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बजट सत्र शुरू होते ही MP विधानसभा में कांग्रेस का जोरदार हंगामा, भागीरथपुरा कांड पर सस्पेंस, कार्यवाही टली

 भोपाल  मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र (Madhya Pradesh budget 2026-27) सोमवार को शुरू होते ही हंगामें की भेंट चढ़ गया। राज्यपाल के अभिभाषण में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से लोगों की हुई मौत का उल्लेख ना होने पर कांग्रेस के विधायकों ने जोरदार हंगामा किया। सोमवार को जैसे ही राज्यपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल का अभिभाषण शुरू हुआ, उसके कुछ देर बाद ही कांग्रेस के सभी विधानसभा सदस्य सदन में खड़े होकर विरोध करने लगे। सदन की कार्यवाही कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कांग्रेस विधायक इंदौर के भागीरथपुरा कांड का राज्यपाल के अभिभाषण में उल्लेख नहीं होने से नाराज दिखे और हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेस सदस्यों का हंगामा बढ़ता देख राज्यपाल ने सदन की कार्यवाही कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। हालांकि इस बात का पहले से अनुमान लगाया जा रहा था कि इस 12 बैठकों वाले सत्र में इंदौर के दूषित जल कांड, जहरीले कफ सीरप और सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह की अशालीन टिप्पणी पर कार्रवाई न होने, कानून-व्यवस्था सहित अन्य मुद्दों को लेकर हंगामा हो सकता है। दस स्थगन, 236 ध्यानाकर्षण की सूचना बजट सत्र के लिए विधायकों ने 1,750 तारांकित और 1,728 अतारांकित प्रश्न लगाए हैं। 10 स्थगन, 236 ध्यानाकर्षण, 41 अशासकीय संकल्प और 83 शून्यकाल की सूचनाएं विधानसभा सचिवालय को प्राप्त हुई हैं। उधर, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा सहित सचिवालय के अधिकारियों के साथ विधानसभा की व्यवस्थाएं देखीं। उन्होंने निर्देश दिए कि सुरक्षा-व्यवस्था चाकचौबंद रहे। प्रवेश पत्र के माध्यम से ही प्रवेश हो। कांग्रेस ने बुलाई विधायक दल की बैठक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोमवार को विधायक दल की बैठक बुलाई थी। सूत्रों के अनुसार इसमें सरकार को घेरने के लिए इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों, बेरोजगारी, एससी-एसटी वर्ग पर बढ़ते अत्याचार, ड्रग्स के मामले, बिगड़ती कानून-व्यवस्था, बढ़ते कर्ज सहित सदन में उठाए जाने वाले अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई।  

MP विधानसभा में डिजिटल बदलाव: विधायकों को ऑनलाइन काम करने की खास ट्रेनिंग आज

भोपाल  मध्य प्रदेश की विधानसभा अब पूरी तरह डिजिटल होने वाली है. सारा कामकाज पेपरलेस होगा. ये व्यवस्था अगले विधानसभा सत्र से लागू की जाएगी. इस नए सिस्टम से प्रदेश के 230 विधायकों को रूबरू कराने के लिए मंगलवार (23 दिसंबर) को ट्रेनिंग दी जाएगी. ई-विधान के तहत प्रशिक्षण एमपी विधानसभा के मानसरोवर सभागार में मंगलवार (23 दिसंबर) को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक विधायकों को ट्रेनिंग दी जाएगी. ये ट्रेनिंग राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन के तहत दी जाएगी. संसदीय कार्य मंत्रालय के अधिकारी माननीयों को प्रशिक्षण देंगे. देश की विधायी व्यवस्था को मॉडर्न, ट्रांसपेरेंट और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में इस शुरू किया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट के तहत भारतीय संसद और देश के सभी राज्यों की विधानसभा को पेपरलेस बनाया जा रहा है. भोपाल पहुंचेंगे सभी विधायक  एमपी के सभी विधायक आज से भोपाल पहुंचना शुरू हो जाएंगे. क्योंकि विधानसभा मानसरोवर सभागार सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक विधायकों को  संसदीय कार्य मंत्रालय दिल्ली के एक्सपर्ट की तरफ से ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर समेत बीजेपी कांग्रेस के सीनियर विधायक शामिल होंगे. एमपी विधानसभा में ऑनलाइन काम को लेकर नरेंद्र सिंह तोमर लगातार जोर दे रहे हैं. क्योंकि यह आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है. यह परियोजना देश के कई राज्यों की विधानसभाओं में लागू हो रही है, क्योंकि इसके जरिए विधानसभा को पूरी तरह से पेपरलेस बनाना है, ताकि कागज के उपयोग को बचाया जा सके.  विधायकों को होगा फायदा  एमपी विधानसभा में ऑनलाइन काम से सबसे ज्यादा फायदा विधायकों का ही होने वाला है. विधायकों को कागज के बड़े बंडल अपने साथ नहीं ले जाने होंगे. वहीं प्रस्ताव और चर्चा के लिए प्रश्न आसानी से जाएंगे. पुराने सवालों का जवाब और उसके दस्तावेज एक ही जगह पर आसानी से मिलेंगे. वहीं किसी भी बिल या अन्य मुद्दों पर वोटिंग के लिए भी अपनी आसानी से दे सकेंगे. पर्यावरण संरक्षण यानि कागजों की बचत में भी उपयोगी काम होगा. डिजिटल काम विधायी रिकॉर्ड भी सुरक्षित होगा. वही विधानसभा के काम भी तेजी आएगी और सारी जानकारी आम आदमी को भी ऑनलाइन विधानसभा की साइड पर मिलेगी.  मध्य प्रदेश विधानसभा में अगला विधानसभा का सत्र ऑनलाइन ही होगा, ऐसे में पूरी कार्रवाई के लिए लगातार इस प्रक्रिया में काम किया जा रहा है, जिसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से भी लगातार सहयोग हो रहा है. क्योंकि एमपी विधानसभा में ऑनलाइन काम की तैयारियां लंबे समय से चल रही है, जिस पर अब तेजी से अमल किया जा रहा है. जो राज्य सरकार के आम लोगों के लिए भी उपयोगी साबित होगी.   कैसे काम करता है NeVA प्लेटफॉर्म NeVA यानी नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन एक ऐसा डिजिटल सिस्टम है, जिसमें विधानसभा की पूरी कार्यवाही रियल-टाइम में दर्ज होती है। विधायकों को लॉगिन के माध्यम से सभी दस्तावेज, प्रस्ताव और रिपोर्ट तुरंत उपलब्ध हो जाती हैं। यह परियोजना “वन नेशन, वन एप्लिकेशन” की अवधारणा पर आधारित है, जिससे देशभर की विधानसभाओं में एकरूपता लाई जा सके। आगे की योजना विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षण के बाद चरणबद्ध तरीके से पेपरलेस कार्यप्रणाली को पूरी तरह लागू किया जाएगा। शुरुआती दौर में तकनीकी सहायता टीम भी मौजूद रहेगी, ताकि विधायकों को किसी तरह की असुविधा न हो। क्यों अहम है यह पहल विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह विधानसभा की कार्यक्षमता और जवाबदेही बढ़ाने में भी सहायक होगा। मध्य प्रदेश विधानसभा का यह डिजिटल बदलाव अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। इस व्यवस्था से क्या फायदा होगा? बजट सत्र से मध्य प्रदेश की विधानसभा को पेपरलेस करने की योजना है, यानी सारे कार्य डिजिटल तरीके से किए जाएंगे. इस व्यवस्था के लागू होने के बाद विधायकों, सचिवालय और आम लोगों को फायदा होगा. विधायकों को कागजों के भारी बंडल से मुक्ति मिलेगी. प्रश्न को आसानी से पूछा जा सकेगा. मतदान और उपस्थिति दर्ज कराने में आसानी होगी. वहीं, सचिवालय के कामकाज में तेजी आएगी. फाइल मैनेजमेंट आसान और तेज होगा. कर्मचारियों का समय और मेहनत भी बचेगी. आम जनता को भी इससे लाभ होगा. विधानसभा की कार्यवाही में पारदर्शिता आने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास बढ़ेगा. क्या है ई-विधान प्रोजेक्ट? नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (National E-Vidhan Application) एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है. इसकी मदद से संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही को ऑनलाइन और रियल टाइम तरीके से संचालित की जाती है. ये पूरे देश की विधानसभाओं और संसद को एक करती है.

विधानसभा में नारेबाजी और विरोध अब बैन, कांग्रेस बोली – लोकतंत्र की आवाज दबाई जा रही

भोपाल  मध्य प्रदेश में आगामी 28 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष द्वारा एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है जिसका कांग्रेस ने विरोध शुरू कर दिया है. इस आदेश के तहत, विधानसभा परिसर में किसी भी प्रकार की नारेबाजी या प्रदर्शन करने पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया गया है. यह रोक विधान सभा अध्यक्ष द्वारा संविधान के अनुच्छेद 94(2) के अंतर्गत लगाई गई है. आदेश में कहा गया है कि विधायकों द्वारा परिसर में प्रदर्शन, नारेबाजी या किसी प्रकार की भीड़भाड़ वाली गतिविधि पर प्रतिबंध रहेगा. यह निर्णय सत्र के दौरान अनुशासन और शांति बनाए रखने की दृष्टि से लिया गया है. हालांकि, इस निर्णय को लेकर विपक्ष खासतौर पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है. कांग्रेस ने किया फैसले का विरोध नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस आदेश को सरकार के दबाव में उठाया गया कदम बताया है. उन्होंने कहा, 'विधानसभा अध्यक्ष ने सरकार के दबाव में आकर यह आदेश जारी किया है. विपक्ष बार-बार मांग कर रहा है कि विधानसभा की कार्यवाही को लाइव किया जाए ताकि जनता देख सके कि सदन में उनके मुद्दों को किस तरह उठाया जाता है लेकिन सरकार और अध्यक्ष दोनों ही लोकतंत्र की आवाज़ को दबाने में लगे हैं.' कांग्रेस ने बताया संविधान का उल्लंघन सिंघार ने आगे कहा कि, 'यह संविधान की धारा 194 का उल्लंघन है, जो विधायकों को विशेषाधिकार देती है कि वो जनता के मुद्दे सदन में उठा सकें. प्रदर्शन, नारेबाजी और सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है लेकिन सरकार इन सभी माध्यमों को नियंत्रित कर विपक्ष की आवाज़ को दबाना चाहती है.' कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह इस आदेश का खुलकर विरोध करेगी और पूर्व की भांति आगामी सत्र में भी जोर-शोर से जनहित के मुद्दे उठाएगी. कांग्रेस ने इस प्रतिबंध को लोकतंत्र का गला घोंटने वाला निर्णय बताया है.