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संबल योजना में आयु संशोधन पर सख्ती, मृत्यु के बाद बदलाव अब पूरी तरह प्रतिबंधित

भोपाल मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना में पंजीकृत श्रमिकों की आयु संबंधी प्रावधानों को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि समग्र पोर्टल में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर ही संबल पोर्टल पर श्रमिक की आयु की गणना की जाएगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, किसी भी पंजीकृत श्रमिक की मृत्यु के बाद उसकी आयु (जन्म तिथि) में किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकेगा। अपर सचिव श्रम विभाग संजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि यह नियम संबल योजना में भी सख्ती से लागू रहेगा। उन्‍होंने बताया है कि  समग्र पोर्टल पर मृत्यु प्रविष्टि दर्ज करने से पहले संबंधित हितग्राही की जन्म तिथि का गहन परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए। एक बार मृत्यु दर्ज हो जाने के बाद किसी भी परिस्थिति में आयु परिवर्तन की अनुमति नहीं होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी श्रमिक की आयु पोर्टल पर त्रुटिपूर्ण पायी जाती है, तो उसके सुधार के लिए आवेदन केवल आईटी विभाग के माध्यम से ही किया जा सकेगा। अन्य किसी माध्यम से आयु संशोधन मान्य नहीं होगा।  

संबल योजना के छात्रों को राहत, हाई कोर्ट ने फीस भरने का जिम्मा सरकार पर डाला

 जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में कहा कि संबल योजना के लाभार्थी विद्यार्थियों की ट्यूशन फीस व परीक्षा फीस सरकार ही भरेगी। हाई कोर्ट ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता छात्रों से शुल्क वसूल किए बिना ही उनका परीक्षा फार्म स्वीकार कर उन्हें परीक्षा में शामिल करें। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन व न्यायमूर्ति दीपक खोत की युगलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि 30 दिन के भीतर संबल योजना के तहत लाभार्थी छात्रों की फीस विश्वविद्यालय को भुगतान करें। जबलपुर निवासी मनीष बघेल और यामिनी सिंह की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल व रोहित रघुवंशी ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता जबलपुर विवि में एलएलएम पाठ्यक्रम के छात्र हैं। याचिकाकर्ताओं को मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना के तहत प्रवेश मिला था। इस योजना के तहत प्रवेश लेने वाले छात्रों को ट्यूशन एवं परीक्षा शुल्क से छूट प्राप्त होती है। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें परीक्षा फॉर्म भरने की अनुमति नहीं दी जा रही, क्योंकि उन्होंने ट्यूशन एवं परीक्षा शुल्क जमा नहीं किया है। छात्रसंघ चुनाव कराने के मामले में मांगा जवाब एक अन्य मामले में विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव कराए जाने को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले में अनावेदकों को सरकार से निर्देश प्राप्त कर पांच अगस्त तक जवाब देने के निर्देश दिए हैं। यह मामला छात्र नेता अदनान अंसारी की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश उपाध्याय ने पक्ष रखा। याचिका में प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव की पुन: बहाल किये जाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि लिंगदोह समिति की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 2017 से अब तक छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए हैं। जबकि छात्रों से 250 प्रति वर्ष छात्रसंघ शुल्क लिया जा रहा है, लेकिन चुनाव नहीं कराए जाते हैं। पिछले कई सालों से छात्रसंघ चुनाव संपन्न नहीं हुए हैं, जो कि अनुचित है। मामले की सुनवाई पश्चात न्यायालय ने विवि को शासन से इंस्ट्रक्शन प्राप्त कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।