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धरतीफोड़ महादेव का चमत्कार: छत्तीसगढ़ में साल में तीन बार रूप बदलने वाला शिवलिंग बना आस्था का केंद्र

खरोरा   बेलदार राजा की राजधानी बेलदार सिवनी में एक अद्भुत प्राचीन शिवलिंग है जो साल में तीन बार अपना स्वरूप बदलता है, इस प्रतिमा को लोग धरती फोड़ महादेव के नाम से भी जानते हैं।  खरोरा से 5 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर पूर्व दिशा में स्थित इस गांव की आबादी करीब 5000 है यहां का प्राचीन शिव मंदिर कितना पुराना है इस बारे में तीन पीढ़ी के सियान भी कुछ नहीं बता पाते हैं ।   इस प्राचीन शिवलिंग को स्थानीय लोग 'धरतीफोड़ महादेव' के नाम से जानते हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह साल में तीन बार अपना स्वरूप बदलता है:गर्मी में: प्रतिमा बीच से दो भागों में बंट जाती है, जिससे इसमें अर्धनारीश्वर (आधा शिव, आधा शक्ति) का रूप स्पष्ट दिखाई देता है। इस दौरान यह खुरदुरा भी हो जाता है।सावन (बरसात) में: यह वापस अपनी पूर्ण आकृति में आ जाता है, जिसे लोग 'जड़-महादेव' कहते हैं। ठंड में: शिवलिंग का रंग गहरा काला हो जाता है और इसकी सतह चिकनी व तैलीय दिखाई देने लगती है। प्राचीनता: यह मंदिर कितना पुराना है, इसके बारे में गांव के 80 साल के बुजुर्ग भी नहीं बता पाए। यह क्षेत्र कभी बेल्दार राजा की राजधानी हुआ करता था। पवित्र कुंड: मंदिर के चारों ओर लगभग 1000 वर्ग फीट में फैला एक कुंड है। कहा जाता है कि सावन के महीने में इस कुंड की गंदगी और दुर्गंध अपने आप गायब हो जाती है। नशामुक्त गांव: बेल्दारसिवनी अपनी पूर्ण शराबबंदी के लिए भी प्रसिद्ध है। सालों पहले गांव वालों ने कड़ा फैसला लेकर शराब बेचने और पीने वालों पर पाबंदी लगा दी थी जिसकी परंपरा आज भी जारी है।इस कुंड को अब शिव कुंड का नाम दिया गया है और इस कुंड के बीच में लक्ष्मी नारायण भगवान की प्रतिमा स्थापित है चारों ओर द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन देखने को मिलते हैं। बेलदार सिवनी के इस धरतीफोड़ महादेव जिसे अर्धनारीश्वर भी कहा जाता है इस प्रतिमा के बारे में ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार गर्मी के दिनों में ढाई फीट ऊंची और 8 इंच विकास की प्रतिमा बीचो-बीच दो भागों में विभक्त हो जाती है तब इस प्रतिभा में अर्धनारीश्वर महादेव की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। सावन के महीने में यह प्रतिमा अपनी पूर्ण आकृति को प्राप्त करती है तब इसे जड़ महादेव के नाम से लोग जानते हैं। ठंड के दिनों में प्रतिमा चिकनी और तेली काले रंग की हो जाती है गर्मी में प्रतिमा खुरदुरा होकर अपना चोला छोड़ती है। इसके बावजूद इस मंदिर की सुरक्षा पर शासन या पुरातत्व विभाग का ध्यान अब तक नहीं गया है ग्रामीण खुद समय-समय पर इसका जीर्णोद्धार करते हैं। इसी तारतम्य में गांव के पूर्व सरपंच व वर्तमान जनपद सदस्य मुकेश वर्मा ने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए संकल्प लिया एवं  बाबा अर्द्धनारीश्वर मंदिर जीर्णोद्धार निर्माण समिति बेलदार सिवनी के अध्यक्ष थनवार वर्मा सहित सदस्यों में उद्योराम वर्मा, मुकेश वर्मा, पन्नालाल वर्मा, कैलाश वर्मा, नारद वर्मा ,बलराम वर्मा,अरुण वर्मा, ईश्वरी वर्मा, दिनेश वर्मा, भूपेंद्र वर्मा, मनहरन वर्मा, छेदु वर्मा, सुनील वर्मा, रामकुमार रातड़े, उमेंद क्षत्रिय, अजय वर्मा, यशवंत क्षत्रिय, मनीराम वर्मा, लोकेश शर्मा, गजानंद वर्मा शामिल हैं।विगत 2 से 3 वर्ष में स्थानीय व क्षेत्रीय दानदाताओं के सहयोग से मंदिर का भव्य स्वरूप का निर्माण कराया |  मंदिर के जीर्णोद्धार से एक मनोहारी मंदिर का निर्माण हो गया है परिसर से लगे कुंड में ही 12 ज्योर्तिलिंग व शिव मंदिर में अन्य देवी देवताओं के प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया गया जिसमें 5 फरवरी को कलश यात्रा निकाली गई, जिसके बाद 6 फरवरी को द्वितीय दिवस के रूप में वेदी पूजन और आधिवास यज्ञ संपन्न हुआ। 7 फरवरी को प्रातः 10 बजे से भगवान की प्राण-प्रतिष्ठा, हवन-पूजन, पूर्णाहुति एवं विशाल भोग-भंडारे का आयोजन किया गया । दर्शनार्थियों ने मंदिर परिसर पर बने कुंड में म्यूजिकल फाउंटेन की मांग शासन से की है जिससे मंदिर की भव्यता और बढ़ जाए|मान्यता के अनुसार लोगों मांग भगवान भोलेनाथ जरूर सुनते है और उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है.. यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, एकता एवं सकारात्मक ऊर्जा के संचार का माध्यम भी है। समारोह में विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए , जिसमें स्थानीय और दूर-दराज के  श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आगामी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन किया जायेगा जिसमें 14 व 15 फरवरी रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा | आयोजक समिति के संरक्षक एवं जनपद सदस्य शिवशंकर वर्मा ने बतलाया कि तीन दिन तक चले इस प्राण प्रतिष्ठा समारोह में विधायक अनुज शर्मा, पूर्व विधायक श्रीमती अनीता योगेंद्र शर्मा, रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, तिल्दा जनपद अध्यक्ष टिकेश्वर मनहरे, तिल्दा जनपद उपाध्यक्ष दुलारी सुरेंद्र वर्मा, संतोष शाह, रविंदर बबलू भाटिया, खूबी डहरिया, प्रवीण अग्रवाल, शेखर अग्रवाल, अनिल कुर्मी, प्रवीन लाटा सहित हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन लाभ प्राप्त  कर क्षेत्र में खुशहाली व सम्पन्नता के लिए भोलेनाथ से आशीर्वाद प्राप्त किया।  

चम्पारण के विराट रामायण मंदिर में पहुंचा दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग

चम्पारण. दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग पूर्वी चम्पारण के जानकीपुर में बन रहे विराट रामायण मंदिर पहुंच गया है। यहीं पर 17 जनवरी को 5 नदियों के जल से अभिषेक किया जाएगा। हरिद्वार, प्रयागराज, गंगोत्री, कैलाश मानसरोवर, सोनपुर आदि के जल से शिवलिंग का अभिषेक होगा। इधर, सोमवार को विराट शिवलिंग जैसे ही पूर्वी चंपारण की धरती पर पहुंचा, श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। स्थापना से 12 दिन पहले श्रद्धालुओं ने शिवलिंग का भव्य स्वागत किया। शिवलिंग को लेकर सबसे बड़ी चुनौती डुमरियाघाट थाना क्षेत्र‎के रामपुर-खजुरिया ओवरब्रिज को पार करना रहा। इसे पार करने में पांच घंटे लग गए। कड़ाके की ठंड के बावजूद हजारों की संख्या में भक्त घंटों पहले से सड़क किनारे खड़े होकर शिवलिंग के स्वागत का इंतजार करते नजर आए। डुमरिया घाट पुल पार करते ही चारों ओर हर-हर महादेव के नारे गूंजे। जगह-जगह भव्य स्वागत द्वार बनाए गए थे, फूल-मालाओं और रोशनी से पूरे रास्ते को सजाया गया था। श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के साथ भगवान शिव का अभिनंदन किया। कई स्थानों पर शिवलिंग को कुछ देर के लिए रोका गया, जहां भक्तों ने विधिवत पूजा-अर्चना की और जयकारे लगाए। हर चौराहे पर पुलिस टीम मौजूद शिवलिंग की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मोतिहारी प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आई। चकिया के DSP संतोष कुमार खुद सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाले हुए हैं। उनके नेतृत्व में करीब 150 से अधिक पुलिस बल को तैनात किया गया है। इनमें सीनियर पुलिस अधिकारी से लेकर सिपाही तक शामिल हैं।

शिवलिंग को इस दिशा में रखकर करें अभिषेक, जीवन बन जाएगा खुशहाल और सिद्धियों से भरपूर

हिंदू धर्म में महादेव को देवों के देव कहा गया है। नए साल के पहले दिन यदि विधि-विधान से घर में शिवलिंग की स्थापना और अभिषेक किया जाए, तो यह न केवल मानसिक शांति लाता है बल्कि रुके हुए कार्यों को भी गति देता है। लेकिन, अक्सर लोग अनजाने में शिवलिंग को गलत दिशा में रख देते हैं, जिससे उन्हें पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। तो आइए जानते हैं साल के पहले दिन किस दिशा में शिवलिंग रखकर करें अभिषेक करें। किस दिशा में रखें शिवलिंग? वास्तु शास्त्र और शिव पुराण के अनुसार, शिवलिंग की स्थापना के लिए उत्तर दिशा सबसे उत्तम मानी गई है। उत्तर दिशा भगवान शिव और माता पार्वती का निवास स्थान मानी जाती है। शिवलिंग की जलाधारी का मुख हमेशा उत्तर दिशा की ओर ही होना चाहिए। इससे घर में सुख-समृद्धि का प्रवाह निरंतर बना रहता है। भूलकर भी न करें ये दिशा संबंधी गलती शिवलिंग को कभी भी पूर्व या पश्चिम दिशा की ओर मुख करके नहीं रखना चाहिए। यदि आप दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा करते हैं, तो इसे भी शास्त्रों में वर्जित माना गया है। घर के मंदिर में शिवलिंग को हमेशा ऐसी जगह रखें जहाँ से ऊर्जा का संचार चारों ओर हो सके। नए साल पर अभिषेक की विधि सिद्धियों की प्राप्ति के लिए साल के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से भोलेनाथ का अभिषेक करें। यह जीवन के पांच दोषों को दूर करता है। महादेव को बेलपत्र, धतूरा, और चंदन अर्पित करें। ध्यान रहे कि शिवलिंग पर कभी भी केतकी के फूल या सिंदूर न चढ़ाएं। अंत में गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक करते समय 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें। घर में शिवलिंग का आकार शास्त्रों के अनुसार, घर में रखे जाने वाले शिवलिंग का आकार बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए। गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए अंगूठे के ऊपर के पोर जितना बड़ा शिवलिंग ही सबसे शुभ माना जाता है। इससे अधिक बड़ा शिवलिंग मंदिरों के लिए उपयुक्त होता है। सिद्धि और सफलता के लिए विशेष मंत्र अभिषेक के दौरान यदि आप 'श्री शिवाय नमस्तुभ्यं' या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हैं, तो यह आपके स्वास्थ्य और करियर के लिए 'रामबाण' सिद्ध हो सकता है।