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महापौर का बड़ा फैसला: ललेडीपुरा माचल में स्लॉटर हाउस नहीं बनेगा

इंदौर  साल 2017 में इंदौर के ललेडीपुरा माचल में स्लॉटर हाउस बनाने को लेकर बार-बार विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने स्पष्ट किया कि नगर निगम की किसी भी योजना में ललेडीपुरा और आसपास के गांवों में स्लॉटर हाउस बनाने का कोई विचार नहीं है। महापौर ने कहा कि हमारे पास स्थानीय गोपालकों और गांव वासियों से इस विषय पर जानकारी आई है और उन्होंने ये स्पष्ट किया है कि ललेडीपुरा माचल में स्लॉटर हाउस बनाने की नगर निगम की कोई मंशा नहीं है। महापौर ने यह भी बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर पहले भी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए थे और अब फिर से सभी अधिकारियों को यह निर्देश दिए गए हैं कि इस क्षेत्र में स्लॉटर हाउस का निर्माण नहीं किया जाएगा। महापौर ने कहा साल 2017 में तत्कालीन समय में इस परियोजना को लेकर अनुमति और कार्रवाई की गई थी, लेकिन अब वे इस निर्णय को निरस्त करने के निर्देश दे चुके हैं।

असलम चमड़ा का साम्राज्य: स्लॉटर हाउस अफसरों की मदद और सिस्टम की छांव में कैसे बढ़ा कारोबार

भोपाल  राजधानी भोपाल में जिंसी के पास भोपाल नगर निगम की अनुमति और सहयोग से स्लॉटर हाउस संचालित करने वाले असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा आज कई करोड़ों का आसामी है। भोपाल में करीब 25 से 30 साल पहले असलम कुरैशी चमड़े का कारोबार करता था। यहीं से उसका नाम असलम चमड़ा पड़ा।  पुलिस सूत्रों के अनुसार असलम चमड़ा पर बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को बसाकर स्लॉटर हाउस में कार्य कराने की शिकायत राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग तक की जा चुकी है लेकिन भोपाल पुलिस ने सवालों के घेरे में आए असलम चमड़ा के बयान के आधार पर उसे निर्दोष बताते हुए शिकायत की फाइल क्लोज कर दी।  इतना ही नहीं उसने भोपाल नगर निगम के प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में चलाए जा रहे स्लॉटर हाउस में गायों का मांस को भैंस का मांस का बताने वाला सर्टिफिकेट भी नगर निगम के डॉक्टर से बनवा लिया था। इसी के आधार पर वह मुंबई और हैदराबाद से लेकर विदशों तक मांस की सप्लाई कर रहा था। अगर बजरंग दल द्वारा पकड़े गए कंटेनर के मांस की लैब में जांच नहीं कराई जाती तो असलियत सबके सामने नहीं आती। 8 जनवरी को सार्वजनिक हुई रिपोर्ट में उक्त कंटेनर में गौमांस होने की पुष्टि हो गई है, जबकि भोपाल नगर निगम के डॉ. बेनीप्रसाद गौर द्वारा इसे भैंस का मांस होने का सर्टिफिकेट दिया गया था। इस खुलासे के बाद राजधानी में असलम चमड़ा को लेकर हर कोई  जानना चाहता है कि  भोपाल शहर, मध्यप्रदेश और देश में भाजपा की सरकार होने के बाद भी गौहत्या कर उनके मांस की सप्लाई करने वाला असलम चमड़ा आखिर है कौन? भोपाल नगर निगम के पूर्व अधिकारियों से जुटाई गई जानकारी के अनुसार असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा 25 से 30 साल पहले पुराने भोपाल में मृत मवेशियों को उठाकर उनके मांस से  चमड़े और हड्डियों को निकालकर बेचता था। समय बदला और भोपाल नगर निगम द्वारा मृत मवेशियों को उठाने के लिए कर्मचारी रख लिए गए लेकिन उनको उठाने और उसके बाद होने वाले खर्च को निकालने की व्यवस्था कहां से हो? ये एक बड़ा सवाल था। इसके लिए भोपाल नगर निगम के अधिकारियों ने असलम चमड़ा से अघोषित सौदा किया और मृत मवेशियों को उठाकर असलम को दिया जाने लगा।   असलम चमड़ा नाम कैसे पड़ा ? चूंकि असलम कुरैशी वर्षों तक चमड़े का कार्य करता रहा, इसलिए उसका नाम असलम चमड़ा हो गया। नगर निगम के संपर्क में आने के बाद असलम मृत मवेशियों के चमड़े और हड्डियों के कारोबार को और फैलाता गया। बाद में डेयरियों और अन्य स्थानों पर मृत मवेशियों को उठाकर उसके चमड़े-हड्डी का कारोबार करने के लिए कई कर्मचारी भी रख लिए। स्लॉटर हाउस का संचालन शुरू किया  भोपाल नगर निगम के पूर्व अधिकारियों ने बताया कि भोपाल नगर निगम द्वारा जब मैनुअली स्लॉटर हाउस का संचालन किया जा रहा था, तब भी असलम चमड़ा ही उसका ठेका लेता था। इसके बाद स्लॉटर हाउस से निकलने वाले वेस्ट को बेचकर वो कमाई करता था। आगे चलकर वह जिस भी दल की सरकार रहे, उस राजनीतिक दल के नेताओं और तत्कालीन अधिकारियों से सांठगांठ करने लगा और मांस की सप्लाई का ठेका भी लेने लगा था।  भोपाल वन विहार में वर्षों तक की सप्लाई  भोपाल में स्थित वन विहार नेशनल पार्क में कई मांसाहारी जानवर हैं, जिसमें बाघ, शेर व अन्य जानवर शामिल हैं। मध्यप्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्क में घायल होने वाले जानवरों को यहीं लाकर इलाज किया जाता है। वन विहार में रहने वाले मांसाहारी जानवरों को खिलाए जाने वाले कच्चे मांस की सप्ताल भी असलम चमड़ा ही करता था। स्लॉटर हाउस में गायों को काटकर गौमांस सप्लाई का खुलासा होने के बाद वन विहार में उसका मीट सप्लाई का ठेका निरस्त कर दिया गया है। I जिंसी स्लॉटर हाउस का आधुनिकीकरण    दस्तावेजों की पड़ताल और नगर निगम के अधिकारियों से जानकारी जुटाने पर पता चला कि भोपाल में जब आधुनिक स्लॉटर हाउस का संचालन किया जाने लगा तो इसके लिए महापौर परिषद ने शहर के अंदर स्लॉटर हाउस संचालन की अनुमति नहीं दी। इसके बाद आदमपुर छावनी के पास स्लॉटर हाउस लगाने के लिए उत्तरप्रदेश की एक बड़ी मीट कंपनी ने प्रस्ताव दिया, लेकिन आदमपुर छावनी और आसपास के गांव के लोगों ने विरोध किया तो मामला ठंडा पड़ गया। इसके बाद जिंसी स्थित पुराने स्लॉटर हाउस के स्थान पर ही आधुनिक स्लॉटर हाउस को संचालित करने की तिकड़म भी अधिकारियों ने निकाल ली और वर्ष 2022 में नगर निगम के आयुक्त और प्रशासक रहे अधिकारियों ने असलम चमड़ा को आधुनिक स्लॉटर हाउस संचालन का ठेका भी दे दिया। अधिकारियों की मेहरबानी नगर निगम सूत्रों की मानें तो असलम चमड़ा निगम के अधिकारियों और स्थानीय नेताओं से सांठगांठ कर अपने हिसाब से स्लॉटर हाउस का संचालन करता था। वह नगर निगम द्वारा पशुओं की मेडिकल जांच और मांस को सर्टिफाइड करने के लिए पदस्थ किए गए पशु चिकित्सक और कर्मचारियों से अपने हिसाब से कार्य कराता था। सूत्रों की मानें तो स्लॉटर हाउस में पदस्थ डॉ. बेनीप्रसाद गौर मीट के ब्लैंक सर्टिफिकेट और कटने से पहले पशुओं के होने वाले चिकित्सकीय परीक्षण की खाली रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कर असलम चमड़ा को दे देते थे और वह अपने हिसाब से मीट और मवेशियों की स्वास्थ्य परीक्षण रिपोर्ट भरता रहता था। तीन दर्जन संपत्तियां और आलीशान बंगले बनाए असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा ने भोपाल नगर निगम के साथ मिलकर जब से मांस और चमड़े का कारोबार शुरू किया, तब से अब तक वह भोपाल शहर और आसपास करीब तीन दर्जन संपत्तियां बना चुका है। वह भोपाल के सेंट्रल जेल रोड स्थित पॉश कॉलोनी में करोड़ों की आलीशान कोठी में परिवार के साथ रहता है। उसके सट्टेबाजी और जुआ खेलने के लिए मुंबई और दुबई जाने के दावे भी सामने आए हैं। तीन साल पहले भी असलम पर भोपाल की जीवदया गौशाला के पास बड़ी संख्या में मृत गायों को फेंकने का आरोप लगा था। 

भोपाल स्लॉटर हाउस कांड पर बड़ा एक्शन, 11 कर्मचारी सस्पेंड, ठेका मालिक को ब्लैक लिस्ट किया गया

भोपाल  गोवध मामले में नगर निगम के 32 करोड़ से बने स्लॉटर हाउस को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। निगम शहर में पशु स्लॉटरिंग का इंतजाम नहीं करेगा। शहर के बाहर व्यवस्था करने की जिम्मेदारी प्रशासन के पाले में डाल दी। स्लॉटर हाउस में जानवरों की कटाई करने वाली लाइव स्टॉक प्रालि कंपनी व मालिक असलम कुरैशी को आजीवन ब्लैकलिस्ट किया गया है। निगम ने 11 कर्मियों को सस्पेंड किया है।   भोपाल नगर निगम की परिषद बैठक में जोरदार हंगामा हुआ. नगर निगम के स्लॉटर हाउस से गोमांस की सप्लाई के मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों ने बैठक में कड़ा विरोध जताया. इस मामले को लेकर परिषद में कांग्रेस पार्षद दल के सदस्य भी आक्रामक रहे और नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी का घेराव किया. वहीं मामले से दुखी 2 भाजपा पार्षद परिषद की बैठक छोड़कर चले गए. एक घंटे देरी से शुरू हुई बैठक बता दें की गोमांस को लेकर पहले से ही हंगामा होना तय था. कांग्रेस पार्षदों ने पहले ही इसकी तैयारी कर ली थी. वहीं भाजपा के पार्षदों ने भी इस मामले में परिषद को घेरने की तैयारी की ली. एक दिन पहले गोमांस वाले मुद्दे को लेकर हिंदूवादी संगठनों ने भी नगर निगम कार्यालय का घेराव किया था. महापौर और परिषद पर आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई का भी दवाब था. ऐसे में सबसे पहले स्लॉटर हाउस में पदस्थ वेटनरी डॉक्टर बेनी प्रसाद गौर को निलंबित कराया गया. इसके आदेश संभागायुक्त संजीव कुमार सिंह ने जारी किए. निलंबन का लेटर जारी होने के बाद करीब एक घंटे देरी से परिषद की बैठक शुरू हुई और सत्तापक्ष ने डॉक्टर के निलंबन की जानकारी दी. 11 नगर निगम के कर्मचारी होंगे निलंबित परिषद बैठक शुरू होते ही दोनों पक्षो के पार्षद ने गोमांस मामले में उच्च स्तरीय कमेटी और आरोपितों पर कार्रवाई करने की मांग की. इस पर निगम अध्यक्ष सूर्यवंशी ने सदन को कार्रवाई का भरोसा दिलाते हुए कहा कि भोपाल को मांस की मंडी नहीं बनने देंगे. निगम अध्यक्ष ने आयुक्त को निर्देश दिया कि इस मामले में स्लाटर हाउस में कार्यरत नगर निगम के सभी 11 कर्मचारियों को निलंबित किया जाए. इसके साथ ही स्लॉटर हाउस का संचालन करने वाली लाइव स्टॉक को ब्लैक लिस्टेड करने के निर्देश दिए. साथ ही यह भी कहा कि भविष्य में यह एजेंसी नगर निगम के किसी भी टेंडर में पार्टिसिपेट ना कर सके, यह भी सुनिश्चित किया जाए. शासन स्तर पर होगी उच्च स्तरीय जांच कांग्रेस पार्षद दल के सदस्यों ने कहा कि उन्हें नगर निगम की जांच कमेटी पर भरोसा नहीं है. इसलिए शासन स्तर पर एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी बनाई जाए. यदि नगर निगम के अधिकारी ही जांच कमेटी में शामिल होंगे तो निष्पक्ष जांच नहीं होगी. इसके बाद नगर निगम अध्यक्ष ने कहा कि परिषद की ओर से व्यवस्था दी जा रही है कि इस मामले की जांच नगर निगम के बाहर के शासन स्तर के अधिकारी करेंगे, इसका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा. भाजपा पार्षद का इस्तीफ़ा, अध्यक्ष ने किया अस्वीकार नगर निगम परिषद की बैठक में कांग्रेस पार्षदों ने पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया और महापौर व एमआईसी के इस्तीफे की मांग की. भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव भी विरोध में जैकेट पर कागज चस्पा कर पहुंचे. भाजपा के वरिष्ठ पार्षदों समेत कई सदस्यों ने विरोध जताया. इस दौरान भावुक होकर भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव ने परिषद से इस्तीफ़ा देने की चेतावनी दी. उनका कहना था कि जब तक गोमांस के मामले में शामिल सभी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती वह परिषद में वापस नहीं आएंगे. हलाकि बाद में भाजपा पार्षद उन्हें परिषद में लेकर आए और निगम अध्यक्ष ने उनका इस्तीफ़ा अस्वीकार कर दिया. परिषद से बहिर्गमन के दौरान भार्गव के साथ भाजपा पार्षद नीरज सिंह भी साथ रहे. महापौर ने कहा- एमआईसी ने नहीं दी गोवंश काटने की अनुमति महापौर मालती राय ने कहा कि स्लॉटर हाउस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए जा चुके हैं. विपक्ष द्वारा 2024 में एमआईसी के अनुमोदन पर भवन निर्माण और अनुमति को लेकर लगाए जा रहे आरोप तथ्यहीन हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय न तो महापौर परिषद थी और न ही यह प्रक्रिया उनके कार्यकाल में शुरू हुई. महापौर परिषद ने स्लॉटर हाउस में गोवंश काटने की अनुमति नहीं दी थी. पीपीपी मोड पर बने टेंडर, प्रक्रिया, अधिकारियों की भूमिका और निगरानी से जुड़े सभी बिंदुओं की जांच होगी और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. भाजपा पार्षद ने दिया इस्तीफा भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव, सुरेंद्र वाडीका, पप्पू विलासराव घाटगे ने एमआइसी पर मनमानी के आरोप लगाए। कहा, संगठन गोरक्षा मुद्दे पर राजनीति करता है, पर हमारी ही सरकार गो-रक्षा नहीं कर सकी। पार्षद देवेंद्र ने पद से इस्तीफा दिया और चले गए। अध्यक्ष ने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। यह है मामला जिंसी स्थित स्लॉटर हाउस से भैंस के मांस की आड़ में गोमांस सप्लाई किया जा रहा था। दिसंबर में पुलिस ने मुंबई भेजे जा रहे मांस की बड़ी खेप से सैंपल लिए तो गोमांस की पुष्टि हुई। इसके बाद स्लॉटर हाउस की ठेका कंपनी लाइव स्टॉक और मालिक कुरैशी पर कार्रवाई हुई। इन पर हुई कार्रवाई अब्दुल खान, रहमान खान, मोहम्मद खान, फरीद खान, राजा खान, सलीम, वसीम खान, युसूफ खान, अब्दुल हकीम, मो. रफीक।

स्लॉटर हाउस कांड का खुलासा: दुधारू-स्वस्थ भैंसों की हत्या, बछड़े और पाड़ों के अवशेष मिलने से हड़कंप

भोपाल   स्लॉटर हाउस में नियमों को ताक पर रखकर की जा रही अवैध कटाई का मामला गहराता जा रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार स्लॉटर हाउस में 14-15 साल की निर्धारित उम्र के बजाय 4 से 8 साल के दुधारू और स्वस्थ भैंसों को काटा जा रहा है। यहां छोटे-छोटे बछड़ों और पाड़ों के अवशेष के साक्ष्य मिले हैं। 26 टन गौ मांस से भरा मिला था ट्रक बता दें कि पीएचक्यू (PHQ) के सामने 26 टन गोमांस से भरा ट्रक मिला था। इस मांस को स्लॉटर हाउस से मुंबई भेजने का सर्टिफिकेट नगर निगम ने जारी किया था। निगम के डॉक्टर ने इस मांस को भैंस का बताते हुए इंसानों के उपभोग के लिए फिट माना था।  पड़ताल में सामने आया कि स्लॉटर हाउस में रोज 100 से 150 पशुओं का वध किया जा रहा था। वहीं, निगम के रिकॉर्ड में ह संख्या औसतन 40 भैंसों की थी। 22 दिसंबर को स्लॉटर हाउस संचालक असलम कुरैशी ने भास्कर से बातचीत में खुद स्वीकारा था कि रोज 100 से 150 पशुओं की स्लॉटिंग हो रही है। यानी निगम के रिकॉर्ड और वास्तविक संचालन में 3 गुना से ज्यादा का अंतर था।स्लॉटर हाउस से मांस मुंबई और चेन्नई के रास्ते दुबई समेत खाड़ी देशों तक एक्सपोर्ट किया जा रहा था। हालांकि, नगर निगम प्रशासन को इस सप्लाई चैन की कोई जानकारी नहीं थी। एमआईसी सदस्य (हेल्थ और एसबीएम) आरके सिंह ने कहा, ‘निगम के रिकॉर्ड में हर दिन अधिकतम 40 भैंसों की स्लॉटिंग दर्ज है। मांस कहां और कितना भेजा जा रहा है, यह देखना हमारा काम नहीं है।’ निगम के डॉक्टर रोज दो बार स्लॉटर हाउस की जांच करते थे। शाम को पशुओं की मेडिकल जांच होती। इसके बाद प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता। अगले दिन सप्लाई होने वाले मांस की गुणवत्ता की जांच होती थी। अब पुलिस रिपोर्ट की आड़ में मामला दबाने की कोशिश     जिस 26 टन मांस को मुंबई भेजा गया, उसमें गोमांस की पुष्टि हो चुकी है। इसके बावजूद पूरा सिस्टम पुलिस की जांच रिपोर्ट की आड़ लेता दिख रहा है। पुलिस कह रही है कि सीसीटीवी फुटेज में सिर्फ भैंसें नजर आ रही हैं, जबकि निगम यह तर्क दे रहा है कि पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की जांच होगी।     पुलिस की जांच रिपोर्ट का मतलब है चार्जशीट, जिसमें कम से कम 3 महीने लगते हैं। यानी तब तक कार्रवाई टालने का रास्ता साफ। ऐसे में सवाल है कि किस रिपोर्ट का इंतजार है?     जब पुलिस की पीएम रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि पहले ही हो चुकी है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? मेयर से बोले पार्षद- मान लिया कि सब नियम से हुआ, पर गोमांस का जवाब दें गोमांस मामले में महापौर मालती राय अब एमआईसी सदस्यों और जोन अध्यक्षों को मनाने में जुट गई हैं। उन्होंने सोमवर को एमआईसी सदस्यों और जोन अध्यक्ष पार्षदों को इस मुद्दे पर निगम का साथ देने के लिए कहा। इस पर पार्षदों ने कहा कि माना सबकुछ नियम से हुआ, लेकिन गाय का मांस कैसे जस्टीफाई हो सकता है? इस पर तो जवाब देना ही होगा। अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। हम तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कर रहे हैं। नियमों को तिलांजलि: डॉक्टर और तकनीक फेल 1- फिटनेस रिपोर्ट का अभाव: नियम है कि बिना पशु चिकित्सक की जांच और उम्र निर्धारण के किसी पशु को नहीं काटा जाएगा, लेकिन यहां बिना जांच के ही वध का खेल चल रहा था। 2- स्टनिंग और क्रूरता आधुनिक मशीनों और सीसीटीवी की मौजूदगी के बावजूद पशुओं को बिना बेहोश किए और अनावश्यक पीड़ा देकर काटा जा रहा था। 3- अवैध ड्रेसिंग: स्वास्थ्य मानकों के अनुसार जमीन पर मांस का संपर्क प्रतिबंधित है, लेकिन सबूत बताते हैं कि यहां स्वच्छता के मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। सवालों से भाग रहे अधिकारी 1- डॉ. बीपी गौर (पशु चिकित्सक): विवादित सर्टिफिकेट जारी करने के बाद से डॉक्टर ने चुप्पी साध ली है। वे न फोन उठा रहे हैं और न ही दफ्तर में मिल रहे हैं। 2- हर्षित तिवारी (अपर आयुक्त): पशु संबंधी कामकाज संभालने वाले अपर आयुक्त ने सवालों पर फोन काट दिया। स्लॉटर हाउस की नियमावली इनके पास नहीं है। 3- संस्कृति जैन (निगम आयुक्त): भोपाल शहर की मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को स्लॉटर हाउस के संचालन की बुनियादी प्रक्रिया तक की जानकारी नहीं है, जिससे प्रबंधन की पोल खुल गई है। असलम पर मेहरबान निगम, 100 करोड़ की जमीन 4 लाख में दी यह मॉडर्न स्लॉटर हाउस करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन पर बना है, जिसकी बाजार कीमत करीब 100 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। निगम ने यह जमीन कंपनी को सालाना सिर्फ 4 लाख रुपए किराये पर दी थी। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, परिसर में बाहरी लोगों की एंट्री प्रतिबंधित थी। संचालन का पूरा नियंत्रण असलम कुरैशी के पास था। सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग भी निगम के बजाय संचालक के पास थी। गोमांस की पुष्टि होते ही तुरंत स्लॉटर हाउस सील कर दिया। आगे की कार्रवाई पुलिस की रिपोर्ट के बाद की जाएगी।’ -मालती राय, मेयर ( नगर निगम भोपाल) गोमांस मामले में आरोपियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। मामले में सख्त कार्रवाई हो।’ -विश्वास सारंग, कैबिनेट मंत्री