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इन मार्गों पर नहीं होंगे धरना-प्रदर्शन व जुलूस, पुलिस आयुक्त ने लगाया प्रतिबंध

रायपुर राजधानी रायपुर की हेवी ट्रैफिक वाली सड़कों पर यातायात व्यवस्था बनाए रखने को लेकर रायपुर कमिश्नरेट ने नया आदेश जारी किया है. 4 प्रमुख मार्गों पर अब रैली, जुलूस और प्रदर्शन जैसे सार्वजनिक आयोजनों पर पाबंदी लगा दी गई है. अगले दो महीने तक के लिए आदेश लागू किया गया है.   जारी आदेश के मुताबिक, सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक बीएनएसएस 2023 की धारा 163 तक सार्वजनिक आयोजन पर प्रतिबंध रहेगा. आदेश का आदेश का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी. पुलिस कमिश्नर ने आम नागरिकों और संगठनों से अपील की है कि वे शहर में शांति और सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन का सहयोग करें. इन सड़कों पर नहीं निकाल सकेंगे रैली 1. जी.ई. रोड: शारदा चौक से जयस्तंभ चौक होते हुए फूल चौक तक. 2. एम.जी. रोड: जयस्तंभ चौक से कोतवाली चौक तक. 3. सदर बाजार रोड: कोतवाली से सत्ती बाजार चौक तक. 4. एम.जी. रोड: मौलाना चौक से शारदा चौक तक.

भोपाल के पास मंडीदीप में हाई टेंशन लाइन को लेकर विरोध, नहार स्पिनिंग मिल्स के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन

भोपाल के पास मंडीदीप में हाई टेंशन लाइन को लेकर विरोध, नहार स्पिनिंग मिल्स के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन मंडीदीप,रायसेन  नहार स्पिनिंग मिल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अपनी दूसरी यूनिट खोलने की तैयारी के तहत नेशनल हाईवे नंबर 46 को क्रॉस करते हुए हाई टेंशन पावर लाइन ले जाए जाने का स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया है। इस प्रस्तावित हाई टेंशन लाइन को लेकर क्षेत्र के मजदूरों और रहवासियों ने अपनी जान को खतरा बताते हुए आपत्ति जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे के ऊपर से और रिहायशी इलाके के नजदीक से गुजरने वाली हाई टेंशन लाइन से हमेशा हादसे की आशंका बनी रहेगी। इसी चिंता को लेकर आज मंडीदीप इलाके में नहार कंपनी के खिलाफ मजदूरों और स्थानीय नागरिकों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने अपने हाथों में तिरंगा झंडा लेकर वंदे मातरम के नारे लगाए और देशभक्ति गीत गाकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि कंपनी इस हाई टेंशन लाइन को वैकल्पिक और सुरक्षित मार्ग से ले जाए या फिर स्थानीय लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस योजना पर पुनर्विचार करे।  इस पूरे मसले पर नहार कंपनी से बात करनी चाही तो उन्होंने इस पर कुछ भी बोलने से बचते हुए मिलने से ही इनकार कर दिया. सवाल ये है कि क्या किसी भी फैक्ट्री के ऊपर से हाइ पावर एक्सटेंशन लाइन ले जाई जा सकती है..? अगर भविष्य में इससे कोई दुर्घटना होती है तो जिम्मेदार कौन होगा..? क्या इसके लिए नेशनल हाइवे ऑटोरिटी और पावर डिपार्टमेंट से परमिशंस ली गई हैं..? क्या जिस प्राइवेट लैंड पर विशालकाय गड्ढे किए जा रहे हैं उन लैंड ओवर्स की परमिशन ली गई हैं..?  और सबसे बड़ा सवाल अलग फैक्ट्री डालने के लिए कंपनी अलग पावर स्टेशन क्यों नहीं बना रही है.?? इस तरह के कई सवाल हवा में तैर रहे हैं और जल्द ही इन सवालों की जवाबदेही तय नहीं हुई तो भविष्य में इस हाइटेंशन लाइन की वजह से संभावित हादसों की आशंका बढ़ती हुई नजर आ रही है. प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से भी हस्तक्षेप की मांग की है ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना से पहले इस मामले का समाधान निकाला जा सके। फिलहाल विरोध शांतिपूर्ण रहा और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति नहीं बनी…!