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उत्तरी बस्तर समिति को झटका: कांकेर में तीन नक्सलियों ने किया सरेंडर, माओवादी संगठन बिखरने के संकेत

कांकेर छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त करने की डेड लाइन में अब केवल महीनेभर का वक्त बचा है. जंगलों में भटक रहे नक्सली मुख्याधारा में लौट रहे हैं. 3 दिन में 25 लाख रुपये के 3 नक्सली AK-47 हथियार के साथ आत्मसमर्पण चुके हैं. उत्तर बस्तर के जंगल में अभी भी 21 नक्सली शेष हैं. पुलिस का अनुमान है कि जल्द ये नक्सली भी आत्मसमर्पण कर उत्तर बस्तर इलाके को नक्सल मुक्त करने में अपनी अहम रोल अदा करेंगे. नक्सलियों के लिए पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिया है. AK-47 हथियार के साथ लौटे नक्सली, 25 लाख के इनामी उग्रवादियों ने छोड़ी हिंसा दशकों से उत्तर बस्तर का इलाका नक्सलवाद का दंश झेलता आ रहा है. नक्सलियों के दहशत के कारण आज भी अंदरूनी इलाके विकास से कोसो दूर है. केंद्र और राज्य सरकार ने नक्सलवाद की समाप्ति के लिए मार्च 2026 की डेडलाइन तय की है. तय डेडलाइन के आधार पर चलाये जा रहे ऑपरेशन में पुलिस और सुरक्षा बल के जवानों को सफलता मिलती जा रही है. नक्सली मारे जा रहे हैं. बड़ी संख्या में नक्सली हथियारों के साथ मुख्यधारा में लौटकर आत्मसमर्पण कर रहे हैं. कांकेर में बचे हैं करीब 60 लाख के 21 इनामी नक्सली बीते 3 दिनों में दो डिवीसीएम व एक पार्टी सदस्य सहित 25 लाख रुपये के 3 नक्सलियों ने AK-47 हथियार के साथ आत्मसमर्पण किया है. उत्तर बस्तर के भिहड़ में अभी भी 21 नक्सली बचे हैं. पुलिस को उम्मीद है कि ये भी जल्द आत्मसमर्पण कर सकते हैं. पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने लल्लूराम डॉट कॉम से बात करते हुए बताया कि उत्तर बस्तर कांकेर में 60 लाख रुपये के आसपास के लगभग 21 नक्सली शेष बचे हुए हैं. बीते कुछ दिनों में कुछ नक्सली मुख्यधारा में लौटे हैं. बड़े कैडर के आत्मसमर्पण के बाद अब बचे हुए नक्सलियों के पास कोई आधार नहीं बचा है. उम्मीद है कि बचे हुए नक्सली भी जल्द आत्मसमर्पण कर सकते हैं. नक्सलियों के लिए हेल्पलाइन जारी पुलिस अधीक्षक ने आगे बताया कि शेष बचे हुए नक्सलियों के लिए मोबाइल नंबर 9479194119 जारी किया गया है, जिससे वह बिना किसी भय के संपर्क कर सकते हैं. उन्हें सुरक्षित मुख्यधारा में लाने प्रयास किया जाएगा. सूत्र बताते हैं कि आगमी समय में उत्तर बस्तर के इलाके में शेष बचे 21 नक्सली भी जल्द आत्मसमर्पण कर सकते हैं. इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं सरकार की डेड लाइन के पूर्व ही उत्तर बस्तर कांकेर जिला जल्द नक्सल मुक्त हो जाएगा, जो सरकार और पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी. इससे आम लोगों के लिए विकास की राह आसान होगा.  

नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता: पहली बार देवजी सहित दो शीर्ष माओवादी नेताओं ने डाले हथियार

जगदलपुर माओवादी संगठन को अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक झटका लगा है। पोलित ब्यूरो सदस्य टिप्पिरी थिरुपथी उर्फ देवजी उर्फ कुम्मा दादा ने अपने तीन शीर्ष साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। सभी ने तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी के समक्ष हथियार डालते हुए मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। देवजी के साथ जिन बड़े माओवादी नेताओं ने आत्मसमर्पण किया, उनमें केंद्रीय समिति सदस्य मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम, स्टेट कमेटी मेंबर बड़े चोक्का राव उर्फ दामोदर, स्टेट कमेटी सदस्य नुने नरसिम्हा रेड्डी उर्फ गंगन्ना उर्फ सन्नू दादा शामिल हैं। यह आत्मसमर्पण कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार दो केंद्रीय स्तर के माओवादी नेताओं ने एक साथ हथियार डाले हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, लगातार बढ़ते फोर्स प्रेशर, सघन ऑपरेशनों और संगठन के भीतर कमजोर पड़ते नेटवर्क के चलते यह बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। वहीं इसे नक्सल उन्मूलन की दिशा में सुरक्षा बलों की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

सुरक्षाबलों की बड़ी जीत: सुकमा में 22 नक्सलियों ने डाले हथियार, ‘लाल आतंक’ कमजोर

सुकमा नक्सल मुक्त भारत अभियान के तहत सुरक्षाबलों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। सुकमा जिले में 22 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सुरक्षाबलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। इसमें एक महिला नक्सली भी शामिल है। इस घटना को नक्सलवाद के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सरकार की नीतियों का असर आत्मसमर्पण की यह प्रक्रिया अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रोहित शाह और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। इस बड़ी सफलता में जिला रिजर्व गार्ड, जिला पुलिस बल, क्षेत्रीय फील्ड टीम, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और कोबरा बटालियन की सराहनीय भूमिका रही। सुरक्षाबलों द्वारा लंबे समय से चलाए जा रहे सघन तलाशी व घेराबंदी अभियानों के कारण नक्सली संगठनों पर लगातार दबाव बना हुआ था। पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर नक्सलियों ने छोड़े हथियार प्रशासन के अनुसार, सरकार की पुनर्वास एवं आत्मसमर्पण नीति, बेहतर जीवन की संभावनाओं और विकास कार्यों के विस्तार से प्रभावित होकर नक्सलियों ने हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को नियमानुसार पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।  प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे नक्सल मुक्त भारत अभियान की दिशा में एक मजबूत कदम बताया है। उनका कहना है कि आने वाले समय में नक्सलवाद के प्रभाव वाले क्षेत्रों में शांति, विकास और विश्वास का माहौल और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। यह कदम क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

नक्सलियों को बड़ा झटका: रामधेर और 11 साथी सरेंडर, तिहरी राज्यों में कमजोर पड़ा नेटवर्क

खैरागढ़ छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता दर्ज करते हुए CPI (माओवादी) के शीर्ष नेता और केंद्रीय समिति सदस्य रामधेर मज्जी ने अपने 11 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया. यह सरेंडर आज सुबह गांव कुम्ही, थाना बकर कट्टा में किया गया, जहां सभी कैडरों ने हथियार नीचे रखकर पुलिस के सामने खुद को समर्पित किया. इस कदम को सुरक्षा एजेंसियां नक्सली ढांचे पर निर्णायक प्रहार मान रही हैं, क्योंकि यह पूरा समूह MMC— महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़— स्पेशल जोनल कमेटी का सक्रिय हिस्सा था, जो तीन राज्यों के छह जिलों में अपनी पैठ बनाए हुए था. रामधेर मज्जी द्वारा AK-47 के साथ आत्मसमर्पण किए जाने को नक्सली संगठन की सबसे बड़ी टूट मानी जा रही है. उसके साथ DVCM रैंक के चंदू उसेंडी, ललिता, जानकी और प्रेम ने भी सरेंडर किया, जिनमें से दो के पास AK-47 और इंसास जैसे हथियार मौजूद थे. इनके अलावा ACM स्तर के नक्सली रामसिंह दादा और सुकेश पोट्टम ने भी हथियार डाले, जबकि क्षेत्रीय महिला मिलिशिया (PM) की लक्ष्मी, शीला, योगिता, कविता और सागर ने पुलिस के सामने समर्पण कर दिया. समूह के पास AK-47, इंसास, SLR, 303 और 30 कार्बाइन जैसे हथियार बरामद हुए हैं. इस सरेंडर ने MMC स्पेशल जोन को लगभग निष्प्रभावी बना दिया है. इससे पहले MMC जोन के प्रवक्ता अनंत गोंदिया में आत्मसमर्पण कर चुका था, जबकि बीते एक दिन में ही बालाघाट में सुरेंद्र सहित नौ अन्य माओवादी हथियार डाल चुके हैं. लगातार हो रही ये सरेंडर श्रृंखलाएं बताती हैं कि नक्सल संगठन की जमीनी पकड़ तेजी से कमजोर हो रही है और सुरक्षा बलों की रणनीति कारगर साबित हो रही है. सभी 12 माओवादी अब पुलिस कस्टडी में हैं और उनसे पूछताछ की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. पुलिस जल्द ही प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर पूरे ऑपरेशन और नक्सली नेटवर्क से संबंधित विस्तृत खुलासा करने वाली है.

1.40 करोड़ इनामी नक्सली एर्रा सहित 37 माओवादी मुख्यधारा में लौटे, तेलंगाना में बड़ा सरेंडर ऑपरेशन

जगदलपुर तेलंगाना में माओवादी संगठन को तगड़ा झटका लगा है, जहां पहली बार बड़ी संख्या में शीर्ष नेतृत्व से जुड़े माओवादियों ने एक साथ हथियार डाले हैं। तेलंगाना डीजीपी शिवधर रेड्डी के सामने कुल 37 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें 3 स्टेट कमेटी सदस्य शामिल हैं। सरेंडर करने वालों में कोय्यादा सम्बैया उर्फ आजाद, अप्पासी नारायण उर्फ रमेश और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य मूचाकी सोमडा उर्फ एर्रा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। एर्रा को लंबे समय से हिड़मा के सबसे भरोसेमंद साथियों में गिना जाता था। सरेंडर लिस्ट में 3 स्टेट कमेटी सदस्य, 3 डिवीजनल कमेटी सदस्य, 9 एरिया कमेटी मेंबर और 22 पार्टी कमेटी सदस्य शामिल हैं। इन सभी पर कुल 1,40,05,000 रुपए का इनाम घोषित था, जो तेलंगाना–दक्षिण बस्तर बेल्ट में संगठन की सक्रियता को दर्शाता है। सरेंडर करने वाले अपने साथ एक AK-47, दो SLR, चार 303 रायफल सहित अन्य हथियार लेकर पहुंचे हैं। 37 माओवादियों में 12 तेलंगाना स्टेट कमेटी से जुड़े थे, जबकि 23 दक्षिण बस्तर डिवीजन कमेटी और 2 PLGA के सक्रिय सदस्य थे। आजाद ने सरेंडर के दौरान खुलकर कहा कि वे लंबे समय से मुख्यधारा में लौटना चाहते थे और संगठन को इसकी जानकारी देकर ही आए हैं। सरेंडर किए नक्सलियों को पुनर्वास योजनाओं का मिलेगा लाभ अधिकारियों का कहना है कि यह सरेंडर माओवादियों की दक्षिण बस्तर–तेलंगाना सीमा पर कमजोर होती पकड़ का बड़ा संकेत है। विशेष रूप से हिड़मा के नेटवर्क में सक्रिय एर्रा का आत्मसमर्पण संगठन के लिए बड़ा मनोबल गिराने वाला माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इसे माओवादी संगठन के भीतर बढ़ते अविश्वास और लगातार दबाव की परिणति बता रही है। तेलंगाना पुलिस का दावा है कि भविष्य में और बड़े स्तर पर सरेंडर की संभावनाएं है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने सरेंडर करने वालों को पुनर्वास योजनाओं का लाभ देने की घोषणा की है। इस सामूहिक आत्मसमर्पण से दंडकारण्य क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों पर बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

नक्सलियों का बड़ा सरेंडर: संगठन को झटका, 8 उग्रवादी हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटे

मुलुगु नक्सल संगठन को एक और बड़ा झटका लगा है. जहां तेलंगाना स्टेट कमेटी में सक्रीय दो शीर्ष माओवादी नेताओं सहित कुल 8 नक्सलियों के वारंगल पुलिस के सामने सरेंडर किया है. मिली जानकारी के अनुसार, ये सभी नक्सली दो दिन पहले ही गुपचुप तरीके से सरेंडर हो चुके हैं और सोमवार को इसकी आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है. आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे बड़ा नाम कोय्यादी संबय्या उर्फ आज़ाद, बीकेएसआर डिवीजन कमेटी सचिव का है. आजाद कई दशकों से माओवादी संगठन में प्रमुख रणनीतिक भूमिका निभा रहे थे. इसके अलावा अब्बास नारायण उर्फ़ रमेश, जो तकनिकी टीम के प्रभारी ने भी सरेंडर किया है. रमेश रामागुंडम इलाके में लंबे समय से सक्रीय था। इसके अलावा भी जय लाल (SZCM) 25 लाख और माडवी भीमे( DVCM) 08 लाख ने ये दंपती ने विजयवाडा में आत्मसमर्पण किया.  

माओवादी संगठन को करारा झटका, तेलंगाना में आठ सदस्यों ने हथियार डाले

जगदलपुर तेलंगाना माओवादी संगठन को एक और बड़ा झटका लगा है। राज्य की स्टेट कमेटी के दो शीर्ष नेताओं सहित कुल आठ माओवादियों ने वारंगल पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। पुलिस की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन सूत्रों के अनुसार ये सभी माओवादी दो दिन पहले ही गुपचुप तरीके से समर्पण कर चुके हैं। सोमवार को इसकी आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है। आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे प्रमुख नाम कोय्यादी संबय्या उर्फ आजाद का है। आजाद बीकेएसआर डिवीजन कमेटी का सचिव रह चुका है और दशकों तक माओवादी संगठन में रणनीतिक भूमिका निभाई है। उसका संगठन में प्रभाव और पकड़ बेहद मजबूत माना जाता था। इसके अलावा, अब्बास नारायण उर्फ रमेश, जो माओवादी तकनीकी टीम का प्रभारी था, ने भी आत्मसमर्पण किया। रमेश लंबे समय से रामागुंडम क्षेत्र में सक्रिय था। सूत्रों का कहना है कि आजाद और स्टेट कमेटी के शीर्ष नेता दामोदर के बीच लंबे समय से चल रहा मतभेद और अंदरूनी टकराव इस आत्मसमर्पण का बड़ा कारण है। आजाद मुलुगु जिले के मोद्दुलागुडेम गांव का निवासी है। यदि पुलिस की ओर से पुष्टि होती है, तो यह कदम तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के लिए गंभीर झटका माना जाएगा और संगठन की कार्यप्रणाली पर इसका व्यापक असर पड़ने की संभावना है।

नक्सलवाद पर उपमुख्यमंत्री शर्मा बड़ा बयान: आत्मसमर्पण स्वागत योग्य, अभियान नहीं रुकेगा

जगदलपुर बस्तर संभाग प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नक्सलवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पित नक्सलियों का सरकार लाल कालिन पर मुख्यधारा में स्वागत कर रही है. लेकिन जो नक्सली नहीं आएंगे, उनके खिलाफ आर्म्ड फोर्सेज कार्रवाई करेंगे. उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि एक मिनट के लिए भी किसी को भी विश्राम करने का समय नहीं है. नक्सलियों के खिलाफ फिर से ऑपरेशन लॉन्च किए जाएंगे. जवानों के भुजाओं की ताकत के आधार पर ही निर्णय हो रहा है. बता दें कि उप मुख्यमंत्री शर्मा बीजापुर और सुकमा के दौरे पर पहुंचे थे. जहां उन्होंने आत्म समर्पण करने वाले माओवादियों से मुलाकात की. साथ ही शासन द्वारा किए जा रहे पुनर्वास करने वाले माओवादियों के लिए रोजगारमुखी कार्यों को भी देखा. इस दौरान जगदलपुर में मीडिया से चर्चा करते हुए उप मुख्यमंत्री ने उक्त बयान दिया.

नक्सलियों की बड़ी हार: गढ़चिरौली में 60 सदस्यीय दल ने किया सरेंडर, कमांडर सोनू भी शामिल

गढ़चिरौली देश में नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। इस बीच महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में पहली बार सबसे बड़ा नक्सली आत्मसमर्पण हुआ है। वरिष्ठ नक्सली नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ भूपति ने अपने 60 अन्य नक्सली साथियों के साथ महाराष्ट्र मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने हथियार डाले हैं।  बुधवार (15 अक्तूबर) गढ़चिरौली शहीद पांडु आलम हॉल, पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण समारोह आयोजित किया। जिसमें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सभी नक्सलियों का मुख्यधारा में लौटने के लिए स्वागत किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक नक्सली कमांडर मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने शर्त रखी कि वह मुख्यमंत्री की मौजूदगी में आत्मसमर्पण करेंगे। जिसके बाद गढ़चिरौली पुलिस मुख्यालय में सीएम फडणवीस की मौजूदगी में नक्सली लीडर और भाकपा-माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लौजुला वेणुगोपाल राव ने हथियार डाले। एक अधिकारी ने बताया कि भूपति पर 6 करोड़ रुपए का इनाम था। जानकारी के मुताबिक नक्सलियों ने अपने 54 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया, जिनमें सात एके-47 और नौ इंसास राइफलें शामिल हैं। गढ़चिरौली पुलिस को 1 करोड़ रुपए के इनाम देने की घोषणा कार्यक्रम के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "आज नक्सल कमांडर मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने 60 नक्सलियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। भूपति नक्सलियों की भर्ती, रणनीति और हमले का काम करते थे। पिछले एक महीने से हमारी पुलिस उससे मुख्यधारा में लौटने के लिए बात कर रही थी। उसे यह भी बताया गया था कि हमारे नक्सल विरोधी अभियान नहीं रुकेंगे और उसे आत्मसमर्पण करने का विकल्प दिया गया था। आज महाराष्ट्र में नक्सलवाद की कमर टूट गई है। इसके बाद छत्तीसगढ़ के नक्सली आत्मसमर्पण करने की कोशिश करेंगे। इस उपलब्धि पर हमने गढ़चिरौली पुलिस को 1 करोड़ रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।" उन्होंने आगे कहा कि हम सभी, चाहे वह महाराष्ट्र हो, छत्तीसगढ़ हो या तेलंगाना नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एकजुट हैं। हम एक-दूसरे के साथ समन्वय में काम करते हैं।" टॉप कमांडर के सरेंडर से टूटी नक्सलियों की कमर नक्सली टॉप कमांडर मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ भूपति पर करोड़ों का ईनाम घोषित था। जिनको माओवादी संगठन के सबसे प्रभावशाली रणनीतिकारों में से एक माना जाता था और वह लंबे समय से महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर प्लाटून अभियानों की निगरानी करते थे। उनके सरेंडर के बाद अबूझमाड़ में नक्सलियों की कमर टूट गई है। बता दें कि सोमवार देर रात (13 अक्तूबर) भाकपा-माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लौजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। जो कि यह भाकपा-माओवादी के लिए एक बड़ा झटका था। आत्मसमर्पण करने वालों में भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति का एक सदस्य और एक संभागीय समिति के 10 सदस्य शामिल थे।