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सदस्यता विवाद पर सियासी घमासान: निर्मला सप्रे ने कहा—मैंने कभी पद का लोभ नहीं किया

भोपाल मध्यप्रदेश के बीना विधायक निर्मला सप्रे की बहुचर्चित सदस्यता मामले में संशय अभी भी बरकार है। लोगों और खुद विधायक को कोर्ट के निर्णय का इंतजार है। इस बीच निर्मला सप्रे का बड़ा बयान सामने आया है। आमंत्रण के लिए सीएम से मिलने आती हूं विधायक निर्मला सप्रे ने कहा- विधायक पद का मोह होता तो मैं मंत्री होती। कोर्ट के निर्णय का इंतजार करें, कोर्ट जो भी निर्णय देगा वह मंजूर है। मैं कोर्ट में अपना जवाब दूंगी, सार्वजनिक मंच पर नहीं। मैं जनता की विधायक हूं, मैं जनता के लिए काम कर रही हूं। 177 करोड़ के काम सरकार ने स्वीकृत किए हैं उनके शिलान्यास भूमिपूजन के आमंत्रण के लिए सीएम से मिलने आती हूं। मुझे विधायक पद का मोह नहीं है। अगर मोह होता तो मैं मंत्री होती। बीना जल्द ही जिला बनेगा, जनता की यही इच्छा बीजेपी को आज की स्थिति में किसी दूसरे दल के विधायक की जरूरत नहीं है। मैं जनता की सेवा के लिए काम कर हूं, जनता मेरे काम से बहुत खुश है। बीना जल्द ही जिला बनेगा, जनता की यही इच्छा है। बीना को जिला बनाने के लिए मैं खुद धरने पर बैठी हूं। सीएम ने बीना के विकास के लिए बहुत काम किया है।

निर्मला सप्रे की सदस्यता पर विवाद जारी, 8 अक्टूबर को हाईकोर्ट में फैसला आएगा

सागर  कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता खतरे में है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उनका आरोप है कि सप्रे ने कांग्रेस से जीतने के बाद भाजपा का समर्थन किया। उन्होंने भाजपा के मंच पर प्रचार भी किया। कोर्ट इस मामले की सुनवाई 8 अक्टूबर को करेगा। देखना होगा कि उनकी सदस्यता रहेगी या जाएगी। कांग्रेस के टिकट से जीती थीं निर्मला निर्मला सप्रे 2023 में बीना से कांग्रेस के टिकट पर विधायक बनीं। उमंग सिंघार का कहना है कि सप्रे ने दल बदल विरोधी कानून का उल्लंघन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सप्रे ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का मंच साझा किया। उन्होंने भाजपा का दुपट्टा पहनकर प्रचार किया और कांग्रेस के खिलाफ बयान भी दिए। सिंघार ने मांग की है कि उनकी सदस्यता रद्द की जाए। विधानसभा अध्यक्ष से कर चुके शिकायत कांग्रेस पार्टी ने पहले विधानसभा अध्यक्ष को इस बारे में शिकायत की थी। उनका कहना था कि अध्यक्ष ने 90 दिन से ज्यादा समय तक कोई कार्रवाई नहीं की। इसलिए, उन्हें हाई कोर्ट जाना पड़ा। हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने पहले याचिका खारिज कर दी थी। अब जबलपुर बेंच इस मामले की जांच करेगी। अदालत के फैसले पर टिकी नजर कांग्रेस का कहना है कि सप्रे ने खुले तौर पर पार्टी बदल ली है। वहीं, भाजपा इसे 'विचारधारा के समर्थन' का नाम दे रही है। अब यह देखना होगा कि अदालत इसे दलबदल मानती है या नहीं। इस पर कोर्ट का फैसला ही अंतिम होगा।