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अब मध्यप्रदेश में बिजली चोरी रोकना होगाआसान, सरकार ‘विद्युत पुलिस थानों’ की शुरुआत करने जा रही

भोपाल  अब मध्यप्रदेश में बिजली चोरी रोकना आसान होगा। गुजरात की तर्ज पर प्रदेश सरकार 'विद्युत पुलिस थानों' की शुरुआत करने जा रही है। इन थानों में प्रतिनियुक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा, जो बिजली विभाग की जांच टीमों के साथ जाकर औचक निरीक्षण करेगा, एफआईआर दर्ज करेगा और केस डायरी तैयार करेगा। पहले चरण में भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन और रीवा में एक-एक विद्युत थाना खोला जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। सीएम ने बिजली चोरी के मामलों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस बल की आसान उपलब्धता पर जोर दिया। बैठक में बताया गया कि 15 अगस्त से सभी सरकारी कार्यालयों में प्री-पेड मीटर लगाए जाएंगे, जिससे बकाया बिलों की समस्या खत्म हो सके। वहीं, स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को दिन के समय बिजली पर 20% सस्ती दरों का लाभ मिलेगा। यह छूट पहले से उद्योगों को मिल रही थी, अब घरेलू उपभोक्ताओं को भी दी जाएगी। फिलहाल प्रदेश में 21 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जबकि कुल 1.34 करोड़ मीटर लगाने का लक्ष्य है। इस कार्य की धीमी गति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई और तेजी से कार्य योजना लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, “स्मार्ट मीटरिंग बिजली उपयोग में अनुशासन लाएगी और उपभोक्ताओं को फायदा भी होगा।” सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि पंपों को सोलर पंप में बदला जाए, ताकि बिजली लोड कम हो और आपूर्ति बेहतर हो। इसके साथ ही घने पेड़ों के नीचे से गुजरने वाली लाइनों पर कोटिंग कराने के निर्देश भी दिए गए, ताकि बारिश या आंधी के समय बिजली बाधित न हो। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी कि बकाया बिल वसूली के लिए ‘समाधान योजना’ लाई जा रही है। घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को अधिभार में छूट दी जाएगी। यह योजना 6 महीने के लिए लागू होगी। इसके बाद भी बिल न चुकाने वालों के कनेक्शन काट दिए जाएंगे। अगले दो साल में तीनों बिजली वितरण कंपनियों को लाभ में लाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए ट्रांसफार्मर रिपेयरिंग यूनिट, सौर ऊर्जा, स्मार्ट मीटरिंग और राजस्व वृद्धि पर जोर दिया जा रहा है।

MP में बड़ा स्कॉलरशिप घोटाला, 40 स्कूलों-मदरसों ने की धोखाधड़ी, क्राइम ब्रांच ने शुरू की जांच

भोपाल मध्य प्रदेश में अल्पसंख्यक छात्रों को केंद्र सरकार से मिलने वाली विशेष छात्रवृत्ति योजना में घोटाला का मामला सामने आया है। भोपाल में आठवीं और 10वीं कक्षा तक की मान्यता वाले अल्पसंख्यक स्कूलों और मदरसों ने 11वीं व 12वीं कक्षा के 972 विद्यार्थियों के नाम पर 57 लाख रुपये की छात्रवृत्ति हड़प ली। 20 मदरसों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सहायक संचालक की शिकायत पर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 20 स्कूलों और 20 मदरसों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने प्री-मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक, मेरिट कम मीन्स, अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति में भोपाल जिले की 83 शिक्षण संस्थाओं को रेड फ्लैग से चिह्नित किया था। राज्य सरकार ने भौतिक निरीक्षण कराया तो खुली पोल राज्य सरकार ने इसका भौतिक निरीक्षण कराया। पता चला कि इनमें से नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर पंजीकृत 20 निजी स्कूल और 20 मदरसे ऐसे हैं, जिनकी मान्यता तो आठवीं और 10वीं कक्षा तक की ही है, लेकिन उन्होंने 11वीं-12वीं के विद्यार्थियों का पंजीयन पोर्टल पर करा रखा है। उनके नाम पर जारी छात्रवृत्ति निकाली जाती रही है। जिन विद्यार्थियों के नाम पर यह छात्रवृत्ति निकली, वे वास्तव में दूसरे स्कूलों में पढ़ रहे थे। पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू की शुरुआती जांच के बाद पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सहायक संचालक योगेंद्र राज ने क्राइम ब्रांच थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू की है। केंद्र सरकार की यह छात्रवृत्ति मुस्लिम, जैन, बौद्ध, सिख, ईसाई और पारसी समुदाय के विद्यार्थियों की बेहतरी के लिए आती है।