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मध्यप्रदेश में 33 अवैध कालोनियों में रजिस्ट्री और नामांतरण पर रोक, जानें कौन-कौन सी कालोनियां प्रभावित

भोपाल  मध्यप्रदेश के भोपाल जिले में 24 नई अवैध कॉलोनियों के मामले में डेवलपर्स को नोटिस जारी किए हैं। एक साल पहले भी प्रशासन ने 70 कॉलोनी को नोटिस देने के बाद एफआइआर की कार्रवाई की थी, हालांकि इसके बाद जमीन स्तर पर कुछ भी नहीं किया गया। प्रशासन की ओर से इनकी नामजद सूची जारी की गई है। बावजूद इसके अवैध कॉलोनियों का विकास नहीं रुक रहा है। एक्सपर्टस का कहना है कि प्रशासन अवैध कॉलोनियों के निर्माण को रोकने के लिए कानूनी प्रावधानों को और सख्त करें। 33 कॉलोनियों की रजिस्ट्री पर रोक 70 अवैध कॉलोनियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जबकि 63 लोगों पर नामजद एफआइआर दर्ज की है। प्रशासन की ओर से 33 कॉलोनियों में रजिस्ट्री और नामांतरण पर रोक लगा दी गई है। हताईखेड़ा और रोलूखेड़ी जैसे क्षेत्रों में अवैध निर्माणों को जेसीबी मशीनों की मदद से ध्वस्त किया गया है। अवैध कॉलोनियों की अधिकता वाले क्षेत्रों में रातीबड़, नीलबड़, पिपलिया बरखेड़ी, अमरावदकलां, शोभापुर, रोलूखेड़ी, कानासैय्या, कालापानी, पचामा, थुआखेड़ा, छावनी पठार, विदिशा रोड, बैरसिया रोड, सेवनिया ओंकारा, कोलुआ खुर्द, हथाईखेड़ा, रायसेन रोड, बिशनखेड़ी, कलखेड़ा, करोंद, संतनगर, भौंरी आदि शामिल है। जैसा मैंने कहा है कि राजधानी में अवैध कालोनी समेत अतिक्रमण अवैध निर्माण को लेकर पूरी जानकारी एकत्रित कर रहा हूं। इसके बाद हम तेजी से कार्रवाई शुरू करेंगे।  प्रियंक मिश्रा, कलेक्टर यहां विकसित अवैध कॉलोनियां पर मई में फैसला अरेडी में तीन कॉलोनियां ईंटखेड़ी में पांच कॉलोनियां हज्जामपुरा में एक कॉलोनी बसई में एक कॉलोनी अचारपुरा में छह कॉलोनी बदरखां सड़क में एक कॉलोनी बांसिया में एक कॉलोनी अमझरा में एक कॉलोनी परेवाखेड़ी में एक कॉलोनी सेवनियां ओंकारा में दो कॉलोनी मुबारकपुरा मे एक कॉलोनी 40 मकान मालिकों को ननि का नोटिस नगर निगम ने साकेत नगर 9ए में अवैध निर्माणों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। निगम ने करीब 40 निवासियों को नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने अपनी स्वीकृत भवन सीमा से चार मीटर बाहर तक निर्माण कर लिया है। वार्ड 54 (जोन 13) के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र के कई मकान मालिकों ने अपनी निर्धारित सीमा के बाहर किचन गार्डन और पार्किंग शेड बनाकर सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण कर लिया है। इन विस्तारों के कारण मुख्य सड़क काफी संकरी हो गई है, जिससे वहां से चार पहिया वाहनों का गुजरना मुश्किल हो गया है। सर्वे में अतिक्रमण की पुष्टि बीते माह ए्स इलाके में अवैध निर्माण के छज्जा गिरने से 9 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसके बाद इलाके के रहवासियों द्वारा बारबार शिकायतों की जा रही थीं। साथ ही सड़क बाधित होने का मुद्दा उठाया था। विस्तृत जांच के बाद, निगम के अतिक्रमण निरोधक दस्ते ने सर्वे में उल्लंघन की पुष्टि की। शुरुआत में स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन निवासियों ने पालन नहीं किया। निगम अधिनियम, 1956 की धारा 322 के तहत नोटिस जारी किए गए। अधिकारियों ने एक सप्ताह की समय सीमा दी है। लोगों ने अतिक्रमण नहीं हटाए तो निगम हटाएगा। पार्षद ने कहा- स्वयं हटा लें अवैध निर्माण नोटिस मिलने के बाद प्रभावित रहवासियों ने स्थानीय पार्षद जितेंद्र शुक्ला से हस्तक्षेप की गुहार लगाई। पार्षद ने अन्याय न होने का आश्वासन तो दिया।

अंबिकापुर को 5743 रजिस्ट्री से 30 करोड़ से अधिक का मिला राजस्व

अंबिकापुर. अंबिकापुर उप पंजीयन विभाग ने वित्तीय वर्ष समाप्त होने के एक माह पहले ही तीस करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व शुल्क प्राप्त किया है. वित्तीय वर्ष की समाप्ति में अब मात्र एक माह का समय शेष रह गया है. वर्तमान वित्तीय वर्ष में पंजीयक विभाग को शासन से लक्ष्य नहीं मिला है. पंजीयक विभाग के द्वारा गत वित्तीय वर्ष के लक्ष्य को ही मौजूदा वित्तीय वर्ष का लक्ष्य मानते हुए राजस्व प्राप्ति में ताकत झोंक दिया गया है. कलेक्ट्रेट परिसर स्थित उप पंजीयक विभाग में वित्तीय वर्ष 2025-26 में अभी तक 5743 दस्तावेजों से 30 करोड़ दस लाख 27 हजार 36 रूपए का राजस्व प्राप्त किया है. वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में 6912 दस्तावेजों से 37 करोड़ 39 लाख 29 हजार 754 रूपए का आय प्राप्त हुआ था. उप पंजीयक अलबर्ट कुजूर के मुताबिक हर रोज दस्तावेजों के लिए 30 से 35 अपाइमेंट आ रहे हैं. इस बार गत वित्तीय वर्ष की तुलना में अधिक राजस्व प्राप्ति का अनुमान है.

बांका में मार्केट वैल्यू रेट का रिवीजन से जमीन रजिस्ट्री होगी महंगी

बांका. नए वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल से जमीन रजिस्ट्री में नया मार्केट वैल्यू रेट (एमवीआर) लागू हो जाएगा। इसके लिए जिला मूल्यांकन समिति की ओर से बांका नगर परिषद, बौंसी नगर पंचायत, अमरपुर नगर पंचायत और कटोरिया नगर पंचायत सहित सभी राजस्व ग्रामों में इलाके वार एमवीआर रेट के रिविजन की पूरी तैयारी कर ली गई है। साथ ही इससे संबंधित प्रस्ताव भी विभाग के पास भेज दिया गया है। विभागीय स्वीकृति मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा। जिससे रजिस्ट्री दर चार से पांच गुणा तक बढ़ जाएगा। शहर के आसपास के इलाकों का भी शहरी क्षेत्र के अनुसार दर निर्धारित किया जा रहा है। अभी जो दर है उसमें एमवीआर और बाजार दर में काफी अंतर है। जमीन की रजिस्ट्री का रेट सबसे अधिक बांका नगर परिषद क्षेत्र में बढ़ेगा। शहर के गांधी चौक के पास अभी प्रति डिसमल साढ़े छह लाख रुपए एमवीआर है, लेकिन अप्रैल से गांधी चौक के पास की जमीन का एमवीआर 25 लाख रुपए प्रति डिसमल तक हो जाएगा। इसी तरह कटोरिया और चांदन में खेतिहर जमीन का एमवीआर प्रति डिसमल दो से चार हजार रुपए डिसमल है, जो बढ़कर 15 से 20 हजार रुपए प्रति डिसमल तक पहुंच जाएगा। जमीन निबंधन से हर साल सरकार को लगभग 90 से सौ करोड़ रुपए राजस्व की प्राप्ति होती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 95.31 करोड़ का लक्ष्य जिला को मिला है। इसमें से 80 फीसद राजस्व का लक्ष्य हासिल हो चुका है। मार्केट रेट और एमवीआर में काफी अंतर जिला सब रजिस्ट्रार हेमंत कुमार ने बताया कि अभी जो एमवीआर है, वह बाजार दर से काफी कम है। जमीन के साथ-साथ भवन और संरचना में भी यही स्थिति है। व्यावसायिक भूखंड में पक्के निर्माण का मूल्य हाइवे और मुख्य मार्ग के किनारे तीन हजार रुपए प्रति वर्गफीट निर्धारित है, जबकि आवासीय भवन के लिए एमवीआर 1650 रुपए प्रति वर्गफुट है, लेकिन बाजार मूल्य तीन से चार गुणा से भी अधिक है। आरसीसी रोड के किनारे व्यावसायिक भूखंड में पक्का निर्माण का मूल्य 2600 रुपए प्रति वर्गफुट है जबकि आवासीय उपयोग वाली संरचना का दर औसतन 1200 रुपए प्रति वर्गफीट है। जिला सब रिजिस्टार ने बताया कि नए वित्तीय वर्ष में 50 फीसद तक एमवीआर में बढ़ोतरी हो जाएगी। 2013 के बाद हो रहा एमवीआर पुनरीक्षण एमवीआर का पुनरीक्षण करीब 13 साल बाद हो रहा है। पिछली बार साल 2013 में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों का किया गया था। इसके तीन साल बाद 2016 में केवल बांका शहरी क्षेत्र के लिए एमवीआर पुनरीक्षण किया गया था। ऐसे में करीब एक दशक से अधिक समय से एमवीआर पुनरीक्षण नहीं होने के कारण राजस्व संग्रहण कार्य एवं आधारभूत संरचना विकास कार्य में परेशानी हो रही थी। साथ ही जिले में अब जमीन की वर्गीकरण प्रक्रिया में भी बदलाव होगा। ग्रामीण क्षेत्रों के जमीन का वर्गीकरण आवासीय भूमि, कृषि भूमि तथा सड़क की दोनों तरफ की भूमि, सिंचित भूमि, असिंचित भूमि तथा व्यावसायिक, औद्योगिक एवं विशेष श्रेणी क्षेत्र के रूप में किया गया है। यानी ग्रामीण क्षेत्र में जमीन का वर्गीकरण सात प्रकार में किया गया है, जबकि शहरी क्षेत्र में जमीन का वर्गीकरण छह तरह से किया गया है नए साल में बढ़ेगा राजस्व एमवीआर रिवाइज होने से सरकार को राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। अभी जमीन निबंधन से हर साल सरकार को लगभग 90 से सौ करोड़ रुपए राजस्व की प्राप्ति होती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 95.31 करोड़ का लक्ष्य जिला को मिला है। इसमें से 80 फीसद राजस्व का लक्ष्य हासिल हो चुका है। एमवीआर पुनरीक्षण होने से जमीन का वैल्यू बढ़ेगा। इससे राजस्व में बढ़ोतरी होगी। शहरी क्षेत्र और सभी राजस्व ग्रामों के लिए इलाके वार एमवीआर रेट में संशोधन की तैयारियां पूरी कर ली गई है। विभागीय निर्देश मिलने के बाद डीएम से आदेश लेकर इसे लागू कर दिया जाएगा। – हेमंत कुमार, जिला अवर निबंधक पदाधिकारी