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सर्वे सेतु ऐप से PVTG बसाहटों का शत-प्रतिशत सैचुरेशन सुनिश्चित होगा:- प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा

रायपुर.  भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) समुदाय के समग्र विकास हेतु एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य के सभी 18 PVTG बहुल जिलों में निवासरत परिवारों का व्यापक सर्वेक्षण कर उनकी जानकारी "सर्वे सेतु ऐप" में अपलोड की जा रही है। पीवीटीजी परिवारों की वास्तविक स्थिति जानने और उन्हें योजनाओं से जोड़ने के लिए मोबाइल ऐप के माध्यम से घर-घर सर्वेक्षण किया जा रहा है। प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि इस डिजिटल सर्वे के माध्यम से PVTG परिवारों की भौतिक एवं सामाजिक स्थिति का सटीक आंकलन किया जा रहा है, जिससे शासकीय योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके। उन्होंने कहा कि यह पहल PVTG समुदाय के शत-प्रतिशत सैचुरेशन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। यह सर्वे कार्य विभागीय मंत्री रामविचार नेताम के निर्देशन में संचालित किया जा रहा है, जबकि प्रमुख सचिव बोरा स्वयं इसकी सतत मॉनिटरिंग कर रहे हैं। पूर्व में सभी संबंधित जिलों के कलेक्टरों को आवश्यक निर्देश जारी कर सर्वे कार्य में तेजी लाने को कहा गया था। राज्य के जिन 18 जिलों में यह सर्वे कार्य चल रहा है, उनमें मनेन्द्रगढ़- चिरमिरी-भरतपुर, बिलासपुर, धमतरी, नारायणपुर, जशपुर, सरगुजा, बलौदाबाजार, कोंडागांव, कांकेर, गौरेला-पेंड्रा- मरवाही, मुंगेली, गरियाबंद, बलरामपुर, कोरबा, खैरागढ़- छुईखदान-गण्डई, कबीरधाम, रायगढ़ और महासमुंद शामिल हैं। शासन द्वारा जारी निर्देशानुसार इस सर्वे को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए जिला, विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति कार्य कर रही है, जबकि विकासखंड स्तर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं ग्राम स्तर पर सर्वे दल इस प्रक्रिया को अंजाम दे रहे हैं। सर्वे के दौरान प्रत्येक परिवार की विस्तृत जानकारी एकत्र कर उन्हें 'PVTG एंटाइटलमेंट कार्ड' से जोड़ा जाएगा, जिससे योजनाओं के लाभ वितरण में पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सके। साथ ही, इससे शासन को भविष्य की नीतियों के निर्माण में भी सटीक डेटा उपलब्ध होगा। भारत सरकार के निर्देशानुसार यह सर्वेक्षण कार्य अप्रैल 2026 तक पूर्ण किया जाना है। इसके लिए जिला एवं ब्लॉक स्तर पर लगातार समीक्षा और निगरानी की जा रही है। मैदानी अमले द्वारा भी सक्रिय रूप से गांव-गांव पहुंचकर सर्वे कार्य को समय-सीमा में पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रमुख सचिव बोरा ने विश्वास जताया कि यह पहल न केवल PVTG समुदाय के जीवन स्तर में सुधार लाएगी, बल्कि राज्य में समावेशी विकास को भी नई दिशा दे  रही  है l  

‘प्रोजेक्ट संकल्प’: शैक्षणिक अध्ययन के साथ रचनात्मक गतिविधियों, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास पर जोर

रायपुर, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा प्रदेश में प्रारंभ किए गए ‘प्रोजेक्ट संकल्प‘ के माध्यम से आश्रम छात्रावासों में रहकर अध्ययन कर रहे बच्चों का  भविष्य संवर रहा है। विभाग की इस नई पहल से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के  लिए शैक्षणिक के साथ नैतिक, सामाजिक एवं जीवन कौशल से भी सशक्त बनाया जा रहा है।     आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने आज यहां बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश एवं विभागीय मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में छात्रावासी बच्चों के भविष्य को नई उड़ान देने के उद्देश्य से यह अभिनव पहल की गई हैै। छोटा बीज बड़े वृक्ष का बनता है आधार     प्रमुख सचिव बोरा ने कहा कि जिस प्रकार छोटा बीज बड़े वृक्ष का आधार बनता है उसी प्रकार एक छोटी  सकारात्मक पहल समाज में क्रांति ला सकती है। यदि विद्यार्थी को प्रारंभ से ही उच्च आदर्शों पर आधारित शिक्षा प्राप्त होगी तो वह आगे चलकर समाज एवं राष्ट्र में अपना सकारात्मक योगदान देने में सक्षम होगा। प्रोजेक्ट संकल्प’’ इसी कड़ी में ‘‘ एक महत्वपूर्ण प्रयास है।     प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि इस पहल के अंतर्गत छात्रावासों में अध्ययनरत बच्चों के शैक्षणिक अध्ययन के साथ-साथ रचनात्मक गतिविधियों, अनुशासन, जीवन कौशल एवं व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। छात्र-छात्राओं को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण भोजन, नियमित शैक्षणिक सहयोग तथा खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसमें हैदराबाद के सुप्रसिद्ध प्रेरक वक्ता श्री नंद जी द्वारा निस्वार्थ भाव से प्रशिक्षण दिया जा रहा है।     प्रशिक्षण सत्र के दौरान नंदा जी ने छात्रावास अधीक्षकों को छात्रावास-आश्रमों में सकारात्मक सोच विकसित करने के सामान्य, परंतु प्रभावी तरीके बताएं। उन्होंने बच्चों को अनुशासन में रखने, उनमें अच्छी आदतें विकसित करने, अपने कार्य पर पूर्ण फोकस करने, समय का महत्व समझने, अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने, नियमित व्यायाम करने, स्वयं भी खुश रहने एवं अपने सहपाठियों को भी खुश रखने तथा सबके साथ अच्छे मधुर संबंध बनाने के गुर बताएं। छोटी सकारात्मक पहल बच्चों के जीवन में ला सकती है बड़ा परिवर्तन       प्रमुख सचिव बोरा ने बताया कि प्रोजेक्ट संकल्प के प्रथम चरण के अंतर्गत 16 से 18 अक्टूबर 2025 को रायपुर में सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास के साथ एक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। छात्रावास-आश्रमों से जुड़ी सामान्य एवं व्यवहारिक समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई एवं उनके सकारात्मक सरल एवं प्रभावी निदान नंद जी द्वारा बताए गए। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों के मानसिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक विकास को लेकर उपयोगी सुझाव साझा किए गए। इसी कड़ी में आज पोस्ट मैट्रिक छात्रावास-आश्रमों के अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर बोरा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि “एक छोटी-सी सकारात्मक पहल भी बच्चों के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकती है।’’        उल्लेखनीय है कि आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा संचालित छात्रावास-आश्रमों में अध्ययनरत बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु विभाग द्वारा समय-समय पर अनेक प्रयास किए जाते रहे हैं। विभागीय मंत्री जी एवं वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा समय-समय पर छात्रावास-आश्रमों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाती है, ताकि बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी न रहे। बच्चों में पैदा हुआ नया उत्साह एवं आत्मविश्वास        प्रोजेक्ट संकल्प के माध्यम से किए जा रहे प्रयासों से अब छात्रावासों में रह रहे बच्चों में नया उत्साह एवं आत्मविश्वास पैदा हुआ है। अब वे आगे बढ़ते हुए न केवल शैक्षणिक उपलब्धियाँ हासिल कर रहे हैं, बल्कि जीवन के रंग और खुशियाँ भी सीख रहे हैं। शिक्षक एवं छात्रावास अधीक्षक बच्चों को सीखने-सिखाने की संस्कृति से जोड़ते हुए उन्हें समाज का जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।        आदिम जाति विकास विभाग का यह प्रयास विशेष रूप से दूरस्थ और आदिवासी अंचलों के बच्चों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। इस अभिनव पहल से शिक्षा को संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच के साथ जोड़ने से छात्रावास भी बच्चों के खुशहाल जीवन की मजबूत नींव बन रहा हैं।