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सम्राट विक्रमादित्य की गाथा केवल इतिहास नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत: मंत्री टेटवाल

भोपाल  गुड़ी पड़वा एवं वर्ष प्रतिपदा विक्रम संवत 2083 के शुभ अवसर पर प्रदेश में विक्रमोत्सव का आयोजन किया गया। इसी क्रम में कौशल विकास एवं रोजगार तथा उज्जैन के प्रभारी मंत्री  गौतम टेटवाल ने उज्जैन के पावन रामघाट पर विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत सृष्टि आरंभ दिवस के शुभ अवसर पर कोटि सूर्योपासना कार्यक्रम में सहभागिता की। साथ ही माँ शिप्रा का पूजन-अर्चन कर प्रदेश में सुख, शांति, समृद्धि कि कामना की। विक्रम संवत केवल एक काल गणना नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रमाण मंत्री  टेटवाल ने कहा कि यह पावन अवसर हमें हमारी महान परंपरा और गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता है। चैत्र नववर्ष (विक्रम संवत) का प्रारंभ उज्जैन के महान सम्राट  विक्रमादित्य महाराज द्वारा किया गया था, जो भारतीय संस्कृति, ज्ञान और स्वाभिमान का प्रतीक है। विक्रम संवत केवल एक काल गणना नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सभ्यता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रमाण है। उज्जैन नगरी उसी गौरव को आगे बढ़ाते हुए निरंतर विकास की ओर अग्रसर है, जो हम सभी के लिए गर्व का विषय है। सम्राट विक्रम की गाथा केवल इतिहास नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्त्रोत भी है मंत्री  टेटवाल ने कहा कि विक्रम संवत, आज भी हमारे पर्व-त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों का आधार है, यह केवल एक कैलेंडर नहीं, बल्कि भारतीय अस्मिता और स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है। इसकी स्थापना लगभग 57 ईसा पूर्व महान सम्राट विक्रमादित्य द्वारा की गई थी। सम्राट विक्रमादित्य का नाम आते ही हमारे मन में वीरता, पराक्रम और अद्भुत नेतृत्व की छवि उभरती है। उनका शासनकाल भारतीय इतिहास का स्वर्णिम युग माना जाता है। उनकी गाथा केवल इतिहास नहीं बल्कि हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। महाकाल लोक हमारी विरासत और आधुनिक विकास का अद्भुत संगम मंत्री  टेटवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश की पावन धरती, विशेष रूप से उज्जैन, सम्राट विक्रमादित्य की कर्मभूमि रही है। उज्जैन को उस समय भारत की सांस्कृतिक और खगोलीय राजधानी माना जाता था। आज भी यह नगरी हमारे लिए आस्था, इतिहास और गौरव का केंद्र है। उज्जैन विश्व के प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में से एक है। यहां स्थित  महाकालेश्वर मंदिर और विकसित होता हुआ महाकाल लोक न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि हमारी विरासत और आधुनिक विकास का अद्भुत संगम भी है। इस अवसर पर सांसद  अनिल फिरोजिया, विधायक  अनिल जैन कालुहेड़ा, महापौर  मुकेश टेटवाल, सभापति मती कलावती यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।  

मंत्री टेटवाल ने मुख्यमंत्री का माना आभार

सारंगपुर को मिली नई सौगात, मोहनपुरा डेम से जुड़े 26 गांव भोपाल राजगढ़ जिले की सारंगपुर विधानसभा में लगातार विकास कार्यों को गति मिल रही है। किसानों के हित को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने मोहनपुरा सिंचाई परियोजना के विस्तारीकरण के तहत सारंगपुर क्षेत्र के 26 गांवों को योजना से जोड़ने का निर्णय लिया है। इस निर्णय से क्षेत्र के किसानों को सिंचाई परियोजना का प्रत्यक्ष और स्थायी लाभ मिलेगा। 11,040 हेक्टेयर कृषि भूमि को मिलेगी सिंचाई सुविधा मंत्री श्री गौतम टेटवाल ने बताया कि सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत मोहनपुरा विस्तारीकरण सिंचाई परियोजना को राज्य सरकार द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना पर 396.21 करोड़ रुपए की लागत आएगी। परियोजना के माध्यम से सारंगपुर तहसील के 26 ग्रामों की 11,040 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। परियोजना से किसानों की आय में वृद्धि होगी मंत्री श्री टेटवाल ने बताया कि इस परियोजना के तहत आधुनिक दाबयुक्त पाइप सिंचाई प्रणाली को अपनाया जाएगा, जिससे जल की बचत के साथ सिंचाई की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा। परियोजना से क्षेत्र के भू-जल स्तर में सुधार होगा, कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। इस योजना से लगभग 10,400 किसान परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। मंत्री श्री टेटवाल ने मुख्यमंत्री का जताया आभार मंत्री श्री गौतम टेटवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार लगातार जनहित के कार्य कर रही है। किसान कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। मोहनपुरा सिंचाई परियोजना एक वृहद और दूरगामी लाभ देने वाली योजना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सारंगपुर को नई सौगात देते हुए मोहनपुरा डेम की सिंचाई परियोजना से 26 गांवों को जोड़ने की स्वीकृति प्रदान की है। इसके लिए उन्होंने सारंगपुर की जनता की ओर से मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। मोहनपुरा सिंचाई परियोजना से जुड़े 26 ग्राम मोहनपुरा सिंचाई परियोजना के विस्तारीकरण के तहत सारंगपुर तहसील के लीमा चौहान, पान्दा, टूट्याहेड़ी, दराना, देवीपुर, भेंसवा माता, भवानीपुर, कलाली, अरण्या, लोटटया, घटटटया, रोजड़कलां, धमन्दा, गायन, पट्टी, इचीवाड़ा, शंकरनगर, अमलावता, पीपल्या पाल, पाडल्या माता, शेरपुरा, कमलसरा, किशनखेड़ी, सुल्तानिया, जोगीपुरा और छापरा ग्रामों को योजना से जोड़ा गया है।  

कौशल प्रशिक्षण को वैश्विक मानकों से जोड़ना हमारी प्राथमिकता – मंत्री टेटवाल

सिंगापुर प्रशिक्षण युवाओं के कॅरियर को नई दिशा देगा मंत्री श्री टेटवाल प्रतिमाह दो बार प्रदेश के आईटीआई के विद्यार्थियों से होंगे रूबरू शाला त्यागी बेटियों का कौशल प्रशिक्षण लेकर रोजगार से जुड़ने से महिला सशक्तिकरण को मिलेगा संबल नेशनल डेफ क्रिकेट टीम में आईटीआई के बच्चों के चयन पर मंत्री ने दी बधाई और शुभकामनाएं अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण से संस्थानों की गुणवत्ता को नई ऊँचाई मिलेगी कौशल भारत और विकसित भारत में मध्यप्रदेश की भूमिका निर्णायक होगी कौशलम संवाद में मंत्री श्री टेटवाल से बात कर बच्चे हुए प्रोत्साहित भोपाल  कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल ने कहा कि कौशलम् संवाद का उद्देश्य प्रदेश के विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों से सीधे जुड़कर उनके कौशल, प्रगति, अवसरों और उपलब्धियों को समझना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार कौशल विकास को वैश्विक मानकों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है और विद्यार्थियों को देश-विदेश में प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। संवाद के प्रथम चरण में बच्चों से उनकी यात्रा, चुनौतियों और सफलता के अनुभव सुनकर वे विशेष रूप से प्रसन्न और प्रोत्साहित हुए। मंत्री श्री टेटवाल ने सिंगापुर कौशल प्रशिक्षण के लिए चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह अवसर न केवल उनके करियर को नई दिशा देगा बल्कि वे लौटकर अपने संस्थानों और साथियों को भी उन्नत प्रशिक्षण में सहयोग करेंगे, जिससे विकसित मध्यप्रदेश और विकसित भारत के निर्माण को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि सिंगापुर जाकर बच्चे जिस तरह उच्च तकनीक और कार्य-संस्कृति को सीखेंगे, वह कौशल भारत अभियान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मंत्री श्री टेटवाल ने संवाद के दौरान यह भी बताया कि प्रदेश में आईटीआई संस्थानों से निकलने वाले युवा अब बड़ी कंपनियों में कार्य कर रहे हैं, जो यह प्रमाणित करता है कि कौशल प्रशिक्षण का स्तर लगातार उच्च हो रहा है। संवाद में उन्होंने अंचल की उन शाला त्यागी बालिकाओं से बात की जिन्होंने आईटीआई में प्रवेश लिया, विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण प्राप्त किया और अब प्रतिष्ठित कंपनियों में कार्यरत हैं। मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि यह उदाहरण महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रदेश सरकार के प्रयासों की सफलता को दर्शाता है और यह देखकर संतोष होता है कि बेटियाँ लगातार नए अवसरों को अपनाकर आगे बढ़ रही हैं। डिवीजनल आईटीआई भोपाल के श्रवण बाधित विद्यार्थियों के साथ संवाद में मंत्री श्री टेटवाल ने उनके नेशनल डेफ क्रिकेट टीम में चयन पर शुभकामनाएँ दीं और कहा कि यह उपलब्धि सिद्ध करती है कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती। उन्होंने बच्चों को बताया कि उनकी यह सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है और सरकार समावेशी कौशल प्रशिक्षण को और अधिक मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री श्री टेटवाल ने जर्मनी में विशेष तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर आने वाले पिपरिया आईटीआई के प्रशिक्षण अधिकारी श्री बलदेव शर्मा को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि संस्थान की गुणवत्ता को नए स्तर पर ले जायेगी और इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सहयोग से प्रदेश का कौशल ढांचा और अधिक सुदृढ़ होगा। इसी क्रम में उन्होंने आईटीआई खिलचीपुर के 42 प्रशिक्षणार्थियों के कैम्पस प्लेसमेंट पर बधाई दी। प्रशिक्षणार्थियों को देवास की वोल्वो आइशर कंपनी से नौकरी के ऑफर लेटर प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रशिक्षण और उद्योगों के बीच सक्रिय सहयोग का परिणाम है। मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि सुदूर ग्रामीण अंचल के विद्यार्थी आईटीआई से निकलकर प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों में जॉब पाकर बेहतर उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं, अपने क्षेत्र और प्रदेश का नाम भी रोशन कर रहे हैं। आईटीआई झाबुआ की 30 महिला प्रशिक्षणार्थियों को प्रतिभा सिंटेक्स लिमिटेड पीथमपुर में ऑन द जॉब ट्रेनिंग (OJT) मिलने पर उन्होंने कहा कि यह अवसर न केवल इन बालिकाओं के रोजगार अनुभव को विस्तार देगा बल्कि प्रदेश में महिला कौशल विकास और रोजगार संवर्धन के लिए प्रेरक उदाहरण बनेगा। उन्होंने जबलपुर में संस्थान की भूमि से अवैध कब्जा हटाए जाने और उसे पुनः प्रशिक्षण कार्यों के लिए उपलब्ध कराने के प्रयासों को भी सराहनीय बताया और टीम को बधाई दी। कौशलम् संवाद के प्रथम चरण के इस कार्यक्रम में छात्रों में उत्साह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। उन्होंने मंत्री से सीधे संवाद कर अपनी प्रगति साझा की और मंत्री श्री टेटवाल के मार्गदर्शन से नए कौशल लक्ष्यों को निर्धारित करने का आत्मविश्वास प्राप्त किया।  

मंत्री टेटवाल ने खरीदे स्थानीय दीये, दिया वोकल फॉर लोकल का सशक्त संदेश

मंत्री  टेटवाल ने स्थानीय कुम्हारों द्वारा बनाए गए दियों को खरीद कर वोकल फॉर लोकल का दिया संदेश हर घर जले स्वदेशी दीप : मंत्री  टेटवाल भोपाल कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गौतम टेटवाल ने राजगढ़ जिले के सारंगपुर में दीपावली के लिए स्थानीय बाजार से कुम्हारों द्वारा बनाए गए स्वदेशी दीयों और सजावटी सामग्री की खरीदारी की। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे दीपावली पर अपने घर में स्वदेशी दीप जलाएं। मंत्री  टेटवाल ने कहा कि वोकल फॉर लोकल अभियान आत्मनिर्भर भारत की दिशा में जन-आंदोलन का रूप ले चुका है और यह हर भारतीय को प्रेरित करता है कि वह स्वदेशी वस्तुओं को अपनाए और स्थानीय उद्योगों को सशक्त बनाए। मंत्री  टेटवाल ने कहा कि दीपावली हमारे खुशियों का पर्व है और इस अवसर पर स्थानीय व्यापारियों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्थानीय दुकानदार सिर्फ व्यवसायी नहीं, बल्कि समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। वे हर त्यौहार, हर संकट और हर खुशी में हमारे साथ खड़े रहते हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि उनकी दीपावली को प्रकाशोत्सव में बदलें और हर घर में स्वदेशी की पहचान कायम करें। मंत्री  टेटवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे स्थानीय कारीगर और व्यापारी मजबूती से अपनी कला और व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें। सारंगपुर जैसे नगरों में यह पहल वोकल फॉर लोकल के संदेश को और प्रभावी बनाएगी। हर घर को आत्मनिर्भर भारत की भावना को मजबूत करने के लिए आगे बढ़ने की भावना को मजबूत करेगी।उन्होंने कहा कि स्वदेशी दीयों, सजावटी सामग्री और उपहारों की खरीदी से न केवल स्थानीय व्यापारियों को प्रोत्साहन मिलेगा बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा। उन्होंने सभी से अपील की कि हर घर में स्वदेशी दीप जलाकर आत्मनिर्भर भारत की भावना को जीवंत करें और दीपावली के पर्व को खुशियों और समृद्धि से सजाएं। व्यापारियों ने मंत्री  टेटवाल के इस कदम का स्वागत किया।  

कौशल आत्मनिर्भरता, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन की शक्ति है : मंत्री टेटवाल

भोपाल  कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल ने राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 9 राष्ट्रीय स्तरीय एवं 14 राज्य स्तरीय टॉपर्स को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कौशलम् प्रतिभा प्रोत्साहन समारोह 2025 में कौशल उत्कृष्टता, नारी शक्ति और नवाचार का अद्भुत संगम देखने को मिला। समारोह उन प्रतिभाशाली प्रशिक्षणार्थियों को समर्पित रहा जिन्होंने वर्ष 2025 की राष्ट्र स्तरीय आईटीआई परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मध्यप्रदेश का नाम रोशन किया। प्रशिक्षणार्थियों के साथ उनके प्रशिक्षण अधिकारी एवं प्राचार्य को भी कौशलम् प्रतिभा प्रोत्साहन सम्मान 2025 से सम्मानित किया गया। मंत्री श्री टेटवाल ने राष्ट्र स्तर पर प्रथम स्थान पाने वाली त्रिशा तावड़े का किया पूजन कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं को समर्पित एक प्रेरक क्षण देखने को मिला जब राज्यमंत्री श्री गौतम टेटवाल ने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कुमारी त्रिशा तावड़े को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र से सम्मानित करने के साथ ही टीका लगाकर एवं आरती कर पूजन किया। साथ ही पौधा भी भेंट किया। उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण समाज को नई दिशा दे रहा है और यह पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विज्ञान भवन, नई दिल्ली में 4 अक्टूबर-2025 को शासकीय एकलव्य महिला आईटीआई बैतूल की प्रशिक्षणार्थी त्रिशा तवडे को कौशल दीक्षांत समारोह में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया था। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत परिश्रम का परिणाम है, बल्कि प्रदेश की कौशल शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता का प्रतीक भी है। राज्य मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि छात्रों ने विभिन्न ट्रेडों में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर यह सिद्ध किया है कि कौशल का कोई बंधन नहीं होता और मेहनत, समर्पण तथा आत्मविश्वास से हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है। कौशल आत्मनिर्भरता, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन की शक्ति है राज्य मंत्री श्री गौतम टेटवाल ने कहा कि कौशल केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन की शक्ति है। प्रदेश के प्रशिक्षणार्थी अपने हुनर से सीमाओं को तोड़ रहे हैं, और समाज में नई संवेदनशीलता तथा समावेशन का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कौशल विकास संचालनालय द्वारा आयोजित समारोह केवल प्रतिभा और परिश्रम का उत्सव नहीं, बल्कि समानता, आत्मनिर्भरता और प्रेरणा का प्रतीक है। आईटीआई में लगातार बढ़ रहा प्रवेश, महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ी पहल राज्य मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि वर्ष 2025 में आईटीआई संस्थानों में प्रवेश की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस वर्ष कुल 49,133 सीटों पर प्रवेश हुआ, जो वर्ष 2024 की 42,152 सीटों की तुलना में लगभग 8 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने बताया कि महिला आरक्षण को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत किया गया है, जिससे महिला विद्यार्थियों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस वर्ष महिला प्रशिक्षणार्थियों की संख्या बढ़कर 12,118 हो गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि समाज में महिला सशक्तिकरण और कौशल आधारित शिक्षा की स्वीकृति को दर्शाती है। राज्यमंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि यह प्रदेश के लिए गर्व का विषय है कि आईटीआई में प्रशिक्षण लेने के लिए अब बड़ी संख्या में युवा, विशेष रूप से महिलाएं, आगे आ रही हैं। कौशल विकास में मध्यप्रदेश अग्रणी कौशलम् प्रतिभा प्रोत्साहन समारोह- 2025 ने यह सिद्ध किया कि मध्यप्रदेश कौशल विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत पहचान बना रहा है। प्रशिक्षार्थियों की उपलब्धियां यह प्रमाणित करती हैं कि राज्य में तकनीकी शिक्षा का आधार सशक्त हो रहा है और युवाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में नए अवसर मिल रहे हैं। राज्य मंत्री श्री गौतम टेटवाल के नेतृत्व में विभाग द्वारा संचालित पहल न केवल युवाओं के कौशल को निखार रही हैं, बल्कि उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित जनशक्ति तैयार कर प्रदेश को औद्योगिक दृष्टि से भी मजबूत बना रही हैं।  

जीएसपी में सेंट्रल जोन की वर्कशॉप में भविष्य की स्किलिंग और शिक्षा-प्रशिक्षण एकीकरण पर हुआ मंथन

भोपाल कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल ने अपने वर्चुअल संदेश में कहा कि विभिन्न राज्यों और संस्थानों की सक्रिय भागीदारी हमारे मज़बूत स्किलिंग इकोसिस्टम की झलक है। उन्होंने एनसीवीईटी को बधाई देते हुए कहा कि अवार्डिंग बॉडीज और असेसमेंट एजेंसियों के लिए नए मानक तय किए गए हैं। योग्यताओं को राष्ट्रीय कौशल योग्यताओं के ढाँचे (NSQF) से जोड़ा गया है साथ ही प्रशिक्षकों व अवसरों के प्रशिक्षण की व्यवस्था को सशक्त बनाया गया है। मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि ये सुधार न केवल युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ा रहे हैं, बल्कि सॉफ्ट स्किल्स और जीवन कौशल के माध्यम से आधुनिक उद्योगों और तकनीकी क्षेत्रों में नए अवसर भी खोल रहे हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश की पहल, जैसे संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क और राज्य कौशल विकास मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि कौशल विकास एक कार्यक्रम नहीं बल्कि युवाओं के सशक्तिकरण का मिशन है, जो विकासित भारत के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएगा। नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (एनसीवीईटी), भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा मध्यप्रदेश शासन के तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग और संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क, भोपाल के सहयोग से सोमवार को सेंट्रल जोन के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग एवं अवेयरनेस वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और उत्तरप्रदेश के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वर्कशॉप का उद्देश्य कौशल विकास एवं प्रशिक्षण (VET) इकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाना, गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करना और नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के अनुरूप वोकेशनल एजुकेशन के एकीकरण को गति देना है। केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी ने वीडियो संदेश में कहा कि कौशल विकास केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि राष्ट्रीय अनिवार्यता है और भारत के भविष्य को गति देने वाली ताकत है। उन्होंने एनसीवीईटी द्वारा आयोजित जोनल वर्कशॉप की श्रृंखला को सराहते हुए कहा कि ये प्लेटफॉर्म अवार्डिंग बॉडीज, उच्च शिक्षा संस्थानों, राज्य बोर्ड्स और स्किल मिशन्स को साझा अनुभव और दिशा प्रदान करते हैं। राज्यमंत्री श्री चौधरी ने नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क, NEP 2020 में स्किल्स के एकीकरण, पीएमकेवीवाई 4.0 के तहत नए जॉब रोल्स तथा Skilling for AI Readiness (SOAR) पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत को “भविष्य की स्किल राजधानी” बनाने के लिए हर युवा को वैश्विक प्रतिस्पर्धा योग्य कौशल से लैस करना आवश्यक है। श्री विनीता अग्रवाल, कार्यकारी सदस्य, एनसीवीईटी ने कहा कि एनसीवीईटी राष्ट्रीय रेगुलेटर के रूप में गुणवत्ता मानकों की सुरक्षा और पहचान ढांचे की मजबूती पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा को न केवल रोजगारपरक बल्कि युवाओं के लिए आकर्षक बनाने की आवश्यकता है। श्री नीना पाहुजा, कार्यकारी सदस्य, एनसीवीईटी ने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, जीवन कौशल, उद्योग सहयोग और एआई जैसी नई स्किल्स के एकीकरण पर बल दिया। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोज़गार प्रमुख सचिव श्री मनीष सिंह ने कहा कि कौशल विकास, कौशल उन्नयन और क्षमता निर्माण ही भारत की विकास यात्रा की वास्तविक आधारशिला है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि युवाओं को उद्योग-संबंधित कौशल से सशक्त करना न केवल देश की कार्यशक्ति को मजबूत बनाता है, बल्कि नवाचार, उत्पादकता और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को भी गति प्रदान करता है। तकनीकी सत्रों में एनसीवीईटी, एमएसडीई और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रक्रियागत सुधार, सामान्य लागत मानक, और केंद्र-राज्य स्किलिंग पहलों के समन्वय पर विस्तृत विचार साझा किए। पैनल चर्चाओं में शिक्षा और उद्योग के विशेषज्ञों ने वोकेशनल एजुकेशन को उच्च शिक्षा और सामान्य शिक्षा के साथ जोड़ने, नवाचार अपनाने और युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करने की दिशा में विचार प्रस्तुत किए। वर्कशॉप में सभी प्रतिभागियों ने इस संकल्प को दोहराया कि सरकार, नियामक संस्थाएं, उद्योग और शिक्षा जगत मिलकर केंद्रीय क्षेत्र में एक भविष्य कार्यबल तैयार करेंगे और भारत को वैश्विक कौशल शक्ति बनाने में सहयोग करेंगे।  

मंत्री टेटवाल से सिंगापुर के प्रतिनिधि मंडल ने भेंटकर कौशल विकास पर चर्चा की

भोपाल  कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री श्री गौतम टेटवाल से सिंगापुर के कौंसुल-जनरल (मुंबई) श्री चॉन्ग मिंग फूंग के नेतृत्व में आए प्रतिनिधि मंडल ने मंत्रालय में भेंट की। मंत्री श्री टेटवाल से प्रतिनिधि मंडल ने कौशल विकास, रोजगार के अवसरों और द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा की। मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश कौशल विकास के क्षेत्र में नई उड़ान भर रहा है। प्रदेश के युवाओं को वैश्विक स्तर के गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सिंगापुर के साथ सहयोग से प्रदेश के युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने और उन्हें नए रोजगार अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रतिनिधि मंडल में कौंसुल जनरल श्री जेरोम वॉन्ग और रिसर्च एवं सूचना विश्लेषक सुश्री ऋद्धि कोठावाले भी शामिल थे। उन्होंने मध्यप्रदेश में कौशल विकास और रोजगार की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए और राज्य सरकार के आमंत्रण और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क जैसे प्रोजेक्ट से जुड़ना गर्व की बात है और वे भविष्य में ज्ञान साझेदार के रूप में सक्रिय सहयोग करने के लिए तत्पर हैं। मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि प्रदेश के युवाओं की क्षमता और कौशल को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने के लिए किए जा रहे प्रयास देश में मिसाल बन रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सिंगापुर के सहयोग से प्रदेश में कौशल विकास की गुणवत्ता और अवसरों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मंत्री श्री टेटवाल ने प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों को स्मृति चिन्ह भेंट किए और राज्य की नीतियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कौशल विकास केंद्रों की सफलताओं के बारे में जानकारी भी दी। सिंगापुर का प्रतिनिधि मंडल 24 सितंबर को संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क का भ्रमण करेगा। इस दौरान वे पार्क की विभिन्न ट्रेडों, अत्याधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्थाओं और वैश्विक स्तर की सुविधाओं का अवलोकन करेंगे तथा प्रशिक्षण केंद्र की सभी गतिविधियों और नवाचारों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगे। ग्लोबल स्किल्स पार्क के सीईओ श्री गिरीश शर्मा ने संस्थान की उपलब्धियों, योजनाओं और नवाचारों की जानकारी दी। इस अवसर पर ग्लोबल स्किल्स पार्क के ट्रेड्स और नवाचारों पर आधारित शॉर्ट फिल्म का प्रदर्शन किया।  

कारीगरों की मेहनत से सारंगपुर बन रहा है स्वदेशी शक्ति केंद्र : मंत्री टेटवाल

हथकरघा और शिल्पकला से प्रदेश को मिलेगी वैश्विक पहचान भोपाल  कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री( स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए लोकल फ़ॉर वोकल के संदेश ने न केवल देश में स्वदेशी वस्तुओं की खपत को बढ़ाया है, बल्कि उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का मार्ग भी प्रशस्त किया है। इसी दिशा में राजगढ़ जिले के सारंगपुर जैसे कस्बे अपने हुनर और कारीगरी के माध्यम से लगातार प्रगति कर रहे हैं और प्रदेश को समर्थ बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। मंत्री श्री टेटवाल ने सारंगपुर विधानसभा के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण किया और वार्डों में कुटीर उद्योग से जुड़े कारीगरों, बुनकरों और व्यापारियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि सारंगपुर की शिल्पकला और हस्तनिर्मित वस्तुएं आने वाले समय में इस क्षेत्र को वैश्विक पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाएंगी। मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि सारंगपुर हथकरघा और बुनकरों के कार्यों में निरंतर आगे बढ़ रहा है। यहां तैयार की जा रही सिल्क की साड़ियां पहले से ही कई स्थानों पर प्रसिद्ध हैं। इसी प्रकार ताड़ से बनाई जा रही चटाइयां और अन्य उपयोगी वस्तुएं की भी लोगों के बीच बड़ी मांग हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सारंगपुर के कारीगरों की मेहनत से यहां की पारंपरिक कला और उत्पाद न केवल देश के बाजारों में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी विशेष पहचान बनाएंगे। वोकल फॉर लोकल को जनआंदोलन बनाने की अपील मंत्री श्री टेटवाल ने कारीगरों और व्यापारियों से अपील की कि वे स्वदेशी उत्पादों के निर्माण और उपयोग को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि यदि हम सभी लोकल उत्पादों का अधिक से अधिक इस्तेमाल करेंगे तो इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि प्रदेश और देश की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी। मंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का जो अभियान चलाया जा रहा है, वह तभी सफल होगा जब प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझकर इसमें भागीदार बनेगा। सारंगपुर के कारीगरों का हुनर और समर्पण इस दिशा में एक प्रेरक उदाहरण है, जो यह दर्शाता है कि कैसे एक छोटा सा कस्बा भी लोकल से ग्लोबल पहचान बना सकता है।  

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता प्रशिक्षकों को मंत्री टेटवाल ने दी शुभकामनाएं

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता प्रशिक्षकों को मंत्री टेटवाल ने दी शुभकामनाएं मंत्री टेटवाल का सम्मान, राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त प्रशिक्षकों को दी बधाई कौशल विकास के प्रशिक्षकों ने बढ़ाया मध्यप्रदेश का मान भोपाल कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025 से सम्मानित प्रशिक्षण अधिकारी प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। राज्यमंत्री टेटवाल ने तीनों प्रशिक्षकों से मिलकर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। राज्यमंत्री टेटवाल ने कहा कि यह उपलब्धि प्रशिक्षकों की प्रतिबद्धता, नवाचार और मेहनत का परिणाम है। राज्यमंत्री टेटवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार का संकल्प युवाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान करना है, ताकि वे वर्तमान के प्रतिर्स्धात्मक वातावरण के अनुकूल स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन प्रयासों की बड़ी उपलब्धि है और आने वाले समय में विभाग को और अधिक नवाचार करने की प्रेरणा देगा। यह गौरव पूरे प्रदेश और विभाग के लिए गर्व का क्षण है, जो यह दर्शाता है कि मध्यप्रदेश कौशल विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानक स्थापित कर रहा है। राष्ट्रपति ने किया था पुरस्कृत शिक्षक दिवस 5 सितम्बर को राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु ने प्रदेश के तीन प्रशिक्षण अधिकारियों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया था। शासकीय संभागीय आईटीआई, भोपाल के प्रशिक्षण अधिकारी (ट्रेड रेफ्रिजरेशन एंड एयर कंडीशनिंग) राजेंद्र मालवीया को यह पुरस्कार उनकी नवाचारी पद्धतियों और व्यावहारिक प्रशिक्षण की दिशा में किए गए उल्लेखनीय योगदान के लिए मिला। उन्होंने प्रशिक्षार्थियों को स्वरोजगार और उद्यमिता की राह दिखाई। उनके प्रशिक्षार्थियों ने स्वयं व्यवसाय स्थापित कर लाखों रूपये का रोजगार उत्पन्न किया और अनेक विद्यार्थियों ने अंतरराष्ट्रीय अवसर प्राप्त कर प्रदेश का नाम रोशन किया। शासकीय संभागीय आईटीआई, भोपाल के प्रशिक्षण अधिकारी (ट्रेड मैकेनिक डीजल) प्रशांत दीक्षित ने विद्यार्थियों के लिए नई तकनीकें विकसित करने और ई-कंटेंट निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया। कोविड-19 महामारी के दौरान उनके डिजिटल कंटेंट से देशभर के लाखों आईटीआई विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। उनकी इस पहल ने कौशल शिक्षा को तकनीकी रूप से मजबूत आधार प्रदान किया। शासकीय संभागीय आईटीआई, भोपाल के प्रशिक्षण अधिकारी (ट्रेड कोपा दृष्टिबाधित) श्रीमती प्रेमलता रहांगडाले ने दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रयास किए। उन्होंने उन्हें कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाने में सफलता पाई। उनके प्रशिक्षार्थी समाज में गरिमापूर्ण पहचान बना रहे हैं और विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्राप्त कर रहे हैं। मध्यप्रदेश की यह उपलब्धि निरंतर बनी हुई है। वर्ष 2024 में भी प्रदेश के दो प्रशिक्षण अधिकारियों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया गया था। यह साबित करता है कि कौशल विकास विभाग लगातार गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और नवाचार का नया मानक स्थापित कर रहा है। राज्यमंत्री टेटवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार और रोजगार से सशक्त बनाना सरकार की प्राथमिकता है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदेश की इस दिशा में हो रहे प्रयासों की पुष्टि है और आने वाले समय में और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा भी है।