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फर्जी सिम रैकेट पर शिकंजा, ऑपरेशन फेस में आरोपी गिरफ्तार—455 सिम का खुलासा

नरसिंहपुर जिले में साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे ‘‘ऑपरेशन फेस’’ के तहत नरसिंहपुर पुलिस ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। फर्जी सिम कार्डों के अवैध नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक और आरोपित को गिरफ्तार किया है, जिससे अब तक कुल 1232 फर्जी सिम कार्डों का खुलासा हो चुका है। इस कार्रवाई को साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है। पुलिस जांच में सामने आया कि थाना गोटेगांव क्षेत्र निवासी विनय सिलावट पिता भगवानदास सिलावट (उम्र 28 वर्ष) इस नेटवर्क में सक्रिय था। आरोपित ने फर्जी दस्तावेजों और अपने चेहरे का उपयोग कर 455 सिम कार्ड अवैध रूप से एक्टिवेट कराए थे। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और मामले में पूछताछ जारी है। इससे पहले थाना ठेमी क्षेत्र के ग्राम बढ़ैयाखेड़ा निवासी रंजीत पटेल को गिरफ्तार किया गया था, जिसने 777 सिम एक्टिवेट कराए थे। दोनों मामलों को जोड़कर अब तक कुल 1232 फर्जी सिम कार्डों का खुलासा हो चुका है, जिससे बड़े नेटवर्क के सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। ऐसे होता था फर्जीवाड़ा जांच में खुलासा हुआ कि आरोपित फर्जी या छलपूर्वक प्राप्त पहचान दस्तावेज एकत्रित कर सिम विक्रेताओं के माध्यम से ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कराते थे। फेशियल ऑथेंटिकेशन के दौरान अपने ही चेहरे का उपयोग कर सिम सक्रिय कर दिए जाते थे। इस तरह अलग-अलग फर्जी पहचान पर बड़ी संख्या में सिम कार्ड चालू किए गए। मामला दर्ज, अन्य की तलाश जारी पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश मीना के निर्देशन में गठित टीम ने आरोपित के खिलाफ धारा 419, 468, 471 भादवि एवं 66 (सी) आईटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। कार्रवाई में उनि गौरव नेमा, विजय द्विवेदी, श्रीराम रधुवंशी, जयवति कुरोपे, प्रधान आरक्षक देवेन्द्र सिंह, हेमंत बाडिवा, भूपेन्द्र नवरेती, महिला आरक्षक कुमुद पाठक, आरक्षक जितेन्द्र ठाकुर, राकेश इनवाति एवं संकल्प ठाकुर की सराहनीय भूमिका रही। पुलिस की यह अपील पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने आधार, फोटो व अन्य दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति को न दें और अपने नाम पर जारी सिम कार्डों की समय-समय पर जांच करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस को दें।  

MP में साइबर पुलिस ने 33 जिलों में एक ही चेहरे पर सक्रिय 36 हजार सिम पकडे

इंदौर/भोपाल. मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिमकार्ड जारी करने के बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। साइबर पुलिस ने एक ही फोटो का इस्तेमाल कर अलग-अलग पहचान पत्रों के सहारे सिम एक्टिवेट कराने वाले गिरोह के खिलाफ ‘ऑपरेशन फेस’ शुरू किया है। दूरसंचार विभाग से मिले डेटा के विश्लेषण में सामने आया है कि प्रदेश के 33 जिलों में 135 ऐसे चेहरे हैं, जिनके नाम और फोटो के आधार पर 36,668 सिमकार्ड सक्रिय किए गए हैं। पुलिस अब इन मामलों की गहन जांच कर आरोपी पीओएस एजेंटों और गिरोह से जुड़े लोगों की धरपकड़ की तैयारी कर रही है। 33 जिलों में फैला फर्जीवाड़े का नेटवर्क     साइबर पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार यह घोटाला केवल राजधानी भोपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के कई जिलों में संगठित रूप से चल रहा था। जांच में पता चला है कि 33 जिलों में ऐसे 135 चेहरे चिन्हित किए गए हैं, जिनके आधार पर कम से कम 50 या उससे अधिक सिमकार्ड जारी किए गए हैं।     इन सभी मामलों में एक ही व्यक्ति की फोटो का उपयोग कर अलग-अलग पहचान पत्रों के जरिए बड़ी संख्या में सिमकार्ड सक्रिय किए गए। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रदेश में एक बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय था। गुना, सतना और मुरैना में सबसे ज्यादा मामले     दूरसंचार विभाग से प्राप्त डेटा के अनुसार सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा गुना जिले में सामने आया है। यहां एक ही फोटो के आधार पर 3,760 सिमकार्ड सक्रिय पाए गए हैं।     इसी तरह सतना जिले में 2,870 और मुरैना में 2,714 सिमकार्ड एक ही तस्वीर के आधार पर जारी किए गए हैं। इसके अलावा बैतूल, भोपाल और इंदौर जैसे बड़े जिलों में भी इस तरह के कई मामले सामने आए हैं। नियमों को दरकिनार कर जारी किए सिम नियमों के अनुसार किसी भी व्यक्ति के नाम और पहचान पत्र के आधार पर अधिकतम नौ सिमकार्ड ही जारी किए जा सकते हैं। लेकिन पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) एजेंटों ने इस नियम की अनदेखी करते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार कर बड़ी संख्या में सिमकार्ड एक्टिवेट कर दिए। इसके लिए पहचान पत्रों और फोटो में हेरफेर कर नई पहचान तैयार की गई, जिससे एक ही व्यक्ति के नाम और चेहरे का इस्तेमाल कई बार किया जा सका। पांच सप्ताह तक चलेगा अभियान     साइबर पुलिस ने इस फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ ‘ऑपरेशन फेस’ शुरू किया है। यह विशेष अभियान पांच सप्ताह तक चलाया जाएगा। इस दौरान पुलिस संदिग्ध सिमकार्ड और उनसे जुड़े लोगों की पहचान कर कार्रवाई करेगी।     साइबर पुलिस मुख्यालय के आईजी शियास मजीद के अनुसार जांच को तेज कर ऐसे पीओएस एजेंटों को चिन्हित किया जा रहा है, जिन्होंने नियमों का उल्लंघन कर बड़ी संख्या में सिमकार्ड जारी किए। दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।     पुलिस का मानना है कि इन फर्जी सिमकार्ड का इस्तेमाल साइबर अपराध, धोखाधड़ी और अन्य अवैध गतिविधियों में किया जा सकता है, इसलिए इस पूरे नेटवर्क को खत्म करना बेहद जरूरी है।