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मॉडल की रहस्यमय मौत: शरीर पर चोट के निशान, पुलिस कर रही बॉयफ्रेंड से पूछताछ

भोपाल राजधानी भोपाल के भैंसाखेड़ी क्षेत्र में सोमवार सुबह 21 वर्षीय मॉडल की मौत होने का मामला सामने आया है। युवती को उसके दोस्त ने अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक मृतका की पहचान खुशबू अहिरवार के रूप में हुई है। वह पिछले कुछ वर्षों से भोपाल में मॉडलिंग कर रही थी। बैरागढ़ क्षेत्र के सहायक पुलिस आयुक्त आदित्य राज सिंह ने बताया कि खुशबू को उसका दोस्त कासिम और एक बस कंडक्टर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। जानकारी के अनुसार, खुशबू बीए फर्स्ट इयर के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। वह तीन साल से भोपल में रह रही थी। उसके प्राइवेट पार्ट और बॉडी पर चोटों के निशान मिले हैं। परिजनों ने लव जिहाद और हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि कासिम को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह मामला आत्महत्या, हादसा या कुछ और है। जानकारी सामने आई कि मॉडल गर्भवती थी। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में गर्भवती और उसके कॉम्प्लिकेशन की बात कही जा रही है। फूल पीएम रिपोर्ट मंगलवार को आएगी। जिसके बाद पूरी तरह से मौत का कारण साफ होने की बात कही जा रही है। 

राजेश मिश्रा के परिवार की कुंडली में खुला राज: घर में मिले ढेरों नोट, पुलिस थक गई गिनते-गिनते

 प्रतापगढ़  उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ, जब किसी तस्करी के मामले में इतनी बड़ी रकम बरामद हुई कि नोट गिनने वालों के हाथ थक गए. पुलिसवालों को 22 घंटे लगातार बैठ कर पैसे गिनना पड़ा.  सुबह करीब साढ़े आठ बजे प्रतापगढ़ के मानिकपुर थाना क्षेत्र के मुन्दीपुर गांव में अचानक पुलिस की एक साथ कई गाड़ियां पहुंची. थाना प्रभारी के साथ भारी पुलिस बल एक पुराने पक्के मकान की ओर बढ़ा. सूचना थी कि यहीं से जेल में बंद राजेश मिश्रा अपना पूरा नेटवर्क चला रहा है. राजेश मिश्रा वही नाम, जो कभी शराब, फिर जमीन और अब नशे के कारोबार से प्रदेश भर में कुख्यात हो चुका है. राजेश इस वक्त जेल में बंद है, लेकिन पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि उसका गिरोह वहीं से चालू था. जेल के भीतर से  डील फाइनल होती, और बाहर से उसका परिवार डिलीवरी और कैश की वसूली संभालता. 22 घंटे तक चली गिनती जब पुलिस ने राजेश मिश्रा के घर पर दबिश दी, तो सबसे पहले अंदर से दरवाजा बंद कर दिया गया. घर में रीना मिश्रा (राजेश की पत्नी), बेटा विनायक, बेटी कोमल, रिश्तेदार यश और अजीत मिश्रा मौजूद थे. जब दरवाजा खुलवाया गया, तो सामने जो दृश्य था, उसने हर किसी को चौंका दिया.  कमरे में चारों तरफ काले पन्नियों में लिपटे नोटों के बंडल, गत्तों में पैक गांजा, और लोहे के ट्रंक में रखी स्मैक. एक कोने में इलेक्ट्रॉनिक नोट गिनने की मशीन थी, जिससे साफ था कि गिरोह सिर्फ तस्करी ही नहीं, कमाई की गिनती का पूरा इंतजाम भी रखता था. पुलिस ने जब गिनती शुरू की तो 2,01,55,345 रुपये की नकदी बरामद हुई. इसके अलावा 6.075 किलो गांजा और 577 ग्राम स्मैक (हेरोइन) मिली. जिसकी अनुमानित कुल कीमत  3 करोड़ रुपये से अधिक है. कहने को बस तीन घंटे का ऑपरेशन था, लेकिन नोटों की गिनती पूरी करने में 22 घंटे लग गए. फर्जी जमानत से लेकर करोड़ों की कुर्की तक छानबीन में सामने आया कि रीना मिश्रा और उसका बेटा विनायक मिश्रा, राजेश की जेल से रिहाई के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर अदालत में जमानत करवा चुके थे. इस खुलासे के बाद उन पर धोखाधड़ी, जालसाजी और गैंगस्टर एक्ट समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस रिकॉर्ड बताता है कि पहले भी इस परिवार की ₹3,06,26,895.50 रुपये की चल-अचल संपत्ति कुर्क की जा चुकी है. यह कुर्की भी राजेश और रीना के नाम पर दर्ज की गई थी. बावजूद इसके, गिरोह ने जेल से नेटवर्क चलाना जारी रखा. रीना मिश्र: घर बैठी माफिया क्वीन स्थानीय पुलिस के अनुसार, रीना मिश्रा सिर्फ नाम की गृहिणी नहीं थी. राजेश मिश्रा के जेल जाने के बाद उसने ही पूरा सिंडिकेट संभाला. गांव में उसका खौफ इस कदर था कि कोई भी उसके घर की ओर नजर उठाकर नहीं देखता था. लोगों का कहना है कि मकान में कभी-कभी ट्रक रुकते थे, फिर कुछ लोग आते-जाते दिखते थे. सबको मालूम था, मगर कोई बोलता नहीं था. रीना का रोल सिर्फ घर की देखरेख का नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की बुक-कीपिंग का था. वह तय करती थी किस इलाके में कितना माल जाएगा और कितनी रकम वापस आएगी. जेल में बैठे राजेश से वह रोज़ बात करती, और उसी के कहने पर डील फाइनल करती थी. जेल की दीवारों के भीतर से चलने वाला नेटवर्क पुलिस के अनुसार, राजेश मिश्रा पहले से ही कई गंभीर मामलों में अभियुक्त है. जेल से बाहर उसकी कमान उसकी पत्नी और बच्चों के पास थी. वह फोन और मुलाकातों के ज़रिए गिरोह को निर्देश देता था कि कहाँ से माल मंगाना है, कहाँ सप्लाई करनी है, और कौन पुलिसकर्मी कब ड्यूटी पर होता है. पुलिस का कहना है कि गिरोह अंतर्राज्यीय स्तर पर सक्रिय था. बिहार और मध्य प्रदेश तक इसके तार फैले हुए हैं. प्रतापगढ़, प्रयागराज और कौशांबी के कई गांव इस नेटवर्क के रूट बने हुए थे. एसपी दीपक भूकर बोले- यह तो बस शुरुआत है पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह कार्रवाई संगठित अपराध के खिलाफ हमारी लंबी रणनीति का हिस्सा है. इस गिरोह की जड़ें काफी गहरी हैं, लेकिन अब इनके नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाएगा. जो भी इसमें शामिल है, किसी को छोड़ा नहीं जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि मादक पदार्थ तस्करी में लिप्त गिरोहों की फाइलें अब डिजिटल रूप से ट्रैक की जा रही हैं. कई बैंक खातों और संपत्तियों की जांच भी चल रही है. एनडीपीएस और गैंगस्टर एक्ट में दर्ज मामले गिरफ्तार अभियुक्तों पर एनडीपीएस एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है. फर्जी जमानत के मामले में भी पुलिस ने अलग एफआईआर की है.  गिरफ्तार अभियुक्तों की लिस्ट: – रीना मिश्रा, पत्नी राजेश मिश्रा (40 वर्ष) – विनायक मिश्रा, पुत्र राजेश मिश्रा (19 वर्ष) – कोमल मिश्रा, पुत्री राजेश मिश्रा (20 वर्ष) – यश मिश्रा, पुत्र अजीत कुमार मिश्रा (19 वर्ष) – अजीत कुमार मिश्रा, पुत्र पवन कुमार मिश्रा (32 वर्ष) सभी को मानिकपुर थाना पुलिस ने मौके से गिरफ्तार किया. सवा तीन करोड़ की बरामदगी  पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है. बरामद नकदी और ड्रग्स की कुल कीमत करीब ₹3 करोड़ 17 लाख है. इतनी भारी मात्रा में कैश की बरामदगी ने पूरे जिले में हलचल मचा दी है. जांच एजेंसियों का मानना है कि राजेश मिश्रा का नेटवर्क सिर्फ नशे तक सीमित नहीं है. कई जगहों पर उसकी अंडरग्राउंड इन्वेस्टमेंट की जानकारी मिली है. कुछ को जमीन खरीद के नाम पर और कुछ को लॉजिस्टिक कंपनी के रूप में छिपाया गया था. जांच टीमें अब बैंक खातों, प्रॉपर्टी रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन खंगाल रही हैं. 

राष्ट्रीय स्तर पर बटाला पुलिस को मिला सम्मान, पूरे देश में हुई तारीफ की वर्षा

बटाला  मौजूदा समय में मोबाइल फोन इंसान के जीवन का अटूट हिस्सा बन गया है, जिसके न होने से एक कमी का एहसास होता है। ऐसे में अगर किसी का मोबाइल फोन गुम या चोरी हो जाए तो स्वाभाविक है कि उस शख्स की चिंता बढ़ जाएगी। मोबाइल फोन चोरी या गुम होने के बाद लगता है कि शायद ही अब यह वापस मिल पाएगा। लेकिन ऐसा नहीं है… क्योंकि पंजाब के बटाला पुलिस ने जो कर दिखाया है उसके लिए पुलिस महकमे को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। बटाला पुलिस ने चोरी व गुम हुए हजारों मोबाइल ढूंढ निकाले और उन्हें उनके असली मालिकों को भी सही सलामत सौंपा।  गुम हुए मोबाइल फोन बरामदगी में शानदार प्रदर्शन के लिए बटाला पुलिस को राष्ट्रीय सम्मान मिला है। पंजाब में बटाला पुलिस जिला पहला पुलिस जिला बना है, जिसने सबसे ज्यादा चोरी और गुम हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके असली मालिकों तक पहुंचाए हैं। करीब एक साल पहले डीजीपी गौरव यादव और स्पेशल डीजीपी साइबर क्राइम के मार्ग दर्शन में बटाला के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में पहले आपका गुम मोबाइल अब वापिस आपके हाथ मुहिम शुरू की थी।  इस मुहिम द्वारा और दूरसंचार विभाग (डीओटी) और भारत सरकार के सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (सीईआईआर) पोर्टल की मदद से बटाला पुलिस ने 1100 से अधिक गुम हुए मोबाइलों को ट्रेस करके वापिस उनके मालिकों को सौंपे हैं। बरामद किए मोबाइलों की बाजारी कीमत लगभग 2.20 करोड़ लगाई गई है। बटाला पुलिस की इसी सफलता को देखते हुए दूरसंचार विभाग और भारत सरकार ने बटाला पुलिस को सोलन, हिमाचल प्रदेश में आयोजित नार्थ जोन सुरक्षा कान्फ्रेंस के दौरान सुनीता चंद्रा, डायरेक्टर जनरल, दूरसंचार विभाग, भारत सरकार द्वारा सम्मानित किया गया। इस मौके पर एसएसपी बटाला सुहेल कासिम मीर ने इस सफलता को अपनी टीम की लगन और जन सहयोग को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि बटाला पुलिस टेक्नोलॉजी द्वारा जनहित में लोगों की सेवा करने लिए बचनबद्ध है और लोगों में अपना विश्वास मजबूत कर रही है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि लोग अपने गुम मोबाइलों की रिपोर्ट दर्ज सांझ केंद्र में करवांए और साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन बटाला से संपर्क करें।  

ट्रेनिंग के दौरान जवानों को मिलेगी गीता से जीवन की सीख, नेक जीवन जीने में मदद मिलेगी

भोपाल  रामचरितमानस के बाद, मध्य प्रदेश पुलिस की ट्रेनिंग विंग ने अपने सभी सेंटरों को अपने रंगरूटों के लिए भगवद गीता पाठ सेशन आयोजित करने का निर्देश दिया है, क्योंकि इससे उन्हें "नेक" जीवन जीने में मदद मिलेगी। यह निर्देश एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (ट्रेनिंग) राजा बाबू सिंह ने राज्य के सभी आठ ट्रेनिंग स्कूलों के सुपरिटेंडेंट को जारी किया है। इन सेंटरों में जुलाई से लगभग 4,000 युवा लड़के और लड़कियां नौ महीने की कांस्टेबल ट्रेनिंग ले रहे हैं। सिंह ने जुलाई में ट्रेनिंग सेशन का उद्घाटन करते समय इन संस्थानों में रामचरितमानस का पाठ करने का निर्देश दिया था, और कहा था कि इससे उनमें अनुशासन आएगा। रामचरितमानस में भगवान राम के गुणों और जंगल में उनके 14 साल के वनवास का वर्णन है। 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी सिंह ने ट्रेनिंग स्कूल के डायरेक्टरों से कहा कि अगर संभव हो तो भगवान कृष्ण के चल रहे पवित्र महीने (अगहन कृष्ण) के दौरान भगवद गीता का कम से कम एक अध्याय पढ़ना शुरू करें। उन्होंने निर्देश दिया कि यह ट्रेनी के रोज़ाना के मेडिटेशन सेशन से ठीक पहले किया जा सकता है। ADG ने ट्रेनिंग स्कूलों को अपने संदेश में कहा, "भगवद गीता हमारा शाश्वत ग्रंथ है। इसका नियमित पाठ निश्चित रूप से हमारे ट्रेनी को एक नेक जीवन जीने में मार्गदर्शन करेगा, और उनका जीवन बेहतर होगा।" यह अधिकारी, लगभग 2019 में ग्वालियर रेंज के पुलिस प्रमुख के रूप में काम करते हुए, इसी तरह का एक अभियान शुरू किया था और कई स्थानीय जेल कैदियों और अन्य लोगों को भगवद गीता की प्रतियां बांटी थीं।

आज से MP में हेलमेट नियम सख्त, पीछे बैठने वालों को भी पहनना होगा, इन 5 जिलों पर फोकस

भोपाल  मध्यप्रदेश में सड़क हादसों में बढ़ती मौतों को देखते हुए आज से प्रदेशभर में हेलमेट अनिवार्यता को लेकर पुलिस का विशेष अभियान शुरू हो गया है. अब न केवल दोपहिया वाहन चालक, बल्कि पीछे बैठने वाले व्यक्ति को भी हेलमेट पहनना जरूरी होगा. राज्य पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर 6 नवंबर से पूरे प्रदेश में यह अभियान शुरू किया गया है. इस दौरान ट्रैफिक पुलिस हेलमेट न पहनने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी. पुलिस का कहना है कि यह अभियान केवल चालान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी फोकस किया जाएगा. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन इन पांच जिलों में अभियान को लेकर विशेष सख्ती बरती जाएगी. कारण यह है कि पूरे प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में से 58 प्रतिशत मौतें इन्हीं जिलों में दर्ज हुई हैं.  2 व्हीलर्स पर अगर एक शख्स ने हेलमेट पहना है और दूसरे ने नहीं तो 300 रुपए का चालान होगा और अगर दोनों ने हेलमेट नहीं पहना तो 500 रुपए का जुर्माना होगा.  4 साल की उम्र से बड़े पिलियन राइडर (दोपहिया पर ड्राइवर के पीछे बैठने वाले) के हेलमेट न पहनने पर 300 रुपए का चालान बनता है। डीआईजी टीके विद्यार्थी ने कहा- फिलहाल 5 बड़े शहरों में इसे लागू किया गया है। अगले चरण में इसे पूरे प्रदेश में लागू करेंगे। इस अभियान के पहले दिन गुरुवार को भोपाल में ट्रैफिक पुलिस 20 पॉइंट्स पर चालानी कार्रवाई कर रही है। इस दौरान अलग-अलग नजारे सामने आ रहे हैं। कोई कह रहा है कि पुलिसकर्मी सामने से गुजरा, तब चालान क्यों नहीं किया? किसी ने कहा- बच्ची एडमिट है। जल्दी में हेलमेट भूल गया।  एक नजर आंकड़ों पर:- – 2024 में प्रदेशभर में 14 हजार 791 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई  – इंदौर: शहर में 2 हजार 425 और ग्रामीण क्षेत्र में 290 मौतें – भोपाल: शहर में 945 और ग्रामीण क्षेत्र में 235 मौतें – जबलपुर: 2,035 मौतें – उज्जैन: 1,536 मौतें – ग्वालियर: 1,049 मौतें – इन पांच जिलों में कुल 8 हजार 515 लोगों की जान गई, जो राज्य की कुल मौतों का 58 प्रतिशत है.

विदेश में काम दिलाने के नाम पर सौदा! 3500 डॉलर में बेचे जा रहे आगरा के युवा

आगरा  उत्तर प्रदेश की ताजनगरी से बड़ा ही अजब-गजब मामला सामने आया है. आगरा की पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. यहां उन्नाव और इंदौर के रहने वाले दो लड़कों को गिरफ्तार किया है. ये लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देते थे. जब युवा उनकी बातों में आ जाते तो उन्हें कंबोडिया और थाईलैंड में 3500 डॉलर के हिसाब से बेच देते थे. इसके बाद दूसरे देशों में बैठे इनके आका खरीदे गए युवाओं को साइबर ठगी की ट्रेनिंग देकर उनको अपने गैंग में शामिल करते थे. एडीसीपी आदित्य सिंह ने बताया कि युवाओं के लापता होने की लगातार जानकारी मिल रही थी. इस पर साइबर क्राइम, साइबर सेल और साइबर इंटेलिजेंस की टीम जांच पड़ताल में जुट गई थी. जांच के दौरान टीम ने उन्नाव के रहने वाले आतिफ खान और इंदौर के रहने वाले अजय कुमार शुक्ला को गिरफ्तार किया. जब इनसे कड़ाई से पूछताछ की तो जो सच पता चला उसे सुनकर पुलिस भी दंग रह गई. इन शातिरों ने पुलिस को बताया कि यह लोग देश के अलग अलग हिस्सों से बेरोजगार युवाओं को खोजते थे. फिर विदेश में नौकरी लगवाने का झांसा देकर उनको कंबोडिया और थाईलैंड में बेच देते थे. इसके बदले में इन शातिरों को प्रति युवा के बदले 3500 डॉलर दिए जाते थे. विदेश में बैठे इनके आका खरीदे गए युवाओं को साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट समेत डिजिटल तरीकों की ट्रेनिंग देते थे. फिर ट्रेनिंग के बाद इन युवाओं को साइबर ठगी के गैंग में शामिल किया जाता था. अभी तक यह शातिर लगभग 50 से ज्यादा युवाओं को कंबोडिया और थाईलैंड में बेच चुके है. अब पुलिस इनके अन्य साथियों की तलाश में जुट गई है.  

नरसिंहपुर से 10 हजार का इनामी राजा हाशमी पकड़ा गया, इंदौर किन्नर विवाद में फिनाइल पिलाने का मामला

इंदौर    इंदौर पुलिस को किन्नर समाज से जुड़े एक विवादित में बड़ी सफलता हाथ लगी है. झगड़े के दौरान एक को फिनाइल पिलाने और मारपीट करने की घटना में फरार चल रहे 10 हजार रुपए के इनामी मुख्य आरोपी राजा हाशमी को गिरफ्तार कर लिया गया है.   किन्नर समाज से जुड़े विवाद में एक व्यक्ति को फिनाइल पिलाने और मारपीट करने का गंभीर आरोप. आरोपी राजा हाशमी घटना के बाद से पिछले एक हफ्ते से फरार चल रहा था, जिस पर डीसीपी जोन ने 10-10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था. पुलिस टीम को तकनीकी जानकारी और मुखबिर की मदद से राजा हाशमी की लोकेशन गोटेगांव, जिला नरसिंहपुर (जबलपुर के पास) में मिली. पुलिस ने उसके बहनोई के घर पर दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया. आरोपी को हिरासत में लेकर इंदौर लाया गया है और पुलिस पूछताछ के लिए उसे अदालत में पेश कर रिमांड की मांग करेगी. इस मामले में पुलिस ने कुल चार आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था. एक आरोपी सपना हाजी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था. आरोपी अक्षय कुमायूं और पंकज जैन अब भी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस के प्रयास लगातार जारी हैं. 

MP पुलिस बल में कमी, हर 873 नागरिकों पर एक जवान; 22 हजार भर्ती का रोडमैप तैयार

भोपाल  मध्य प्रदेश में औसतन 873 लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी एक पुलिसकर्मी पर है। मुख्यमंत्री ने तीन वर्ष के भीतर 22,500 पुलिस आरक्षकों की भर्ती की घोषणा की है। इसे सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन सच्चाई है कि प्रतिवर्ष दो से ढाई हजार पुलिस आरक्षक सेवानिवृत हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश ने वर्ष 2024 में 60 हजार पुलिस आरक्षकों की भर्ती की। इस वर्ष भी वहां पुलिस आरक्षक और उप निरीक्षकों के लगभग 30 हजार पदों पर भर्ती होने वाली है। मध्य प्रदेश में पुलिस बल की कमी के चलते बड़ी चुनौती वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ में सुरक्षा को लेकर रहेगी। इसमें 60 हजार पुलिसकर्मियों की आवश्यकता होगी। थाने नहीं बढ़ाने से पुलिस बल भी नहीं बढ़ा प्रदेश में पुलिस आरक्षक से लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तक के एक लाख 25 हजार 489 पद हैं। इनमें अभी एक लाख 600 ही पदस्थ हैं। जब कोई थाना स्वीकृत होता है, तभी उसके लिए बल स्वीकृत किया जाता है। जरूरत के अनुसार थाने नहीं बढ़ने के कारण पुलिस बल भी नहीं बढ़ा। सरकार का ही मापदंड मान लें, तो पचास हजार की आबादी पर जिला पुलिस बल का एक थाना होना चाहिए, इस हिसाब से प्रदेश की अनुमानित आठ करोड़ 90 लाख की जनसंख्या के हिसाब से 1700 से अधिक थाने होने चाहिए, पर अभी 968 ही हैं। एक साथ भर्ती में यह हैं चुनौतियां     प्रदेश में आठ पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में 7850 पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण की सुविधा है। उन्हें नौ माह का प्रशिक्षण दिया जाता है। इससे अधिक पदों पर भर्ती होने पर प्रशिक्षण के लिए प्रतीक्षा करनी होगी।     पुलिस आरक्षक के पदों पर आनलाइन परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्रों की कमी रहती है। इस कारण कर्मचारी चयन मंडल को परीक्षा कराने में दो से तीन माह लग जाते हैं। इसके बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा में दो से तीन माह लग जाते हैं। छह से सात हजार पद भरने में ही लगभग डेढ़ वर्ष लग जा रहे हैं।     तीसरा, बजट के अभाव के कारण भी सरकार एक साथ बड़ी भर्ती करने से बच रही है। खुफिया तंत्र को मजबूत करने की जरूरत     जिस तरह से अपराध बढे हैं, उस तरह से पुलिसबल की संख्या बढ़ाने के साथ उसे ताकतवर बनाना होगा। विशेष रूप से खुफिया तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है। सरकार आंकड़े कुछ भी दिखाए, पर स्थिति ठीक नहीं है। जैसे-जैसे बेरोजगारी बढ़ रही है, युवा अपराध की ओर जा रहे हैं। औसतन देखा जाए तो जितने पुलिसकर्मी रिटायर हो रहे हैं, सरकार उतने भी भर्ती नहीं कर पा रही है। – अरुण गुर्टू, पूर्व, डीजी, विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त  

एक लाख के इनामी शूटर फैसल को एनकाउंटर में किया खत्म, संजीव जीवा गैंग पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

शामली  यूपी के शामली में झिंझाना क्षेत्र के वेदखेड़ी मार्ग पर देर रात पुलिस और बदमाशों के बीच भोगीमजरा के जंगल में मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ में झिंझाना पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने एक लाख रुपये के इनामी बदमाश को मार गिराया, जबकि एक सिपाही घायल हो गया। मारा गया बदमाश संजीव जीवा गैंग का सक्रिय शूटर बताया जा रहा है, जो लंबे समय से पुलिस की पकड़ से दूर था। गुरुवार रात करीब आठ बजे कुछ बदमाश वेदखेड़ी मार्ग पर लूटपाट कर रहे थे। इस दौरान बदमाशों ने वेदखेड़ी निवासी जीतराम पुत्र रामचन्द्र से नगदी, मोबाइल व बाइक लूट ली। सूचना पर झिंझाना थाना पुलिस व एसओजी टीम मौके पर पहुंची। पुलिस को देखकर बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश गोली लगने से घायल हो गया, जिसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मारा गया बदमाश संजीव जीवा गैंग का शूटर फैसल निवासी खालापार मुजफ्फरनगर था और उस पर हत्या, लूट और रंगदारी समेत कई संगीन मामले दर्ज हैं। मुठभेड़ के दौरान एसओजी के एक सिपाही दीपक निर्वाण को भी गोली लगी है, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतक बदमाश का एक साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस टीमों ने जंगल में कॉम्बिंग अभियान चलाया है। मौके से पुलिस ने दो बाइक, दो पिस्टल, कई जिंदा कारतूस और खोखे बरामद किए हैं। झिंझाना थाना प्रभारी ने बताया कि फरार बदमाश की पहचान कर उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और घायल सिपाही का हालचाल लिया। इस मुठभेड़ के बाद इलाके में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह भी घटना स्थल का मुयायना करने पहुंचे। एसपी ने बताया कि मृतक संजीव जीवा गैंग का शूटर था। उस पर विभिन्न थानों में लूट हत्या डकैती आदि के मुकदमे दर्ज है।

भोपाल पुलिस के लिए नया नियम: मौके पर जाने से पहले पहनना होगा बॉडी कैमरा

भोपाल  बहुचर्चित डीएसपी के साले उदित गायकी की मौत के बाद पुलिस प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। राजधानी भोपाल के साथी थानों में तैनात पुलिस जवान के हर कदम और कार्रवाई पर कैमरे की नजर होगी। रात में किसी भी तरह की सूचना पर इस कैमरा को पहनकर ही घटना स्थल पर जाना अनिवार्य है। पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र ने बताया कि शहर के गश्ती जवानों को बॉडी कैमरा(Bhopal Police) और रिकॉर्डिंग डिवाइस से लैस करने का आदेश जारी किया है। इसके लिए 200 कैमरों का ऑर्डर दिया जा चुका है। कंट्रोल रूम से सीधे होगी कंट्रोलिंग पुलिस कमिश्नर ने बताया कि शुरुआत में यह कैमरे रात में गश्त करने वाली टीमों को दिए जाएंगे। जवानों की वर्दी की जेब और कंधे पर कैमरा लगाया जाएगा, जो वीडियो और ऑडियो की रिकॉर्डिंग करेगा। किसी भी घटना, कार्रवाई के दौरान कैमरा ऑटोमेटिक चालू रहेगा। जिसकी कंट्रोलिंग कंट्रोल रूम से रहेगा। अब पुलिसिंग कार्रवाई में पारदर्शी रहें। पुलिस पर नहीं उठेंगे सवाल पुलिस प्रशासन ने यह कदम इसलिए उठाया कि पुलिसिंग में पारदर्शिता लाना है। उदित की मौत के बाद पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवालों पर अब पुलिस पर लोगों के भरोसे को और मजबूत करेगा। गश्त के दौरान होने वाली कार्रवाई कैमरे में रेकॉर्ड होगी। इससे घटना या शिकायत के मामले में फुटेज साक्ष्य के रूप में काम करेगा। यह शहर के सभी थानों और विशेष इकाइयों में लागू करेंगे, साथ ही पुलिसकर्मियों को कैमरा ऑपरेट करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। नई व्यवस्था लागू की जाएगी इससे जवानों की कार्यप्रणाली में अनुशासन बढ़ेगा और जनता के साथ व्यवहार में भी सुधार आएगा। हर बात रेकॉर्ड होगी तो झूठे आरोप की बात नहीं रहेगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भोपाल चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा। यह सिस्टम से पुलिस की कार्रवाई में पारदर्शिता रहेगी।- हरिनारायण चारी मिश्र, पुलिस कमिश्नर