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खालिस्तान संगठन की धमकी- ‘यह एक ट्रेलर, ट्रेन में भी हो सकता था धमाका’

चंडीगढ़/फतेहगढ़ साहिब. सरहिंद में हुए रेल ब्लास्ट की जिम्मेदारी खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स नाम के अलगाववादी संगठन ने इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट कर ली है। एक लेटर हेड पर गुरमुखी में टाइप एक चिट्ठी पोस्ट की गई है, जिसमें ब्लास्ट की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्र सरकार को चुनौती दी गई है। चिट्ठी के नीचे रणजीत सिंह जम्मू नाम लिखा है और हस्ताक्षर भी है। मूल रूप से जम्मू के रहने वाले रणजीत सिंह ने इस अलगवादी संगठन की शुरुआत आईएसआई की मदद से की थी। इसे साल 2008 में वांछित आतंकवादी घोषित किया गया था। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, रणजीत सिंह काफी समय से पाकिस्तान में शरण लिए हुए है। चिट्ठी में क्या लिखा है वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह। आज सरहिंद मालगाड़ी में हुए धमाके की जिम्मेदारी खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स लेती है। हम आपको बताना चाहते हैं कि यह धमाका पैसेंजर ट्रेन में भी किया जा सकता था, लेकिन हमारा इरादा किसी को कोई बेवजह नुकसान पहुंचाना नहीं था। यह एक ट्रेलर था, जो हमने खालिस्तान घोषणा की 40वीं सालगिरह पर भारत सरकार को दिखाया और बताया कि खालिस्तान के लिए जंग अभी भी जारी है और जारी रहेगी। हम न चैन से बैठेंगे और न तुम्हें बैठने देंगे, यह लड़ाई खालिस्तान की आजादी तक जारी रहेगी और हमारे एक्शन तुम्हारी नींद खराब करते रहेंगे। शहीदों को प्रणाम खालिस्तान जिंदाबाद गुरु पंथ का दास रणजीत सिंह जम्मू मुख्य सेवादार- खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स बता दें कि सरहिंद क्षेत्र में रेलवे लाइन पर देर रात बड़ा धमाका हुआ था। यह ब्लास्ट फतेहगढ़ सहिब-सरहद रेलवे स्टेशन से चार किलोमीटर दूर फ्रेट कॉरिडोर रेलवे लाइन पर हुआ था। यह घटना रात करीब 11 बजे उस दौरान घटी जब जब एक मालगाड़ी फ्रंट कॉरिडोर रेल लाइन से गुजर रही थी। जानकारी के मुताबिक, यह नई रेलवे लाइन विशेष रूप से मालगाड़ियों के संचालन के लिए बनाई गई है। जैसे ही मालगाड़ी का इंजन खानपुर फाटकों के पास पहुंचा, तभी अचानक जोरदार धमाका हो गया। धमाके के कारण रेलवे लाइन का करीब 12 फीट हिस्सा पूरी तरह उड़ गया।

फतेहगढ़ साहिब रेल ब्लास्ट में ब्रेक टेस्ट के लिए घटाई स्पीड से टला बड़ा हादसा

अंबाला. गणतंत्र दिवस से करीब 60 घंटे पहले पंजाब के सरहिंद रेलवे स्टेशन के निकट मालगाड़ी को उड़ाने के लिए रखे गए विस्फोटक से नुकसान इसलिए कम हुआ, क्योंकि लोको पायलट ने ब्रेक टेस्ट के लिए रफ्तार घटाई थी। यदि गाड़ी पूरी गति में होती तो बड़ा नुकसान हो सकता था। इस ट्रैक पर 100 किमी प्रति घंटा की गति से मालगाड़ी दौड़ सकती है। यदि ऐसा होता तो मालगाड़ी पलट सकती थी। यह मालगाड़ी बिहार के धनबाद से कोयला लेकर मंडी गोबिंदगढ़ पहुंची थी। खाली रैक फिर से वापस ले जाया जा रहा था। 58 डिब्बों की मालगाड़ी से करीब 18 डिब्बे धमाका होने बाद भी आगे निकल गए और फिर लोको पायलट ने रोक कर चेक किया। कुछ देर के बाद लोको पायलट धीरे से मालगाड़ी को आगे ले गया और अगले स्टेशन पर जाकर सूचना कंट्रोल में दी। रेल अधिकारियों का मानना है कि यदि गाड़ी की स्पीड अधिक होती तो पटरी टूटने के बाद मालगाड़ी पलटने का खतरा अधिक हो जाता। लोको पायलट की सूचना के बाद करीब 10 मालगाड़ियों को रोक दिया गया, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी। उत्तर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के डीआइजी अंबाला मंडल के अधिकारियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। इस घटना से जहां इंजन क्षतिग्रस्त हुआ, वहीं दो से तीन स्लीपर भी टूटे हैं और पटरी भी क्षतिग्रस्त हुई है। लोको पायलट हरिंद्र कुमार को हल्की चोटें आई हैं, जबकि सहायक लोको पायलट आनंद प्रकाश यादव ठीक हैं। 50 की स्पीड में पहुंची थी 25 किमी तक मंडी गोबिंदगढ़ से खाली होने के बाद साइडिंग पर आई और जब फिर से ढुलाई के लिए जा रही थी तो गाड़ी कि स्पीड 40 से 50 किमी प्रतिघंटा की थी। नियम है कि जब भी मालगाड़ी फिर से चलाई जाती है तो कुछ किमी दौड़ाने के बाद गाड़ी की रफ्तार घटाई जाती है। ब्रेक टेस्ट के बाद गाड़ी की रफ्तार 100 किमी कर दी जाती है। साइडिंग से गाड़ी चलने के बाद मालगाड़ी की स्पीड 50 किमी थी, ब्रेक टेस्ट किया तो यह आधी हो गई। तभी धमाके की आवाज आई और लोको पायलट का कैबिन थोड़ा क्षतिग्रस्त हो गया। लोको पायलट जब तक समझता तब तक 18 डिब्बे आगे निकल चुके थे। दो कंपनियां आरपीएफएस की संभालेंगी कमान गणतंत्र दिवस को लेकर आरपीएफएस की दो कंपनियां अंबाला रेल मंडल में भेजी हैं। यह यहां से विभिन्न स्टेशनों के लिए रवाना कर दी हैं। स्टेशनों पर चेकिंग अभियान जारी है।