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Metro Project Update: भोपाल में 32 किमी की नई मेट्रो लाइन, 27 रैक होंगे शामिल

 भोपाल  एमपी के भोपाल शहर में मेट्रो का काम चल रहा है। इसी बीच मेट्रो रैक की वडोदरा से आपूर्ति फिलहाल रोक दी गई है। यहां से तीन-तीन कोच के 27 रैक मिलने तय हुए हैं। आठ रैक की आपूर्ति हो चुकी है। अभी कमर्शियल रन में महज दो रैक का ही उपयोग किया जा रहा है। छह रैक अभी डिपो में ही हैं। ऐसे में जब तक प्रोजेक्ट में 32 किमी की लाइन नहीं बन जाती, तब तक नए रैक की आपूर्ति रोक दी गई है। गौरतलब है कि मेट्रो ट्रेन की रैक को बनाने का काम वडोदरा के पास स्थापित प्लांट में हो रहा है। देरी से बढ़ेगी कीमत मेट्रो रैक के लिए अनुबंध किया हुआ है। अब तब रैक भेजा जाएगा, जब लाइन पूरी होगी। उस समय की स्थिति के अनुसार कीमत होगी। 2023 में पहला रैक यहां आया था। 2024 तक आठ रैक आ गए। इस समय इनकी कीमत दस फीसदी तक बढ़ गई है। 2028 तक ये करीब 20 फीसदी महंगी होगी। यानी प्रोजेक्ट में जितनी देरी होगी, रैक उतना महंगा होगा। एमडी मेट्रो रेल चैतन्य कृष्णा के अनुसार प्रोजेक्ट की शुरुआती दो लाइनों पर फोकस किया जा रहा है। अब तेजी से इसे पूरा किया जा रहा है। देरी का असर यहां पर भी -भोपाल मेट्रो परियोजना की लागत 2017- 18 में 6,941 करोड़ रुपए तय थी -प्रति किमी 249 करोड़ रुपए की लागत आंकलित की थी वर्ष 2025 में बढ़कर ये 10,033 करोड़ रुपए हो गई -प्रति किमी खर्च 371 करोड़ रुपए पहुंच गया -ये बढ़ोतरी 43 प्रतिशत है। देरी से कीमत बढऩे और प्रोजेक्ट के वित्तीय संकट के तौर पर होगा शहर को मिलेगी बड़ी सौगात केंद्रीय बजट में भोपाल मेट्रो समेत नेशनल हाइवे और ब्रिज की उम्मीद बेहतर हुई। टियर दो- तीन शहरों के लिए 12.02 लाख करोड़ रुपए आवंटित हुए हैं, इसमें भोपाल की भागीदारी होगी। मेट्रो की मौजूदा 32 किमी की लाइन को पूरा करने 5000 करोड़ रुपए की जरूरत है। इसी तरह टियर 2 शहरों में सिटी इकोनॉमिक रीजन का प्रावधान किया है, जिसमें पांच साल में 5000 करोड़ रुपए मिलेंगे। भोपाल को लाभ मिला तो यहां लॉजिस्टिक व हाइवे कनेक्टिविटी के लिए काम शुरू हो सकता है।

मेट्रो प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, ट्रांसको ने चालू किया 200 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर

भोपाल . ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि भोपाल मेट्रो के लिए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा 220 केवी सबस्टेशन गोविंदपुरा, भोपाल में 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत किया गया है। इस ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से भोपाल मेट्रो के सुभाषनगर सबस्टेशन के लिए पर्याप्त और भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति उपलब्ध हो सकेगी। सीमित जगह में स्थापित किया ट्रांसफार्मर ऊर्जा मंत्री ने बताया कि मेट्रो परियोजना के लिए यह स्थापना एमपी ट्रांसको के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण रही। शहर के मध्य स्थित गोविंदपुरा सब स्टेशन में सीमित उपलब्ध स्थान के कारण बड़े क्षमता वाले पावर ट्रांसफार्मर की स्थापना एक जटिल कार्य था। एमपी ट्रांसको मुख्यालय, जबलपुर स्थित प्लानिंग एवं डिजाइन विभाग के इंजीनियरों ने अपने कौशल, नवाचार और तकनीकी दक्षता से सब स्टेशन परिसर में आवश्यक स्थान चिन्हित कर यह कार्य संभव बनाया। इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने लिए ऊर्जा मंत्री  तोमर ने ट्रांसमिशन कंपनी के कार्मिकों को बधाई दी है। सब स्टेशन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि एमपी ट्रांसको भोपाल के अतिरिक्त मुख्य अभियंता  राजेश शांडिल्य ने जानकारी दी कि भोपाल मेट्रो के डिपॉजिट वर्क के तहत इस ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से 220 केवी सबस्टेशन, गोविंदपुरा (भोपाल) की ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता में वृद्धि हुई है। यह इस सब स्टेशन का पाचंवा 220 केवी वोल्टेज लेवल का ट्रांसफार्मर है। अब सब स्टेशन की कुल क्षमता बढ़कर 820 एमवीए हो गई है, जिससे भोपाल शहर और मेट्रो परियोजना की भविष्य की विद्युत आवश्यकताओं को सुदृढ़ता मिले

10 हजार करोड़ की लागत से इंदौर-उज्जैन मेट्रो, डीएमआरसी का प्रेजेंटेशन, कैबिनेट में जाएगा प्रस्ताव

इंदौर/उज्जैन  इंदौर और उज्जैन के लोगों के लिए खुशखबरी है, क्योंकि दोनों शहरों के बीच मेट्रो चलाने का जो सपना देखा गया था, वह अब हकीकत में बदलने को तैयार है. इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की टीम ने डीपीआर ने प्रस्ताव पेश कर दिया है, जिसमें बताया गया है कि दोनों शहरों के बीच 10 हजार करोड़ की लागत से मेट्रो का काम पूरा किया जाएगा, जिसमें 45 किलोमीटर का ट्रैक बिछाया जाएगा और दोनों शहरों के बीच करीब 11 मेट्रो स्टेशन बनेंगे, जिसमें 4.5 किलोमीटर का ट्रैक उज्जैन शहर में रहेगा जिसे अंडरग्राउंड रखने की बात डीपीआर में कही गई है. वहीं यह भी बताया गया है कि मेट्रो इंदौर के लवकुश चौराहे से शुरू होगी और उज्जैन के रेलवे स्टेशन तक चलाई जाएगी. इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो चलने से दोनों शहरों को बड़ा फायदा होगा.  सिंहस्थ से पहले चलाने की तैयारी  दरअसल, इंदौर-उज्जैन मेट्रो साल 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ से पहले चलाने की कोशिश की जाएगी, क्योंकि सीएम मोहन यादव ने पिछले दिनों सिंहस्थ तक दोनों शहरों के बीच मेट्रो चलाने की मंशा जाहिर की थी. बताया जा रहा है कि इसी प्लान पर काम करते हुए मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की तरफ से डीपीआर बनाया गया है. क्योंकि करीब 1 साल पहले दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की टीम ने इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो चलाने के लिए सर्वे किया था, जिसमें सिंहस्थ महाकुंभ से पहले ही मेट्रो चलाने का डीपीआर पेश किया गया है. बताया जा रहा है कि इस दौरान टीम ने इंदौर और उज्जैन जिला प्रशासन के अधिकारियों से भी विस्तार से बातचीत की है और उसी के बाद दो सप्ताह तक लगातार काम के बाद मेट्रो का डीपीआर पेश किया गया है.  बताया जा रहा है कि अब डीपीआर का प्रस्तुतिकरण जनप्रतिनिधियों और सरकार के पास भी किया जा रहा है. सरकार 2028 सिंहस्थ से पहले ही इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो ट्रैक तैयार करवाने की प्लानिंग पर काम कर रही है. इसके लिए अब जल्द ही एक टीम मोहन सरकार को भी इंदौर-उज्जैन मेट्रो का प्रजेटेंशन देगी और उसी के आधार पर आगे का काम किया जाएगा.  दिल्ली मेट्रो ने दोनों शहरों की फिजिबिलिटी स्टडी रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें इसे मेट्रो के लिए अच्छा बताया था। इसके बाद डीपीआर तैयार की गई। इस प्रोजेक्ट में करीब 10 हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। वहीं, लगभग 45 किमी के ट्रैक में 11 स्टेशन बनेंगे। 4.5 किमी का ट्रैक उज्जैन शहर में अंडर ग्राउंड रखने का प्रस्ताव है। मेट्रो लवकुश नगर से शुरू होकर उज्जैन रेलवे स्टेशन तक जाएगी। सिंहस्थ तक ट्रैक पूरा होने की संभावना नहीं नई प्लानिंग में इंदौर-उज्जैन के बीच करीब 50-51 किमी का कॉरिडोर बनेगा। अफसरों का कहना है कि जल्द डीपीआर तैयार होती है तो भी एक साल में काम शुरू नहीं हो पाएगा। सिंहस्थ तक ट्रैक पूरा होने की संभावना नहीं है। प्लानिंग का प्रेजेंटेशन सीएम के सामने होने के बाद डीपीआर फाइनल होगी। सीएम से प्रेजेंटेशन के लिए समय मांगा है। 10 हजार करोड़ खर्च का अनुमान अफसरों के मुताबिक, स्टेशन पहले लवकुश चौराहा, अरबिंदो हॉस्पिटल, बारोली, धरमपुरी, तराना, सांवेर, पंथ पीपलई, निनौरा, इंजीनियरिंग कॉलेज उज्जैन, नानाखेड़ा व महाकाल पर प्रस्तावित थे। 47-48 किमी में 10 हजार करोड़ खर्च अनुमानित है। इस बीच सीएम ने उज्जैन में आगर रोड पर भी एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की बात कही। पौन घंटे में सफर पूरा होगा मेट्रो चलने से इंदौर-उज्जैन के बीच सफर में समय कम लगेगा और महाकाल मंदिर तक पहुंचने में दर्शनार्थियों को आसानी होगी। उज्जैन पहुंचने का समय लगभग आधा रह जाएगा। अभी बस से करीब 2 घंटे तो कार से करीब डेढ़ घंटा लगता है। दोपहिया से लगभग दो घंटे लगते हैं। मेट्रो 45 से 50 मिनट में लवकुश चौराहा से उज्जैन पहुंचेगी। यह 11 स्टेशन बनेंगे डीपीआर में भौंरासला, बारोली, धरमपुरी, तराना, सांवेर, पंथ पिपलई, निनोरा, त्रिवेणी घाट, नानाखेड़ा, उज्जैन आईएसबीटी, उज्जैन रेलवे स्टेशन पर मेट्रो स्टेशन बनेंगे। उज्जैन में मेट्रो को कहां से अंडरग्राउंड किया जाना है, इस पर निर्णय होना है। इंदौर में मेट्रो पहले से है, दूसरे डिपो की जरूरत नहीं इंदौर-उज्जैन के बीच प्रस्तावित मेट्रो के लिए दिल्ली मेट्रो ने फिजिबिलिटी स्टडी की। इसके बाद डीपीआर का ड्रॉफ्ट बनाया गया। इसमें लागत, स्टेशनों की संख्या तय की गई है। इस प्रोजेक्ट में स्टेशनों की संख्या कम रहेगी। इंदौर-उज्जैन के बीच सड़क मार्ग की दूरी करीब 55Km है। इसके आसपास से ही मेट्रो गुजर सकती है। यह रोड पहले से ही सिक्स लेन किया जा रहा है। वहीं, यहां पर ज्यादा भू-अर्जन भी नहीं करना पड़ेगा। इंदौर-उज्जैन के बीच 11 स्टेशन  डीपीआर के मुताबिक दोनों शहरों के बीच चलने वाली मेट्रो में इंदौर शहर के लिए भौंरासला, बारोली, धरमपुरी, तराना, सांवेर तक स्टेशन बनेंगे, इसके बाद उज्जैन के लिए पंथ पिपलई, निनोरा, त्रिवेणी घाट, नानाखेड़ा, उज्जैन आईएसबीटी, उज्जैन रेलवे स्टेशन तक मेट्रो के स्टेशन बनाए जाएंगे. हालांकि उज्जैन में कुछ स्टेशन अंडरग्राउंड बनाने का प्रस्ताव पेश किया गया है, लेकिन यह स्टेशन कहां बनेंगे यह तय नहीं हुआ है. इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो का सफर पौन घंटे में पूरा हो जाएगा. दोनों शहरों के बीच मेट्रो चलाने से सबसे ज्यादा आसान बाबा महाकाल के दर्शन होंगे, क्योंकि इससे इंदौर से उज्जैन का सफर आज के हिसाब से आधा रह जाएगा. अभी कार से 2 से ढाई घंटे का समय लग जाता है. लेकिन मेट्रो से आप 45 मिनट में ही उज्जैन पहुंच जाएंगे.   सांवेर के पास रेवती में मांगी जमीन इंदौर में पहले से मेट्रो का संचालन हो रहा है, इसलिए दूसरे डिपो की जरूरत नहीं होगी। इंदौर के लवकुश चौराहे से उज्जैन तक मेट्रो पहुंचेगी। उज्जैन में डिपो के लिए जमीन तलाश की गई। कुल 49.7 एकड़ सरकारी जमीन उज्जैन के आसपास नहीं मिली। इस वजह से सांवेर के पास रेवती में जमीन मांगी गई। देश में कई शहरों में मेट्रो और रैपिड रेल चल रही हैं। दिल्ली मेट्रो सबसे बड़ी प्रणाली है और इसके अलावा रैपिड रेल दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर भी चल रही है। रैपिड रेल गुरुग्राम में भी उपलब्ध है। इसमें सीटिंग व्यवस्था ज्यादा रहेगी, क्योंकि यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा करना … Read more