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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गूगल क्लाउड के सीटीओ तरुण पंत और उनकी टीम के साथ की महत्वपूर्ण बैठक

बेंगलुरु/लखनऊ  विकसित उत्तर प्रदेश के विजन को वैश्विक टेक्नोलॉजी और निवेश जगत के साथ जोड़ने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेंगलुरु दौरे के दौरान गूगल क्लाउड के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर-सीटीओ) तरुण पंत और उनकी टीम के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। राउंड टेबल बैठकों और रोड शो से पहले आयोजित इस संवाद में मुख्यमंत्री ने आम नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने, किसानों की आय बढ़ाने, युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने, स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत करने तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को नई टेक्नोलॉजी से जोड़ने संबंधी राज्य सरकार के विजन को विस्तार से साझा किया। बैठक के दौरान सीटीओ तरुण पंत और गूगल टीम के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्लाउड टेक्नोलॉजी, डिजिटल गवर्नेंस और डेटा आधारित समाधानों के माध्यम से विकास कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने गूगल की टीम के साथ इस बात पर भी विचार-विमर्श किया कि टेक्नोलॉजी के माध्यम से सरकारी सेवाओं की पहुंच और प्रभावशीलता को कैसे बढ़ाया जा सकता है। किसानों, युवाओं, स्टार्टअप्स, एमएसएमई क्षेत्र और आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए नवाचार आधारित समाधानों पर भी चर्चा हुई। गूगल टीम के प्रतिनिधियों ने बैठक को अत्यंत सकारात्मक और सार्थक बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के विकास का स्पष्ट और दूरदर्शी रोडमैप साझा किया। उन्होंने किसानों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और युवाओं के लिए निर्धारित लक्ष्यों एवं प्राथमिकताओं की जानकारी दी तथा यह भी चर्चा की कि एआई और आधुनिक टेक्नोलॉजी के माध्यम से इन लक्ष्यों को और तेजी से कैसे हासिल किया जा सकता है। गूगल इंडिया की ओर से कहा गया कि कंपनी भारत के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर इन लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के अवसर को लेकर उत्साहित है। वैश्विक निवेशकों के साथ भी हुआ व्यापक संवाद इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेंगलुरु में देश और दुनिया की अग्रणी निवेश एवं टेक्नोलॉजी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ भी विशेष संवाद किया। इनमें वेस्टब्रिज कैपिटल के मैनेजिंग पार्टनर संदीप सिंघल, एक्सेल पार्टनर्स के प्रशांत प्रकाश, इनमोबी के संस्थापक पीयूष शाह, यूलू के संस्थापक अमित गुप्ता, एनवीडिया दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक विशाल धूपर, सर्वानएआई के प्रतिनिधि तथा ब्लैकस्टोन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। बैठक में उत्तर प्रदेश में निवेश, टेक्नोलॉजी, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्टार्टअप इकोसिस्टम और रोजगार सृजन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कानून-व्यवस्था और निवेशक-अनुकूल वातावरण की सराहना करते हुए राज्य को भविष्य के विकास का प्रमुख केंद्र बताया। निवेश और नवाचार के नए केंद्र के रूप में उभर रहा उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश लगातार निवेश, नवाचार और टेक्नोलॉजी आधारित विकास का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक गलियारों, डिजिटल सेवाओं और निवेशक-अनुकूल नीतियों ने राज्य को देश के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में शामिल कर दिया है। बेंगलुरु में गूगल और वैश्विक निवेशकों के साथ हुए संवाद ने यह संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश अब टेक्नोलॉजी, एआई, स्टार्टअप, निवेश और रोजगार सृजन का राष्ट्रीय केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

सुपोषण की दिशा में नई पहल, विदिशा का ‘पोषण संजीवनी अभियान’ बना प्रदेश के लिए मिसाल

प्रदेश में सुपोषण का नया रोडमैप विदिशा के पोषण संजीवनी अभियान ने पेश की राज्य स्तरीय मिसाल भोपाल प्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए निरंतर अभिनव और नीतिगत प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विदिशा जिले से सफलता की एक ऐसी गौरवशाली गाथा सामने आई है, जिसने पूरे राज्य के सामने प्रशासनिक सूझबूझ और जनभागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 'स्वस्थ मध्यप्रदेश' के संकल्पों को जमीनी धरातल पर उतारते हुए विदिशा जिला प्रशासन द्वारा शुरू किए गए 'पोषण संजीवनी अभियान' ने गंभीर कुपोषण के खिलाफ एक निर्णायक और प्रभावी जंग छेड़ दी है। यह अभियान इस बात का जीवंत प्रमाण बन गया है कि जब जिला प्रशासन और समाज की संवेदनशील ताकतें एक साथ कदम बढ़ाती हैं, तो कठिन से कठिन सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान सहज संभव हो जाता है। अमूमन यह देखा जाता है कि पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) में उपचार के बाद जब बच्चे घर लौटते हैं, तो परिवारों की सीमित आर्थिक क्षमता और माताओं में पोषण संबंधी जागरूकता की कमी के कारण वे दोबारा कुपोषण चक्र में फंस जाते हैं। जून 2025 में हुए एक व्यापक सर्वे के दौरान जिले में 1,307 गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान होने पर समस्या की गंभीरता और स्पष्ट हो गई। इसी चुनौती को एक बड़े अवसर में बदलते हुए विदिशा जिला कलेक्टर अंशुल गुप्ता के नेतृत्व में 'पोषण संजीवनी अभियान' की परिकल्पना की गई, जिसका मूल ध्येय बच्चों का तात्कालिक उपचार नहीं बल्कि उनका दीर्घकालिक सुपोषण सुनिश्चित करना था। अभियान के तहत प्रत्येक चिन्हित गंभीर कुपोषित बच्चे को तीन महीने तक अतिरिक्त पोषण देने के लिए ₹3000 मूल्य की विशेष 'सुपोषण किट' प्रदान की जा रही है। उच्च गुणवत्तायुक्त पौष्टिक तत्वों से भरपूर इस किट में दो किलो मूंगदाल, एक किलो बेसन, पंद्रह सौ ग्राम मुरमुरा, एक लीटर खाद्य तेल, एक किलो शुद्ध घी, डेढ़ किलो मूंगफली, एक किलो गुड़ पाउडर, दो किलो मल्टीग्रेन आटा, एक किलो सत्तू, दो किलो चावल और पांच सौ ग्राम तिल जैसी अत्यंत पौष्टिक सामग्रियां शामिल की गई हैं। यह संतुलित आहार बच्चों को प्रतिदिन लगभग 750 अतिरिक्त कैलोरी प्रदान करता है, जो उनके शारीरिक विकास के लिए संजीवनी साबित हो रहा है। इस पूरे अभियान की सफलता के पीछे जनभागीदारी एक प्रमुख कारण बना। इस पुनीत कार्य में समाज के विभिन्न वर्गों, स्थानीय व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने अभूतपूर्व संवेदनशीलता का परिचय दिया। समाज के सामूहिक प्रयासों से देखते ही देखते ₹39.21 लाख की सम्मानजनक राशि स्वेच्छा से एकत्र हो गई, जिसके माध्यम से अब तक सभी 1,307 बच्चों तक सुपोषण किट पहुंचाई जा चुकी है। यह जनसहयोग इस बात का सशक्त प्रतीक है कि समाज अपने नौनिहालों के स्वास्थ्य के प्रति कितना सजग और उत्तरदायी है। तकनीक और जमीनी निगरानी से सफल परिणाम प्रशासन ने केवल राशन वितरण तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि माताओं के व्यवहार में स्थायी बदलाव लाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के जमीनी अमले को पूरी मुस्तैदी से काम पर लगाया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा माताओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों से सरल और पौष्टिक व्यंजन जैसे लड्डू, हलवा और सत्तू पेय बनाने की विधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और आनंद को ध्यान में रखते हुए उन्हें खिलौना किट और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए टिफिन व पानी की बोतलें भी उपहार स्वरूप दी गईं। तकनीक और कड़े पर्यवेक्षण के मोर्चे पर भी यह मॉडल बेहद सुदृढ़ है। 'पोषण ट्रैकर' ऐप के माध्यम से प्रत्येक बच्चे के चयन से लेकर उसकी शारीरिक प्रगति का संपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड संधारित किया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा नियमित रूप से घर-घर जाकर बच्चों की वृद्धि निगरानी की गई। वहीं विभाग के पर्यवेक्षक लगातार बच्चों का वजन मापकर उनकी वास्तविक स्थिति का जमीनी आकलन कर रहे हैं। 63%  से अधिक बच्चे हुए सामान्य इस बेहद सुनियोजित और समन्वित प्रयास के जो परिणाम निकलकर आए हैं, वे राज्य स्तर पर बेहद उत्साहजनक और प्रेरणादायी हैं। जिले के कुल 1,307 कुपोषित बच्चों में से 772 बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य श्रेणी में आ चुके हैं, जिससे 63.02% की उल्लेखनीय और ऐतिहासिक रिकवरी दर दर्ज की गई है। यह शानदार सफलता इस अभियान को मध्यप्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक अनुकरणीय 'रोल मॉडल' के रूप में स्थापित करती है। यह अभियान अब एक प्रशासनिक पहल से आगे बढ़कर विदिशा में एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। जिला प्रशासन के सशक्त नेतृत्व में अब स्वयंसेवी संस्थाओं, प्रबुद्ध समाज सेवियों एवं विभिन्न सरकारी विभागों की सक्रिय अंतर-विभागीय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। विभाग द्वारा इन गंभीर कुपोषित बच्चों की सतत और गहन निगरानी की जा रही है ताकि परिवर्तन केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि हर बच्चे के स्वस्थ भविष्य के संकल्प में बदले। भविष्य की तैयारियों को लेकर भी सरकार और प्रशासन की प्रतिबद्धता स्पष्ट दिखाई देती है। आगामी तिमाही के लिए 650 नए गंभीर कुपोषित बच्चों को इस अभियान से जोड़कर कुपोषण मुक्त करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अडाणी फाउंडेशन के सहयोग से जून माह में लटेरी, सिरोंज एवं कुरवाई जैसी दूरस्थ परियोजनाओं के चिन्हित गंभीर कुपोषित बच्चों के बीच 500 अतिरिक्त सुपोषण किट के वितरण का लक्ष्य रखा गया है। विदिशा का यह सुपोषण मॉडल यह संदेश देता है कि जब शासन, प्रशासन, समाज और संस्थाएं एकजुट होकर पूरी संवेदनशीलता से कार्य करते हैं, तो कुपोषण जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ जीत सुनिश्चित हो जाती है।