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दिल्ली में पंजाब कांग्रेस की बड़ी हलचल! वरिष्ठ नेता की एंट्री से बढ़ी सियासी गर्मी

पटियाला पंजाब कांग्रेस के भीष्म पितामह और पार्टी के ‘ब्रेन’ के रूप में माने जाने वाले पूर्व वित्त मंत्री तथा पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष लाल सिंह ने दिल्ली पहुंचकर कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच पंजाब की मौजूदा राजनीति को लेकर गंभीर चर्चा हुई।   पंजाब कांग्रेस की वर्तमान राजनीति में लाल सिंह सबसे पुराने नेताओं में से हैं। उन्होंने 1977 के बाद बने सभी कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों के साथ बतौर कैबिनेट मंत्री काम किया है। उनके पास कांग्रेसी राजनीति का 50 वर्षों का अनुभव है। इन वर्षों के दौरान कांग्रेस में कई बार टूट-फूट हुई कभी तिवाड़ी कांग्रेस बनी, कभी एन.सी.पी. जैसी पार्टियों का गठन हुआ पर लाल सिंह ऐसे नेता रहे जो हर परिस्थिति में गांधी परिवार की अगुवाई वाली कांग्रेस के साथ डटे रहे। यही कारण है कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी उनका विशेष सम्मान करते हैं। लाल सिंह भी सदैव पार्टी की मजबूती के लिए हाईकमान को महत्वपूर्ण सलाह देते रहे हैं। कांग्रेस पार्टी का तरनतारन उपचुनाव में चौथे नंबर पर पहुंचना पार्टी के लिए बेहद चिंताजनक है। मौजूदा राजनीतिक माहौल में लोग आम आदमी पार्टी की सरकार से काफी निराश हैं। अकाली दल दोबारा खड़े होने की कोशिशों में लगा हुआ है, पर अभी तक वह सफल नहीं हो पाया। वहीं भाजपा की केंद्र सरकार के कुछ फैसलों से पंजाब में पार्टी की राजनीतिक स्थिति कमजोर होती दिख रही है। ऐसे माहौल में लाल सिंह जैसे वरिष्ठ नेता का राहुल गांधी से मुलाकात करना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस पंजाब को लेकर बेहद गंभीर है। वर्तमान समय में लाल सिंह ही ऐसे नेता हैं जो पंजाब के सभी 117 विधानसभा हलकों की राजनीति को गहराई से समझते हैं। पार्टी 2027 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए उनके अनुभव का लाभ लेना चाहती है, क्योंकि चुनावों में बहुत कम समय बचा है और सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी गतिविधियां तेज कर चुकी हैं। आम आदमी पार्टी जहां विकास कार्यों के लिए ग्रांटों का वितरण कर रही है, वहीं गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शहीदी वर्षगांठ को बड़े स्तर पर मना कर अकाली दल के पंथक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश भी कर रही है। कांग्रेस पंजाब में संगठन निर्माण अभियान चला रही है। सभी जिलों के नए अध्यक्ष नियुक्त किए जा चुके हैं। अब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का पुनर्गठन होना है और पंजाब को नया प्रदेशाध्यक्ष मिलने वाला है। ऐसे में लाल सिंह का दिल्ली जाकर हाईकमान से मिलना पंजाब की कांग्रेस राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पंजाब की सियासत में भूचाल: कांग्रेस के भीतर गुटबाज़ी हुई तेज़

जालंधर संगठन सृजन अभियान के तहत जिला कांग्रेस शहरी के प्रधान पद को लेकर मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा। जिला कांग्रेस शहरी में “कुर्सी का संग्राम” को लेकर सग्राम चल रहा है और गुटबाजी से हाईकमान चिंतित है। इसी के चलते आब्जर्वर व सह आब्जर्वरों ने फिर कमान संभालनी पड़ी है। कांग्रेस भवन जालंधर में आज ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की तरफ से नियुक्त आब्जर्वर राजेश लिलोठिया ने सभी दावेदारों के साथ एक बार फिर अहम बैठक कर पैनल गठन को लेकर मंथन किया। बैठक में पंजाब प्रदेश कांग्रेस की ओर से नियुक्त सह आब्जर्वर टीना चौधरी, विकास सोनी और शाम सुंदर अरोड़ा भी मौजूद रहे।मीटिंग के अलावा आब्जर्वर और सह आब्जर्वरों ने कई पार्षदों, विभिन्न सेल के पदाधिकारियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात की। इससे संगठनात्मक हालात का जमीनी स्तर पर अंदाजा लगाया जा सके। हालांकि आज भी कई दावेदार अपनी-अपनी लिस्टें और समर्थकों के साथ दबदबा दिखाने में जुटे दिखाई दिए। हाईकमान किस पर भरोसा जताएगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। अब इतना तय है कि इस खींचतान ने कांग्रेस संगठन की अंदरूनी कमजोरी और गुटबाजी को पूरी तरह उजागर कर दिया है। आज आब्जर्वर से मीटिंग करने वाले दावेदारों में जिला कांग्रेस शहरी के प्रधान राजिंदर बेरी, प्रदेश यूथ कांग्रेस के महासचिव दीपक खोसला, प्रदेश कांग्रेस के महासचिव मनु बडिंग, महिला कांग्रेस की कोऑर्डिनेटर डा. जसलीन सेठी, पूर्व पार्षद पति रवि सैनी, पार्षद बंटी नीलकंठ, पार्षद पवन कुमार, कांग्रेस व वाल्मीकि नेता राजेश भट्टी और राजकुमार राजू, युवा नेता संजय सहगल, दिनेश कुमार, हामिद मसीह व अन्य मौजूद रहे। वहीं 16 में से किसी एक को जिला प्रधान बनाए जाने की स्थिति में बाकी 15 दावेदारों में गुटबाजी और धड़ेबंदी की आशंका जताते हुए आब्जर्वर लिलोठिया ने सभी दावेदारों को स्पष्ट अनुशासन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मजबूती और संगठन की एकजुटता सर्वोपरि है। किसी एक के प्रधान बनने पर बाकी दावेदारों को अनुशासन में रहते हुए कंधे से कंधा मिलाकर काम करना होगा। वहीं राजेश लिलोठिया द्वारा प्रत्येक दावेदार से 100-100 समर्थकों की लिस्ट सौंपने के मैसेज के बाद कई दावेदारों ने लिस्टों को मोबाइल नंबरों सहित ऑब्जर्वर को सौंप दिया। उन्होंने साफ कर दिया कि इन समर्थकों से कभी भी संपर्क कर फीडबैक लिया जा सकता है। कुछ दावेदारों ने लिस्ट तत्काल सौंप दी, जबकि कुछ ने 1-2 दिन का समय मांगा। ब्लॉक प्रधानों की राय, ”बेरी को रिपीट करो” आब्जर्वर राजेश लिलोठिया और सह आब्जर्वरों ने जालंधर नॉर्थ, सैंट्रल, वैस्ट और कैंट विधानसभा हलकों के ब्लॉक कांग्रेस प्रधानों में शामिल राजेश जिंदल टोनू, दीपक शर्मा मोना, रछपाल जाखू, हरमीत सिंह, जगदीप सिंह पवार, प्रेम नाथ के साथ भी बैठक की गई। जबकि नॉर्थ हलका-1 के ब्लाक प्रधान जगजीत सिंह कंबोज के अमेरिका में होने के कारण वह मौजूद नहीं हुए। इस दौरान कई ब्लॉक प्रधानों ने साफ राय दी कि 2027 के विधानसभा चुनाव अब महज डेढ़ साल दूर हैं। ऐसे समय जिला प्रधान में बदलाव करना उचित नहीं होगा। उनका कहना था कि मौजूदा जिला प्रधान राजिंदर बेरी को ही रिपीट किया जाए। उन्होंने दलील दी कि यदि अगले विधानसभा चुनाव में बेरी को टिकट मिलती है तो अन्य दावेदारों का पैनल हाईकमान के पास पहले से मौजूद है। उस समय किसी नए चेहरे को जिला प्रधान बनाया जा सकता है। हालांकि, कुछ दावेदारों ने बाद में ऑब्जर्वर से मिलकर इस पर आपत्ति भी जताई। उनका कहना था कि मौजूदा ब्लॉक प्रधानों की नियुक्ति खुद राजिंदर बेरी ने की है, इसलिए उनका झुकाव और समर्थन बेरी के पक्ष में होना स्वाभाविक है।