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बीमारी से जंग और भाई के अधूरे सपनों को पूरा करने का साहस लिए अरुणाचल की अनाई ने जीता स्वर्ण

बीमारी से जंग और भाई के अधूरे सपनों को पूरा करने का साहस लिए अरुणाचल की अनाई ने जीता यादगार केआईटीजी स्वर्ण रायपुर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के पहले संस्करण के लिए रायपुर रवाना होने से कुछ ही दिन पहले अरुणाचल प्रदेश की 21 वर्षीय वेटलिफ्टर अनाई वांगसु अस्पताल के बिस्तर पर थीं। उनकी पुरानी गैस्ट्रिक समस्या एक बार फिर उभर आई थी और ताकत लौटाने के लिए उन्हें इंट्रावेनस फ्लूइड्स पर रखा गया। ऐसे में उनके इन खेलों में भाग लेने पर ही सवाल खड़े हो गए थे।           अनाई के लिए यह संघर्ष नया नहीं है। 2019 से वह इस बीमारी से जूझ रही हैं, जो बिना किसी चेतावनी के उन्हें कमजोर, डिहाइड्रेटेड और थका हुआ बना देती है—एक ऐसे खेल में जहां ताकत और संतुलन सबसे अहम होते हैं।              लेकिन इस शारीरिक चुनौती के आगे हार मानने के बजाय अनाई ने वापसी की। अस्पताल से छुट्टी मिलने के अगले ही दिन वह फिर से प्रशिक्षण में जुट गईं, क्योंकि इस बार वह अपने करियर के ‘करीब आकर चूक जाने’ की कहानी को बदलना चाहती थीं।              अनाई ने यहां महिलाओं के 58 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीतने के बाद साई मीडिया से कहा,” मैंने पहले कांस्य और रजत पदक जीते थे और परिवार में सभी पूछते थे कि मैं स्वर्ण कब जीतूंगी। अब सब बहुत खुश हैं कि आखिरकार मैंने यह लक्ष्य हासिल कर लिया।”          इससे पहले अनाई ने यूथ नेशनल्स में दो कांस्य पदक जीते थे। इसके अलावा उन्होंने विभिन्न खेलो इंडिया प्रतियोगिताओं, जिसमें 2025 का खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (राजस्थान) भी शामिल है, में रजत पदक हासिल किए। लेकिन स्वर्ण हर बार उनसे थोड़ा दूर रह जाता था।             पिछले साल ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी नेशनल्स में वह केवल एक लिफ्ट से स्वर्ण चूक गई थीं, क्योंकि एक मिनट की समय सीमा समाप्त हो गई थी। उस पल की टीस आज भी उनके दिल में है। उन्होंने उस पाल को याद किया,” उस दिन मैं बहुत रोई थी। लगा जैसे मेरी सारी मेहनत बेकार हो गई।”          वांगचो जनजाति से ताल्लुक रखने वाली अनाई की वेटलिफ्टिंग यात्रा उनके बड़े भाई सिंचाड बांसु के सपनों से जुड़ी है, जो खुद राष्ट्रीय स्तर के वेटलिफ्टर रह चुके हैं और अब अरुणाचल प्रदेश पुलिस में कार्यरत हैं।            सिंचाड ही उन्हें पहली बार इटानगर के स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) केंद्र में ट्रायल्स के लिए लेकर गए थे। शुरुआत में अनाई की दिलचस्पी इस खेल में नहीं थी। वह बॉक्सर बनना चाहती थीं, खासकर मैरी कॉम की फिल्म से प्रेरित होकर। लेकिन उनके भाई ने उन्हें समझाया और वेटलिफ्टिंग पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया। जल्द ही अनाई को लखनऊ के एनसीओई में उन्नत प्रशिक्षण के लिए चयनित कर लिया गया।         हालांकि, कोविड-19 महामारी के दौरान उन्हें वापस अरुणाचल लौटना पड़ा, जहां पर्याप्त पोषण और संसाधनों की कमी ने उनकी गैस्ट्रिक समस्या को और बढ़ा दिया।          अनाई ने कहा,” मैं बहुत मेहनत करती हूं, लेकिन कभी-कभी मेरी सेहत अचानक खराब हो जाती है। समझ नहीं आता कि मेरा शरीर मेरा साथ क्यों नहीं देता।”          भारत के लिए खेलने का सपना रखने वाली अनाई ने यह भी जोड़ा कि यहां मिला स्वर्ण पदक उन्हें यह भरोसा देता है कि उनकी मेहनत बेकार नहीं जा रही है। —

भारत्तोलन पुरुष 88 किग्रा वर्ग में अरुणाचल के रुबा ताडु बने चैंपियन

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 भारत्तोलन पुरुष 88 किग्रा वर्ग में अरुणाचल के रुबा ताडु बने चैंपियन देवराकोंडा प्रेम सागर और  सोरम हिटलर टाग्रू ने दिखाया दमखम, रायपुर में शानदार प्रतिस्पर्धा का रहा रोमांच रायपुर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय खेल मैदान रायपुर में आयोजित पुरुष 88 किलोग्राम भारोत्तोलन प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों का दिल जीत लिया। प्रतियोगिता में देशभर के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने भाग लिया और कड़े मुकाबले देखने को मिले। इस प्रतिस्पर्धा में अरुणाचल प्रदेश के रुबा ताडु ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल 274 किलोग्राम वजन उठाकर पहला स्थान हासिल किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 117 किग्रा तथा क्लीन एंड जर्क में 157 किग्रा वजन उठाकर शीर्ष स्थान सुनिश्चित किया।           दूसरे स्थान पर आंध्र प्रदेश के देवरकोंडा प्रेम सागर रहे, जिन्होंने कुल 270 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता। वहीं अरुणाचल प्रदेश के ही सोरम हिटलर टाग्रू ने 262 किलोग्राम के साथ तीसरा स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक हासिल किया। प्रतियोगिता में ओडिशा के सनातन मलिक (249 किग्रा) चौथे स्थान पर रहे, जबकि असम के प्रीतम सोनोवाल (248 किग्रा) ने पांचवां स्थान प्राप्त किया। मध्यप्रदेश के पृथ्वीराज चौहान (226 किग्रा) छठे स्थान पर रहे।             इसके अलावा त्रिपुरा के डेनियल जमातिया (192 किग्रा), गोवा के एलेस्टर गोम्स (152 किग्रा), तेलंगाना के सिद्दाबोइना नवीन (146 किग्रा) और छत्तीसगढ़ के छत्रपाल ठाकुर (130 किग्रा) ने भी प्रतियोगिता में भाग लेकर अपने-अपने प्रदर्शन से अनुभव हासिल किया।            इस प्रतियोगिता में खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जहां हर खिलाड़ी ने अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया। आयोजन ने न केवल खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों के बीच खेल भावना और एकता को भी मजबूत किया। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के इस आयोजन से यह स्पष्ट होता है कि आदिवासी क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ये खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं।

25 मार्च से छत्तीसगढ़ में पहली बार खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 का आयोजन, 2000 खिलाड़ी होंगे शामिल

रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर एक बार फिर बड़े खेल आयोजन की मेजबानी के लिए तैयार है। 25 मार्च से 3 अप्रैल तक आयोजित होने जा रहे खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स 2026 को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। देशभर से आने वाले 1069 खिलाड़ी और ऑफिशियल्स के ठहरने, आवागमन और प्रतियोगिताओं के सुचारू संचालन के लिए प्रशासन और खेल विभाग ने व्यापक इंतजाम किए हैं। 25 मार्च से शुरू होने वाले ये खेल छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल इलाकों की विविधता और गहराई को दर्शाते हुए तीन सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण शहरों – रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में आयोजित किए जाएंगे। एक विज्ञप्ति के अनुसार, 25 मार्च से 3 अप्रैल तक छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाले केआईटीजी 2026 में 2300 से अधिक एथलीट और 3700 प्रतिभागी भाग लेंगे। छत्तीसगढ़ की 32% से अधिक आबादी आदिवासी समुदायों से संबंधित है और यहाँ की स्वदेशी संस्कृति, परंपराओं और खेल उत्कृष्टता की जीवंत विरासत इसे न केवल एक मेजबान राज्य बनाती है, बल्कि इन खेलों का स्वाभाविक घर भी बनाती है। रायपुर के मैदानी इलाकों से लेकर बस्तर के समृद्ध आदिवासी परिदृश्य और अंबिकापुर के ऊंचे इलाकों तक, खेल लंबे समय से रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न अंग रहा है, जो परंपरा, दृढ़ता और समुदाय द्वारा आकारित है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स इस चिरस्थायी विरासत का जश्न मनाते हैं, और छत्तीसगढ़ की मेजबानी भारत की आदिवासी पहचान में इसके केंद्रीय स्थान को रेखांकित करती है। 7 होटलों में ठहरेंगे खिलाड़ी और ऑफिशियल्स इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में शामिल होने वाले खिलाड़ियों और उनके ऑफिशियल्स को रायपुर के 7 अलग-अलग होटलों में ठहराया जाएगा। खासतौर पर वीआईपी रोड और आसपास के प्रमुख होटलों में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, जहां सुरक्षा, भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। इन खेलों में दिखेगा जनजातीय प्रतिभा का दम ट्राइबल गेम्स में इस बार स्विमिंग, वेटलिफ्टिंग, हॉकी, फुटबॉल और तीरंदाजी जैसी प्रमुख प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इन खेलों में केवल जनजातीय वर्ग के खिलाड़ी ही हिस्सा लेंगे, जिससे देशभर की पारंपरिक और उभरती खेल प्रतिभाओं को मंच मिलेगा। छत्तीसगढ़ से 200 खिलाड़ी लेंगे हिस्सा मेजबान राज्य छत्तीसगढ़ की ओर से करीब 200 खिलाड़ियों का दल इस आयोजन में भाग लेगा। स्थानीय खिलाड़ियों को अपने घरेलू मैदान पर प्रदर्शन का मौका मिलेगा, जिससे राज्य के खेल प्रतिभाओं को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। पहली बार लद्दाख की टीम भी शामिल इस बार आयोजन की खास बात यह है कि पहली बार लद्दाख की टीम भी इसमें हिस्सा लेने रायपुर पहुंचेगी। इससे खेलों का दायरा और अधिक व्यापक हो गया है और विभिन्न क्षेत्रों की जनजातीय खेल संस्कृति का संगम देखने को मिलेगा। खिलाड़ियों का आगमन शुरू, कंट्रोल रूम स्थापित खिलाड़ियों के रायपुर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है। अरुणाचल प्रदेश की वेटलिफ्टिंग टीम 22 मार्च को राजधानी पहुंच गई है। वहीं, 24 मार्च की सुबह तक सभी टीमों के पहुंचने की संभावना है। खिलाड़ियों की सुविधा के लिए रेलवे स्टेशन पर विशेष कंट्रोल रूम भी बनाया गया है, जिससे आवागमन और समन्वय में किसी तरह की परेशानी न हो। 10 दिनों तक चलेगा खेल महाकुंभ करीब 10 दिनों तक चलने वाले इस खेल आयोजन का उद्घाटन 25 मार्च को रायपुर में होगा। वहीं, समापन समारोह अंबिकापुर में आयोजित किए जाने की संभावना है। यह आयोजन इस वर्ष राजधानी में स्कूल नेशनल के बाद दूसरा बड़ा स्पोर्ट्स इवेंट है। व्यापक तैयारियों में जुटा प्रशासन इस बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रशासन और खेल विभाग पूरी तरह सक्रिय है। खिलाड़ियों के ठहरने से लेकर प्रतियोगिता स्थलों की तैयारी, सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री मांडविया बोले- आदिवासी बच्चों को मिलेगा बड़ा फायदा केंद्रीय मंत्री मांडविया ने कहा कि यह आयोजन युवाओं को अवसर देने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत” विजन का हिस्सा है, जिसमें खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। मांडविया ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों से प्रतिभाओं को सामने लाना बेहद जरूरी है। सरकार का फोकस है कि प्रतिभाओं की जल्दी पहचान हो, उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण मिले और राष्ट्रीय खेल ढांचे में शामिल किया जाए।