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MP Budget 2026 से जुड़े ईंधन दरों के फैसले, पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर होगी बड़ी बात

भोपाल  सोने-चांदी की कीमतों में उतार चढ़ाव से जूझ रही मध्य प्रदेश की जनता के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें टेंशन दे सकती हैं। जी हां सीएम मोहन ने इशारों इशारों में पेट्रोल डीजल की कीमतें बढ़ने के संकेत दिए हैं। सीएम मोहन यादव ने कहा है कि सरकार इन कीमतों को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है और धीरे-धीरे राहत देने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। भोपाल में केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान सीएम मोहन यादव ने स्वीकार किया कि पेट्रोल-डीजल वाकई एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने इशारों में कहा कि सरकार इस समस्या का समाधान निकालने की तैयारी कर रही है। सीएम ने यह भी जानकारी दी कि मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होगा और 18 फरवरी को MP Budget 2026 पेश किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बजट में जनता को कई क्षेत्रों में रियायत दी जाएगी। इसका सीधा मतलब ये निकाला जा सकता है फरवरी के बाद ही पेट्रोल डीजल की कीमतें में बदलाव आएगा। मध्यप्रदेश में पेट्रोल पर करीब 29 फीसदी और डीजल पर लगभग 19 फीसदी वैट पर राहत मिलने के सवाल पर सीएम ने जवाब कहा—इस पर उन्होंने कहा कि सरकार पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी पर भी काम कर रही है। ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि ईंधन पर निर्भरता कम हो सके। सीएम मोहन यादव ने पेट्रोल-डीजल का सीधे नाम लिए बिना कहा कि बजट के माध्यम से इस चुनौती के निराकरण का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में मध्यप्रदेश शामिल है, लेकिन साथ ही यह राज्य कम बेरोजगारी दर वाले राज्यों में भी अपनी जगह बना चुका है।

वित्त मंत्री का बड़ा बयान: 4.63 लाख करोड़ का MP बजट, मोहन सरकार का फोकस समावेशी विकास पर

भोपाल  केंद्र सरकार के बजट के बाद अब मध्यप्रदेश की मोहन सरकार भी अपने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की तैयारियों में जुट गई है। वित्त मंत्री और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इस बार का बजट 'सर्वस्पर्शी' होगा, जिसमें समाज के हर वर्ग को राहत देने की कोशिश की जाएगी। विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होने जा रहा है, जिसमें सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप विकास और समावेशी विकास का रोडमैप पेश करेगी। इस बार का बजट पूरी तरह डिजिटल होगा और इसमें 'कृषि कल्याण वर्ष' के तहत किसानों, युवाओं और कर्मचारियों पर विशेष फोकस रखा गया है। समावेशी विकास और राहत पर फोकस मध्यप्रदेश विधानसभा में इस बार का बजट सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाला है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने स्पष्ट किया है कि बजट तैयार करते समय उन चार स्तंभों (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति) पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिनकी बात प्रधानमंत्री अक्सर करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस साल के बजट का आकार पिछले वर्ष के 4.21 लाख करोड़ से करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 4.63 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है। किसानों के लिए बड़ी योजनाओं की उम्मीद राज्य सरकार ने साल 2026 को 'कृषि कल्याण वर्ष' घोषित किया है, जिसका सीधा असर बजट प्रावधानों में देखने को मिलेगा। इस बार कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों जैसे डेयरी, मत्स्य पालन, सहकारिता और उद्यानिकी के लिए बजट में भारी वृद्धि की संभावना है। माना जा रहा है कि इन क्षेत्रों के फंड में पिछले साल के मुकाबले इस बार बड़ी बढ़ोतरी की जा सकती है ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिले। पूरी तरह 'डिजिटल' होगा बजट मध्यप्रदेश के संसदीय इतिहास में पहली बार पूरी तरह 'ई-बजट' पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा कागजी दस्तावेजों के बजाय टैबलेट के माध्यम से बजट भाषण पढ़ेंगे। इसके साथ ही सरकार अगले तीन वर्षों का विजन बताने वाला 'रोलिंग बजट' भी तैयार कर रही है, जो प्रदेश के भविष्य का रोडमैप तय करेगा।  बजट में बड़ी घोषणाएं संभव बजट में सरकारी कर्मचारियों के लिए बहुप्रतीक्षित स्वास्थ्य बीमा योजना की घोषणा हो सकती है। साथ ही, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए नए प्रावधान किए जा रहे हैं। सरकार का विशेष फोकस मेट्रोपॉलिटन रीजन और बड़े शहरों के अधोसंरचना विकास (Infrastructure) पर भी रहने वाला है। जैविक खेती और ग्रामीण विकास को बढ़ावा सरकार जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए नई योजनाओं का ऐलान कर सकती है। चूँकि 2026 को कृषि कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, इसलिए खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) इकाइयों की स्थापना के लिए विशेष रियायतों की घोषणा की जा सकती है।

MP बजट 2026: ग्वालियर के लिए नई उड़ान और चंबल क्षेत्र के विकास को मिलेगी गति

 ग्वालियर मध्य प्रदेश के आगामी बजट 2026-27 को लेकर ग्वालियर-चंबल संभाग की उम्मीदें सातवें आसमान पर हैं। बजट से अंचल के सभी छह जिलों ग्वालियर, मुरैना, भिंड, शिवपुरी और श्योपुर के विकास को नए पंख लगने की आस है। वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किए जाने के बाद से कृषि प्रधान इस अंचल की आशाएं बलवती हो गई हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग के लिए आगामी बजट केवल वित्तीय आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि विकास की एक ऐसी पटरी साबित होगी जिस पर अंचल की रफ्तार तय होगी। किसान कल्याण वर्ष और ग्वालियर का स्मार्ट सिटी विजन मिलकर अंचल को प्रदेश का नया ग्रोथ इंजन बना सकते हैं। ग्वालियर : 2322 करोड़ रुपये का मास्टर प्लान और म्यूजिक सिटी का कायाकल्प ग्वालियर के लिए यह बजट ऐतिहासिक हो सकता है। ग्वालियर नगर निगम ने 2322 करोड़ रुपये का एक महत्वाकांक्षी बजट प्रस्ताव तैयार किया है। इसे राज्य के बजट से संजीवनी मिलने की उम्मीद है। शहर के भीतर ई-व्हीकल चार्जिंग स्टेशन, पिंक टायलेट्स और स्मार्ट शौचालयों का जाल बिछाने की योजना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के कन्वेंशन सेंटर के लिए भी काफी उम्मीदें हैं। 1000 बिस्तर वाले अस्पताल को पूर्णतः क्रियाशील बनाने और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं के विस्तार के लिए विशेष पैकेज की उम्मीद है। साथ ही, यूनेस्को म्यूजिक सिटी होने के नाते संगीत और कला के क्षेत्र में नई परियोजनाओं को धनराशि मिलने की आस है। मुरैना और भिंड : अटल प्रगति पथ से औद्योगिक क्रांति चंबल क्षेत्र के दो प्रमुख जिले मुरैना और भिंड के लिए सबसे बड़ी बात अटल प्रगति पथ (चंबल एक्सप्रेस-वे) की इन-प्रिंसिपल मंजूरी है। 420 किमी लंबा यह कारिडोर भिंड और मुरैना को सीधे उत्तर प्रदेश और राजस्थान से जोड़ेगा। बजट 2026 में इसके भूमि अधिग्रहण के लिए बड़े आवंटन की उम्मीद है। मुरैना में 600 मेगावाट के सोलर-प्लस-स्टोरेज प्रोजेक्ट और भिंड के मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र में डिफेंस सहायक इकाइयों के विकास के लिए राशि प्रविधान होने की उम्मीद है। श्योपुर : चीता स्टेट की वैश्विक ब्रांडिंग श्योपुर जिला अब प्रोजेक्ट चीता की सफलता के बाद वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी जगह बना चुका है। कूनो नेशनल पार्क के आसपास इको-टूरिज्म और चीता सफारी के विस्तार के लिए 50 करोड़ रुपये से अधिक के फंड की अपेक्षा है। ग्वालियर-श्योपुर रेल लाइन के अंतिम चरण के लिए फंड की घोषणा श्योपुर के आर्थिक परिदृश्य को बदल देगी। शिवपुरी और दतिया : पर्यटन और आस्था का संगम शिवपुरी को नए एयरपोर्ट विकास (प्रस्तावित लागत 45 करोड़) और टाइगर सफारी के लिए बड़ी राशि की उम्मीद है। साथ ही पार्वती-काली सिंध-चंबल लिंक परियोजना से सिंचाई के लिए जल अभाव की समस्या दूर होने की आस है। स्किल डेवलपमेंट को लेकर पिछले बजट में जो प्रविधान किए गए थे, उनका धरातल पर क्रियान्वयन हो, ताकि युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें। शिवपुरी में औद्योगिक क्षेत्र तो विकसित कर दिए गए हैं, परंतु उनमें उद्योग अब तक नहीं आ पाए हैं। इस दिशा में काम होने की उम्मीद है। यह कहते हैं क्षेत्र के लोग     बजट 2026 से मुख्य अपेक्षा है कि इसमें स्मार्ट मोबिलिटी और ग्रीन एनर्जी के लिए ठोस आवंटन हो। विशेषकर, शहर के बढ़ते दायरे को देखते हुए और कन्वेंशन सेंटर जैसे प्रोजेक्ट्स ग्वालियर को टीयर-1 शहरों की श्रेणी में खड़ा करेंगे। सरकार स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत न केवल ऐतिहासिक स्मारकों के जीर्णोद्धार के लिए फंड देगी। ग्वालियर को अब लांग टर्म बिजनेस हब के रूप में पहचान दिलाने वाले वित्तीय प्रविधानों की जरूरत है। – डॉ. प्रवीण अग्रवाल, अध्यक्ष, चैंबर ऑफ कामर्स, ग्वालियर