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राम मंदिर शिखर का धर्म ध्वज सात महाद्वीपों तक पहुंचेगा, ऐतिहासिक संकल्प लिया गया

अयोध्या   धर्म नगरी अयोध्या से सनातन संस्कृति और प्रभु श्रीराम की भक्ति को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी पहल शुरू हो चुकी है. राम मंदिर के शिखर पर स्थापित होने वाला पवित्र धर्म ध्वज अब केवल अयोध्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे दुनिया के सातों महाद्वीपों तक ले जाकर फहराने का संकल्प लिया गया है. इस विशेष अभियान की विधिवत शुरुआत अयोध्या में पूजा अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ की गई, जिसने इसे आध्यात्मिक के साथ साथ सांस्कृतिक आंदोलन का स्वरूप दे दिया है. अयोध्या में विधिविधान से हुआ अभियान का शुभारंभ राम जन्मभूमि अयोध्या में हुए इस आयोजन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा अर्चना के साथ धर्म ध्वज यात्रा का शुभारंभ किया गया. यह वही ध्वज है जो राम मंदिर के शिखर पर स्थापित होगा और अब उससे पूर्व पूरी दुनिया में सनातन धर्म की पहचान का संदेश लेकर निकलेगा. आयोजन में संत समाज और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस पहल को और भी पवित्र और ऐतिहासिक बना दिया. नरेंद्र कुमार कर रहे हैं नेतृत्व इस वैश्विक अभियान का नेतृत्व हरियाणा के हिसार निवासी और प्रसिद्ध पर्वतारोही नरेंद्र कुमार कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि यह धर्म ध्वज केवल एक कपड़ा या प्रतीक नहीं, बल्कि सनातन धर्म, प्रभु श्रीराम और भारतीय संस्कृति के मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है. उनका लक्ष्य है कि वर्ष 2026 के अंत तक इस पवित्र ध्वज को विश्व के सभी सात महाद्वीपों पर फहराया जाए, ताकि राम और सनातन संस्कृति का संदेश हर कोने तक पहुंचे. नेपाल से शुरू हुआ पहला चरण नरेंद्र कुमार के अनुसार इस यात्रा का पहला चरण नेपाल से शुरू किया गया. 21 दिसंबर को यात्रा की शुरुआत हुई और 29 दिसंबर को नेपाल में संबंधित महाद्वीप पर धर्म ध्वज फहराया गया. इसके बाद अब चरणबद्ध तरीके से अन्य महाद्वीपों की यात्रा की जाएगी. यह पूरी पहल अयोध्या से शिखर तक निकाली जा रही धर्म ध्वज यात्रा के रूप में आयोजित की जा रही है, जो अपने आप में एक अनूठा धार्मिक अभियान है. धार्मिक के साथ सामाजिक उद्देश्य भी राम मंदिर के शिखर पर लगने वाला यह धर्म ध्वज अब पूरी दुनिया में सनातन धर्म की पहचान बनेगा. इस अभियान का उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है. नरेंद्र कुमार का मानना है कि आज का युवा वर्ग भौतिकवाद की दौड़ में अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होता जा रहा है. इस यात्रा के माध्यम से युवाओं को धर्म, संस्कार और भारतीय मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. श्रीराम के आदर्शों का वैश्विक संदेश इस यात्रा का मूल उद्देश्य प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र और आदर्शों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाना है. नरेंद्र कुमार का कहना है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन आज भी समाज को त्याग, कर्तव्य, मर्यादा और सत्य का मार्ग दिखा सकता है. अयोध्या में संपन्न हुई पूजा अर्चना के बाद यह धर्म ध्वज यात्रा अब अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले चुकी है. आने वाले समय में जब यह ध्वज सातों महाद्वीपों पर फहराएगा, तब पूरी दुनिया में राम मंदिर और सनातन संस्कृति की भक्ति का संदेश गूंजेगा.

अयोध्या के बाद अब बंगाल! भव्य राम मंदिर और भाजपा कनेक्शन पर सियासी हलचल

कोलकाता ममता बनर्जी की अध्यक्षता वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) शासित राज्य पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं लेकिन उससे पहले वहां मंदिर-मस्जिद के बहाने ध्रुवीकरण की कोशिशें तेज हो गई हैं। पिछले महीने तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने राज्य के मुर्शीदाबाद जिले के बेलदांगा में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद का शिलान्यास किया था। उसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद दुर्गा आंगन और महाकाल मंदिर का शिलान्यास किया और अब नादिया जिले के शांतिपुर में ‘बंगाली राम’ थीम पर भव्य राम मंदिर बनाने की योजना सामने आई है, जो इन दिनों चुनावी राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है।   क्या है ‘बंगाली राम मंदिर’ की योजना? यह मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ का स्थल नहीं होगा, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को समर्पित एक बड़ा केंद्र बनेगा। मंदिर की अवधारणा 15वीं शताब्दी के प्रसिद्ध कवि कृतिबास ओझा की परंपरा पर आधारित है। कृतिबास ओझा ने ही संस्कृत रामायण का बंगला अनुवाद ‘श्रीराम पंचाली’ लिखा था, जिसे आज भी बंगाल के घर-घर में पढ़ा जाता है। इसी वजह से भगवान राम के इस रूप को ‘बंगाली राम’ या ‘हरा राम’ कहा जाता है। कौन बना रहा है मंदिर? रिपोर्ट के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण श्री कृतिबास राम मंदिर ट्रस्ट करवा रहा है। यह ट्रस्ट 2017 से ही इस परियोजना पर काम कर रहा है। रविवार को ट्रस्ट ने इस बात की जानकारी दी है कि मंदिर के लिए जमीन का अंतिम सर्वे पूरा कर लिया गया है। इसे परियोजना की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है। भाजपा से क्या कनेक्शन? इस ट्रस्ट के अध्यक्ष और शांतिपुर के पूर्व तृणमूल विधायक अरिंदम भट्टाचार्य हैं, जो अब भाजपा में हैं। हालांकि, उनका कहना है कि यह कोई चुनावी परियोजना नहीं है। उन्होंने बताया कि शांतिपुर भक्ति आंदोलन की धरती रही है और कृतिबास ओझा ने राम को बंगाली संस्कृति से जोड़ा। इसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए यहां भव्य राम मंदिर के निर्माण की योजना बनाई गई है, जो निर्माण के शुरुआती दौर में पहुंच चुका है। कितनी जमीन और कितनी लागत? उन्होंने बताया है कि इस मंदिर के लिए 15 बीघा जमीन स्थानीय निवासी लितन भट्टाचार्य और पूजा बनर्जी ने दान की है। इस परियोजना को करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मंदिर परिसर में केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि एक ऐसा केंद्र होगा, जहां सांस्कृतिक केंद्र, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज और शोध केंद्र भी होंगे। नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर से जुड़े वैदिक विद्वान अर्जुन दासतुला को इस मंदिर का संरक्षक बनाया गया है। क्यों उठ रहे हैं सवाल? स्थानीय निवासियों का कहना है कि शांतिपुर का संबंध कृतिबास ओझा की रामायण से जुड़ा है, इसलिए यहां राम मंदिर बनना चाहिए। कई लोग आगे भी जमीन दान करने की इच्छा जता रहे हैं लेकिन कुछ लोग इसकी टाइमिंग पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि मंदिर निर्माण ऐसे समय में सामने आया है जब बंगाल में मंदिर-मस्जिद की राजनीति तेज है, लेकिन ट्रस्ट का कहना है कि इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है और यह पूरी तरह धार्मिक और सांस्कृतिक परियोजना है। शांतिपुर का ऐतिहासिक महत्व वहीं, अरिंदम भट्टाचार्य ने कहा कि अगर सरकार सहयोग करना चाहे तो उसका स्वागत किया जाएगा। हुगली नदी के तट पर स्थित शांतिपुर भक्ति आंदोलन, चैतन्य महाप्रभु की परंपरा और कीर्तन संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में ‘बंगाली राम मंदिर’ इस क्षेत्र को एक नई धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान दे सकता है।  

अयोध्या में पीएम मोदी का संबोधन: राम मंदिर पर ध्वजारोहण, धर्म ध्वज बनेगा प्रेरणा

अयोध्या  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अयोध्या के राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज फहरा दिया है. इस मौके पर पीएम मोदी के साथ संघ प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद रहे. पीएम मोदी दिल्ली से अयोध्या से महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से हेलीकॉप्टर के जरिये साकेत महाविद्यालय पहुंचे. पीएम मोदी साकेत महाविद्यालय से सड़क मार्ग से रोड शो की शक्ल में सप्त मंदिर पहुंचे.पीएम मोदी सप्त मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद राम मंदिर पहुंचे और गर्भगृह के साथ ही मंदिर के प्रथम तल पर निर्मित राम दरबार में भी पूजा-अर्चना की. पीएम मोदी का यह दौरा आध्यात्मिक रूप से भी बेहद खास है. यह ध्वज सदियों के सपने साकार होने का प्रतीक- पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और पल की साक्षी बन रही है. आज संपूर्ण भारत, संपूर्ण विश्व राममय है. आज रामभक्तों के दिल में असीम आनंद है. सदियों के घाव भर रहे हैं. सदियों का संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहा है. आज उस यज्ञ की पूर्णाहूति है, जिसकी अग्नि पांच सौ वर्ष तक प्रज्ज्वलित रही. आज भगवान श्रीराम के गर्भगृह की अनंत ऊर्जा प्रतिष्ठापित हुआ.यह धर्मध्वज इतिहास के सुंदर जागरण का रंग है. इसका भगवा रंग, इस पर लगी सूर्यवंश की थाती रामराज की कीर्ति को. यह ध्वज संकल्प है, यह संकल्प से सिद्धि की भाषा है, यह सदियों के संघर्ष की सिद्धि है, सदियों के सपने का साकार स्वरूप है, राम के आदर्शों का उद्घोष है. संतों की साधना और समाज की सहभागिता की गाथा है. यह धर्मध्वज प्रभु श्रीराम के आदर्शों का उद्घोष करेगा, सत्यमेव जयते का उद्घोष करेगा. यह ध्वज 'प्राण जाए पर वचन न जाई' की प्रेरणा है.  राम मंदिर की धर्म ध्वजा की विशिष्टता और महत्व अयोध्या के राम मंदिर के 161 फीट ऊंचे  शिखर पर फहराई गई यह केसरिया धर्म ध्वजा अनेक मायनों में बेहद खास है. इस 10 फीट ऊंचे और 20 फीट लंबे धर्म ध्वज पर एक तेजस्वी सूर्य की छवि है, जो भगवान श्री राम की प्रतिभा और वीरता का प्रतीक है, इस पर कोविदार वृक्ष की छवि के साथ एक 'ॐ' अंकित है. यह विशेष धर्म ध्वजा गुजरात की एक पैराशूट निर्माण कंपनी द्वारा 25 दिनों में तैयार की गई है. इसे टिकाऊ पैराशूट-ग्रेड कपड़े और प्रीमियम सिल्क के धागों से बनाया गया है. यह ध्वज 60 किमी/घंटा तक की हवा, बारिश और धूप का सामना करने में सक्षम है, जो इसकी लंबी आयु सुनिश्चित करता है. ध्वज के आयाम-  लंबाई: 20 फीट चौड़ाई: 10 फीट ध्वजदंड की ऊंचाई: 42 फीट केसरिया रंग का महत्व: केसरिया (भगवा) रंग सनातन परंपरा में त्याग, बलिदान, वीरता और भक्ति का प्रतीक है. यह ज्ञान, पराक्रम, समर्पण और सत्य की विजय का भी प्रतिनिधित्व करता है. रघुवंश के शासनकाल में इस रंग का विशेष महत्व था. ध्वज पर अंकित पवित्र चिह्न: ध्वज पर तीन मुख्य चिह्न अंकित हैं: सूर्य, ऊँ, और कोविदार वृक्ष. कोविदार वृक्ष: यह चिह्न रघुवंश की परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. प्राचीन ग्रंथों में इसे पारिजात और मंदार के दिव्य संयोग से बना वृक्ष बताया गया है, जो आज के कचनार वृक्ष जैसा दिखता है. सूर्यवंश के राजाओं के ध्वज पर सदियों से इसी वृक्ष का प्रतीक अंकित होता रहा है. वाल्मीकि रामायण में भी भरत के ध्वज पर इसका वर्णन मिलता है. ऊँ: सभी मंत्रों का प्राण माना जाने वाला 'ऊँ', ध्वजा पर अंकित होकर संपूर्ण सृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है. सूर्य: सूर्यदेवता को भी ध्वज पर चिह्नित किया गया है, जो विजय का प्रतीक माने जाते हैं. माना जाता है कि यह पूरा ध्वज सूर्य भगवान का प्रतीक है.  जैसा सपना देखा था, उससे भी शुभकर मंदिर बन गया है- मोहन भागवत मोहन भागवत ने कहा कि इस दिन के लिए कितने राम भक्तों ने अपने प्राण अर्पण किए. मंदिर बनने में भी समय लगता है. यह धर्म ध्वज है. इसका भगवा रंग है. इस धर्मध्वज पर रघुकूल का प्रतीक कोविदार वृक्ष है. कोविदार वृक्ष दो देव वृक्षों के गुणों का समुच्चय है. धर्मध्वज को शिखर तक पहुंचाना है. आज हमारे संकल्प की पुनरावृत्ति का दिवस है. सबको शांति बांटने वाला, सुफल देने वाला भारतवर्ष हमें खड़ा करना है. जैसा सपना देखा था कुछ लोगों ने, बिल्कुल वैसा, उससे भी अधिक शुभकर यह मंदिर बन गया है. अयोध्या धाम में आज हर प्रकार की सुविधा- योगी आदित्यनाथ यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर पर धर्मध्वज के आरोहरण को नए युग का शुभारंभ बताया और कहा कि यह भव्य मंदिर 140 करोड़ भारतीयों की आस्था का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि राम मंदिर पर लहराता यह केसरिया ध्वज धर्म का, भारत की संकल्पना का प्रतीक भी है. संकल्प का कोई विकल्प नहीं. योगी आदित्यनाथ ने 'लाठी-गोली खाएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे' नारे का भी उल्लेख किया और कहा कि भगवान राम की पावन नगरी एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है. हर प्रकार की सुविधा आज अयोध्या धाम में है. उन्होंने अयोध्या में हुए विकास के काम भी गिनाए और जय जय श्रीराम के नारे के साथ अपनी बात पूरी की. राम मंदिर पर लहराया धर्म ध्वज राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज लहराने लगा है. पीएम मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज लहराया.

स्लीपर सेल हुई सक्रिय, अयोध्या-काशी और राम मंदिर पर था आतंकी हमला तय

लखनऊ अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक अयोध्या का राम मंदिर और वाराणसी आतंकियों के निशाने पर था, जिसके लिए उन्होंने मॉड्यूल तैयार कर रखा था. अयोध्या में भी आतंकी विस्फोट करना चाहते थे. इसके लिए गिरफ्तार हो चुकी शाहीन ने अयोध्या के स्लीपर मॉड्यूल को एक्टिवेट कर रखा था. अयोध्या में ये सारे घटनाक्रम को अंजाम तक पंहुचाते उससे पहले ही इन आतंकियों की गिरफ्तारी और विस्फोटक बरामद हो गए. सूत्र बताते हैं की दरअसल, लाल किला में ब्लास्ट करने की योजना नहीं थी. ऐसा अभी तक जांच में लग रहा है. क्योंकि विस्फोटक में टाइमर या किसी दूसरी चीज़ो का इस्तेमाल नहीं किया गया. हड़बड़ी और जल्दबाज़ी में ब्लास्ट हो गया. अस्पताल और भीड़भाड़ वाली जगहें निशाने पर थीं आतंकियों से पूछताछ में पता चला है की ये मॉड्यूल अस्पतालो को टारगेट करना चाहता था ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को नुकसान हो. इन आतंकियों के हिट लिस्ट में अस्पताल और भीड़ भाड़ वाली जगह थी. लगातार छापेमारी के बाद भारी मात्रा में विस्फोटक व हथियार बरामद करने के बाद सुरक्षा एजेंसीज के सामने इस वक़्त सबसे बड़ी चुनौती है बचे हुए 300 किलोग्राम के अमोनियम नाइट्रेट को बरामद करना. जिसका अभी तक पता नहीं चल पाया है. सूत्रों की माने तो 2900 किलोग्राम विस्फोटक अबतक एजेंसी बरामद कर चुकी है. 300KG अमोनियम नाइट्रेट की खोज जारी अलग-अलग जरियों से आया 300 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट अभी भी आतंकियों ने कहीं छिपा रखा है, जिसके लिए देश के कई हिस्सों में छापेमारी चल रही है. जांच और सुरक्षा एजेंसियां लगातार छापेमारी कर पूरे मॉड्यूल का खुलासा करने की कोशिश कर रही है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार आतंकियों तक ये विस्फोटक बांग्लादेश के रास्ते नेपाल और फिर हिन्दुस्ततान आया था. किसी फर्टीलाइजर से उक्त अमोनियम नाइट्रेट को चोरी से हासिल किया गया है. आतंकियों द्वारा कुल 3200 किलोग्राम की खेप आई है.  

इतिहास में नया अध्याय: राम मंदिर निर्माण हुआ पूरा, रामलला और अन्य भगवानों की भी प्रतिष्ठा

अयोध्या  पूरे विश्व में प्रभु राम के भक्तों में एक अलग ही उत्साह आज देखने को मिल रही है. अयोध्या में आखिरकार वह दिन आ गया. जब प्रभु राम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया है. राम मंदिर से जुड़ी एक बड़ी जानकारी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने साझा की है. चंपत राय ने बताया कि अयोध्या में बनने वाला प्रभु राम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया है. इसके अलावा राम मंदिर के साथ ही परकोटे में बनाए जा रहे सभी मुख्य मंदिरों में, जिसमें भगवान शंकर, भगवान गणेश, हनुमान जी, सूर्य, भगवती माता, माता अन्नपूर्णा, शेषअवतार मंदिर पूर्ण रूप से तैयार कर लिया गया है. इन मंदिरों का हो चुका है निर्माण इस पर ध्वज दंड एवं कलश भी स्थापित कर दिया गया है. सप्त मंडप में जितने भी मंदिर हैं, जिसमें महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त, निषादराज, माता शबरी, माता अहिल्या के मंदिर भी पूर्ण हो चुके हैं. इसके अलावा संत तुलसीदास जटायु गिलहरी की प्रतिमा भी स्थापित कर दी गई है. दरअसल, अयोध्या में 25 नवंबर को ध्वजारोहण का कार्यक्रम होना है, जिसके मौके पर 10000 विशेष मेहमान और खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में मौजूद रहेंगे. 25 नवंबर की वह तारीख है, जब राम मंदिर से प्रधानमंत्री मोदी राम मंदिर की पूर्णता का संदेश देंगे तो विश्व में बैठे राम भक्त भी उत्साहित होंगे. दर्शनार्थियों से जुड़े सभी कार्य पूरे चंपत राय ने स्पष्ट किया कि दर्शनार्थियों की सुविधा और व्यवस्था से जुड़े सभी कार्य पूरे कर दिए गए हैं. वहीं मानचित्र अनुसार सड़कें और फर्श पर पत्थर लगाने का काम एलएंडटी (L&T) द्वारा किया जा रहा है. साथ ही भूमि सौंदर्यीकरण और हरियाली का कार्य जारी है. जबकि 10 एकड़ में पंचवटी का निर्माण GMR कंपनी द्वारा तेज़ी से किया जा रहा है. सिर्फ प्रशासनिक व तकनीकी कार्य शेष ट्रस्ट महासचिव ने बताया कि ऐसे कार्य ही शेष हैं, जिनका सीधा संबंध जनता से नहीं है. जिसमें 3.5 किलोमीटर लंबी परिसर की चारदीवारी (बाउंड्री वॉल),ट्रस्ट कार्यालय भवन, अतिथि गृह, भव्य सभागार (ऑडिटोरियम) जैसे कार्य साल 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.  

रामलला के मंदिर में पूर्णता की गूंज — कलश व ध्वज स्थापना से संपन्न हुआ निर्माण कार्य

अयोध्या करीब 500 सालों के इंतजार के बाद अयोध्या राम मंदिर अब पूरी तरह से बनकर तैयार है. 2020 में इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ, जो कि अब समाप्त हो चुका है. राम मंदिर का उद्घाटन 22 जनवरी 2024 को किया गया. लेकिन निर्माण संबंधी कुछ कार्य अभी तक जारी थे. हालांकि, अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की तरफ से बताया गया कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़े सभी कार्य पूरे हो चुके हैं यानीमुख्य मंदिर, परकोटा के 6 मंदिर – भगवान शिव, भगवान गणेश, भगवान हनुमान, सूर्यदेव, देवी भगवती, देवी अन्नपूर्णा तथा शेषावतार मंदिर भी पूर्ण हो चुके हैं. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने की घोषणा राम मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने के साथ ही परकोटा के 6 मंदिरों पर ध्वजदण्ड और कलश स्थापित हो चुके हैं. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के सोशल मीडिया अकाउंट से यह पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि सभी श्रीराम भक्तों को यह जानकारी देते हुए हर्ष हो रहा है कि मंदिर निर्माण सबंधी सभी कार्य पूर्ण हो गए हैं. जटायु और गिलहरी की प्रतिमा स्थापित इसके अलावा, सप्त मण्डप अर्थात् महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषादराज, शबरी एवं ऋषि पत्नी अहल्या मंदिरों का भी निर्माण पूर्ण हो चुका है. सन्त तुलसीदास मंदिर भी पूर्ण हो चुका है. साथ ही, जटायु और गिलहरी की प्रतिमाएं स्थापित की जा चुकी हैं. दर्शनार्थी कार्य हुए पूरे जिन कार्यों का सीधा संबंध दर्शनार्थियों की सुविधा से है या व्यवस्था से है, वे सभी कार्य पूर्णत्व प्राप्त कर चुके हैं. मानचित्र अनुसार सड़कें एवं फ्लोरिंग पर पत्थर लगाने कार्य L&T द्वारा तथा भूमि सौन्दर्य, हरियाली और लैंड स्केपिंग कार्य सहित 10 एकड़ में पंचवटी निर्माण GMR द्वारा तीव्र गति से किए जा रहे हैं. वही कार्य अभी चल रहे हैं जिनका संबंध जनता से नहीं है – जैसे ३.5 किलोमीटर लंबी चारदीवारी, ट्रस्ट कार्यालय, अतिथि गृह, सभागार इत्यादि.  

त्रिनिदाद में राम मंदिर निर्माण की तैयारी, सरकार का भरोसा- पूरा साथ देंगे

त्रिनिदाद  कैरेबियन का एक छोटा-सा देश, समुद्र के बीच बसा हुआ. लेकिन वहां गूंजती है “सिय राममय सब जग जानी…”. बात हो रही है त्रिनिदाद और टोबैगो की. यहां हिंदू आबादी अच्छी-खासी है और भगवान राम के प्रति आस्था पीढ़ियों से चली आ रही है. इसी आस्था को और मजबूत करने के लिए देश की राजधानी में राम मंदिर बनाने की तैयारी हो रही है. त्रिनिदाद के जन सुविधा मंत्री बैरी पदारथ ने धार्मिक नेताओं के साथ बैठक में यह घोषणा की है कि सरकार इस मंदिर की योजना को पूरा समर्थन देगी. उन्होंने कहा कि  राम लला की पहल का हम स्वागत करते हैं और हम इसका समर्थन करते हैं. उन्होंने ये भी बताया कि दुनिया में जहां-जहां हिंदू संस्कृति बची है, उनमें त्रिनिदाद और टोबैगो की पहचान एक ‘रामायण देश’ के रूप में होती है. पर्यटन और संस्कृति- दोनों को मिलेगा फायदा सरकार इस राम मंदिर को सिर्फ पूजा की जगह नहीं, बल्कि एक पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी देख रही है. यहां होगा पूजा-पाठ, शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रम, हिंदू परंपराओं का संरक्षण और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना. सरकार का मानना है कि इससे देश की पहचान और मजबूत होगी और दुनिया भर के श्रद्धालु यहां आएंगे. ‘अयोध्या नगरी’ का भी खास प्रस्ताव न्यूयॉर्क की संस्था ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ राम मंदिर के संस्थापक प्रेम भंडारी ने एक और दिलचस्प प्रस्ताव दिया है कि यहां एक छोटी ‘अयोध्या नगरी’ बनाई जाए. खास तौर पर उन लोगों के लिए जो भारत की अयोध्या नहीं जा पाते. यह प्रस्ताव उन्होंने त्रिनिदाद की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर के सामने रखा है.अभी हाल के महीनें मई 2025 में  त्रिनिदाद-टोबैगो में अयोध्या के राम मंदिर की रामलला प्रतिमा की प्रतिकृति का अनावरण हुआ था. जब वह प्रतिमा पोर्ट ऑफ स्पेन पहुंची तो 10,000 से ज्यादा भक्तों ने उसका स्वागत किया था. यह बताता है कि यहां भगवान राम लोगों के दिलों में कितने गहरे बसे हुए हैं. भारत से रिश्ते और मोदी का सम्मान इसी साल जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी त्रिनिदाद-टोबैगो की यात्रा पर गए थे. यह उनकी इस देश की पहली आधिकारिक यात्रा थी और 1999 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की वहां पहली द्विपक्षीय यात्रा भी. इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी को देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान भी मिला था, ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो. प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर ने यह सम्मान देते हुए मोदी को वैश्विक नेतृत्व, भारतीय प्रवासियों से जुड़े रिश्ते और कोविड-19 के समय मदद के लिए धन्यवाद दिया. सम्मान मिलने पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं इसे 140 करोड़ भारतीयों की ओर से स्वीकार करता हूं. मंत्री बैरी पदारथ ने कहा कि अगले कुछ महीनों में राम मंदिर और हिंदू धार्मिक जीवन से जुड़े और बड़े ऐलान होंगे. सरकार का लक्ष्य साफ है कि त्रिनिदाद-टोबैगो को हिंदू धर्म का मजबूत केंद्र बनाना, धार्मिक पर्यटन बढ़ाना  और भगवान राम की शिक्षा को दुनिया तक फैलाना.

अयोध्या में ध्वजारोहण: पीएम मोदी 25 नवंबर को देंगे राम मंदिर पूरा होने का संदेश

अयोध्या राम मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि राम मंदिर सिर्फ राष्ट्र मंदिर नहीं है बल्कि अंतरराष्ट्रीय राम मंदिर बने। यह बात सभी क्षेत्र, सभी वर्ग और सभी विचारधारा के लोग स्वीकार करें, ऐसा प्रधानमंत्री का सपना है और जब ये सपना साकार होता दिखाई पड़ता है तब मन को संतोष मिलता है। 25 नवंबर अयोध्या के लिए एक ऐतिहासिक दिन होगा। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या पहुंचकर राम मंदिर के शिखर पर 21 फीट का ध्वजारोहण करेंगे। यह दिन ऐतिहासिक इसलिए भी होगा कि इस दिन राम मंदिर निर्माण पूर्ण होने की घोषणा भी की जाएगी। राम मंदिर के ध्वजारोहण के साथ प्रधानमंत्री पूरे विश्व को राम मंदिर निर्माण कार्य पूरा होने का संदेश देंगे। ध्वज का स्वरूप, रंग और प्रतीक चिन्ह तय करने की जिम्मेदारी चंपत राय को सौंपी ध्वज का स्वरूप कैसा होगा, रंग कैसा और प्रतीक चिन्ह कौन सा होगा, इसके लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पांच अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का भूमि पूजन किया था। 22 जनवरी 2024 को रामलला भव्य महल में विराजमान हुए थे। प्रधानमंत्री मुख्य यजमान थे। प्रधानमंत्री के हाथों विराजमान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा कराई गई थी। मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद 25 नवंबर को प्रधानमंत्री ध्वजारोहण करेंगे।   राम विवाह पंचमी की शुभ तिथि पर किया जाएगा ध्वजारोहण राम विवाह पंचमी की शुभ तिथि पर ध्वजारोहण किया जाएगा। ध्वजारोहण के साथ मंदिर निर्माण पूरा होने का विश्व को संदेश दिया जाएगा। 21 नवंबर से 25 नवंबर तक पांच दिवसीय अनुष्ठान चलेगा। वैदिक आचार्यों की मौजूदगी में अयोध्या और काशी के विद्वान अनुष्ठान कराएंगे।  

श्रीरामलला के चरणों में शीश नवाकर सीएम योगी ने मांगी प्रदेश की सुख-शांति की कामना

अक्टूबर महीने में सीएम योगी का पहला अयोध्या दौरा, हुआ भव्य स्वागत अयोध्या, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या बुधवार को एक बार फिर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठी, जब प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ एक दिवसीय दौरे पर पावन धरा पर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने अपने अयोध्या प्रवास की शुरुआत संकट मोचन हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन से की, जहां उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और शांति की कामना की। हनुमानगढ़ी से निकलने के बाद मुख्यमंत्री योगी सीधे श्रीरामलला के दरबार पहुंचे। आरती उतारकर उन्होंने प्रभु श्रीराम के चरणों में शीश नवाया और परिक्रमा करते हुए मंदिर निर्माण कार्यों की प्रगति का गहराई से अवलोकन किया। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने उन्हें मंदिर के निर्माण की वर्तमान स्थिति और आगामी चरणों की विस्तृत जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने श्रीरामलला के दर्शन-पूजन के उपरांत मंदिर प्रांगण से बाहर निकलते समय श्रद्धालुओं और आमजन का हाथ जोड़कर अभिवादन भी स्वीकार किया। पूरा परिसर “जय श्रीराम” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। इससे पूर्व, अयोध्या आगमन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रामकथा पार्क स्थित हेलीपैड पर भव्य स्वागत किया गया। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। गौरतलब है कि अक्टूबर माह में यह मुख्यमंत्री योगी का पहला अयोध्या दौरा रहा, जिसमें उन्होंने न केवल धार्मिक आस्था प्रकट की, बल्कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के कार्यों की प्रगति पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया। हेलीपैड पर भव्य स्वागत में उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और कृषि मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही,पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह व महापौर गिरीशपति त्रिपाठी, जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह, विधायकगण वेद प्रकाश गुप्ता, अमित सिंह चौहान, रामचंद्र यादव, अभय सिंह, चंद्रभानु पासवान, बीजेपी जिलाध्यक्ष संजीव सिंह, महानगर अध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव, सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।

टाइम-लैप्स और पांच साल की मेहनत: राम मंदिर निर्माण पर बनेगी विशेष डॉक्यूमेंट्री

अयोध्या  उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बन रहा भव्य राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर निर्माण का अधिकांश कार्य अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा. दिसंबर तक शेष काम भी समाप्त कर दिया जाएगा. इसके साथ ही जनवरी में होने वाले भव्य उद्घाटन के लिए तैयारियां तेजी से चल रही हैं. राम मंदिर निर्माण की यह ऐतिहासिक यात्रा करीब पांच साल की रही है. खास बात यह है कि इस पूरे निर्माण कार्य को पांच टाइम-लैप्स कैमरों के माध्यम से लगातार रिकॉर्ड किया जा रहा है. खुदाई से लेकर सॉइल टेस्टिंग और चरणबद्ध निर्माण की यह पूरी कहानी भविष्य में डॉक्यूमेंट्री के रूप में दुनिया के सामने लाई जाएगी. ट्रस्ट ने इस रिकॉर्डिंग को बौद्धिक संपदा घोषित किया है और इसे कुछ शर्तों के साथ सीबीआरआई (रुड़की) को सौंपा जाएगा. डॉक्यूमेंट्री का उद्देश्य आगे की पीढ़ियों को यह दिखाना है कि कैसे तकनीकी विशेषज्ञता, वास्तुशिल्पी विशेषताएं और श्रमिकों का समर्पण मिलकर इस भव्य धरोहर को साकार कर पाया. मंदिर की पवित्रता और मूल स्वरूप को बनाए रखना ट्रस्ट की प्राथमिकता है. इसी को ध्यान में रखते हुए सजावट और अन्य तकनीकी काम किए जा रहे हैं. मंदिर परिसर में फसाड लाइटिंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है. अनुमानित 8 से 10 करोड़ रुपये की लागत से इस लाइटिंग का काम होगा. तीन प्रमुख कंपनियों ने प्रजेंटेशन दी है और चयन प्रक्रिया अंतिम दौर में है. रात के समय इन लाइट्स से मंदिर की अद्भुत नक्काशी और वास्तुकला और भी भव्य दिखाई देगी. इसके साथ ही मंदिर की कलात्मकता को और विशेष बनाने के लिए थ्री-डी म्यूरल्स लगाए जा रहे हैं. कुल 90 म्यूरल्स में से 85 अयोध्या पहुंच चुके हैं. इनमें से 70 से अधिक को मंदिर की दीवारों पर स्थापित कर दिया गया है. शेष म्यूरल्स लगाने का काम 15 सितंबर तक पूरा कर लिया जाएगा. राम मंदिर न सिर्फ आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय शिल्प, संस्कृति और इंजीनियरिंग का भी उदाहरण बनेगा. नृपेंद्र ने बताया कि सुबह 9:30 बजे तीन कंपनियों की ओर से फसाड लाइटिंग का प्रजेंटेशन किया गया। इसमें हाइब्रिड मॉडल, प्रोजेक्टर और लीनियर लाइटिंग जैसे विकल्प प्रस्तुत किए गए। अंतिम चयन के बाद इस पूरी व्यवस्था पर लगभग आठ से 10 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इस लाइटिंग से रात में भी मंदिर की अद्भुत नक्काशी झलकेगी। थ्री डी म्यूरल के निर्माण में एक माह की हुई देरी उन्होंने बताया कि राम मंदिर के लोअर प्लिंथ में लगने वाले 90 म्यूरल्स में से 85 तैयार होकर अयोध्या पहुंच चुके हैं। इनमें से 70 से अधिक लगाए भी जा चुके हैं। थ्री डी मूर्तियों के निर्माण में तकरीबन 15 से 30 दिन की देरी दर्ज की गई है। यह काम अब 15 सितंबर तक पूरा होने की उम्मीद है।  दिसंबर तक सभी काम पूरा कर लेने का लक्ष्य निर्माण समिति के अध्यक्ष ने बताया कि समीक्षा के दौरान अस्थायी मंदिर और शहीदों की स्मृति में लगाए गए ग्रेनाइट पिलर के स्वरूप पर भी विस्तार से विचार किया गया। ट्रस्ट का स्पष्ट मत है कि मंदिर की पवित्रता और मूल स्वरूप पर किसी भी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। निर्माण कार्य की रफ्तार को देखते हुए अनुमान है कि अक्तूबर के अंत तक अधिकांश काम पूरे हो जाएंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि दिसंबर तक शेष काम भी लक्ष्य के अनुसार पूरा कर लिया जाएगा। अयोध्या राम मंदिर; शेषावतार और परकोटा के 6 मंदिरों के दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु, 15 अक्टूबर से व्यवस्था लागू   राम मंदिर परिसर में सभी 6 मंदिरों के साथ सप्त मंडप, कुबेर टीला और शेषावतार मंदिर के दर्शन की व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू हो जाएगी. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक 9 सितंबर को आयोजित होगी, जिसमें एक नए ट्रस्टी के नाम को भी शामिल करने पर मुहर लग सकती है. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि मंदिर निर्माण समिति की भी बैठक 7, 8 और 9 सितंबर को होगी. मंदिर निर्माण समिति की बैठक में इसके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं. पूरी उम्मीद है कि मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्य इस वर्ष पूरे कर लिए जाएंगे. मंदिर निर्माण समिति की तीन दिवसीय बैठक के दूसरे दिन आगामी तैयारियों को देखते हुए निर्माण कार्य को पूरा करने और दर्शन व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर मंथन किया गया. लगभग 6 घंटे तक लगातार चल इस बैठक के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र टेस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि यह तय कर लिया गया है कि परकोटा के 6 मंदिर और शेषावतार मंदिर में दर्शन की व्यवस्था अक्टूबर माह से प्रारम्भ हो जाएगी. लेकिन सप्त मंडपम में दर्शन की व्यवस्था शुरू किए जाने पर विचार किया जा रहा है. राम मंदिर परिसर में निर्माण. हालांकि, इसके पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लिए श्रद्धालुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की व्यवस्था में सुरक्षा बड़ी चुनौती बन सकती है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र टेस्ट की मानें तो दर्शन व्यवस्था प्रारंभ होने के बाद प्रतिदिन सुरक्षा के जवानों को परिसर में हर कोने की तलाशी न करनी पड़े, इसके लिए ट्रस्ट सुरक्षा एजेंसी के साथ अध्ययन कर रहा है. वृद्ध श्रद्धालुओं के लिए लगेंगी तीन लिफ्ट: राम मंदिर में आने वाले अतिरिक्त श्रद्धालुओं के लिए लिफ्ट की व्यवस्था भी सितंबर तक पूरा कर की ली जाएगी. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि मंदिर में तीन लिफ्ट लगाई जानी हैं. इसमें उत्तर दिशा में दो और एक पश्चिम दिशा में होगी. अक्टूबर में इसे प्रारंभ कर दिया जाएगा. एक दिन में एक लाख श्रद्धालु करेंगे शू सेंटर का उपयोग: राम मंदिर में दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को गर्मी में तेज धूप का जलना पैरों में बर्दाश्त नहीं हो पता इसके चलते अब आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के पास परकोटा के बाहर शू सेंटर का निर्माण कराया गया. चंपत राय ने बताया कि इसमें एक साथ लगभग 12000 से अधिक लोग एक साथ इसके अंदर अपने जूता और चप्पल को रख सकेंगे. एक दिन लगभग एक लाख श्रद्धालु इस सुविधा … Read more