राशि में वक्री हो रहे हैं. बुध का वक्री होने का मतलब है उल्टी चाल चलना. बुध के वक्री होने पर शुभ-अशुभ परिणाम की प्राप्ति होती है. इस लेख में हम जानेंगे कि बुध का वक्री होने क्या होता है और इसके क्या उपाय हैं. बुध वक्री हो तो क्या होता है? बुध वक्री का मतलब है कि पृथ्वी से देखने पर बुध ग्रह अपनी कक्षा में पीछे की ओर जाता हुआ प्रतीत होता है, जबकि असल में ऐसा नहीं होता है. आसान शब्दों में कहें तो”बुध वक्री होना” का मतलब है कि बुध ग्रह अपनी सामान्य चाल से उल्टी दिशा में चलता हुआ प्रतीत होता है. यह एक दृष्टि भ्रम है जो तब होता है जब पृथ्वी सूर्य के चारों ओर अपनी तेज गति से बुध को पार करती है. ज्योतिष में बुध ग्रह को बुद्धि, संचार, व्यापार और यात्रा का कारक माना गया है. ऐसे में इस अवधि को गलतफहमी, तकनीकी गड़बड़ी और यात्रा में देरी जैसी समस्याओं से जोड़ा जाता है. बुध व्रकी अवस्था साल में 3 से 4 बार आती है और लगभग 3 सप्ताह तक रहती है. बुध वक्री होने के प्रभाव संचार में बाधा:- बातचीत में गलतफहमी हो सकती है, और आप जो कहना चाहते हैं, वह सही से व्यक्त नहीं हो पाता है. तकनीकी समस्याएं:- कंप्यूटर, मोबाइल, इंटरनेट और बाकी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में खराबी आ सकती है. यात्रा में देरी:- यात्रा की योजनाएं बाधित हो सकती हैं या उनमें अप्रत्याशित समस्याएं आ सकती हैं. निर्णय लेने में कठिनाई:- व्यक्ति भ्रमित हो सकता है और अपने निर्णयों को बार-बार बदल सकता है. मानसिक स्थिति:- झुंझलाहट, चिड़चिड़ापन और मानसिक असंतुलन महसूस हो सकता है. वक्री बुध ग्रह का उपाय     किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी से सलाह लेकर असली पन्ना रत्न पहनें.     रोजाना “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” या “ॐ बुं बुधाय नमः” मंत्रों का जाप करें.     बुधवार को गणेश जी की पूजा करें या बुध यंत्र की स्थापना कर पूजा करें.     हरे रंग की चीजें जैसे हरी मूंग, हरे कपड़े या पत्तेदार सब्जियां दान करें.     बुधवार के दिन गायों को हरा चारा खिलाना भी लाभकारी होता है.     बुधवार को खाली मटकी को बहते पानी में प्रवाहित करें.     कन्याओं को भोजन कराकर हरे रंग का वस्त्र या रुमाल भेंट करें.  

बुध के गोचर के बाद इन 3 राशियों की किस्मत खुलेगी, होगी मालामाल!

ज्योतिश शास्त्र में बुध के गोचर या कहें राशि परिवर्तन को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. ज्योतिष शास्त्र में बुध को ग्रहों का राजकुमार कहा गया है. बुध वाणी, वाणिज्य-व्यापार के स्वामी माने जाते हैं. फिलहाल बुध तुला राशि में गोचर कर रहे हैं. 24 अक्टूबर यानी दिवाली के महापर्व के बाद बुध का राशि परिवर्तन होगा. 24 अक्टूबर को बुध तुला से निकलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे. द्रिक पंचांग के अनुसार, बुध शुक्रवार 24 अक्टूबर को दोपहर के समय 12:39 बजे वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे. वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल हैं. ये अग्नि तत्व वाली राशि है. बुध का इस प्रवेश व्यक्ति की सोच, संवाद शैली, निर्णय क्षमता को साहसी और गहरा करता है. मंगल की राशि में बुध ग्रह का यह गोचर तीन राशि के जातकों के लिए विशेष लाभकारी हो सकता है. तीन राशि वालों के करियर, निवेश और व्यापार में चमत्कारी बदलाव आ सकते हैं, तो आइए जानते हैं भाग्यशाली राशियां कौन-सी हैं. वृश्चिक राशि बुध का वृश्चिक राशि में गोचर इस राशि के जातकों के संपूर्ण व्यक्तित्व को निखार सकता है. वाणी में प्रभाव बढ़ सकता है. विचारों को महत्व दिया जा सकता है. आत्मविश्वास के साथ फैसले लेने पर करियर और कारोबार को ऊंचाई मिल सकती है. मिथुन राशि बुध का वृश्चिक राशि में गोचर मिथुन राशि वाले जातकों को रणनीतिक लाभ दे सकता है. नई योजनाएं बना सकते हैं. कोई पुराना अटका हुआ पैसा मिल सकता है. निवेश से लाभ के योग बन रहे हैं. जो जातक विदेश से आायात-निर्यात के काम में करते हैं उनको खास सफलता मिल सकती है. मेष राशि वृश्चिक राशि बुध का यह गोचर मेष राशि वालों के लिए बहुत लाभकारी साबित हो सकता है. निवेश, बीमा, शेयर बाजार या पारिवारिक संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ के योग हैं. करियर में नई संभावनाएं बन सकती हैं. प्रमोशन मिल सकता है.