samacharsecretary.com

जेल में VIP सुविधाओं पर बड़ा एक्शन, गिरिबाला-समर्थ केस के बाद 25+ अधिकारियों का ट्रांसफर

भोपाल  जेल विभाग ने 20 से ज्यादा अधिकारियों की तबादला सूची जारी की है। जिसमें सबसे चर्चित नाम ग्वालियर के जेल अधीक्षक विदित सिरवैया का है। जिन्हें ग्वालियर से हटाकर सर्किल जेल शिवपुरी का प्रभारी अधीक्षक बनाया है। बता दें सिरवैया से रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है। जिसमें ब्लैकमेलर ने जेल में वसूली और नशेबाजी का वीडियो भेजकर उनसे 5 लाख मांगे। रकम नहीं भेजने पर वीडियो वरिष्ठ अधिकारियों को भेजने की धमकी दी। जिस पर जेल अधीक्षक द्वारा ब्लैकमेलिंग की लिखित शिकायत बहोड़ापुर थाने में दर्ज करवाई गई। गिरिबाला, समर्थ सिंह जैसे हाईप्रोफाइल कैदियों का ध्यान रखने वाले अधीक्षक का भी ट्रांसफर वहीं परिवहन के करोड़पति आरक्षक सौरभ शर्मा और ट्विशा की सास पूर्व जज गिरिबाला सिंह और समर्थ जैसे हाईप्रोफाइल बंदियों की जेल में देखरेख करने वाले कथित VIP ट्रीटमेंट देने वाले भोपाल जेल अधीक्षक का भी तबादला किया गया है। अधीक्षक राकेश भांगरे को केंद्रीय जेल ग्वालियर का प्रभारी अधीक्षक बनाया गया है। बता दें हाल ही में भांगरे पर पूर्व जज गिरिबाला और समर्थ को जेल के भीतर वीआईपी ट्रीटमेंट देने का आरोप लगा था। जेल विभाग में हुए प्रमुख ट्रांसफर की लिस्ट अधिकारी – वर्तमान पदस्थापना – नई पदस्थापना दिनेश नरगावे – जेल मुख्यालय, भोपाल केंद्रीय जेल, इंदौर अलका सोनकर – केंद्रीय जेल, इंदौर जेल मुख्यालय, भोपाल विदित सिरवैया – प्र. अधीक्षक, केंद्रीय जेल ग्वालियर – सर्किल जेल, शिवपुरी राकेश भांगरे – प्र. अधीक्षक, केंद्रीय जेल, भोपाल – केंद्रीय जेल, ग्वालियर रमेशचंद्र आर्य – प्र. अधीक्षक, सर्किल जेल शिवपुरी – केंद्रीय जेल, सागर देवेंद्र कुमार – सारस जिला जेल, उमरिया – जिला जेल, खण्डवा मानेंद्र सिंह परिहार- अधीक्षक, केंद्रीय जेल सागर – केंद्रीय जेल, भोपाल अदिति चतुर्वेदी- जिला जेल, खण्डवा – केंद्रीय जेल, नरसिंहपुर यशवंत मांझी – जिला जेल, नीमच – प्र. अधीक्षक, जिला जेल, मंदसौर दिलीप सिंह – जिला जेल, छतरपुर – जिला जेल, हरदा योगेंद्र परमार – केंद्रीय जेल, रीवा – केंद्रीय जेल, छतरपुर 16 जून रात 12 बजे तक होने थे ट्रांसफर बता दें कि नई तबादला नीति के तहत मध्य प्रदेश में 1 जून से तबादलों से रोक हटाते हुए तबादले शुरू किए गए थे। 1 जून से शुरू हुए इन तबादलों की अंतिम तारीख 15 जून थी। लेकिन कई विभाग में तबादलों पर अनुमोदन के बावजूद तबादला आदेश तय समय पर जारी नहीं हो पाए थे। सीएम डॉ. मोहन यादव ने गत दिवस मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मंत्रियों की मांग के बाद 24 घंटे की अवधि और बढ़ाते हुए आदेश जारी किया। आदेश के मुताबिक जिन विभागों में अधिकारी कर्मचारी ज्यादा हैं और अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, ऐसे अधिकारियों कर्मचारियों के तबादले 16 जून रात 12 बजे तक करने की अनुमति मिली। इसके बाद जेल विभाग समेत सभी विभागों में रात 12 बजे तक ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी की गई है।

जेल व्यवस्था में सुधार की पहल: MP सरकार बदलेगी 58 साल पुराने नियम, बंदियों को मिलेगा असर

भोपाल राज्य सरकार ने वर्ष 1968 के मध्य प्रदेश जेल अधिनियम में कुछ बदलाव किए हैं। इसमें अप्रासंगिक हो चुके कुछ नियम हटाकर उनकी जगह नए जोड़े गए हैं। पहली बार मैन्युअल में निर्धारित किया गया है की जेल में पांच कैदियों के बीच में एक शौचालय सीट होगी। हालांकि, अभी आठ कैदियों पर एक शौचालय बनाने के निर्देश जेल मुख्यालय की तरफ से थे। आदतन और गैर आदतन अपराधी को किया परिभाषित दूसरा बड़ा बदलाव यह कि आदतन और गैर आदतन अपराधी को पहली बार परिभाषित किया गया है। लगातार पांच वर्ष की अवधि में कम से कम दो अलग-अलग अवसरों पर एक या एक से अधिक अपराधों में सजा पा चुके अपराधी को आदतन और अन्य को गैर आदतन माना जाएगा। दोनों को रखने की व्यवस्था व कुछ और शर्तें अलग-अलग रहेंगी। भेदभाव करने वाले कैदियों को मिलेगी अनोखी सजा भोजन बनाने वाली टोली में गैर आदतन अपराधी ही होंगे। यदि कोई कैदी भेदभावपूर्ण रवैया रखते हुए टोली द्वारा तैयार खाना खाने से आपत्ति करता है तो दंडस्वरूप उस बंदी को भोजन बनाने में लगाया जाएगा और उसे समस्त कैदियों का भोजन पकाना होगा। पहली बार यह व्यवस्था की गई है कि केंद्रीय एवं जिला जेल जहां कैदियों की संख्या अधिक है वहां स्वचालित मशीनों से वस्त्रों की धुलाई का काम किया जाएगा। कैदियों के गीले कपड़ों को सुखाने के लिए व्यवस्था की जाएगी। संशोधित नियमों में दोषसिद्ध कैदियों को दो श्रेणियों में बांटने का प्रावधान किया गया है। पहली श्रेणी आदतन अपराधियों की होगी जबकि दूसरी श्रेणी गैर-आदतन अपराधियों की। नए नियमों के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति लगातार पांच वर्षों की अवधि में अलग-अलग मामलों में दो से अधिक बार सजा प्राप्त कर चुका है और उसकी सजा किसी अपील या पुनर्विचार में निरस्त नहीं हुई है, तो उसे आदतन अपराधी माना जाएगा। हालांकि पांच वर्ष की अवधि की गणना करते समय जेल में बिताए गए समय को शामिल नहीं किया जाएगा। बाकी सभी दोषसिद्ध कैदी गैर-आदतन अपराधी की श्रेणी में रखे जाएंगे। जेलों में स्वच्छता सुविधाओं को लेकर भी सरकार ने कई नए मानक तय किए हैं। अब हर सेल में शौचालय होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा प्रत्येक पांच बंदियों पर कम से कम एक शौचालय सीट उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान किया गया है। अधिकारियों के अनुसार शौचालयों में चौबीसों घंटे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। दिव्यांग बंदियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक वार्ड में वेस्टर्न सीट वाले शौचालय भी बनाए जाएंगे। रोटी बनाने के लिए तय हुई एसओपी रोटी बनाने को लेकर भी पहली बार नियम तय किए गए हैं। आटा तय मात्रा में लेकर स्वच्छ वातावरण में गूंथा जाएगा। रोटियों के लिए लोई धीरे-धीरे और समान आकार में तैयार की जाएगी। बेलन से रोटियों को गोल आकार दिया जाएगा। गर्म तवे पर रोटियों को धीरे-धीरे सेंका जाएगा ताकि वे बाहर से न जलें और भीतर से कच्ची न रहें। रोटी बनाने में स्वचालित उपकरणों का भी उपयोग किया जा सकेगा। जो बंदी भोजन बनाने के कार्य में लगे होंगे, उन्हें सामान्य धुलाई कार्यों में शामिल नहीं किया जाएगा ताकि रसोई कार्य और स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित न हो। कपड़े धोने और स्वच्छता पर विशेष जोर नियम 640 में संशोधन के अंतर्गत हर बंदी को सप्ताह में साबुन उपलब्ध कराया जाएगा। बंदियों के कपड़े, कंबल और बिस्तरों की नियमित धुलाई होगी। अस्पताल में भर्ती बंदियों के कपड़ों और बिस्तरों की अलग से सफाई कराई जाएगी। बड़े जिला जेलों में आवश्यकता के अनुसार स्वचालित वाशिंग मशीनों का उपयोग किया जा सकेगा। गीले कपड़ों को सुखाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। एमपी की जेलों में 48 हजार कैदी मध्य प्रदेश की 132 जेलों में क्षमता से अधिक करीब 45,500 से 48,000 कैदी बंद हैं, जिनमें से लगभग 50% विचाराधीन हैं। राज्य के जेलों की कुल तय क्षमता लगभग 30,000 है, जिसके कारण जेलों में अत्यधिक भीड़भाड़ की स्थिति है। यूपी और बिहार के बाद मध्यप्रदेश ही ऐसा राज्य है जहां जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं। जेल सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम राज्य सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से जेलों में स्वच्छता, स्वास्थ्य सुरक्षा और बंदियों के जीवन स्तर में सुधार होगा। साथ ही आदतन अपराधियों की स्पष्ट पहचान, भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता मानकों और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। यह संशोधन राज्य की जेलों को आधुनिक और मानवीय व्यवस्थाओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नियमों में यह भी कहा गया है कि सभी शौचालयों में प्लास्टिक की बाल्टी और बड़े मग की व्यवस्था की जाएगी। बैरकों के भीतर और बाहर पर्याप्त संख्या में शौचालय तथा मूत्रालय बनाए जाएंगे। हाथ धोने के लिए हर शौचालय के बाहर पानी और साबुन की व्यवस्था अनिवार्य होगी। जेल कर्मचारियों और बंदियों के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए जाएंगे। महिला कर्मचारियों के लिए भी सुरक्षित स्थानों पर पृथक शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। भोजन बनाने की व्यवस्था में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। अब केवल गैर-आदतन और स्वस्थ बंदियों को ही भोजन तैयार करने वाली टोली में शामिल किया जाएगा। भोजन बनाने से पहले सभी बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा। रसोई में प्रवेश करने वाले बंदियों को स्वच्छ वस्त्र पहनना अनिवार्य होगा। भोजन तैयार करने से पहले और बाद में हाथ धोना भी जरूरी किया गया है। यदि कोई बंदी अस्वच्छ परिस्थितियों में भोजन बनाता पाया गया या भोजन को दूषित करने की कोशिश करता है तो उसे तत्काल उस कार्य से हटा दिया जाएगा। पहली बार रोटी बनाने को लेकर भी विस्तृत दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। आटा स्वच्छ वातावरण में गूंथा जाएगा और रोटियों के लिए समान आकार की लोइयां तैयार की जाएंगी। रोटियों को ठीक तरीके से बेलकर गर्म तवे पर संतुलित तापमान में सेंका जाएगा ताकि वे कच्ची या जली हुई न रहें। आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित मशीनों का उपयोग भी किया जा सकेगा। जेल विभाग का कहना है कि इससे भोजन की गुणवत्ता बेहतर होगी और सभी बंदियों को एक समान भोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा। सुबह का नाश्ता तैयार करने वाले बंदियों को भी विशेष सुविधा देने का प्रावधान किया गया है। नए नियमों के अनुसार आवश्यकता होने … Read more

वीडियो कॉल सुविधा से परिवार से मिली महिला कैदी, रायपुर जेल में भावुक पल

रायपुर मातृ दिवस (Mother's Day 2026) के अवसर पर रायपुर महिला केंद्रीय जेल में बंद महिला बंदियों को बड़ी सौगात मिली। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की घोषणा के अनुरूप रविवार को प्रिजन इनमेट वीडियो कॉलिंग सिस्टम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस सुविधा के शुरू होने से अब महिला बंदी जेल परिसर से ही अपने स्वजन और अधिवक्ताओं से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत कर सकेंगी। पहले चरण में रायपुर महिला केंद्रीय जेल के साथ कवर्धा, जशपुर समेत सात जेलों में यह सुविधा शुरू की गई है। यह व्यवस्था जेल विभाग और BSNL के बीच हुए एमओयू के तहत लागू की गई है। परिवार को देखकर छलक उठीं आंखें वीडियो कॉलिंग सिस्टम के उद्घाटन के दौरान भावुक दृश्य देखने को मिले। कई महिला बंदियों की आंखें नम हो गईं, जब उन्होंने वर्षों बाद अपने परिवार के सदस्यों को स्क्रीन पर देखा और उनसे बातचीत की। जेल अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक से बंदियों के मानसिक तनाव को कम करने में मदद मिलेगी और वे भावनात्मक रूप से अपने परिवार से जुड़े रह सकेंगे। कौशल विकास से आत्मनिर्भर बनने की पहल कार्यक्रम के दौरान निश्चय योजना के अंतर्गत व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली 38 महिला बंदियों को कौशल प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। अधिकारियों ने बताया कि यह पहल रिहाई के बाद बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगी। मदर्स डे के मौके पर जेल प्रशासन ने अपनी माताओं के साथ जेल में रह रहे 14 बच्चों को विशेष उपहार भी भेंट किए। बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ निश्चय कार्यक्रम के तहत जेल में बंद युवाओं को अपराध की दुनिया से दूर कर रोजगार के योग्य बनाने के लिए कंप्यूटर प्रशिक्षण भी शुरू किया गया है। रविवार को केंद्रीय और महिला जेल रायपुर में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले 67 बंदियों, जिनमें 38 महिलाएं और 29 पुरुष शामिल हैं, को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर केंद्रीय जेल में कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र का भी उद्घाटन किया गया। यहां बंदियों को आधुनिक डिजिटल शिक्षा प्रदान की जाएगी। बंदियों के लिए लोन मेला भी लगेगा बंदियों के पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए 13 मई को इंडियन ओवरसीज बैंक की ओर से जेल परिसर में लोन मेला आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य रिहा होने वाले बंदियों को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में डीजी जेल हिमांशु गुप्ता, जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री, बीएसएनएल के विजय छबलानी, महिला जेल प्रभारी गरिमा पांडेय सहित जेल विभाग का स्टाफ उपस्थित रहा।  

ASI ने बताया: नेटवर्क पर सख्त निगरानी, प्रोडक्शन वारंट से होगी पूछताछ

फरीदकोट  फरीदकोट की केंद्रीय जेल में बंद कैदियों और हवालातियों से मोबाइल फोन बरामद होने का सिलसिला लगातार जारी है। जेल प्रशासन ने एक बार फिर विभिन्न बैरकों की तलाशी के दौरान चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पुलिस को भेजी शिकायत में जेल के सहायक अधीक्षक करमजीत सिंह ने बताया कि जेल अधीक्षक के दिशा-निर्देशों पर जेल कर्मचारियों की टीम ने शुक्रवार रात विभिन्न बैरकों का औचक निरीक्षण किया। तलाशी अभियान के दौरान जेल में बंद हवालाती बठिंडा निवासी दलेर सिंह, फाजिल्का निवासी जशनप्रीत सिंह, मोगा निवासी अमरजीत सिंह, दिलबाग सिंह और हरजीत सिंह के पास से चार मोबाइल फोन बरामद हुए। थाना सिटी पुलिस ने उक्त पांचों हवालातियों के खिलाफ जेल एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रोडक्शन वारंट पर लाकर पूछताछ की जाएगी-जांच अधिकारी इस संबंध में जांच अधिकारी और जेल इन्वेस्टिगेशन सेल के इंचार्ज एएसआई गुरपाल सिंह ने बताया कि आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर पूछताछ की जाएगी। यह भी जांच की जाएगी कि जेल के अंदर मोबाइल फोन किस तरह पहुंचे। यदि किसी जेल अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसे भी मामले में नामजद कर गिरफ्तार किया जाएगा।  

यमुनानगर जेल में कैदी बना रहे फर्नीचर, फ्लिपकार्ट पर बिक्री से बढ़ेगी आमदनी

 यमुनानगर जिला जेल की फैक्ट्री में बने उत्पाद अब ऑनलाइन बिक सकेंगे। जेल प्रशासन इसके लिए ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट से एमओयू साइन करेगा। इसके लिए तैयारियां चल रही हैं। ऑनलाइन पोर्टल पर आने से आमदनी भी बढेगी। हर किसी की पहुंच में यह उत्पाद होंगे। जेल में फर्नीचर के अलावा एलोवेरा जूस, आंवला कैंडी, आंवला जूस, गुलाब जल और एलोवेरा जूस तैयार किया जा रहा है। कपालमोचन मेला, गीता जयंती समारोह व सूरजकुंड में क्राफ्ट मेले में इन उत्पादों की काफी मांग रहती है। वहां पर लगे स्टाल से लोग खरीददारी करते हैं। जेल में तैयार किए जाने वाले फर्नीचरों में सिंगल बेड, सोफा, डबल बेड, टेबल, कुर्सियां और महाराजा कुर्सियां तैयार की जाती है। इसके लिए लकड़ी वन विभाग से खरीदी जाती है। शुद्ध शीशम की लकड़ी से यह फर्नीचर तैयार किया जाता है। जिसकी मजबूती भी बाहर बिकने वाले उत्पाद से अधिक रहती है। यही कारण है कि कोर्ट परिसर, सरकारी कार्यालयों, विश्वविद्यालयों व स्कूलों के लिए जेल में तैयार फर्नीचर खरीदा जाता है। इन उत्पादों का दाम जेल प्रबंधन की ओर से निर्धारित किया जाता है। इसके लिए न तो किसी कोटेशन की जरूरत पड़ती है और न ही कोई अन्य प्रक्रिया होती है। अब जेल प्रबंधन के पेट्रोल पंप पर ही शोरूम भी बनाया गया है। जहां पर यह उत्पाद रखे हैं। ऐसे में लोग जेल के बाहर ही इन उत्पादों को देख सकते हैं और खरीद सकते हैं। शोरूम में फर्नीचर के अलावा अन्य उत्पाद भी रखे हुए हैं। एक वर्ष में बेचे 56 लाख रुपये के उत्पाद जेल प्रशासन ने वर्ष 2025 में 56 लाख रुपये के उत्पाद बेचे। इनमें फर्नीचर से लेकर जूस, कैंडी, गुलाब जल सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं। पिछले दिनों सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में लगभग 15 लाख रुपये के उत्पाद बेचे गए। जेल की फैक्ट्री में फिलहाल 110 कैदी उत्पाद तैयार करने में लगे हुए हैं। फैक्ट्री में अधिकतर कैदी ही कार्य करते हैं लेकिन उन बंदियों को भी लगा दिया जाता है जो पहले से फर्नीचर का कार्य जानते हैं और अपनी मर्जी से काम करना चाहते हैं। जिला जेल में बंद हैं 1150 कैदी जिला जेल में इस समय लगभग साढ़े 1100 कैदी हैं। इनमें लगभग 50 महिला कैदी व बंदी हैं। जेल में हार्डकोर अपराधियों के साथ-साथ जम्मू कश्मीर के आतंकियों को भी रखा गया है। इसके लिए सीआरपीएफ का अलग से पहरा लगाया गया है। हालांकि इनकी संख्या घटती बढ़ती रहती है। पिछले दिनों जेल से कुछ बंदियों की अदला बदली भी हुई है। कुछ को दूसरी जेलों में ट्रांसफर किया गया है। वहीं दूसरी जेलों से कुछ बंदियों को यहां पर भेजा गया है।     फ्लिपकार्ट के साथ जेल प्रबंधन की बातचीत चल रही है। जेल में बने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए एमओयू साइन किया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। – सतेंद्र सिंह, एसपी जेल।  

न्याय हुआ पूरा! डिप्टी कलेक्टर अभय सिंह खराड़ी दोषी, 10 साल की जेल

बड़वानी बड़वानी की तृतीय जिला एवं सत्र न्यायालय ने महिला पटवारी के साथ दुष्कर्म और प्रताड़ना के गंभीर मामले में तत्कालीन एसडीएम (सेंधवा) और वर्तमान उज्जैन डिप्टी कलेक्टर अभय सिंह खराड़ी को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आरोपी अफसर को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 1 लाख 1 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। फैसले के तुरंत बाद पुलिस ने आरोपी डिप्टी कलेक्टर को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। इस मामले में एफआईआर के बाद फरार होने पर 4 मई 2024 को बड़वानी पुलिस ने खराड़ी को भोपाल से गिरफ्तार किया गया था। उस वक्त तत्कालीन उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने उन्हें सस्पेंड किया था। तभी से वह सस्पेंड थे। अभियोजन के अनुसार, आरोपी अभय सिंह खराड़ी वर्ष 2016 से 2024 के बीच महिला का लगातार यौन शोषण करता रहा। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने अपने पद का रसूख दिखाकर 4 से 5 बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। दिसंबर 2023 में आरोपी ने पीड़िता के घर में घुसकर उसके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी भी दी थी। ब्लैकमेलिंग और सिंदूर भरकर तस्वीरें लीं न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार, आरोपी अफसर महिला को मानसिक रूप से भी प्रताड़ित करता था। वह महिला के आने वाले रिश्तों को तुड़वा देता था और फोन पर तेजाब डालने और अपहरण करने की धमकी देता था। पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने उसे बेहोश कर उसकी मांग में सिंदूर भर फोटो खींची थी, ताकि समाज में उसे अपनी पत्नी बताकर बदनाम और ब्लैकमेल कर सके। पत्नी को जान से मारने के आरोप भी लग चुके 31 अक्तूबर 2017 में खराड़ी पर पत्नी को बेहोशी का इंजेक्शन देकर जान से मारने के आरोप भी लगे थे। खराड़ी उस वक्त झाबुआ डिप्टी कलेक्टर थे और पत्नी सुनीता खराड़ी धार जिले के दीनदयालपुरम में रहती थीं। कोतवाली पुलिस ने खराड़ी को बेहोशी की हालत में मिलने पर इलाज करवाया था। सुनीता खराड़ी ने पुलिस को बताया उनके पति ने गुंडे बुलाकर उनके साथ मारपीट की और उसको बेहोशी का इंजेक्शन लगाया। घटना के दिन रात 3 बजे उनके पति ने उनकी दूसरी पत्नी के तीन भाइयों के साथ दो और लोगों को बुलाया। दूसरी पत्नी का मुंह दबा दिया और अपने साथियों के साथ मिलकर बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया, जिसके बाद जान से मारने की कोशिश की। कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।  

अयोध्या जेल की सुरक्षा फेल, दो गंभीर आरोपी फरार, 7 अधिकारियों पर कार्रवाई

अयोध्या यूपी के अयोध्या में जिला कारागार से दो बंदी फरार हो गए। दोनों बंदियों ने बैरक मे लगी ग्रिल काट कर बाहर निकले, उसके बाद बांस के सहारे जिला कारागार के पीछे जहां कैमरे का सर्विलांस नहीं था उस क्षेत्र से चारदीवारी फांद कर भाग गए। सूचना पर जिला पुलिस ने तीन टीमों को बनाकर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए। इसमें अमेठी निवासी गोलू अग्रहरि उर्फ सूरज अग्रहरी पुत्र साधु राम निवासी, मुसाफिरखाना और सुल्तानपुर निवासी शेर अली नाम के बंदी शामिल हैं। दोनों बंदियों के फरार होने की जानकारी पर जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली उन्होंने मौका का मुआयना किया। उन लोगों ने जेल के पिछले हिस्से जिस तरफ हरियाली ज्यादा है वहां बांस के ऊंचे पेड़ों के सहारे दीवार फान गए। हमने उनकी गिरफ्तारी के लिए तीन टीमों को लगा दिया है जल्द सफलता मिलेगी। इनमें एक बंदी हत्या के प्रयास के मामले में व दूसरा बलात्कार के आरोप में जेल में निरुद्ध थे। जेल अधीक्षक समेत 7 सस्पेंड अयोध्या जिला कारागार अयोध्या से दो बंदियों के फरार होने पर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। डीजी जेल पीसी मीणा ने ऐक्शन लेते हुए वरिष्ठ जेल अधीक्षक यूसी मिश्रा को सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही जेलर जेके यादव,डिप्टी जेलर मयंक त्रिपाठी को भी निलंबित कर दिया है। यही नहीं ड्यूटी पर तैनाती के दौरान लापरवाही पर हेड जेल वॉर्डर व 3 जेल वॉर्डर को भी सस्पेंड कर दिया है। उधर मामले की जांच के लिए डीआईजी जेल ए के मैत्रेय अयोध्या पहुंच गए हैं । कुछ देर पहले ही जिलाधिकारी निखिल टीकाराम एवं एसएसपी डॉक्टर गौरव ग्रोवर भी जेल पहुंच गए। जिला जेल से दो बंदियों के फरार होने के मामले में जांच करने पहुंचे डीआईजी जेल मैत्रीए ने कहा कि दोनों बंदी विशेष चार नंबर बैरक में बंद थे। रोशनदान की ईंट तोड़कर दोनों बाहर निकले थे। मौके से 25 फीट का बांस, 30 फुट की सरिया व कंबल बरामद हुआ है। कंबल की रस्सी बनाकर बाउंड्री वाल कूदे थे दोनों।

भयानक हत्या का खुलासा: चार अपराधियों को उम्रकैद, शिकार का शव निर्मम तरीके से प्रदर्शित

पटना बिहार के रोहतास जिले में प्रेम-प्रसंग में हुई एक बेहद नृशंस हत्या के मामले में अदालत ने सात साल बाद कड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मन्नू कुमार हत्याकांड में चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा दी है। अदालत ने सभी दोषियों पर 5,000-5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। मृतक की प्रेमिका और उसके परिजन दोषी दरअसल, यह फैसला जिला जज-IV अनिल कुमार की अदालत ने सुनाया है। जिन लोगों को सजा मिली है, उनमें मृतक की प्रेमिका सुमन देवी उर्फ चुमन देवी, उसका पति प्रभाकर सिंह उर्फ प्रकाश चौधरी, उसका भाई फूलचंद और पिता दुधेश्वर चौधरी शामिल हैं। कोर्ट ने इस वारदात को ऑनर किलिंग से जुड़ा, पूर्व नियोजित और अत्यंत क्रूर अपराध बताया। फोन कर बुलाया गया, फिर की गई हत्या अभियोजन पक्ष के अनुसार, 4 मार्च 2019 की शाम सुमन देवी ने मन्नू कुमार को फोन कर घर से बाहर बुलाया। मन्नू बिना बताए घर से निकला लेकिन फिर वापस नहीं लौटा। अगले दिन 5 मार्च को उसका शव गांव के पास एक सरसों के खेत में मिला, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया। फिर मृतक के पिता अशोक चौधरी ने अगरेर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। पोस्टमॉर्टम में सामने आई निर्ममता पुलिस जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला कि मन्नू का पेट चाकू से चीर दिया गया था। हत्या के बाद उसके निजी अंग काटकर सरसों के पौधे पर लटका दिए गए थे। इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी।   ‘इज्जत’ के नाम पर रची गई साजिश अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि प्रेम संबंधों को लेकर पहले गांव में पंचायत भी हुई थी और दोनों को संबंध खत्म करने की चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद मन्नू और सुमन देवी का मिलना जारी रहा। इसे परिवार ने अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए हत्या की साजिश रची। हत्या से पहले बनी थी पूरी योजना कोर्ट में यह भी साबित हुआ कि हत्या से दो दिन पहले सुमन देवी अपने पति के साथ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले से अपने मायके भगवानपुर आई थी। इसके बाद पूरे परिवार ने मिलकर मन्नू को फोन कर बुलाने और उसकी हत्या करने की योजना बनाई। ट्रायल के दौरान कुल नौ गवाहों ने अभियोजन पक्ष के समर्थन में गवाही दी। कोर्ट की सख्त टिप्पणी सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपों को संदेह से परे साबित किया है। अतिरिक्त लोक अभियोजक अनिल कुमार सिंह ने बताया कि कोर्ट ने माना कि हत्या का तरीका अत्यंत क्रूर था और इससे समाज में भय, असुरक्षा और अमानवीयता का संदेश गया। इसी कारण दोषियों को अधिकतम सजा दी गई।  

महिला अपराधियों की संख्या में वृद्धि, जानिए दुनिया भर के जेलों में कितनी महिलाएं बंद हैं

 नई दिल्ली  पुरुषों की तुलना में कम संख्या में महिलाओं को जेल भेजा जाता है. इसके बावजूद दुनियाभर के जेलों में महिला कैदियों की संख्या बढ़ रही है. ऐसे में जानते हैं कि मौजूदा समय में दुनिया भर के जेलों में बंद महिला कैदियों की कुल संख्या कितनी है और इस मामले में सबसे आगे कौन सा देश है. साथ ही ऐसा होने के पीछे क्या वजहें हैं, इसे जानने की कोशिश करेंगे.  गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में महिला कैदियोंकी संख्या बढ़ रही है.  महिलाओं को  ज्यादातर मामलों में गैर-हिंसक अपराधों के लिए जेल भेजा जाता है. महिलाओं द्वारा किए गए अपराध अक्सर गरीबी से  जुड़े होते हैं. महिलाएं अक्सर अपने परिवार और बच्चों का भरण-पोषण और जीवित रहने के लिए गैर हिंसक अपराधों में संलग्न हो जाती हैं. इनमें तस्करी से लेकर देह व्यापार तक शामिल होता है.  विश्वभर में कितनी महिलाएं जेल में बंद हैं? अपराध और न्याय नीति अनुसंधान संस्थान (Institute for Crime and Justice Policy Research)के अनुसार, विश्व स्तर पर 733,000 से अधिक महिलाएं और लड़कियां जेलों में बंद हैं. इनमें से कईयों या तो मुकदमे से पहले हिरासत में लिया गया है, कई विचाराधीन कैदी हैं, कुछ दोषी ठहराई गई हैं और कईयों को सजा सुनाया जा चुका है.  माना जाता है कि जेलों में बंद महिलाओं की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि पांच देशों के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं और चीन के आंकड़े अपुष्ट हैं.राष्ट्रीय जेलों में बंद कैदियों की कुल संख्या में महिलाएं हमेशा अल्पसंख्यक रही हैं.   जेल में तेजी से बढ़ रही है महिलाओं की संख्या जेलों में बंद महिला और पुरुषों की संख्या में  महिलाओं का औसत केवल 2-9% रहा है. यह आंकड़ा 2024 में वैश्विक रूप से बढ़ा. क्योंकि पिछले साल जेल में बंद लोगों में महिलाओं और लड़कियों की हिस्सेदारी मात्र 6.8% पहुंच गई है. जेल जाने के मामले में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या अधिक तेजी से बढ़ रही है. वर्ष 2000 से लेकर अब तक, जेल में बंद महिलाओं और लड़कियों की संख्या में लगभग 60% की वृद्धि हुई है – जो पुरुषों की जेल आबादी में लगभग 22% की वृद्धि की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है. 2020 के अंत तक पिछले 10 वर्षों में विश्वस्तर पर जेल में बंद महिलाओं की संख्या में 100,000 से अधिक की वृद्धि हुई है. किन देशों में सबसे अधिक महिलाएं जेल में हैं? अगर देश की बात करें तोअमेरिका में महिला कैदियों की संख्या सबसे अधिक है, जो 174,607 है. इसके बाद चीन में 145,000 महिलाएं और लड़कियां जेल में बंद हैं. साथ ही मुकदमे से पहले की हिरासत और प्रशासनिक हिरासत (जब किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के हिरासत में रखा जाता है) में अज्ञात संख्या में महिलाएं और लड़कियां हैं. अमेरिका और चीन के बाद बाद ब्राजील में 50,441, रूस में 39,153, थाईलैंड में 33,057, भारत में 23,772, फिलीपींस में 17,121, तुर्की में 16,581, वियतनाम 15,152, मैक्सिको में 13,841 और इंडोनेशिया में 13,044 महिला कैदी हैं.  इंग्लैंड और वेल्स में 3,566 महिलाएं जेल में हैं – जो कुल कैदियों की संख्या का 4% है , लेकिन अनुमान है कि 2027 तक यह संख्या बढ़कर 4,200 हो जाएगी. यूरोप में 94,472 महिलाएं हिरासत में हैं , जबकि ऑस्ट्रेलिया में 3,473 महिलाएं जेल में हैं, जो कुल कैदियों की संख्या का लगभग 8% है. महिलाओं के जेल जाने के पीछे गरीबी है बड़ी वजह पेनल रिफॉर्म इंटरनेशनल, वीमेन बियॉन्ड वॉल्स और ग्लोबल कैंपेन टू डिक्रिमिनलाइज़ पॉवर्टी एंड स्टेटस द्वारा किए गए शोध में पाया गया कि कानून जीवनयापन के लिए किए जाने वाले कुछ कृत्यों को अपराध मानते हैं और महिलाएं इससे असमान रूप से प्रभावित होती हैं.  कुछ देशों में, गर्भपात, व्यभिचार, यौन दुराचार और वेश्यावृत्ति को अपराध मानने वाले कानून  महिलाओं को ही प्रभावित करते हैं. इसके अलावा महिलाओं को  कारावास की सजा मिलने की एक वजह आर्थिक रूप से असमर्थता भी है. क्योंकि छोटे-मोटे अपराधों के लिए जुर्माना भरने या जमानत राशि का भुगतान करने में गरीबी की वजह से महिलाएं असमर्थ होती हैं. इस वजह से उन्हें जेल में डाल दिया जाता है.

वीरेंद्र तोमर को पांच दिन की रिमांड के बाद कोर्ट में पेश किया जाएगा, पुलिस ने जेल भेजने की अर्जी तैयार की

रायपुर पांच महीने की फरारी के बाद ग्वालियर में गिरफ्तार हिस्ट्रीशीटर वीरेन्द्र सिंह तोमर से पुलिस की पूछताछ पूरी हो गई है. पुलिस शुक्रवार को आरोपी को कोर्ट में पेश करगी और न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आग्रह किया जाएगा. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दर्ज दो केस आर्म्स एक्ट और सूदखोरी, ब्लैकमेल और वसूली केस में पूछताछ की है. घर के लॉकर में मिले हथियार को आरोपी ने अपने सुरक्षा गार्ड का बताया है जबकि क्षत्रिय करणी सेना से जुड़े लोगों द्वारा फरारी के दौरान मदद करने की जानकारी उसने दी है. दूसरी तरफ हिस्ट्रीशीटर रोहित तोमर समेत अन्य सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज कर दी गई है. पीड़ित अब भी डरे हुए हैं इसलिए नहीं कराया आमना-सामना पुलिस ने पूछताछ के दौरान रिपोर्टकर्ता पीड़ितों और आरोपी का आमना-सामना नहीं कराया. बल्कि जब्त एग्रीमेंट, चेक और प्रॉपर्टी के एक-एक दस्तावेजों को लेकर आरोपी से पूछताछ की. पुलिस ने दिए गए कर्ज की राशि, तय ब्याज और वसूली गई राशि से संबंधित दस्तावेजों की भी जानकारी ली है. ताकि उन्हें कोर्ट में पेश किया जा सके. पुलिस का दावा है कि पीड़ित लोग हिस्ट्रीशीटर वीरेन्द्र सिंह तोमर और रोहित सिंह तोमर की फरारी के दौरान भी भयभीत रहे हैं. अभी रोहित सिंह तोमर फरार है. उसके खिलाफ चार मामले दर्ज हैं. रोहित तोमर और केस में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज की गई है. पुलिस वालों के घर घुसकर आंदोलन की चेतावनी क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है, जिसमें हिस्ट्रीशीटर वीरेन्द्र सिंह तोमर का जुलूस निकालने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई को गलत बताया गया है. राष्ट्रीय अध्यक्ष ने छत्तीसगढ़ आकर रायपुर में आंदोलन करने की चेतावनी दी है. साथ ही कहा है कि जिन पुलिस अधिकारियों ने गलत किया, उनके घर में घुसकर आंदोलन किया जाएगा.