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भोपाल में प्रॉपर्टी 20 से 100 प्रतिशत तक होगी महंगी

भोपाल. भोपाल में आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तैयार की गई कलेक्टर गाइडलाइन में कई क्षेत्रों में प्रॉपर्टी की कीमतों में भारी वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है। शहर की करीब 500 से अधिक लोकेशन पर जमीन और प्रॉपर्टी के दामों में 50 से 100 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की तैयारी की गई है। हालांकि नई गाइडलाइन में लोकेशन की संख्या घटाकर 2,175 कर दी गई है, जबकि वर्तमान गाइडलाइन में 2,881 लोकेशन शामिल थीं। कई क्षेत्रों में सरकारी परियोजनाओं के कारण कीमतों में वृद्धि प्रस्तावित नहीं की गई है। 706 लोकेशन कम की गईं नई कलेक्टर गाइडलाइन में कुल 706 लोकेशन कम कर दी गई हैं। पहले जहां 2,881 लोकेशन शामिल थीं, वहीं अब केवल 2,175 लोकेशन को ही गाइडलाइन में रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार कई क्षेत्रों में सरकारी परियोजनाएं शुरू होने के कारण वहां किसी प्रकार की वृद्धि प्रस्तावित नहीं की गई है। कई इलाकों में 20 से 100 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कलेक्टर गाइडलाइन के प्रस्ताव के अनुसार शहर के कई प्रमुख क्षेत्रों में प्रॉपर्टी के दामों में बड़ी वृद्धि की तैयारी है। करोंद, पलासी, गांधीनगर, बैरागढ़, परवलिया सड़क, अयोध्या बायपास, आनंद नगर, रातीबड़, नीलबड़ और कोलार सहित कई क्षेत्रों में जमीन की कीमतों में 20 से 100 प्रतिशत तक वृद्धि प्रस्तावित की गई है। इसके अलावा रायसेन रोड, विदिशा रोड, बैरसिया रोड, नर्मदापुरम रोड, भोपाल-इंदौर रोड, भोपाल बायपास, बंगरसिया, 11 मील और कटारा हिल्स जैसे क्षेत्रों में भी कीमतों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। 621 लोकेशन पर 11 प्रतिशत वृद्धि का दावा पंजीयन और राजस्व अधिकारियों ने प्रस्ताव में 621 लोकेशन पर औसतन 11 प्रतिशत वृद्धि का दावा किया है। हालांकि जब यह प्रस्ताव पोर्टल पर अपलोड हुआ तो कई क्षेत्रों में इससे कहीं अधिक वृद्धि का प्रस्ताव सामने आया। अभी तक नहीं आई आपत्ति कलेक्टर गाइडलाइन का प्रस्ताव दो दिन पहले ही आम लोगों के लिए पोर्टल पर अपलोड किया गया है। जानकारी के अभाव में अब तक इस पर एक भी ऑनलाइन आपत्ति दर्ज नहीं हुई है। अगर, इसी तरह कोई आपत्ति नहीं आती है, तो अधिकतम वृद्धि वाले प्रस्ताव को केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेज दिया जाएगा। सर्वर ठप होने से रजिस्ट्री में परेशानी प्रॉपर्टी की कीमतों में संभावित वृद्धि को देखते हुए लोग जल्दी रजिस्ट्री कराने के लिए पंजीयन कार्यालय पहुंच रहे हैं। हालांकि सोमवार को सर्वर ठप होने के कारण कई लोगों को रजिस्ट्री के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

मध्य प्रदेश में प्रॉपर्टी की कीमतें अब AI और संपदा टू सर्वे से होंगी निर्धारित

 भोपाल  मध्य प्रदेश में नई कलेक्टर गाइडलाइन बनाने की तैयारी शुरू हो गई है, इसके लिए एआई व संपदा टू सॉफ्टवेयर की मदद से सर्वे किया जा रहा है। इस सर्वे में पता लगाया जा रहा है कि किस जिले में कहां पर अधिक दाम पर रजिस्ट्रियां हुई हैं। इसी डाटा के आधार पर ही प्रापर्टी के दाम तय किए जाएंगे। बता दें कि अभी ऑनलाइन माध्यम से सर्वे किया जा रहा है, इसके बाद राजस्व व पंजीयन अधिकारी जमीनी स्तर पर भी उन क्षेत्रों का सर्वे करेंगे, जहां पर तेजी से प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त की जा रही है। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन बनाने के महानिरीक्षक पंजीयन ने आदेश जारी कर दिए हैं, जिसके तहत फरवरी तक जिला मूल्यांकन समितियों को गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार कर केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजना है। सैटेलाइट इमेज निकाली जा रही अधिकारी खंगाल रहे डाटा सभी जिलों में कलेक्टर गाइडलाइन तय करने के लिए राजस्व अधिकारी और सब रजिस्ट्रार पिछले पांच वर्ष का डाटा खंगाल रहे हैं। इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि किन क्षेत्रों में बढ़ी हुई दरों पर रजिस्ट्रियां हुई हैं। उन क्षेत्रों की सैटेलाइट इमेज निकाली जा रही है, जिससे यह पता लग सके कि वहां सिर्फ जमीन की खरीद-फरोख्त हुई है या फिर वहां पर निर्माण कार्य भी हुआ है। बता दें कि अभी तक दरें तय करने के लिए रजिस्ट्रियों को ही आधार बनाया जाता था, लेकिन अब इसके साथ सेटेलाइट इमेज, एआइ और फील्ड रिपोर्ट का विश्लेषण किया जा रहा है। अत्यधिक दरों पर हुईं चार लाख रजिस्ट्रियां मध्य प्रदेश में पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग चार लाख रजिस्ट्रियां कलेक्टर गाइडलाइन की तय दरों से अधिक पर हुईं। खरीदारों ने एक से 30 प्रतिशत दाम बढ़ाकर अत्यधिक दरों पर रजिस्ट्रियां कराईं थीं। रजिस्ट्रेशन और स्टाम्प विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार मध्य प्रदेश में डेढ़ लाख जगह ऐसी हैं, जहां सरकार द्वारा निर्धारित दाम से अधिक पर रजिस्ट्री की संख्या बढ़ी है। सर्वे करने में इन तकनीकों की ली जा रही है मदद     कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) – इसकी मदद से यह पता लगाने में आसानी होगी कि एक प्रमुख स्थान या क्षेत्र में पिछले एक वर्ष में कितना विकास कार्य हुआ है। उसी को दरें बढ़ाने के लिए आधार बनाया जाएगा।     सैटेलाइट इमेज – इसकी मदद से क्षेत्र का वास्तविक चित्र सामने आ जाएगा कि वहां पर खाली जमीन है या फिर बड़ी मात्रा में भवन निर्माण हुआ है। कितनी सड़कें बनाई गई हैं और किन क्षेत्रों से जुड़ रहीं हैं।     फील्ड रिपोर्ट – सभी जिलों के पंजीयकों द्वारा तैयार की गई फील्ड रिपोर्ट गाइडलाइन तय करने के लिए प्रमुख आधार रहती है। इससे स्पष्ट होगा कि उक्त क्षेत्रों में तय दरों से कितनी अधिक दरों पर रजिस्ट्रियां हुई हैं। सर्वे कर प्रस्ताव तैयार किया जाना है     मध्य प्रदेश के सभी जिला पंजीयकों को नई कलेक्टर गाइडलाइन की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसके लिए प्राथमिक तौर पर सर्वे कर प्रस्ताव तैयार किया जाना है, जिसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। – अमित तोमर, महानिरीक्षक, पंजीयन मप्र