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ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बनें शबाना महमूद, तो कश्मीर पर असर कैसा होगा?

लंदन   शबाना महमूद यह नाम विश्व की राजनीति पर हाल ही में चर्चा का केंद्र बन गया है, क्योंकि ऐसी संभावना जताई जा रही है कि शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं. शबाना महमूद पाकिस्तानी मूल की ब्रिटिश नागरिक हैं और उन्होंने आर्टिकल 370 को हटाने जाने का विरोध किया था. उन्होंने कश्मीर को लेकर कई बार भारत विरोधी तेवर दिखाया है, ऐसे में उनके प्रधानमंत्री बनने से क्या भारत और यूके के संबंधों पर असर पड़ सकता है? कौन है शबाना महमूद? शबाना महमूद लेबर पार्टी की तेज तर्रार नेता हैं. वह महज 45 साल की हैं. उनका जन्म इंग्लैंड के बर्मिंघम में हुआ है और वे एक पाकिस्तानी मूल के माता–पिता की संतान हैं. शबाना ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है और शुरुआत में पेशे से वकील रही हैं और बाद में उन्होंने राजनेता बनने की ओर कदम बढ़ा दिया. शबाना का परिवार पीओके के मीरपुर से वास्ता रखता है. उनके पिता सिविल इंजीनियर हैं. शबाना ने शादी नहीं की है और अपने 4 भाई-बहनों में वो सबसे बड़ी हैं. 2010 में वे पहली बार संसद सदस्य (MP) के रूप में चुनी गईं. शबाना महमूद लेबर पार्टी की सदस्य हैं और कई महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुकी है. वर्तमान में वो होम सेक्रेटरी के तौर पर कार्यरत हैं. ब्रिटेन में होम सेक्रेटरी को भारत के गृहमंत्री के समकक्ष माना जा सकता है, लेकिन उसकी भूमिका विदेश नीतियों में भी अहम होती है. 2024 में शबाना ने न्याय मंत्री (Justice Secretary) और लॉर्ड चांसलर (Lord Chancellor) के रूप में भी सेवा दी. ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की कुर्सी पर खतरा क्यों मंडराया? ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर सुपरमेरी जीत(बड़ी जीत) के साथ 5 जुलाई 2024 को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन एपस्टीन फाइल्स ने उनके लिए परेशानी खड़ी कर दी है. दरअसल कीर स्टारमर की परेशानी की वजह हैं पीटर मैंडेलसन. पीटर मैंडेलसन को कुछ समय पहले अमेरिका में ब्रिटिश राजदूत नियुक्त किया गया था और मैंडेलसन के संबंध जेफ्री एपस्टीन से थे. एपस्टीन फाइल्स में यह बताया गया है कि कि मैंडेलसन ने कई संवेदनशील जानकारी एपस्टीन को मेल की थी. इस मुद्दे को लेकर ब्रिटेन में बड़ा बवाल मचा हुआ है और प्रधानमंत्री की इस बात को लेकर आलोचना हो रही है कि आखिर उन्होंने ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति क्यों की. पीटर मैंडेलसन को पद से हटा दिया गया है, लेकिन ब्रिटेन में प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग हो रही है. हालांकि कीर स्टारमर ने इस्तीफा देने से मना किया है, लेकिन उनपर इस्तीफे का दबाव बहुत बढ़ गया है. शबाना महमूद अगर ब्रिटेन की पीएम बनी, तो भारत के साथ बिगड़ेंगे संबंध? शबाना महमूद पाकिस्तानी मूल की राजनेता हैं. इसी वजह से एक आम भारतीय के मन में यह सवाल है कि क्या शबाना महमूद के प्रधानमंत्री बनने से भारत के साथ ब्रिटेन के संबंध बिगड़ सकते हैं? इस शंका के बीच हमें कुछ बातों को समझना होगा. सबसे बड़ी बात यह है कि किसी भी देश की राजनीति और वहां की नीतियां राष्ट्रीय हित के अनुसार तय होती हैं ना कि किसी व्यक्ति के धर्म और उसके सोच के आधार पर. इस स्थिति में अगर शबाना महमूद ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बन भी जाती हैं, तो उनकी व्यक्तिगत राय का असर भारत और ब्रिटेन के संबंधों पर पर पड़ेगा इसकी संभावना शून्य है.

लंदन से PoK तक की कहानी: कौन हैं शबाना महमूद, जो बन सकती हैं ब्रिटेन की पहली मुस्लिम PM?

लंदन ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर की सरकार गिर सकती है। इस बीच युनाइटेड किंगडम में चर्चाएं तेज हैं कि देश को पहली मुस्लिम महिला पीएम मिल सकती है। इसके लिए शबाना महमूद के नाम की चर्चा जोरों पर है। फिलहाल वह ब्रिटिश सरकार में होम मिनिस्टर के तौर पर काम कर रही हैं। उन्हें लेबर पार्टी में सबसे बड़ी नेता के तौर पर देखा जा रहा है, जो पीएम के पद तक पहुंच सकती हैं। ऐसी स्थितियां तब बन रही हैं, जब दुनिया भर की सरकारों को एपस्टीन फाइल्स वाले विवाद ने हिलाकर रख दिया है। शबाना महमूद को कीर स्टार्मर के करीबी लोगों में शुमार किया जाता है। 45 साल की शबाना पेशे से वकील हैं और एक युवा नेता हैं।   लेबर पार्टी में उनकी पहचान एक कुशल वक्ता के तौर पर रही है। उनके परिवार का ताल्लुक पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मीरपुर कस्बे से रहा है। उनका जन्म ब्रिटेन के ही बर्मिंगम में हुआ था। उनकी मां का नाम जुबैदा है और पिता का नाम महमूद अहमद है। 2025 में होम मिनिस्टर के तौर पर जिम्मेदारी संभालने के बाद से उनके आगे सबसे बड़ा टास्क ब्रिटेन की सीमा सुरक्षा का रहा है। ऑक्सफोर्ड के लिंकन कॉलेज से लॉ की डिग्री हासिल करने वाली शबाना महमूद को 2010 में पहली बार सांसद बनने का मौका मिला था। वह उन चंद मुस्लिम महिलाओं में से हैं, जो ब्रिटेन में सांसद बनी हैं। इनमें रौशनआरा अली और यासमीन कुरैशी के नाम भी शामिल हैं। शबाना महमूद ने लेबर पार्टी से ऐसे लोगों को भी जोड़ा है, जो बीते कुछ सालों में उससे छिटक गए थे। इसकी वजह यह है कि लेबर पार्टी ने गाजा में इजरायली हमलों का पक्ष लिया था, जबकि शबाना महमूद खुलकर इजरायल का विरोध करती रही हैं। ऐसे में एक तबका है, जो शबाना महमूद को पसंद करता है और उनकी राय के चलते वापस लेबर पार्टी से जुड़ा है। दरअसल एपस्टीन फाइल्स वाले मामले में कीर स्टार्मर को लेकर भी कयास लग रहे हैं और कहा जा रहा है कि उनकी कुर्सी ही खतरे में है। ऐसी स्थिति में शबाना महमूद को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाने लगा है। फिलिस्तीन की समर्थक हैं शबाना महमूद, पर एक और बात दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ शबाना फिलिस्तीन की समर्थक हैं तो वहीं ब्रिटिश नागरिकता को लेकर सख्त नियम बनाने की भी पैरोकार हैं। कीर स्टार्मर की सरकार ने बीते दिनों पीटर मैंडलसन को वॉशिंगटन में यूके के राजदूत के तौर पर नियुक्त किया था। इसे लेकर भी विवाद की स्थिति बनी हुई है। दरअसल मेंडलसन का भी एपस्टीन से कनेक्शन जोड़ा जा रहा है। इसी के चलते विवाद गहरा गया है।