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ICJS के समस्त पिलर को एक जुट करते हुए राज्य स्तरीय ICJS कार्यशाला का कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में आयोजन

भोपाल  राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (SCRB), पुलिस मुख्यालय, भोपाल द्वारा दिनांक 28 जून 2026 (रविवार) को “ICJS Implementation and Digital Integration” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का भव्य एवं सफल आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे सभागार (मिंटो हॉल), भोपाल में किया गया। यह कार्यशाला अपने स्वरूप और उद्देश्य की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण एवं उल्लेखनीय आयोजन साबित हुई, जिसमें Interoperable Criminal Justice System (ICJS) के अंतर्गत समस्त स्तंभ – पुलिस, न्यायालय, अभियोजन, जेल, फॉरेंसिक एवं स्वास्थ्य –एक ही मंच पर एकत्रित हुए। कार्यशाला में इन विभिन्न स्तंभो के प्रतिनिधियों ने आपसी अनुभवों, व्यावहारिक चुनौतियों तथा समाधान-आधारित विचारों को साझा करते हुए ICJS के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु समन्वित रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया। उक्त कार्यशाला का आयोजन माननीय न्यायमूर्ति  संजीव एस. कालगांवकर , मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य आतिथ्य एवं पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, SCRB  जयदीप प्रसाद के नेतृत्व तथा पुलिस महानिरीक्षक  हरिनारायणचारी मिश्र के समन्वय में किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति  संजीव एस. कालगांवकर, न्यायाधीश, उच्च न्यायालय, म.प्र., पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा एवं मंचासीन अतिथि गणों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य ICJS के अंतर्गत पुलिस, अभियोजन, न्यायालय, जेल, फॉरेंसिक व स्वास्थ्य विभागों के मध्य डिजिटल समन्वय को सशक्त बनाना तथा क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों और कमियों पर संवाद कर उनके समाधान की रूपरेखा तैयार करना था। कार्यशाला में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, जिला न्यायाधीश, पुलिस अधीक्षक, अभियोजन, जेल, फॉरेंसिक और स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। स्वागत उद्बोधन में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, SCRB  जयदीप प्रसाद ने कहा कि ICJS केवल एक सॉफ्टवेयर परियोजना नहीं, बल्कि देश की संपूर्ण आपराधिक न्याय प्रणाली को डिजिटल रूप से जोड़ने वाला राष्ट्रीय मिशन है। उन्होंने कहा कि पुलिस, न्यायालय, अभियोजन, जेल, फॉरेंसिक एवं स्वास्थ्य विभागों के बीच निर्बाध डिजिटल समन्वय स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कार्यशाला के उद्देश्यों, राज्य की वर्तमान प्रगति तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति  संजीव एस. कालगांवकर ने कहा कि इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) केवल एक तकनीकी मंच नहीं, बल्कि पुलिस, न्यायपालिका, अभियोजन, फॉरेंसिक एवं अन्य विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने वाला एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों में तकनीक को विधिक मान्यता दी गई है और भविष्य की न्याय व्यवस्था डिजिटल साक्ष्यों, रियल-टाइम सूचना आदान-प्रदान तथा तकनीक आधारित प्रक्रियाओं पर आधारित होगी। मध्यप्रदेश द्वारा ई-समन, ई-वारंट, CCTNS आधारित समन्वय एवं डिजिटल संचार जैसी पहलों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था की सफलता का वास्तविक पैमाना आम नागरिक को मिलने वाला लाभ है। उन्होंने डिजिटल साक्ष्यों के सुरक्षित प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण डेटा, तकनीकी नवाचारों के उपयोग तथा सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर बल दिया। उन्होंने कहा कि CCTNS 2.0, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एवं मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी, त्वरित एवं स्मार्ट बनाएगा। उन्होंने कहा कि तकनीक का दुरुपयोग करने वाले अपराधियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भी आधुनिक तकनीकों को तेजी से अपनाना होगा। उन्होंने ई-कोर्ट, ई-पेमेंट, भूमि अभिलेखों के एकीकरण तथा ऑनलाइन न्यायिक सेवाओं जैसी डिजिटल पहलों की सराहना करते हुए डिजिटल चार्जशीट, सुरक्षित डिजिटल स्टोरेज, दस्तावेजों की सुव्यवस्थित इंडेक्सिंग एवं विभिन्न एजेंसियों के बीच निर्बाध डेटा साझा करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही आरोपियों एवं गवाहों के डिजिटल संपर्क विवरणों का अद्यतन रिकॉर्ड तैयार कर ई-समन सेवा तथा पुलिस, न्यायालय एवं जेल प्रणालियों के बेहतर एकीकरण को भविष्य की आवश्यकता बताया। अपर मुख्य सचिव (गृह)  संजय शुक्ला ने कहा कि प्रशासनिक सुधार तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के उपयोग में राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की हैं, जबकि ऑपरेशनल एफिशिएंसी, विभागों के बीच डिजिटल इंटीग्रेशन एवं ऑनलाइन प्रक्रियाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन ने सभी संबंधित विभागों के साथ विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है तथा भारत सरकार, NIC एवं अन्य एजेंसियों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि तकनीकी चुनौतियों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने उपस्थित विशेषज्ञों से सुझाव आमंत्रित करते हुए कहा कि हमारा उद्देश्य केवल रैंकिंग में सुधार करना नहीं, बल्कि नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराना है। आवश्यकता पड़ने पर राज्य शासन प्रत्येक स्तर पर संसाधन, बजट एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगा पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध, संगठित अपराध एवं वित्तीय धोखाधड़ी जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तकनीक आधारित पुलिसिंग एवं ICJS समय की आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के सफल क्रियान्वयन में डिजिटल इंटीग्रेशन, वैज्ञानिक विवेचना एवं विभिन्न एजेंसियों के बीच रियल-टाइम सूचना साझा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। डीजीपी ने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस डिजिटल पुलिसिंग के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही है। विवेचना अधिकारियों को टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं तथा e-Sakshya, NAFIS, CCTNS एवं अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विवेचना को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाया जा रहा है। उन्होंने सभी विभागों से डेटा की गुणवत्ता बनाए रखने, तकनीकी दक्षता बढ़ाने तथा समन्वय को और मजबूत करने का आह्वान किया। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि ICJS 2.0, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड एनालिटिक्स एवं रियल-टाइम डिजिटल इंटीग्रेशन भविष्य की पुलिसिंग को नई दिशा देंगे और नागरिकों को अधिक प्रभावी न्याय व्यवस्था उपलब्ध कराएंगे। कार्यशाला के दौरान मुख्य अतिथि द्वारा वर्ष जून 2025 से मई 2026 की अवधि में CCTNS डेटा गुणवत्ता एवं डेटा एंट्री के आधार पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों को "बेस्ट परफॉर्मर अवार्ड" प्रदान किए गए। CCTNS डेटा रैंकिंग में रतलाम जिले ने प्रथम, अशोकनगर एवं गुना ने संयुक्त रूप से द्वितीय तथा राजगढ़ जिले ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त फिंगरप्रिंट प्रबंधन एवं पहचान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु भोपाल कमिश्नरेट, देवास एवं इंदौर को भी सम्मानित किया गया। तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव कार्यशाला के तकनीकी सत्र में देशभर के विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। एनसीआरबी, नई दिल्ली के उप निदेशक  प्रसून गुप्ता ने कहा कि मध्यप्रदेश इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) एवं CCTNS के प्रभावी क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में … Read more

हर जिले तक पहुंचेगा एकीकृत रोजगार मॉडल, युवाओं को प्रशिक्षण से लेकर प्लेसमेंट तक मिलेगी सुविधा

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र (एसवीबीपीईआईजेड) परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को परियोजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी युवा शक्ति का प्रदेश है। तेजी से बढ़ते निवेश, विस्तार ले रहे उद्योगों और बदलती तकनीकी आवश्यकताओं को देखते हुए राज्य को ऐसे संस्थागत ढांचे की जरूरत है जो युवाओं को प्रशिक्षण, रोजगार और उद्यमिता के अवसरों से सीधे जोड़ सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण की व्यवस्था उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए, ताकि युवाओं को कौशल प्राप्त करने के बाद रोजगार के लिए भटकना न पड़े। उन्होंने निर्देश दिए कि परियोजना को केवल प्रशिक्षण केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि रोजगार, उद्योग और उद्यमिता के समेकित इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आने वाले वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता को देखते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल इंडस्ट्रियल एवं एम्प्लायमेंट जोन की अवधारणा तैयार की गई है। इसका उद्देश्य युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। बैठक में नौ क्षेत्रीय जोनों की प्रस्तावित हब एवं स्पोक संरचना प्रस्तुत की गई। प्रत्येक जोन में एक उत्कृष्टता केंद्र (हब) तथा उससे जुड़े क्षेत्रीय कौशल विकास केंद्र (स्पोक) विकसित किए जाएंगे। हब स्तर पर उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण, अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षक प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और कैरियर सेवाओं का संचालन होगा, जबकि क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम स्पोक केंद्रों के माध्यम से संचालित किए जाएंगे। परियोजना के तहत कौशल विकास केंद्र, औद्योगिक भूखंड, प्लग एंड प्ले औद्योगिक सुविधाएं, साझा सुविधा केंद्र, रोजगार सहायता तंत्र, व्यावसायिक सेवाएं, विदेशी भाषा प्रशिक्षण, डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम तथा उद्यमिता सहायता सुविधाएं एक ही परिसर में विकसित की जाएंगी। इससे युवाओं को प्रशिक्षण से लेकर रोजगार प्राप्त करने और स्वयं का उद्यम स्थापित करने तक की पूरी प्रक्रिया के लिए एकीकृत व्यवस्था उपलब्ध होगी। बैठक में बताया गया कि परियोजना के प्रथम चरण के लिए मऊ, कानपुर देहात, कन्नौज, रायबरेली, प्रतापगढ़ तथा कानपुर नगर में कुल 369 एकड़ भूमि उपलब्ध है। अन्य जिलों के लिए भी भूमि की उपलब्धता हो रही है।  बैठक में बताया गया कि परियोजना के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण एवं प्रमाणन उपलब्ध कराया जा सकेगा। प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक रोजगार मिलान (जॉब मैचिंग) का लक्ष्य रखा गया है, जबकि प्रशिक्षित युवाओं के लिए 80 प्रतिशत प्लेसमेंट सुनिश्चित करने की योजना है। इसके अतिरिक्त प्रतिवर्ष दो लाख से अधिक नए एमएसएमई उद्यमों को प्रोत्साहन मिलने तथा लगभग 50 हजार गिग वर्कर्स को औपचारिक आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बैठक में बताया गया कि सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (ITE) और उसकी नॉलेज पार्टनर संस्था ITEES के अनुभवों का उपयोग किया जाएगा। यह संस्था विश्व के अनेक देशों में तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा प्रणालियों के विकास में सहयोग कर चुकी है। पाठ्यक्रम विकास, क्षमता निर्माण, गुणवत्ता आश्वासन, मूल्यांकन, नेतृत्व विकास और प्रशिक्षण अवसंरचना के निर्माण में उसकी विशेषज्ञता का लाभ प्रदेश को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि उपलब्धता, संस्थागत संरचना, निजी क्षेत्र की भागीदारी तथा क्रियान्वयन मॉडल से संबंधित प्रस्तावों पर शीघ्र निर्णय लेते हुए परियोजना को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाया जाए।