samacharsecretary.com

माँ मोटी माता परिसर में ताप्ती–नर्मदा रेल लाइन को लेकर बैठक संपन्न हुई

  बड़वानी नरेश रायक ताप्ती नर्मदा रेल लाइन समिति के केंद्रीय संयोजक दामोदर अग्रवाल की अध्यक्षता में माँ मोटी माता परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में अवगत कराया गया कि खंडवा–अलीराजपुर रेलवे लाइन के सर्वे कार्य पूर्ण हो चुके हैं तथा वृहद परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। बैठक में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के सहयोग हेतु आभार व्यक्त किया गया, जिनमें झाबुआ–अलीराजपुर सांसद अनिता नागरसिंह चौहान, केंद्रीय राज्यमंत्री एवं धार सांसद सावित्री ठाकुर, खरगोन–बड़वानी सांसद गजेंद्र पटेल, खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल तथा राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी शामिल हैं। बैठक में विश्वास व्यक्त किया गया कि शीघ्र ही रेल लाइन को स्वीकृति प्राप्त होगी और बड़वानी जिलेवासियों का रेल यात्रा का सपना साकार होगा। रेल लाइन से क्षेत्र को संभावित लाभ   सस्ती और सुगम यात्रा सुविधा – विद्यार्थियों, मरीजों व श्रमिकों को बड़े शहरों तक आसान आवागमन।  व्यापार एवं कृषि को बढ़ावा – कपास, मिर्च, सोयाबीन सहित स्थानीय उत्पादों का तेज परिवहन। रोजगार के अवसर – निर्माण कार्य से लेकर संचालन तक स्थानीय युवाओं को रोजगार।  स्वास्थ्य व शिक्षा में सुविधा – इंदौर, खंडवा, धार आदि शहरों तक शीघ्र पहुँच।  पर्यटन विकास – क्षेत्र के धार्मिक व प्राकृतिक स्थलों तक पहुँच आसान। इस अवसर पर सर्वश्री अमित शर्मा, राजेंद्र देवड़े, नारायण वर्मा, भगवती प्रसाद कुमरावत, दीपक जेमन, जगन्नाथ गुप्ता, ताराचंद शर्मा, वीरेंद्र रावत, अशोक शर्मा, संजय माले, संतोष गुप्ता, महेश धनगर, बालकृष्ण सोनगरा, नितिन बद्रीलाल अग्रवाल एवं राजेश राठौड़ सहित अनेक नागरिक उपस्थित थे। बैठक में उपस्थित नागरिकों ने एक स्वर में कहा कि यह रेल परियोजना बड़वानी जिले के समग्र विकास की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

मध्य प्रदेश की अहम रेल लाइन: तीन जिलों को जोड़कर इंदौर से जबलपुर का सफर होगा आसान

इंदौर इंदौर के मांगलिया क्षेत्र में इंदौर-बुधनी रेल लाइन का कार्य प्रारंभ हो गया है। यहाँ के खेतों और खलिहानों में रेलवे के लिए ब्रिज, अंडरपास तथा ट्रैक का निर्माण किया जा रहा है। कुल 205 किलोमीटर लंबी इस लाइन के बन जाने से एक हजार से अधिक कस्बे और गाँव सीधे तौर पर रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। तय समयसीमा की तुलना में यह कार्य काफी पिछड़ चुका है, परंतु अब पूरी लाइन को पूर्ण करने का लक्ष्य वर्ष 2030 निर्धारित किया गया है। इंदौर, देवास और सीहोर जैसे तीन जिलों को जोड़ने वाली यह मध्य प्रदेश की एक बड़ी रेल परियोजना है, जो इंदौर से जबलपुर के बीच की दूरी को कम करेगी। जिन गांवों से यह लाइन गुजर रही है, वहाँ के किसान इस योजना का विरोध कर रहे थे। इस कारण प्रोजेक्ट के प्रारंभ होने में कई बाधाएं आईं, लेकिन अब अधिकांश गांवों में भू-अर्जन की प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है और निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है। इस परियोजना का सर्वाधिक विरोध पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विधानसभा क्षेत्र में देखा गया था। इंदौर-बुधनी रेल परियोजना में हो रहे विलंब का विषय लोकसभा में भी उठाया जा चुका है। इंदौर के मांगलिया गाँव और बुधनी के बीच इस नई रेल लाइन के कार्य को 3261.82 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति दी गई है। इस बार के रेल बजट में इस प्रोजेक्ट के लिए सर्वाधिक राशि का प्रावधान किया गया है। अब तक इस परियोजना पर लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं, जिसमें से अधिकांश राशि मुआवजे के वितरण में खर्च हुई है। सांसद शंकर लालवानी के अनुसार अधिकारियों को निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं और रेलवे की समीक्षा बैठकों में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा है।    प्रोजेक्ट से फायदा यह फायदा – इंदौर से मुंबई और दक्षिण भारत के यात्रा समय में कमी आएगी। – भोपाल और इटारसी के व्यस्त मार्ग (घाट सेक्शन बुदनी से बरखेड़ा ) को बायपास कर बुधनी को इंदौर से सीधे जोड़ना। – यह रेल लाइन बुधनी के मौजूदा यार्ड से शुरू होकर इंदौर के पास पश्चिम रेलवे के मांगलिया गांव स्टेशन से जुड़ेगी। – रेल लाइन सीहोर, देवास एवं इंदौर जिलों को जोड़ेगी। किसानों को अपनी उपज बड़े शहरों तक लाने में आसानी होगी। – यह रेललाइन नसरुल्लागंज, खातेगांव और कन्नौद जैसे कस्बों व गांवों को जोड़ेगी। इन क्षेत्रो में अभी वर्तमान में कोई रेल संपर्क नहीं हैं।    

मध्यप्रदेश से महाराष्ट्र तक इंदौर-मनमाड़ रेल, रेल मंत्रालय ने अधिसूचना जारी, मुआवजे पर विवाद

इंदौर  मध्यप्रदेश से महाराष्ट्र तक प्रस्तावित इंदौर-मनमाड़ रेलवे लाइन के लिए रेल मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर दी है। अगले 30 दिन में रेलवे लाइन के लिए होने वाले भूमि अधिग्रहण पर दावे और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। परियोजना में इंदौर जिले की तहसीलों के 19 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। किसान नेता हंसराज मंडलोई ने बताया कि इंदौर-मनमाड़ रेल परियोजना में जहां महाराष्ट्र सरकार चार गुना मुआवजा दे रही है, वहीं प्रदेश सरकार आदिवासी किसानों को केवल दोगुना मुआवजा दे रही है, जो असमानता को दर्शाता है। रेलवे प्रशासन इस परियोजना को अत्यंत महत्वपूर्ण बता रहा है। विभाग का दावा है कि इस लाइन के बनने से इंदौर-मुंबई की दूरी करीब 250 किलोमीटर कम हो जाएगी। वहीं तमिलनाडु से दिल्ली की दूरी लगभग 680 किलोमीटर घटेगी। महू से जम्मू-कश्मीर तक सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलने और गुजरात के यात्रियों को भी आवागमन में सुविधा बढ़ने का दावा किया जा रहा है। महू क्षेत्र के 18 गांव होंगे प्रभावित महू (डॉ. आंबेडकर नगर) से शुरू होकर महाराष्ट्र के मनमाड़ तक जाने वाली रेलवे लाइन में महू विधानसभा क्षेत्र के 18 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इन गांवों के करीब 243 आदिवासी किसानों की 131.49 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है। इंदौर-मनमाड़ रेल प्रोजेक्ट की कवायद वर्षों से चल रही है। वर्ष 2023 में टोकन राशि के रूप में दो करोड़ रुपये मिले थे। मप्र के हिस्से में डीपीआर-सर्वे का काम किया गया। काम जारी रखने के लिए 2024 के बजट में एक हजार रुपये की टोकन राशि दी गई थी। अब इस परियोजना के लिए 18 हजार 36 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। वर्तमान में इंदौर से देवास, उज्जैन, रतलाम, थांदला, दाहोद, गोधरा और वडोदरा होते हुए मुंबई जाना पड़ता है, जिसकी दूरी 828 किलोमीटर है। नई रेल लाइन बनने से 188 किलोमीटर की दूरी कम होगी और करीब पांच घंटे का समय बचेगा। प्रदेश में 905 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण रेलवे लाइन से सबसे ज्यादा फायदा मध्यप्रदेश को मिलेगा। कुल 309 किलोमीटर में से 170.56 किलोमीटर का हिस्सा मप्र में है। इसमें प्रदेश की कुल 905 हेक्टेयर निजी जमीन शामिल है। मप्र में बनने वाले 18 स्टेशनों में महू, कैलोद, कमदपुर, झाड़ी बरोदा, सराय तालाब, नीमगढ़, चिक्तायाबड़, ग्यासपुरखेड़ी, कोठड़ा, जरवाह, अजंटी, बघाड़ी, कुसमारी, जुलवानिया, सलीकलां, वनिहार, बवादड़ और मालवा स्टेशन शामिल हैं।