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वीरेंद्र तोमर को पांच दिन की रिमांड के बाद कोर्ट में पेश किया जाएगा, पुलिस ने जेल भेजने की अर्जी तैयार की

रायपुर पांच महीने की फरारी के बाद ग्वालियर में गिरफ्तार हिस्ट्रीशीटर वीरेन्द्र सिंह तोमर से पुलिस की पूछताछ पूरी हो गई है. पुलिस शुक्रवार को आरोपी को कोर्ट में पेश करगी और न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आग्रह किया जाएगा. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दर्ज दो केस आर्म्स एक्ट और सूदखोरी, ब्लैकमेल और वसूली केस में पूछताछ की है. घर के लॉकर में मिले हथियार को आरोपी ने अपने सुरक्षा गार्ड का बताया है जबकि क्षत्रिय करणी सेना से जुड़े लोगों द्वारा फरारी के दौरान मदद करने की जानकारी उसने दी है. दूसरी तरफ हिस्ट्रीशीटर रोहित तोमर समेत अन्य सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज कर दी गई है. पीड़ित अब भी डरे हुए हैं इसलिए नहीं कराया आमना-सामना पुलिस ने पूछताछ के दौरान रिपोर्टकर्ता पीड़ितों और आरोपी का आमना-सामना नहीं कराया. बल्कि जब्त एग्रीमेंट, चेक और प्रॉपर्टी के एक-एक दस्तावेजों को लेकर आरोपी से पूछताछ की. पुलिस ने दिए गए कर्ज की राशि, तय ब्याज और वसूली गई राशि से संबंधित दस्तावेजों की भी जानकारी ली है. ताकि उन्हें कोर्ट में पेश किया जा सके. पुलिस का दावा है कि पीड़ित लोग हिस्ट्रीशीटर वीरेन्द्र सिंह तोमर और रोहित सिंह तोमर की फरारी के दौरान भी भयभीत रहे हैं. अभी रोहित सिंह तोमर फरार है. उसके खिलाफ चार मामले दर्ज हैं. रोहित तोमर और केस में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज की गई है. पुलिस वालों के घर घुसकर आंदोलन की चेतावनी क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है, जिसमें हिस्ट्रीशीटर वीरेन्द्र सिंह तोमर का जुलूस निकालने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई को गलत बताया गया है. राष्ट्रीय अध्यक्ष ने छत्तीसगढ़ आकर रायपुर में आंदोलन करने की चेतावनी दी है. साथ ही कहा है कि जिन पुलिस अधिकारियों ने गलत किया, उनके घर में घुसकर आंदोलन किया जाएगा.

बस ड्राइवरों की फिटनेस भी जरूरी! इंदौर में स्कूल-कॉलेज बसों में नियमों का पालन सुनिश्चित

इंदौर  स्कूल और कॉलेज बसों के सुरक्षित संचालन तथा विद्यार्थियों एवं नागरिकों की सुरक्षा को लेकर शहर के विभिन्न स्कूल प्रशासकों और स्कूल बसों के ट्रांसपोर्ट अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक पुलिस कमिश्नर कार्यालय के सभागार में हुई। इसमें विद्यार्थियों और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, सड़क पर बसों के सुरक्षित संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने सभी स्कूल और कॉलेजों के ट्रांसपोर्ट अधिकारियों एवं प्रशासकों से कहा कि स्कूल के बच्चों और नागरिकों की सुरक्षा एवं सुरक्षित यातायात हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्कूल/कॉलेज प्रबंधन/बस चालकों एवं संचालकों के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। बैठक में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आरके सिंह, पुलिस उपायुक्त यातायात आनंद कलादगी भी उपस्थित थे। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले और सुरक्षा मानकों को पूरा न करने वाले वाहनों के खिलाफ उचित वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इन बातों का करना होगा पालन     स्कूल बसों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य।     बसों में स्पीड गर्वनर सिस्टम लगवाना आवश्यक है और गति सीमा 40 किमी घंटा से अधिक न हो।     बसों में किसी भी आपात स्थिति के लिए आवश्यक उपकरण जैसे अग्निशामक यंत्र, फर्स्ट एड बाक्स और अन्य जरूरी सामान हो।     बसों में एक इमरजेंसी गेट जरूरी, बसों के फिटनेस व निर्धारित मानकों की निगरानी की जानी चाहिए।     किसी भी स्थिति में खराब वाहनों का संचालन नहीं किया जाए।     ड्राइवरों के पास वैध और भारी वाहन चलाने का लाइसेंस हो, जिसकी वैधता की जांच भी की जानी चाहिए।     ड्राइवरों की शारीरिक स्थिति की समय पर जांच हो और उन्हें प्रशिक्षित भी किया जाए।  

मध्यप्रदेश पुलिस की संवेदनशील पहल: रिश्तों में लौटी मिठास, बढ़ा जन-विश्वास

मध्यप्रदेश पुलिस की संवेदनशील पहल — रिश्तों में लौटी मिठास और बढ़ा भरोसा विदिशा की “पुलिस पंचायत” और टीकमगढ़ का “नवपहल अभियान” बने सामाजिक समरसता व महिला सुरक्षा के प्रतीक भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस आज जनसेवा के उस स्वरूप का परिचायक बन चुकी है, जहाँ कानून-व्यवस्था के साथ संवेदनशीलता, संवाद और सहयोग सर्वोपरि हैं। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा नागरिक–पुलिस संवाद, पारिवारिक समरसता और महिला सुरक्षा को लेकर निरंतर किए जा रहे प्रयास अब उल्लेखनीय परिणाम देने लगे हैं। प्रदेश के विदिशा की “पुलिस पंचायत” और टीकमगढ़ की “नवपहल” पहल ने मध्यप्रदेश पुलिस को संवेदनशीलता, संवाद और महिला सुरक्षा की नई पहचान दी है। इन पहलों से पारिवारिक रिश्तों में विश्वास लौटा है और महिला अपराधों में उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई है। विदिशा की “पुलिस पंचायत” — रिश्तों में लौटी मिठास विदिशा में प्रारंभ हुई “पुलिस पंचायत” पहल अब पारिवारिक विवादों के समाधान की मिसाल बन चुकी है। अब तक आयोजित 34 बैठकों में कुल 98 प्रकरणों की सुनवाई की गई, जिनमें से 72 प्रकरणों का निराकरण किया गया है। प्रत्येक बुधवार को आयोजित होने वाली इन पंचायतों में पारिवारिक विवाद, संपत्ति संबंधी मतभेद एवं वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े मामलों का संवाद, सहानुभूति और सामाजिक सहमति से निराकरण किया जाता है। पुलिस अधीक्षक श्री रोहित काशवानी के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे के नेतृत्व में गठित पंचायत कोर कमेटी — डॉ. सचिन गर्ग, श्री आर. कुलश्रेष्ठ, श्री प्रमोद व्यास, श्री दिनेश वाजपेयी, श्री अजय टंडन, श्री अतुल शाह, श्री विनोद शाह एवं श्री पार्थ पित्तलिया सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यह पहल न केवल विवादों के निपटारे तक सीमित रही, बल्कि इसने संवाद और सहानुभूति के माध्यम से टूटते रिश्तों को फिर जोड़ने का कार्य किया है। वर्षों से बिछड़े परिवार एक-दूसरे से मिले, वृद्ध जनों को उनका हक मिला और समाज में यह संदेश गया कि पुलिस जनता की हमदर्द और सहभागी है। “पुलिस पंचायत” ने यह साबित किया है कि संवाद से बढ़कर कोई न्याय नहीं — यह पहल कानूनी समाधान के साथ सामाजिक समरसता का पुल बन चुकी है। टीकमगढ़ की “नवपहल” – महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में प्रभावी कदम टीकमगढ़ में पुलिस अधीक्षक श्री मनोहर सिंह मंडलोई के मार्गदर्शन में प्रारंभ “नवपहल” अभियान ने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। इस पहल से जिले में महिला अपराधों में लगभग 37% तक की कमी दर्ज की गई है। विशेष सुधार:     शीलभंग: 21.3% कमी     दहेज हत्या: 16.6% कमी     दहेज प्रताड़ना: 50.5% कमी     भ्रूण हत्या/गुप्त व्ययन: 42.8% कमी महिला सुरक्षा के लिए प्रमुख अभियान 1. नीड अभियान: कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम, 42.8% कमी 2. परी अभियान: 55,309 बच्चियों को “गुड टच–बैड टच” की जानकारी 3. भरोसा अभियान: 6,328 किशोरियों को आत्मरक्षा व विधिक प्रशिक्षण 4. सहारा अभियान: 192 महिलाओं को आर्थिक व पारिवारिक सहायता 5. आसरा अभियान: 64 वृद्ध महिलाओं को सहयोग 6. परिवार जोड़ो अभियान: 72 परिवार टूटने से बचे, दहेज प्रताड़ना में 47.5% कमी इसके अलावा “मजनू अभियान” के अंतर्गत स्कूल–कॉलेजों के आस-पास असामाजिक तत्वों पर निगरानी से छेड़छाड़ के अपराधों में 22.3% की कमी दर्ज हुई है। इन अभियानों के माध्यम से महिला सुरक्षा, वन स्टॉप सहायता, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और जागरूकता से पुलिस और समाज के बीच नए भरोसे का रिश्ता बना है। महिला हेल्प डेस्क, संवेदनशील क्षेत्रों में सक्रिय पेट्रोलिंग, सोशल मीडिया निगरानी और स्कूल–कॉलेज परिसरों में नियंत्रण गतिविधियाँ ने टीकमगढ़ पुलिस की छवि को समाज के प्रति समर्पित प्रहरी के रूप में स्थापित किया है। विदिशा की “पुलिस पंचायत” और टीकमगढ़ की “नवपहल” जैसी पहलें इस बात का जीवंत उदाहरण हैं कि मध्यप्रदेश पुलिस अब केवल कानून-व्यवस्था की प्रहरी नहीं, बल्कि “जनभरोसे की पुलिस” के रूप में नागरिकों के बीच संवाद, समझ और सेवा का सेतु बन रही है।  

प्रार्थना सभा से मचा हंगामा: धर्मांतरण के शक में SECL कर्मचारी को पुलिस ने लिया हिरासत में

बिलासपुर बिलासपुर में धर्मांतरण को लेकर फिर हंगामा मचा है. प्रार्थना सभा की आड़ में चल रहे धर्मांतरण के खेल का हिंदू संगठनों ने बुधवार रात भंडाफोड़ किया. पुलिस ने केस दर्ज कर प्रार्थना सभा आयोजित करने वाले एसईसीएल कर्मचारी को हिरासत में ले लिया है. दरअसल, हिंदू संगठनों को सूचना मिली कि सरकंडा क्षेत्र के बसंत विहार कॉलोनी के एक घर में प्रार्थना सभा के आड़ में लोगों को कनवर्ट करने का प्रयास किया जा रहा है. पुलिस को सूचना देते हुए हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे. यहां एसईसीएल कर्मचारी राजेंद्र खरे के मकान में प्रार्थना सभा चल रही थी, जिसमें हिन्दू समाज के लोग मौजूद थे. आरोप है कि सभा में हिन्दू देवी-देवताओं के खिलाफ भ्रामक जानकारी देते हुए मौजूद लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था. वहीं मौके से ईसाई धर्म की किताबें व अन्य प्रचार सामग्रियां भी मिली हैं. हिन्दू संगठनों ने प्रार्थना सभा का विरोध करते हुए मकान के बाहर जमकर नारेबाजी की. जिसके बाद मामले की लिखित शिकायत थाने में दर्ज कराई गई. हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना था वे बिलासपुर में बिल्कुल भी धर्मांतरण के खेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे. जहां से भी इसकी जानकारी मिलेगी, वहां जाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा. पुलिस ने शिकायत पर मामला दर्ज कर एसईसीएल कर्मचारी को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है.

मॉडल की रहस्यमय मौत: शरीर पर चोट के निशान, पुलिस कर रही बॉयफ्रेंड से पूछताछ

भोपाल राजधानी भोपाल के भैंसाखेड़ी क्षेत्र में सोमवार सुबह 21 वर्षीय मॉडल की मौत होने का मामला सामने आया है। युवती को उसके दोस्त ने अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक मृतका की पहचान खुशबू अहिरवार के रूप में हुई है। वह पिछले कुछ वर्षों से भोपाल में मॉडलिंग कर रही थी। बैरागढ़ क्षेत्र के सहायक पुलिस आयुक्त आदित्य राज सिंह ने बताया कि खुशबू को उसका दोस्त कासिम और एक बस कंडक्टर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। जानकारी के अनुसार, खुशबू बीए फर्स्ट इयर के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। वह तीन साल से भोपल में रह रही थी। उसके प्राइवेट पार्ट और बॉडी पर चोटों के निशान मिले हैं। परिजनों ने लव जिहाद और हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि कासिम को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह मामला आत्महत्या, हादसा या कुछ और है। जानकारी सामने आई कि मॉडल गर्भवती थी। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में गर्भवती और उसके कॉम्प्लिकेशन की बात कही जा रही है। फूल पीएम रिपोर्ट मंगलवार को आएगी। जिसके बाद पूरी तरह से मौत का कारण साफ होने की बात कही जा रही है। 

राजेश मिश्रा के परिवार की कुंडली में खुला राज: घर में मिले ढेरों नोट, पुलिस थक गई गिनते-गिनते

 प्रतापगढ़  उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ, जब किसी तस्करी के मामले में इतनी बड़ी रकम बरामद हुई कि नोट गिनने वालों के हाथ थक गए. पुलिसवालों को 22 घंटे लगातार बैठ कर पैसे गिनना पड़ा.  सुबह करीब साढ़े आठ बजे प्रतापगढ़ के मानिकपुर थाना क्षेत्र के मुन्दीपुर गांव में अचानक पुलिस की एक साथ कई गाड़ियां पहुंची. थाना प्रभारी के साथ भारी पुलिस बल एक पुराने पक्के मकान की ओर बढ़ा. सूचना थी कि यहीं से जेल में बंद राजेश मिश्रा अपना पूरा नेटवर्क चला रहा है. राजेश मिश्रा वही नाम, जो कभी शराब, फिर जमीन और अब नशे के कारोबार से प्रदेश भर में कुख्यात हो चुका है. राजेश इस वक्त जेल में बंद है, लेकिन पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि उसका गिरोह वहीं से चालू था. जेल के भीतर से  डील फाइनल होती, और बाहर से उसका परिवार डिलीवरी और कैश की वसूली संभालता. 22 घंटे तक चली गिनती जब पुलिस ने राजेश मिश्रा के घर पर दबिश दी, तो सबसे पहले अंदर से दरवाजा बंद कर दिया गया. घर में रीना मिश्रा (राजेश की पत्नी), बेटा विनायक, बेटी कोमल, रिश्तेदार यश और अजीत मिश्रा मौजूद थे. जब दरवाजा खुलवाया गया, तो सामने जो दृश्य था, उसने हर किसी को चौंका दिया.  कमरे में चारों तरफ काले पन्नियों में लिपटे नोटों के बंडल, गत्तों में पैक गांजा, और लोहे के ट्रंक में रखी स्मैक. एक कोने में इलेक्ट्रॉनिक नोट गिनने की मशीन थी, जिससे साफ था कि गिरोह सिर्फ तस्करी ही नहीं, कमाई की गिनती का पूरा इंतजाम भी रखता था. पुलिस ने जब गिनती शुरू की तो 2,01,55,345 रुपये की नकदी बरामद हुई. इसके अलावा 6.075 किलो गांजा और 577 ग्राम स्मैक (हेरोइन) मिली. जिसकी अनुमानित कुल कीमत  3 करोड़ रुपये से अधिक है. कहने को बस तीन घंटे का ऑपरेशन था, लेकिन नोटों की गिनती पूरी करने में 22 घंटे लग गए. फर्जी जमानत से लेकर करोड़ों की कुर्की तक छानबीन में सामने आया कि रीना मिश्रा और उसका बेटा विनायक मिश्रा, राजेश की जेल से रिहाई के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर अदालत में जमानत करवा चुके थे. इस खुलासे के बाद उन पर धोखाधड़ी, जालसाजी और गैंगस्टर एक्ट समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस रिकॉर्ड बताता है कि पहले भी इस परिवार की ₹3,06,26,895.50 रुपये की चल-अचल संपत्ति कुर्क की जा चुकी है. यह कुर्की भी राजेश और रीना के नाम पर दर्ज की गई थी. बावजूद इसके, गिरोह ने जेल से नेटवर्क चलाना जारी रखा. रीना मिश्र: घर बैठी माफिया क्वीन स्थानीय पुलिस के अनुसार, रीना मिश्रा सिर्फ नाम की गृहिणी नहीं थी. राजेश मिश्रा के जेल जाने के बाद उसने ही पूरा सिंडिकेट संभाला. गांव में उसका खौफ इस कदर था कि कोई भी उसके घर की ओर नजर उठाकर नहीं देखता था. लोगों का कहना है कि मकान में कभी-कभी ट्रक रुकते थे, फिर कुछ लोग आते-जाते दिखते थे. सबको मालूम था, मगर कोई बोलता नहीं था. रीना का रोल सिर्फ घर की देखरेख का नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की बुक-कीपिंग का था. वह तय करती थी किस इलाके में कितना माल जाएगा और कितनी रकम वापस आएगी. जेल में बैठे राजेश से वह रोज़ बात करती, और उसी के कहने पर डील फाइनल करती थी. जेल की दीवारों के भीतर से चलने वाला नेटवर्क पुलिस के अनुसार, राजेश मिश्रा पहले से ही कई गंभीर मामलों में अभियुक्त है. जेल से बाहर उसकी कमान उसकी पत्नी और बच्चों के पास थी. वह फोन और मुलाकातों के ज़रिए गिरोह को निर्देश देता था कि कहाँ से माल मंगाना है, कहाँ सप्लाई करनी है, और कौन पुलिसकर्मी कब ड्यूटी पर होता है. पुलिस का कहना है कि गिरोह अंतर्राज्यीय स्तर पर सक्रिय था. बिहार और मध्य प्रदेश तक इसके तार फैले हुए हैं. प्रतापगढ़, प्रयागराज और कौशांबी के कई गांव इस नेटवर्क के रूट बने हुए थे. एसपी दीपक भूकर बोले- यह तो बस शुरुआत है पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह कार्रवाई संगठित अपराध के खिलाफ हमारी लंबी रणनीति का हिस्सा है. इस गिरोह की जड़ें काफी गहरी हैं, लेकिन अब इनके नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाएगा. जो भी इसमें शामिल है, किसी को छोड़ा नहीं जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि मादक पदार्थ तस्करी में लिप्त गिरोहों की फाइलें अब डिजिटल रूप से ट्रैक की जा रही हैं. कई बैंक खातों और संपत्तियों की जांच भी चल रही है. एनडीपीएस और गैंगस्टर एक्ट में दर्ज मामले गिरफ्तार अभियुक्तों पर एनडीपीएस एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है. फर्जी जमानत के मामले में भी पुलिस ने अलग एफआईआर की है.  गिरफ्तार अभियुक्तों की लिस्ट: – रीना मिश्रा, पत्नी राजेश मिश्रा (40 वर्ष) – विनायक मिश्रा, पुत्र राजेश मिश्रा (19 वर्ष) – कोमल मिश्रा, पुत्री राजेश मिश्रा (20 वर्ष) – यश मिश्रा, पुत्र अजीत कुमार मिश्रा (19 वर्ष) – अजीत कुमार मिश्रा, पुत्र पवन कुमार मिश्रा (32 वर्ष) सभी को मानिकपुर थाना पुलिस ने मौके से गिरफ्तार किया. सवा तीन करोड़ की बरामदगी  पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है. बरामद नकदी और ड्रग्स की कुल कीमत करीब ₹3 करोड़ 17 लाख है. इतनी भारी मात्रा में कैश की बरामदगी ने पूरे जिले में हलचल मचा दी है. जांच एजेंसियों का मानना है कि राजेश मिश्रा का नेटवर्क सिर्फ नशे तक सीमित नहीं है. कई जगहों पर उसकी अंडरग्राउंड इन्वेस्टमेंट की जानकारी मिली है. कुछ को जमीन खरीद के नाम पर और कुछ को लॉजिस्टिक कंपनी के रूप में छिपाया गया था. जांच टीमें अब बैंक खातों, प्रॉपर्टी रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन खंगाल रही हैं. 

राष्ट्रीय स्तर पर बटाला पुलिस को मिला सम्मान, पूरे देश में हुई तारीफ की वर्षा

बटाला  मौजूदा समय में मोबाइल फोन इंसान के जीवन का अटूट हिस्सा बन गया है, जिसके न होने से एक कमी का एहसास होता है। ऐसे में अगर किसी का मोबाइल फोन गुम या चोरी हो जाए तो स्वाभाविक है कि उस शख्स की चिंता बढ़ जाएगी। मोबाइल फोन चोरी या गुम होने के बाद लगता है कि शायद ही अब यह वापस मिल पाएगा। लेकिन ऐसा नहीं है… क्योंकि पंजाब के बटाला पुलिस ने जो कर दिखाया है उसके लिए पुलिस महकमे को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। बटाला पुलिस ने चोरी व गुम हुए हजारों मोबाइल ढूंढ निकाले और उन्हें उनके असली मालिकों को भी सही सलामत सौंपा।  गुम हुए मोबाइल फोन बरामदगी में शानदार प्रदर्शन के लिए बटाला पुलिस को राष्ट्रीय सम्मान मिला है। पंजाब में बटाला पुलिस जिला पहला पुलिस जिला बना है, जिसने सबसे ज्यादा चोरी और गुम हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके असली मालिकों तक पहुंचाए हैं। करीब एक साल पहले डीजीपी गौरव यादव और स्पेशल डीजीपी साइबर क्राइम के मार्ग दर्शन में बटाला के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में पहले आपका गुम मोबाइल अब वापिस आपके हाथ मुहिम शुरू की थी।  इस मुहिम द्वारा और दूरसंचार विभाग (डीओटी) और भारत सरकार के सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (सीईआईआर) पोर्टल की मदद से बटाला पुलिस ने 1100 से अधिक गुम हुए मोबाइलों को ट्रेस करके वापिस उनके मालिकों को सौंपे हैं। बरामद किए मोबाइलों की बाजारी कीमत लगभग 2.20 करोड़ लगाई गई है। बटाला पुलिस की इसी सफलता को देखते हुए दूरसंचार विभाग और भारत सरकार ने बटाला पुलिस को सोलन, हिमाचल प्रदेश में आयोजित नार्थ जोन सुरक्षा कान्फ्रेंस के दौरान सुनीता चंद्रा, डायरेक्टर जनरल, दूरसंचार विभाग, भारत सरकार द्वारा सम्मानित किया गया। इस मौके पर एसएसपी बटाला सुहेल कासिम मीर ने इस सफलता को अपनी टीम की लगन और जन सहयोग को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि बटाला पुलिस टेक्नोलॉजी द्वारा जनहित में लोगों की सेवा करने लिए बचनबद्ध है और लोगों में अपना विश्वास मजबूत कर रही है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि लोग अपने गुम मोबाइलों की रिपोर्ट दर्ज सांझ केंद्र में करवांए और साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन बटाला से संपर्क करें।  

ट्रेनिंग के दौरान जवानों को मिलेगी गीता से जीवन की सीख, नेक जीवन जीने में मदद मिलेगी

भोपाल  रामचरितमानस के बाद, मध्य प्रदेश पुलिस की ट्रेनिंग विंग ने अपने सभी सेंटरों को अपने रंगरूटों के लिए भगवद गीता पाठ सेशन आयोजित करने का निर्देश दिया है, क्योंकि इससे उन्हें "नेक" जीवन जीने में मदद मिलेगी। यह निर्देश एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (ट्रेनिंग) राजा बाबू सिंह ने राज्य के सभी आठ ट्रेनिंग स्कूलों के सुपरिटेंडेंट को जारी किया है। इन सेंटरों में जुलाई से लगभग 4,000 युवा लड़के और लड़कियां नौ महीने की कांस्टेबल ट्रेनिंग ले रहे हैं। सिंह ने जुलाई में ट्रेनिंग सेशन का उद्घाटन करते समय इन संस्थानों में रामचरितमानस का पाठ करने का निर्देश दिया था, और कहा था कि इससे उनमें अनुशासन आएगा। रामचरितमानस में भगवान राम के गुणों और जंगल में उनके 14 साल के वनवास का वर्णन है। 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी सिंह ने ट्रेनिंग स्कूल के डायरेक्टरों से कहा कि अगर संभव हो तो भगवान कृष्ण के चल रहे पवित्र महीने (अगहन कृष्ण) के दौरान भगवद गीता का कम से कम एक अध्याय पढ़ना शुरू करें। उन्होंने निर्देश दिया कि यह ट्रेनी के रोज़ाना के मेडिटेशन सेशन से ठीक पहले किया जा सकता है। ADG ने ट्रेनिंग स्कूलों को अपने संदेश में कहा, "भगवद गीता हमारा शाश्वत ग्रंथ है। इसका नियमित पाठ निश्चित रूप से हमारे ट्रेनी को एक नेक जीवन जीने में मार्गदर्शन करेगा, और उनका जीवन बेहतर होगा।" यह अधिकारी, लगभग 2019 में ग्वालियर रेंज के पुलिस प्रमुख के रूप में काम करते हुए, इसी तरह का एक अभियान शुरू किया था और कई स्थानीय जेल कैदियों और अन्य लोगों को भगवद गीता की प्रतियां बांटी थीं।

आज से MP में हेलमेट नियम सख्त, पीछे बैठने वालों को भी पहनना होगा, इन 5 जिलों पर फोकस

भोपाल  मध्यप्रदेश में सड़क हादसों में बढ़ती मौतों को देखते हुए आज से प्रदेशभर में हेलमेट अनिवार्यता को लेकर पुलिस का विशेष अभियान शुरू हो गया है. अब न केवल दोपहिया वाहन चालक, बल्कि पीछे बैठने वाले व्यक्ति को भी हेलमेट पहनना जरूरी होगा. राज्य पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर 6 नवंबर से पूरे प्रदेश में यह अभियान शुरू किया गया है. इस दौरान ट्रैफिक पुलिस हेलमेट न पहनने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी. पुलिस का कहना है कि यह अभियान केवल चालान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी फोकस किया जाएगा. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन इन पांच जिलों में अभियान को लेकर विशेष सख्ती बरती जाएगी. कारण यह है कि पूरे प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में से 58 प्रतिशत मौतें इन्हीं जिलों में दर्ज हुई हैं.  2 व्हीलर्स पर अगर एक शख्स ने हेलमेट पहना है और दूसरे ने नहीं तो 300 रुपए का चालान होगा और अगर दोनों ने हेलमेट नहीं पहना तो 500 रुपए का जुर्माना होगा.  4 साल की उम्र से बड़े पिलियन राइडर (दोपहिया पर ड्राइवर के पीछे बैठने वाले) के हेलमेट न पहनने पर 300 रुपए का चालान बनता है। डीआईजी टीके विद्यार्थी ने कहा- फिलहाल 5 बड़े शहरों में इसे लागू किया गया है। अगले चरण में इसे पूरे प्रदेश में लागू करेंगे। इस अभियान के पहले दिन गुरुवार को भोपाल में ट्रैफिक पुलिस 20 पॉइंट्स पर चालानी कार्रवाई कर रही है। इस दौरान अलग-अलग नजारे सामने आ रहे हैं। कोई कह रहा है कि पुलिसकर्मी सामने से गुजरा, तब चालान क्यों नहीं किया? किसी ने कहा- बच्ची एडमिट है। जल्दी में हेलमेट भूल गया।  एक नजर आंकड़ों पर:- – 2024 में प्रदेशभर में 14 हजार 791 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई  – इंदौर: शहर में 2 हजार 425 और ग्रामीण क्षेत्र में 290 मौतें – भोपाल: शहर में 945 और ग्रामीण क्षेत्र में 235 मौतें – जबलपुर: 2,035 मौतें – उज्जैन: 1,536 मौतें – ग्वालियर: 1,049 मौतें – इन पांच जिलों में कुल 8 हजार 515 लोगों की जान गई, जो राज्य की कुल मौतों का 58 प्रतिशत है.

विदेश में काम दिलाने के नाम पर सौदा! 3500 डॉलर में बेचे जा रहे आगरा के युवा

आगरा  उत्तर प्रदेश की ताजनगरी से बड़ा ही अजब-गजब मामला सामने आया है. आगरा की पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. यहां उन्नाव और इंदौर के रहने वाले दो लड़कों को गिरफ्तार किया है. ये लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देते थे. जब युवा उनकी बातों में आ जाते तो उन्हें कंबोडिया और थाईलैंड में 3500 डॉलर के हिसाब से बेच देते थे. इसके बाद दूसरे देशों में बैठे इनके आका खरीदे गए युवाओं को साइबर ठगी की ट्रेनिंग देकर उनको अपने गैंग में शामिल करते थे. एडीसीपी आदित्य सिंह ने बताया कि युवाओं के लापता होने की लगातार जानकारी मिल रही थी. इस पर साइबर क्राइम, साइबर सेल और साइबर इंटेलिजेंस की टीम जांच पड़ताल में जुट गई थी. जांच के दौरान टीम ने उन्नाव के रहने वाले आतिफ खान और इंदौर के रहने वाले अजय कुमार शुक्ला को गिरफ्तार किया. जब इनसे कड़ाई से पूछताछ की तो जो सच पता चला उसे सुनकर पुलिस भी दंग रह गई. इन शातिरों ने पुलिस को बताया कि यह लोग देश के अलग अलग हिस्सों से बेरोजगार युवाओं को खोजते थे. फिर विदेश में नौकरी लगवाने का झांसा देकर उनको कंबोडिया और थाईलैंड में बेच देते थे. इसके बदले में इन शातिरों को प्रति युवा के बदले 3500 डॉलर दिए जाते थे. विदेश में बैठे इनके आका खरीदे गए युवाओं को साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट समेत डिजिटल तरीकों की ट्रेनिंग देते थे. फिर ट्रेनिंग के बाद इन युवाओं को साइबर ठगी के गैंग में शामिल किया जाता था. अभी तक यह शातिर लगभग 50 से ज्यादा युवाओं को कंबोडिया और थाईलैंड में बेच चुके है. अब पुलिस इनके अन्य साथियों की तलाश में जुट गई है.