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मोबाइल और टीवी पर स्क्रीनिंग टाइम ने बढ़ाया बच्चों में मोटापा

जालंधर. कृषि प्रदान प्रदेश पंजाब में बच्चों में मोटापे का उभार एक स्वास्थ्य संकट बनने लगा है। बच्चों का मोबाइल , टीवी और कंप्यूटर पर बढ़ता स्क्रीन टाइम इसका अहम कारण माना जा रहा है। कोरोना काल के बाद बच्चों में मोटापा दर 2 से 3 गुना तक बढ़ गई है। बच्चों में मोटापे की वजह से परेशान स्वजन इससे होने वाली शुगर और हायपरटेंशन की समस्या को लेकर बाल रोग माहिरों की सलाह लेने लगे है। पिछले करीब पांच साल में खासकर किशोर 10-16 वर्ष और स्कूल-जाने वाले बच्चों में मोटापे और अधिक वजन की समस्या तेजी से बढ़ी है । हाल ही में हुई स्टडी में बाडी मास इंडेक्स (बीएमआई) के आधार लगभग 31 प्रतिशत बच्चे 10-16 वर्ष या तो ओवरवेट 18.6प्रतिशत या ओबेसी 12.4 प्रतिशत श्रेणी में आते हैं। इसके आधार पर करीब 3 में से 1 बच्चा अब वजन की सीमा से ऊपर है। मोटापा केवल शहरी आबादी के बच्चे में ही देहात के बच्चों में बढ़ रहा है। राज्य में नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे 2015-16 व 2019-21 के अनुसार 0-5 वर्ष के बच्चों में ओवरवेट और ओबेसी लगभग 2 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 4 प्रतिशत पहुंचा। एंडोकिड्स के एमडी एवं बच्चों के एंडोक्रोनोलाजिस्ट डा. सौरभ उप्पल कहते है कि पांच साल पहले अगर उनके पास 100 बच्चे मोटापे को लेकर आते थे अब उनकी संख्या 140 के करीब पहुंच चुकी है। स्वजन उनके पास एक साल के बच्चे भी मोटापे को लेकर पहुंच रहे है। छोटे बच्चों को लोग बिस्कुट और चिप्स देना शुरू कर देते है जो मोटापे का कारण बन रहा है। वहीं बड़े बच्चों का मोबाइल फोन, टीवी और कंप्यूटर पर स्क्रीन टाइम बढ़ गया है। बच्चे इस दौरान फास्ट, फूड, चाकलेट, बिस्कुट, चिप्स व अन्य खाद्य पदार्थ खाते रहते है। उन्हें पता नही चलता और ओवर इटिंग कर लेते है जो मोटापे का बढ़ा कारण बन रहे है। आईएमए के पूर्व प्रधान एवं भुटानी चिल्ड्रन अस्पताल के एमडी डॉ. एमएस भुटानी का कहना है कि एक साल से कम आयु के बच्चों को ही लोग दूध पिलाने और उन्हें व्यस्त रखने मोबाइल फोन उनके हाथ में थमा रहे है। उनकी आदत बिगड़ने का साथ स्क्रीन टाइम बढ़ जाता है। बच्चे मोटे होने के साथ जिद्दी भी हो जाते है। ऐसे बच्चों की आदत छुड़वाने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बच्चों की आउट डोर गेम्स की आदत नही रहती है। जब तक खान-पान, खेल और मानसिक स्वास्थ्य के लिए परिवार और समुदाय मिलकर कदम नहीं उठाते, मोटापे की वृद्धि का सिलसिला नहीं रुकेगा। मॉडल टाउन में रहने वाली श्वेता का कहना है कि उनका 12 साल का बेटा मान्य ओवर वेट है। पति पत्नी दोनों सर्विस करते है और देर शाम और छुट्टी के दिन ही बच्चे को पूरा समय दे पाते है। पहले वह मोबाइल और टीवी एक घंटे तक इस्तेमाल करता था, अब पढ़ाई सहित उसका स्क्रीन टाइम चार घंटे तक पहुंच गया है। इस दौरान उसकी डाइट भी बढ़ गई है। उसका भार सामान्य से दस किलोग्राम ज्यादा है। अब उसका भार कम करने के लिए डाक्टर से सलाह ले रहे है, ताकि मोटापे से होने वाली बीमारियों का खतरा खत्म किया जा सके। मकसूदा में रहने वाले चंद्र शेखर का कहना है कि उनकी बेटी सुरभि 16 साल की है। कोरोना काल के दौरान आन लाइन प्रचलन बढ़ने की वजह से स्क्रीन टाइम बढ़ गया। धीरे धीरे स्क्रीन टाइम 5 से 6 घंटे तक पहुंच गया है, हालांकि इसमें ज्यादातर समय उसकी पढ़ाई और कंपीटिशन की तैयारी से संबंधित है। अब मोटापा की वजह से उसे किशोरियों में होने वाली समस्याएं बढ़ने लगी है। अब मोटापा कम करने के लिए उसे जिम भेजना शुरू किया है। मुख्य कारण जो मोटापे को बढ़ा रहे हैं पैकेज्ड स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक जैसे मीठे वाले उत्पाद अधिक सेवन हो रहे हैं। कोचिंग, मोबाइल, टीवी स्क्रीन टाइम, आउटडोर खेलों में कमी मोटापे में योगदान दे रही है। स्कूलों में खेल-कूद की भूमिका कम और एसी-लाइफस्टाइल जैसे आरामदायक व्यवहार ज्यादा। पौष्टिक तत्वों की कमी और अधिक फैट-सोडियम डाइट। समाधान संतुलित पौष्टिक आहार फल, सब्जियां, दलिया, प्रोटीन। मोबाइल और टैब के समय का नियंत्रण। रोज़ाना कम से कम 60 मिनट खेल-कूद या शारीरिक गतिविधि। नियमित नींद और स्क्रीन-डीटाक्स। खेल मुख्य-पाठ्यक्रम का हिस्सा। स्वास्थ्य-स्क्रीनिंग कैंप।

वजन कम करने की नई उम्मीद! ओजेम्पिक से दोगुनी ताकतवर दवा विकसित

 आज की दुनिया में मोटापा सिर्फ एक हेल्थ इश्यू नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल और मानसिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है। अब तक ओजेम्पिक और वेगोवी जैसी दवाओं ने वजन कम करने के क्षेत्र में क्रांति तो लाई है, लेकिन इनके साथ उल्टी, जी मिचलाना, मांसपेशियों की कमजोरी और कभी-कभी दुबारा वजन बढ़ने जैसे साइड इफेक्ट भी देखने को मिले हैं। ऐसे में अब वैज्ञानिकों ने एक नई उम्मीद जगाई है एक ऐसी दवा जो सर्जरी जितना असरदार, लेकिन अधिक सुरक्षित और आसान हो सकती है। कैसी है नई दवा?- स्टडी अमेरिका की टफ्ट्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक एक्सपेरिमेंटल दवा तैयार की है, जो एक साथ चार हार्मोन पर काम करती है GLP-1, GIP, ग्लूकागन और PYY।     GLP-1 भूख को कम करता है और पाचन को धीमा करता है।     GIP मतली को कंट्रोल करता है और फुलनेस की फीलिंग बढ़ाता है।     ग्लूकागन शरीर की एनर्जी खपत को बढ़ाता है और फैट बर्न करने में मदद करता है।     PYY पाचन की रफ्तार को और धीमा कर अतिरिक्त चर्बी को घटाने में मदद करता है।     वैज्ञानिकों का दावा है कि यह दवा 30% तक वजन घटा सकती है, जो कि आम तौर पर बैरियाट्रिक सर्जरी में देखने को मिलता है। जानिए नई दवा ओजेम्पिक से कैसे अलग है? ओजेम्पिक जैसी मौजूदा दवाएं सिर्फ GLP-1 पर काम करती हैं। नई दवा चार हार्मोन का संतुलन बनाकर असर दिखाने की कोशिश करती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इससे मतली और उल्टी जैसी शिकायतें कम होंगी, साथ ही मांसपेशियों और हड्डियों की ताकत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और मोटापा घटने के बाद दुबारा बढ़ने का रिस्क भी कम हो सकता है। कोशिकाओं पर टेस्ट किया गया? अभी यह दवा प्रारंभिक प्रयोगशाला चरण (preclinical stage) में है। ये न तो जानवरों पर और न ही इंसानों पर इसका ट्रायल हुआ है। फिलहाल इसे कोशिकाओं पर टेस्ट किया गया है, जहां इसके अच्छे नतीजे मिले हैं। अगला कदम होगा पहले जानवरों पर, फिर इंसानों पर ट्रायल। उसके बाद ही इसे दवा के रूप में लॉन्च करने की प्रक्रिया शुरू होगी। क्यों है यह खोज अहम? भारत से लेकर अमेरिका तक लाखों लोग मोटापे से जूझ रहे हैं। वहीं मोटापा कम करने के लिए कई दवाएं बनाई गई हैं, जो काफ़ी असरदार हैं, लेकिन दवाओं के साइड इफेक्ट्स, इंजेक्शन की झंझट और महंगे दाम लोगों को परेशानी में डालते हैं।वहीं अगर नई दवा पर रिसर्च सफल रही, तो यह वजन घटाने में न सिर्फ मदद करेगी बल्कि इसके कम साइड इफेक्ट्स देखने को मिल सकते हैं और इस दवा को लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकेगा।