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कान्हा राष्ट्रीय उद्यान एवं फेन अभयारण्य के लिए निगरानी समिति गठित

भोपाल  भारत सरकार पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना अनुसार मण्डला जिले में स्थित कान्हा राष्ट्रीय उद्यान एवं फेन अभयारण्य को पारिस्थितिकी संवेदी जोन के रूप में अधिसूचित किया गया है। इस क्षेत्र की निगरानी के लिए राज्य शासन द्वारा निगरानी समिति (मॉनिटरिंग कमेटी) का गठन किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश अनुसार समिति में संभागीय आयुक्त जबलपुर को पदेन-अध्यक्ष बनाया गया है। जिला कलेक्टर मंडला और बालाघाट, उप संचालक कोर और बफर कान्हा टाइगर रिजर्व, नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सहायक संचालक मंडला, क्षेत्रीय अधिकारी, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जबलपुर, अधीक्षण अभियंता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मंडला और बालाघाट, जिला पंचायत मंडला और बालाघाट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, जैव विविधता विशेषज्ञ – श्री पी.एस. मसराम भा.व.से. (सेवानिवृत्त) मण्डला, डॉ. अनिरूध्द मजूमदार वैज्ञानिक राज्य वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर एवं अधीक्षण यंत्री लोक निर्माण विभाग सिवनी सदस्य होंगे। क्षेत्र निदेशक कान्हा टाइगर रिजर्व मंडला को सदस्य- सचिव नामित किया गया है। निगरानी समिति के दायित्व भारत सरकार पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना 12 मार्च 2021 के अनुसार होंगे।

अवैध रेत उत्खनन रोकने बनेगी ग्राम निगरानी समिति

जांजगीर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने अवैध रेत उत्खनन पर रोक लगाने और रेत माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हेतु योजना बनाई है। उन्होंने तस्करों और अवैध रेत उत्खनन करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने ग्राम स्तर पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सचिव, सरपंच और कोटवार को शामिल करते हुए विशेष टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं। अवैध उत्खनन और परिवहन पर विशेष टीम तत्काल तहसीलदार और एसडीएम को सूचना देगी, इसके बाद माइनिंग, टास्क फोर्स, राजस्व एवं पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा अवैध उत्खनन और परिवहन पर कार्यवाही करेगी। इसके अलावा कलेक्टर ने धान खरीदी के दौरान भौतिक सत्यापन में जहां-जहां गड़बड़ी पाई गई है वहां तत्काल जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रत्येक मंगलवार और बुधवार को सभी अधिकारियों को अनिवार्य रूप से अपने-अपने कार्यालय में उपस्थित रहने को कहा है ताकि आमजन की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी निराकरण किया जा सके । इसके अलावा ई–ऑफिस के माध्यम से सभी फाइलों का संचालन करने और विभागीय पत्राचार में डिजिटल माध्यम अपनाने के निर्देश दिए हैं।