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तंजानिया के किलिमंजारो पर MP की बेटी का कमाल, महिला पुलिस अधिकारी ने की ऐतिहासिक चढ़ाई

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस की इंस्पेक्टर दीपिका गौतम ने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो फतह कर नया इतिहास रच दिया है। वह मध्यप्रदेश पुलिस की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं, जिन्होंने इस विश्व प्रसिद्ध पर्वत पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की है। दीपिका भोपाल स्थित एससीआरबी (SCRB) पीएचक्यू में पदस्थ है। उन्होंने 29 मई को करीब 5,895 मीटर ऊंची माउंट किलिमंजारो की चोटी पर पहुंचकर यह उपलब्धि हासिल की। खास बात यह रही कि इस अंतरराष्ट्रीय अभियान में वह भारत की एकमात्र प्रतिभागी थीं। ‘सपनों को नहीं छोड़ा पीछे’ दीपिका कहती हैं कि नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अक्सर लोग अपने सपनों को पीछे छोड़ देते हैं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उनका मानना है कि “सपनों के बिना जिंदगी अधूरी होती है,” और यही सोच उन्हें किलिमंजारो तक ले गई। पांच दिन का कठिन अभियान किलिमंजारो पर चढ़ाई पांच दिन का कठिन सफर था, जिसमें तीन बेस कैंप पार करने के बाद अंतिम चढ़ाई रात में शुरू हुई। इस दौरान तापमान माइनस 10 से 15 डिग्री तक पहुंच गया। मौसम भी बेहद अनिश्चित था, जो हर पल बदल रहा था। पहले कर चुकी हैं कई ट्रेक हालांकि यह उनका पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पर्वत अभियान था, लेकिन इससे पहले वह अमरनाथ और केदारनाथ जैसे धार्मिक ट्रेक कई बार कर चुकी हैं। खुद को मल्टीटास्किंग बताते हुए दीपिका लगातार नई चुनौतियों को अपनाने में विश्वास रखती हैं। अगला मिशन जल्द इस उपलब्धि के बाद अब उनका अगला लक्ष्य भी तय है, हालांकि उन्होंने इसे फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया है। संकेत दिए हैं कि अगले साल वह विदेश में एक और पर्वत अभियान पर जा सकती हैं।

हरियाणा में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों पर 6 महीने में होगी कार्रवाई

चंडीगढ़. हरियाणा में अब पुलिस अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतों की जांच में लेटलतीफी नहीं चलेगी। राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण और जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण के लिए किसी भी शिकायत के छह महीने के अंदर कार्रवाई पूरी करना अनिवार्य रहेगा। इसके लिए नियमों में बदलाव किया जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ओर से विधानसभा में हरियाणा पुलिस (संशोधन) अधिनियम 2026 पारित कराया जाएगा। पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और आमजन की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। इससे पुलिस में जवाबदेही बढ़ेगी और प्रशासनिक मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी निगरानी रखी जा सकेगी। हालांकि, गुमनाम या फर्जी नाम से भेजी गई शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण को डीएसपी या इससे बड़े रैंक के पुलिस अधिकारी के खिलाफ मानवाधिकार आयोग की संस्तुति, पीड़ित के शपथपत्र, पुलिस हिरासत में मृत्यु, दुष्कर्म या दुष्कर्म का प्रयास, गैर कानूनी रूप से हिरासत में रखने, प्रताड़ित करके संपत्ति जुटाने या संगठित अपराध के मामलों में जांच का अधिकार दिया गया है। राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण शिकायत की सत्यता के बारे में प्रथम दृष्टया संतुष्ट होने पर ही जांच करेगा। अदालतों, मानवाधिकार आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, महिला आयोग, अल्पसंख्यक आयोग या लोकायुक्त के समक्ष चल रहे मामलों या पहले से निपटाए जा चुके मामलों के साथ ही पांच साल पुराने मामलों की जांच का अधिकार नहीं होगा। धरने-प्रदर्शन या रोड जाम के मामलों में पुलिस लाठीचार्ज की जांच भी अधिकार क्षेत्र से बाहर रहेगी। इसी तरह जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण को इंस्पेक्टर रैंक तक के पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत की जांच का अधिकार दिया गया है।