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भूलकर भी किसी को न बताएं ये 3 बातें, चाणक्य नीति के अनुसार बढ़ सकती हैं आपकी मुश्किलें

आचार्य चाणक्य ने अपनी किताब चाणक्य नीति में समाज और परिवार में जीने के सलीके को बहुत बारीकी से बताया है. उन्होंने अपनी किताब  चाणक्य नीति में पैसे, सेहत, बिजनेस, दांपत्‍य जीवन, जीवन में सफलता से जुड़े कई चीजों के बारे में विस्तार से बताया है. मुश्किल समय में ये किताब हमेशा ही सही रास्ता दिखाती है. अपनी किताब में चाणक्य ने तीन ऐसी बातों के बारें में भी लिखा है, जिसके बारें में आप को किसी से बात नही करनी चाहिए: #3 व्यवसाय में हुए नुकसान के बारे में ना करें अगर आप को आपके बिजनेस में नुकसान हो रहा है तो इसका जिक्र आप को किसी और से नहीं करना चाहिए. अगर आप ऐसा करते हैं तो विरोधी आप को कमजोर समझेंगे और आपका ही नुकसान कर सकते हैं. इसके अलावा वो आप से भी दूरी भी बना सकते है. इसी वजह से आचार्य चाणक्‍य कहते हैं कि अपनी आर्थिक स्थिति का जिक्र किसी से नहीं करनी चाहिए. #2 आतंरिक कलह के बारें में ना करें किसी से बात आचार्य चाणक्‍य कहते हैं कि अगर आप की परिवार में लड़ाई जा रही है या फिर आप की पत्नी से बन नहीं रही है तो इस बात का जिक्र किसी और नहीं करना चाहिये. ऐसा करने से समाज में आप की छवि ख़राब होती है. लोग आपके दांपत्य जीवन का भी मजाक बनाते हैं,जिसका असर आप के रिश्तों पर भी पढ़ता है. #1 धोखे के बारें में ना करें बात आचार्य चाणक्‍य कहते हैं कि अगर आप को किसी से धोखा मिला है तो आप को इस बात का जिक्र नहीं करना चाहिए क्योंकि आप को लोग कमजोर और उदार समझ लेंगे और भविष में आप का ही नुकसान कर सकते हैं. 

सफलता के लिए जीवन में अनुशासन और आजादी का सही तालमेल जरूरी

आजकल का युवा वर्ग आजादी का मतलब अनुशासनहीनता से लगाता है। जबकि लाइफ में अगर सक्सेजफुल होना है तो डिसिप्लिन का होना बेहद जरूरी है। अनुशासन केवल शिक्षा की उम्र तक ही जरूरी नहीं होती बल्कि इसे पूरी लाइफ अपने साथ रखना चाहिए। जिससे केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि रोजगार के समय भी आप सफल हो सकें। लेकिन दैनिक जीवन में पालन किया जाने वाला डिसिप्लिन आपको सक्सेजफुल बना सकता है। चलिए जानें कैसे अनुशासन में रहना फायदेमंद होता है और लाइफ में आगे बढ़ने में मदद करता है। अनुशासन और आजादी एक ही सिक्के के पहलू हैं अनुशासन और आजादी एक दूसरे के विपरीत नही हैं बल्कि ये एक सिक्के के ही पहलू हैं। अनुशासन और आजादी को बराबर मानना चाहिए। आगे जानें कैसे युवा आजादी को अनुशासनहीनता से जोड़ कर देखते हैं। सुबह उठने का रूटीन जब आप सुबह जल्दी और एक ही समय पर हर दिन जागते हैं तो आपको दैनिक क्रिया को करने के लिए पर्याप्त समय मिलता है। साथ ही आप सुबह काम पर जाने की जल्दी में नहीं होते। इससे हर काम पूरी तसल्ली और ठीक से कर पाते हैं। अगर आप आजादी का मतलब सुबह देर से उठना समझते हैं तो इससे दिनभर के काम अस्त-व्यस्त होते है। और अपना ज्यादातर समय बेकार के रोजमर्रा के कामों में बर्बाद कर देंगे।   मिलता है पर्याप्त समय जल्दी उठना, जल्दी सोना अनुशासन का ही एक पार्ट है। जब आप सुबह जल्दी उठते हैं तो आपके पास पर्याप्त समय होता है। जिसे आप एक्सरसाइज या मेडिटेशन करके बिता सकते हैं। रोज की एक्सरसाइज आपकी सेहत को सही रखने में मदद करती है और बीमारियों से दूर रखती है। खाने का अनुशासन घर में मां हमेशा घर के बने शुद्ध खाने के खाने के लिए बोलती है। ये भी एक तरह का अनुशासन है। जिसे पालन करने से आप अपनी सेहत को बचाते हैं। आजादी का अर्थ आजकल युवा वर्ग मन मुताबिक खाने को खाने और स्मोकिंग, शराब, गुटखा की लत को समझते हैं। आप जितना शुद्ध फूड खाते हैं, शराब और स्मोकिंग से दूर रहते हैं, हेल्थ बनी रहती है और बीमार होने से बच जाते हैं। क्योंकि बीमार होने और रिकवर होने में जीवन का काफी सारा समय बेकार हो सकता है। जो आपको बाकी लोगों से पीछे कर देगा। समय का सदुपयोग जब आप दैनिक जीवन के कामों को पूरे डिसिप्लिन के साथ करते हैं तो आपके पास काफी सारा समय बचता है। जिसका सही इस्तेमाल किया जा सकता है। बचे समय में कुछ नया सीखा जा सकता है। जो आपकी लाइफ स्किल को बढ़ाएगा और लाइफ में सफल बनाने में मदद करेगा। डिसिप्लिन लाइफ में आप पॉजिटिव चीजों के बारे में सोचते हैं और अपनी ग्रोथ पर फोकस कर सकते हैं। अनुशासनहीनता ज्यादातर निगेटिव बातों को मन में जन्म देती है जो लाइफ को बर्बाद करने के लिए काफी होती है।