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बढ़ी सर्दी की दस्तक: दिल्ली-एनसीआर में तापमान लुढ़का, IMD का नया अपडेट जारी

नई दिल्ली दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग ने दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत के सभी प्रमुख राज्यों में शीतलहर की चेतावनी जारी की है। अनुमान है कि रविवार का दिन इस साल दिसंबर की सबसे ठंडी सुबह साबित हो सकता है। लगातार गिरते तापमान के चलते शीतलहर का असर तेजी से दिख रहा है। दिल्ली-एनसीआर में न्यूनतम तापमान 3.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। राजधानी में लोग एक तरफ प्रदूषण और दूसरी ओर कड़ाके की ठंड की दोहरी मार झेल रहे हैं। दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई है और AQI 333 तक पहुंच गया है। 39 निगरानी स्टेशनों में से 35 ने ‘बहुत खराब’ रीडिंग दर्ज की, जिससे राजधानी घने धुंध और स्मॉग की चपेट में है। आईएमडी की चेतावनी -ठंड और कोहरा दोनों बढ़ेंगे आईएमडी ने बताया कि रविवार सुबह हल्का कोहरा, आंशिक रूप से बादल छाए रहने और घनी धुंध की स्थिति बनी रह सकती है। तापमान 8°C से 23°C के बीच रहने का अनुमान है। दिन में उत्तर-पश्चिम दिशा से 15-20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, जो तापमान में और गिरावट ला सकती हैं। मौसम विभाग ने अनुमान जताया कि 7 से 8 दिसंबर तक मौसम में धीरे-धीरे सुधार होगा और अधिकतम तापमान 24-26 डिग्री तथा न्यूनतम तापमान 8-10 डिग्री सेल्सियस रहेगा। शनिवार के बाद आसमान साफ रहने की संभावना है। आईएमडी ने आगे बताया कि 10 और 11 दिसंबर को पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों में शीतलहर चलने की संभावना है। 7 और 8 दिसंबर को पश्चिमी मध्य प्रदेश और विदर्भ, 7 दिसंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तथा झारखंड और ओडिशा के कई इलाकों में भी शीतलहर का असर दिख सकता है। उत्तर प्रदेश में भी गिरा पारा उत्तर प्रदेश में भी कड़ाके की ठंड बढ़ रही है और लोगों की परेशानियां बढ़ा रही है। दिसंबर के पहले सप्ताह में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस तक रिकॉर्ड किया गया। कई जिलों में शीतलहर की स्थिति बनने लगी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यूपी में ठंड का प्रकोप और बढ़ेगा। लखनऊ के अमौसी स्थित आंचलिक मौसम केंद्र के अनुसार, 6 दिसंबर को पूर्वी और पश्चिमी यूपी के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहा। राजस्थान में रात का पारा 5 डिग्री तक पहुंचा राजस्थान में भी ठंड बढ़ने लगी है। जयपुर, अजमेर और कोटा में रात का तापमान 10 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया, जबकि शेखावाटी क्षेत्र के कई हिस्सों में तापमान अभी भी 5 डिग्री से नीचे जाने की संभावना बनी हुई है। दिन के समय तापमान सामान्य से 1 से 3 डिग्री कम रहा। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत के ऊपरी हिस्सों से एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ गुजर रहा है, जिसका हल्का असर राजस्थान के कुछ इलाकों में देखने को मिल सकता है, हालांकि बारिश की कोई संभावना नहीं है। शाम होने पर तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन ठंड का असर स्थिर बना हुआ है। दिल्ली-एनसीआर में इस मौसम की सबसे ठंडी सुबह दिल्ली-एनसीआर में कड़ाके की ठंड ने प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है। 5 दिसंबर 2025 को न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन की सबसे ठंडी दिसंबर की सुबह रही और सामान्य से 3.9 डिग्री कम रहा। राजधानी घने कोहरे से ढकी रही और AQI 333 तक पहुंच गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में है। शनिवार सुबह हल्की धुंध के कारण विजिबिलिटी बेहद कम रही। आईएमडी की नई एडवाइजरी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि शीतलहर का प्रभाव कई इलाकों में जारी रहेगा और कुछ स्थानों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे रह सकता है। 5 से 11 दिसंबर तक सुबह के समय धुंध और कोहरा छाए रहने की संभावना है। हालांकि, उत्तर-पश्चिमी हवाएं दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में थोड़ी राहत ला सकती हैं, लेकिन ये हवाएं ठंड को और बढ़ा देंगी।  

बच्चों में उभर रहा नया इंफेक्शन: काली खांसी जैसी खांसी से बढ़ी चिंता

चंडीगढ़ काली खांसी (हूपिंग कफ) और लंबे समय से खांसी से पीड़ित मरीजों के लिए एक नई चिंता उभरकर सामने आई है। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआइ) के किए गए शोध में यह पता चला है कि उत्तर भारत में तेजी से फैल रहा नया बैक्टीरिया, बोर्डेटेला होल्मसी, अब काली खांसी के समान लक्षण उत्पन्न कर रहा है । यह संक्रमण विशेष रूप से पांच से दस वर्ष के बच्चों में फैल रहा है और इसके नियंत्रण में कठिनाई आ रही है। पीजीआइ के मेडिकल माइक्रोबायोलाजी विभाग के डॉ. विकास गौतम ने बताया कि उनकी टीम ने 2019 से 2023 के बीच 935 संदिग्ध काली खांसी के मामलों का अध्ययन किया। इस शोध में पाया गया कि लगभग 37 प्रतिशत मरीजों में संक्रमण का कारण नया जीवाणु बोर्डेटेला होल्मसी था, जबकि पारंपरिक काली खांसी का कारण बोर्डेटेला परट्यूसिस होता है। 2023 में सबसे अधिक मामले पांच से 10 वर्ष के बच्चों में देखे गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि संक्रमण का पैटर्न बदल रहा है। ये हैं लक्षण     लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक चलने वाली खांसी     खांसी के बाद सांस लेने में सीटी जैसी आवाज     थकान, कमजोरी और हल्का बुखार     पारंपरिक खांसी की दवाओं से राहत न मिलना काली खांसी के पारंपरिक मामलों में गिरावट के संकेत   पीजीआइ द्वारा 2015 से चलाए जा रहे निगरानी कार्यक्रम में यह पाया गया कि पहले बोर्डेटेला पयूसिस संक्रमण के 15-20 प्रतिशत मामले मिलते थे, जो अब घटकर दो से पांच प्रतिशत तक रह गए हैं। इसके विपरीत, बोर्डेटेला होल्मसी के मामलों में वृद्धि हो रही है। पीजीआइ के विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव संक्रमण की नई प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है, जो भविष्य में स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन सकता है। बोर्डेटेला होल्मसी के वारे में यह एक जीवाणु है जो सांस संबंधी संक्रमण उत्पन्न करता है और इसके लक्षण काली खांसी से काफी मेल खाते हैं। पहले इसे दुर्लभ माना जाता था, लेकिन अब भारत सहित कई देशों में इसके मामले बढ़ रहे हैं। यह विशेष रूप से बच्चों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को अधिक प्रभावित करता है। डाक्टरों को काली खांसी के साथ नए संक्रमण की जांच की भी जरूरत डाक्टरों को सलाह दी गई है कि वे काली खांसी के साथ-साथ नए संक्रमण की भी जांच करें। पीजीआइ की टीम ने सुझाव दिया है कि डाक्टरों को पारंपरिक काली खांसी की जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनसे मिलते-जुलते संक्रमणों की पहचान और निगरानी भी करनी चाहिए। समय पर पहचान, सही जांच और उचित दवाओं से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।