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मुख्य मार्ग से कपुरी तक बनेगी 6 मीटर चौड़ी सड़क

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क परियोजना के कार्यों की समीक्षा की। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क परियोजना कार्यालय में बैठक में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन के मापदण्डों के अनुसार हर बसाहट में पक्की सड़क की सुविधा दें। इसके लिए इस वर्ष की कार्य योजना में चिन्हित सड़कों को शामिल करें। सड़कें विकास की वाहक होती हैं। गांव और बसाहट तक पक्की सड़क की सुविधा होने से आवागमन सुगम होने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के अवसरों और आर्थिक विकास के अवसर मिलते हैं। रीवा विकासखण्ड में 28 सड़कें इस वर्ष की कार्य योजना में प्रस्तावित की गई हैं। इनका डीपीआर तत्काल तैयार कराएं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से निर्मित सड़कों के रखरखाव और सुधार पर भी ध्यान दें। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि नेशनल हाईवे मुख्य मार्ग से चोरहटा होते हुए कपुरी तक की सड़क का चौड़ीकरण आवश्यक है, जिन किसानों ने सड़क चौड़ीकरण के लिए स्वेच्छा से भूमि उपलब्ध कराई है उन सबका हम अभिनंदन करते हैं। सबके सहयोग से शीघ्र ही सड़क चौड़ीकरण का कार्य शुरू होगा। मुख्य मार्ग से चोरहटा होते हुए कपुरी तक 6 मीटर चौड़ी सड़क बनाई जाएगी। इससे बड़े वाहनों का आवागमन सुगम होगा। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आमजनों से संवाद करते हुए क्षेत्र में विकास की संभावनाओं और समस्याओं पर चर्चा की। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने मौके पर उपस्थित अधीक्षण यंत्री विद्युत मण्डल को चोरहटा में दो नए ट्रांसफार्मर तत्काल स्थापित करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क परियोजना के प्रभारी महाप्रबंधक उमेश कुमार साहू ने बताया कि शासन द्वारा निर्धारित मापदण्डों के अनुसार पाँच सौ तक की आबादी वाले सभी गांवों को इस वर्ष की कार्य योजना में शामिल किया जा रहा है। रीवा और मऊगंज जिले में 273.19 किलोमीटर लम्बाई की 139 सड़कें प्रस्तावित की गई हैं। इनमें रीवा विकासखण्ड की 48.77 किलोमीटर लम्बाई की 28 सड़कें शामिल हैं। इनका डीपीआर तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सड़क योजना से सेटेलाइट से चिन्हित जिले की 1320 बसाहटों में सड़क निर्माण प्रस्तावित किया जा रहा है। इनमें रीवा विधानसभा क्षेत्र की 31 बसाहटें शामिल हैं। रीवा और मऊगंज जिलों में कुल 1697.56 किलोमीटर लम्बाई की सड़कें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से बनाई गई हैं। वर्तमान में 5 सड़कें प्रगतिरत हैं। बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधि  राजेन्द्र शुक्ल ने चोरहटा क्षेत्र के सड़क, बिजली, पानी और नाली निर्माण से जुड़ी विभिन्न मांगे रखीं। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष मती नीता कोल, आयुक्त नगर निगम डॉ. सौरभ सोनवणे, एसडीएम हुजूर डॉ. अनुराग तिवारी, तहसीलदार शिवशंकर शुक्ला सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। 

तेज रफ्तार का कहर: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे बना मौत का हाइवे

दौसा दौसा देश के दो महानगरों दिल्ली और मुंबई को सीधे जोड़ने और यात्रा समय घटाने के उद्देश्य से बनाए गए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को जानवर-रहित और सुरक्षित बताया गया था, लेकिन यह ड्रीम प्रोजेक्ट अब यात्रियों के लिए मौत का हाईवे बनता जा रहा है। एक्सप्रेसवे शुरू हुए 32 महीने से अधिक हो चुके हैं और अब तक 250 से ज्यादा लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं। अकेले दौसा जिले में ही 180 से अधिक मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। जानवरों के कारण बढ़ रहे हादसे केंद्र सरकार के जानवर-रहित हाइवे के दावे हवा में नजर आ रहे हैं। एक्सप्रेसवे पर रोजाना लावारिस पशु घूमते देखे जा रहे हैं, और ज्यादातर हादसे इन्हीं की वजह से हो रहे हैं। भारी-भरकम टोल चुकाने के बाद भी वाहन चालकों को सुरक्षित यात्रा नहीं मिल पा रही है। मॉनिटरिंग सिस्टम फेल, रफ्तार पर नहीं लग रही लगाम वाहनों की तेज रफ्तार हादसों का बड़ा कारण बन चुकी है। एक्सप्रेसवे को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति सीमा के अनुसार तैयार किया गया था, लेकिन मॉनिटरिंग की कमी के चलते कई कारें 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक दौड़ रही हैं। चालक की झपकी और लापरवाही भी कई दुर्घटनाओं की वजह बन रही है। हाई-टेक कैमरे भी बेअसर हादसे रोकने के लिए हर 100 मीटर पर थर्मल सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो ओवरस्पीड वाहनों की पहचान कर एनएचएआई और यातायात पुलिस को सूचना देने के लिए हैं। बावजूद इसके, हादसों में कोई कमी नहीं आई है। सुरक्षा दीवारें टूटीं, जानवरों का आसान प्रवेश एनएचएआई के दावों के विपरीत, कई जगहों पर एक्सप्रेसवे के किनारे सुरक्षा दीवारें टूटी हुई हैं या बनाई ही नहीं गईं। स्थानीय लोगों ने जगह-जगह दीवार तोड़कर रास्ते बना लिए हैं, जिससे आवारा पशु और दुपहिया वाहन आसानी से एक्सप्रेसवे पर पहुंच जाते हैं। हाईवे के किनारे मिट्टी डालकर बनाए ढाबे और दुकानें पिलर संख्या 190 के आसपास हाइवे की सीमा में मिट्टी डालकर समतलीकरण कर ढाबे और दुकानें खोल ली गई हैं। यहां ट्रक खड़े रहते हैं, जबकि यह क्षेत्र नो-पार्किंग जोन है। कई स्थानों पर 10 फीट ऊंचाई तक मिट्टी भरकर हाइवे से जुड़ाव बना लिया गया है। स्थानीय लोग खुलेआम व्यापार कर रहे हैं, लेकिन एनएचएआई अधिकारियों की अनदेखी के कारण स्थिति बेकाबू है। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यह ड्रीम प्रोजेक्ट, जो देश की आधुनिक सड़क प्रणाली की मिसाल माना जा रहा था, अब लगातार हादसों और लापरवाही के कारण सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।

मुस्लिमबहुल इलाके की सड़कों के नाम बदलने पर बवाल, इंदौर में साइनबोर्ड हटाए गए

इंदौर इंदौर के एक मुस्लिमबहुल इलाके की सड़कों के नामों को लेकर विवाद के बाद बृहस्पतिवार को नगर निगम ने विवादित साइनबोर्ड हटा दिए और स्थानीय प्रशासन ने कहा कि वह इन मार्गों के कथित तौर पर अवैध नामकरण के कारण क्षेत्रीय पार्षद के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि चंदन नगर की कुछ सड़कों का नया नामकरण ‘धर्म विशेष' के नामों के आधार पर कर दिया गया है और शहरी निकाय के कर्मचारियों ने सड़कों पर ‘परिवर्तित नामों' के साइनबोर्ड भी लगा दिए हैं. कैलाश विजयवर्गीय के बेटे ने दी चेतावनी आकाश, मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बेटे हैं. उन्होंने आयुक्त को लिखे पत्र में चेतावनी दी कि अगर ‘परिवर्तित नामों' के बोर्ड सड़कों से तुरंत नहीं हटाए गए, तो ‘उग्र आंदोलन' किया जाएगा. मामले के तूल पकड़ने पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा,‘‘चंदन नगर के वॉर्ड क्रमांक दो की पार्षद फातमा रफीक खान ने अवैधानिक तौर पर इस क्षेत्र की पांच सड़कों का नया नामकरण करके नगर निगम के कर्मचारियों से साइनबोर्ड लगवाए. इसकी सूचना मिलने पर ये साइनबोर्ड हटवा दिए गए हैं.'' भार्गव ने कहा कि उन्होंने इस मामले में क्षेत्रीय पार्षद के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. महापौर के आरोप को पार्षद ने किया खारिज उधर, पार्षद के पति रफीक खान ने महापौर के इस आरोप को खारिज किया कि उनकी पत्नी ने मुस्लिमबहुल वॉर्ड की सड़कों का नया नामकरण कर दिया है. उन्होंने कहा,‘‘हमने दो साल पहले नगर निगम को पत्र लिखकर चंदन नगर क्षेत्र के घनी बसाहट वाले इलाकों की सड़कों पर साइनबोर्ड लगाने का अनुरोध किया था ताकि लोगों को पता ढूंढने में आसानी हो. इसके बाद नगर निगम ने ही इन सड़कों के करीब 40 साल से प्रचलित नामों के आधार पर संबंधित साइनबोर्ड लगवाए.'' खान ने कहा कि सड़कों के विवादास्पद साइनबोर्ड हटाये जाने पर उनकी ओर से हालांकि कोई विरोध नहीं जताया गया है, लेकिन वह और उनकी पत्नी महापौर से मिलकर उनके सामने अपना पक्ष जरूर रखेंगे. सड़कों के बदल दिए नाम चंदन नगर क्षेत्र की सड़कें दशकों से चंदू वाला रोड, लोहा गेट रोड, मिश्रा रोड, आम वाला रोड नाम से पहचानी जा रही हैं। हाल ही में इन सड़कों के नाम बदलकर बोर्ड लगा दिए गए थे। इसमें चंदू वाला रोड को गौसिया रोड, लोहा गेट को रजा गेट, मिश्रा रोड को ख्वाजा रोड और आम वाला रोड को हुसैन रोड बताया गया। इसकी खबर लगते ही रहवासी आक्रोशित हो गए। उनका कहना था कि दशकों से ये सड़कें पुराने नामों से जानी जा रही हैं। रातोरात इन सड़कों का नाम बदला गया है। क्षेत्र में इसे लेकर हंगामा हो गया। पूर्व विधायक ने मामले को लेकर महापौर को पत्र भी लिखा। सूचना महापौर तक पहुंची जिसके बाद निगम की टीम ने कार्रवाई की। नगर निगम ने साइन बोर्ड हटाएं नगर निगम ने चंदन नगर में जो विवादास्पद साइनबोर्ड हटाए हैं, उनमें एक ही सड़क के दो प्रचलित नाम लिखे गए थे. मसलन एक साइन बोर्ड पर ‘सकीना मंजिल रोड' के साथ ही 'चंदन नगर सेक्टर-बी वॉर्ड क्रमांक दो' भी लिखा गया था. इसी तरह, अन्य साइनबोर्ड पर ‘रजा गेट' के साथ ही ‘लोहा गेट रोड' भी लिखा गया था. क्षेत्रीय नागरिक अब्दुल वाहिद खान ने बताया,‘‘हमारे इलाके में हटाए गए एक साइन बोर्ड में जनता की सुविधा के लिए गौसिया रोड के साथ ही चंदू वाला रोड भी लिखा गया था क्योंकि इस सड़क के दोनों नाम प्रचलित हैं. जाहिर तौर पर साइनबोर्ड हटाए जाने से आम लोगों को पता ढूंढने में परेशानी होगी.''