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कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात संवर्धन हेतु राज्य सरकार की पहलों पर विशेष फोकस

रायपुर  राज्यसभा सांसद एवं वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्ष  डोला सेन की अध्यक्षता में आज रायपुर के एक निजी होटल में समिति की बैठक आयोजित की गई।  बैठक में ‘‘भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का मूल्यांकन’’ विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। समिति के सदस्यों द्वारा व्यापार, निवेश, निर्यात-आयात तथा दोनों देशों के मध्य आर्थिक सहयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। अध्ययन दौरे का उद्देश्य संबंधित हितधारकों एवं अधिकारियों से जानकारी प्राप्त कर विषय पर व्यापक एवं तथ्याधारित रिपोर्ट तैयार करना है। बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ‘‘भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का मूल्यांकन’’ विषय पर विचार-विमर्श किया गया। चर्चा में विशेष रूप से कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों, उपलब्ध सहायता तंत्र, निर्यात प्रोत्साहन उपायों तथा इस क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। समिति ने कृषि आधारित उद्योगों, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र, निर्यात संवर्धन तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में छत्तीसगढ़ के उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने से संबंधित विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों ने राज्य में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात संवर्धन, निवेश आकर्षित करने, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने तथा व्यापारिक अवसरों के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी समिति के समक्ष प्रस्तुत की। समिति ने इन पहलों की समीक्षा करते हुए निर्यात क्षमता के बेहतर उपयोग तथा वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के संबंध में भी चर्चा की। इस अवसर पर संसदीय स्थायी समिति के सदस्य सांसद  अमरा राम,  बिश्वजीत सिन्हा,  रमेश अवस्थी,  अतुल गर्ग,  धनंजय भीमराव महाडिक, मती रेणुका चौधरी, मती रोजी सैलो दामोदरन, मती लामनेई सिंगसित,  दिलीप यादव,  सदानंद महालू शेट तानवड़े, मती अनीता शुभदर्शिनी, डॉ. शिवपाल सिंह पटेल,  आनंद भदौरिया, डॉ. प्रशांत यादवराव पडोले, डॉ. संगीता बलवंत, मती विजया एस. राजशेखर,  राजेन्द्र कुमार तथा  गिरधारी यादव उपस्थित थे। बैठक में छत्तीसगढ़ शासन के अपर मुख्य सचिव  मनोज कुमार पिंगुआ, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव  अंकित आनंद, छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (सीएसआईडीसी) के प्रबंध संचालक  विश्वेश झा, कृषि विभाग के संचालक  राहुल देव सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने भी भाग लिया।

विधि एवं विधायी कार्य विभाग मंत्री गजेन्द्र यादव ने इस बजट केे लिए सदन के सदस्यों से सुझाव भी लिए

रायपुर  विधि एवं विधायी कार्य मंत्री  गजेन्द्र यादव ने राज्य की न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाए रखने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अंतर्गत 1221 करोड़ 26 लाख 45 हजार रुपये का बजट मांग विधानसभा में प्रस्तुत किया, जिसे सदन ने पारित कर दिया। विधि मंत्री  गजेंद्र यादव ने बताया कि न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए, अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत राज्य सरकार द्वारा विभिन्न स्थानों पर न्यायालय भवनों तथा न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के आवासों के निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 88 करोड़ 63 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। विधि एवं विधायी कार्य मंत्री  गजेन्द्र यादव ने बताया कि राज्य में न्यायालयों के आधुनिकीकरण की दिशा में न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण किया जा रहा है, जिसके लिए इस वित्त वर्ष में 15 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। न्यायपालिका के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों तथा तालुका विधिक सेवा समितियों के माध्यम से विभिन्न योजनाएँ संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य विचाराधीन बंदियों, महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं जनजाति तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के जरूरतमंद लोगों तक न्याय पहुंचाना है। इन योजनाओं के संचालन के लिए 2 करोड़ 50 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है तथा ए.डी.आर. सेंटर के निर्माण के लिए 2 करोड़ 40 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। मंत्री  यादव ने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, महिलाओं, बच्चों तथा विचाराधीन बंदियों सहित पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की जाती है। वर्ष 2025 में कुल 94 हजार 959 पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क एवं सक्षम विधिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में माननीय उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ बिलासपुर से संबंधित व्यवस्थाओं के लिए 100 नवीन पदों के सृजन हेतु 9 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त जगदलपुर में नवीन एन.आई.ए. कोर्ट की स्थापना के लिए एक करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।  यादव ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में विभिन्न न्यायालयों में नए पदों का सृजन भी किया गया है, जिनमें व्यवहार न्यायालय धमधा (दुर्ग) के लिए 06 पद, जिला न्यायालय बेमेतरा के लिए 06 पद, जिला न्यायालय महासमुंद के लिए 55 पद, जिला न्यायालय बिलासपुर के लिए 18 पद, जिला न्यायालय पंखाजूर-कांकेर के लिए 07 पद, जिला न्यायालय कोरबा के लिए 09 पद, जिला न्यायालय जगदलपुर के लिए 06 पद तथा जिला न्यायालय जांजगीर-चांपा के लिए 03 पद शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सिविल जिला न्यायालय दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा (अम्बिकापुर) एवं बस्तर (जगदलपुर) में 40 विभिन्न पदों के सृजन तथा प्रत्येक जिला न्यायालय में एक-एक अनुवादक का पद के मान से कुल 23 पदों के सृजन हेतु 10 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। विधि एवं विधायी कार्य मंत्री  यादव ने बताया कि आर्थिक या अन्य कारणों से न्याय से वंचित लोगों को आपराधिक मामलों में सक्षम एवं प्रभावी निःशुल्क कानूनी सेवा प्रदान करने के लिए एक करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को अंतर्राष्ट्रीय मूट-कोर्ट प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए एक करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। साथ ही विश्वविद्यालय के स्थापना व्यय के लिए 13 करोड़ 50 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। यह बजट राज्य में न्यायिक अधोसंरचना को मजबूत करने, न्यायालयों के आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने तथा समाज के कमजोर वर्गों तक न्याय की पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।