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जनजातीय क्षेत्र के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

भोपाल  सफलता की कहानी जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह के विशेष प्रयासों से खंडवा जिले के खालवा विकासखंड के ग्राम रोशनी में मध्यप्रदेश का पहला इंटीग्रेटेड फिश फार्मिंग एक्वा पार्क तैयार किया गया है। लगभग 50 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस आधुनिक परियोजना ने जनजाति समाज, विशेषकर महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए द्वार खोल दिए हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से स्वयं सहायता समूहों की 160 महिलाएं सीधे जुड़कर आजीविका प्राप्त करेंगी। एक्वा पार्क में आधुनिक तकनीक से मछली उत्पादन, प्रशिक्षण और विपणन की सुविधाएं विकसित की गई हैं। इससे ग्रामीण और आदिवासी परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। यह परियोजना केवल मछली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि जनजातीय समाज के आर्थिक सशक्तिकरण का नया मॉडल बनकर उभर रही है। मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह लंबे समय से जनजाति समाज के विकास और उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। आदिवासी बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने, गांव-गांव तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने, किसानों के खेतों तक मां नर्मदा का पानी पहुंचाकर बहुफसली खेती को बढ़ावा देने तथा जनजाति युवाओं को विदेशों में अध्ययन के अवसर दिलाने जैसी कई महत्वपूर्ण पहल उनके नेतृत्व में लगातार आगे बढ़ रही हैं। 50 एकड़ में विकसित इंटीग्रेटेड फिश फार्मिंग एक्वा पार्क बदलेगा जनजातीय क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मंत्री डॉ. शाह ने बताया है कि नीति आयोग एवं शासन की 10 अलग-अलग योजनाओं के समन्वय से विकसित इस हाईटेक परियोजना को जनजाति क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ी पहल माना जा रहा है। करीब 50 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस एक्वा पार्क का संचालन 16 आदिवासी महिला स्व-सहायता समूहों की 160 सदस्याओं द्वारा किया जाएगा। यहां बंगाल से लाई गई तलापिया नस्ल की मछलियों का पालन किया जाएगा, जो 6 से 8 माह के भीतर एक से सवा किलो तक वजन प्राप्त कर लेंगी। एक्वा पार्क में आधुनिक तकनीक के तहत मछली पालन की संपूर्ण व्यवस्था विकसित की गई है। मछलियों के पालन के लिए शेड के नीचे 14 बायोफ्लॉक टैंक बनाए गए हैं, जहां प्रारंभिक चरण में मछली बीज छोड़े गए। मछलियों का आकार बढ़ने पर उन्हें ग्रेडिंग कर रिवर्स एक्वा सिस्टम टैंकों में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके बाद उन्हें बायोफ्लॉक पॉन्ड में छोड़ा जाएगा। अंतिम चरण में विकसित मछलियों को 1200 क्यूबिक मीटर क्षमता वाले आवंलिया डेम के बैकवॉटर क्षेत्र में स्थापित 120 आधुनिक केज में डाला जाएगा। इस तकनीक से बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण मछली उत्पादन संभव हो सकेगा। एक्वा पार्क से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार परियोजना के तहत अगले 8 से 10 महीनों में प्रतिमाह लगभग 30 टन और सालाना करीब 360 टन मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके माध्यम से सालाना लाखों रूपये के टर्नओवर का अनुमान है। इससे क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलने के साथ जनजाति महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। ग्राम रोशनी का यह इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क “आत्मनिर्भर आदिवासी – समृद्ध मध्यप्रदेश” की सोच को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस परियोजना से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी भी बढ़ेगी। सामाजिक कार्यकर्ता मोहन रोकड़े का कहना है कि मंत्री डॉ. विजय शाह की दूरदर्शी सोच और जनसेवा के प्रति समर्पण के कारण आज जनजाति समाज विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह एक्वा पार्क पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक मॉडल साबित होगा।  

घर बैठे अच्छी कमाई कर रहे हैं होम-स्टे संचालक, अब तक ₹6.76 करोड़ कमाए

भोपाल मध्यप्रदेश की ग्रामीण संस्कृति के इन्द्रधनुषी रंगों को करीब से देखना और ज्यादा आनंददायी और रोमांचक हो गया है। बड़ी संख्या में बन रहे होम-स्टे में आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में हाई-वे और प्राकृतिक स्थानों के आस-पास के तथा जनजातीय क्षेत्रों में अब बड़ी संख्या में होम-स्टे नजर आ जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्रामीण उदयमिता को बढ़ावा देते हुए ग्रामीण पर्यटन की असीम संभावनाओं का दोहन करने की नीति बनाई है। पिछले दो सालों में इससे ग्रामीण अंचलों में रोजगार के बड़े अवसर निर्मित हुए हैं। होम-स्टे से देशी-विदेशी पर्यटकों को ग्रामीण संस्कृति के दर्शन अब सहजता से सुलभ हो गया है। प्रदेश में 98 चुने गांवों में 346 होम-स्टे ग्रामीणों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जबकि 642 होम-स्टे निर्माणाधीन हैं, जो जल्दी ही पर्यटकों के आतिथ्य के लिए तैयार हो जायेंगे। अब तक लगभग 34 हजार देशी-विदेशी पर्यटकों ने होम-स्टे कर ग्रामीण जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव लिया। सुखद आवास सुविधा, परम्परागत व्यंजनों का स्वाद, स्थानीय लोक-कला, नृत्य-संगीत, हस्त-कला, हस्त-शिल्प से होम-स्टे संचालक परिवारों को ₹6.76 करोड़ की आय प्राप्त हुई। उन्हें आय का एक गरिमापूर्ण साधन मिल गया। पर्यटकों को खुशियां देने के साथ उनके परिवारों में भी खुशियां आ गईं। होम-स्टे योजना पर्यटन विभाग अंतर्गत मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा संचालित ग्रामीण पर्यटन कार्यक्रम एक बहुआयामी योजना है। इसका उददेश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव लाना, गांवों में ही रोजगार के अवसरों का निर्माण करना और ग्रामीण संस्कृति बचाये रखना है। प्रदेश के सांस्कृतिक क्षेत्रों बुन्देलखण्ड, बघेलखण्ड, निमाड़, मालवा, महाकौशल एवं चम्बल की ग्रामीण सांस्कृतिक विरासतों का दर्शन करा रही है। होम-स्टे गांवों में रची-बसी संस्कृति, ग्रामीण आवास विन्यास, परम्परागत व्यंजन, नृत्य संगीत, लोक-कला, हस्त-शिल्प से पर्यटकों को सुखद अनुभव प्रदान करते हैं। पर्यटन स्थलों से लगे ग्रामों के साथ ही प्राकृतिक, नैसर्गिक सुन्दरता से परिपूर्ण एवं जनजातीय सांस्कृतिक पहचान वाले गावों का चयन कर उन्हें गामीण पर्यटन से जोड़ा गया है। होम-स्टे शहरी पर्यटकों को कम बजट में गांव के शांत और सुरम्य वातावरण में सुखद स्मृतियों से सराबोर करने का काम कर रहे हैं। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा होम-स्टे एवं पर्यटन ग्रामों के समेकित विकास एवं विस्तार की दिशा में समय-समय पर हॉस्पिटैलिटी, साफ-सफाई एवं कौशल विकास के तकनीकी प्रशिक्षणों के माध्यम से ग्रामीणों के कौशल उन्नयन में सहयोग दिया जा रहा है। होम-स्टे के प्रचार-प्रसार में डिजिटल एवं आईटी, सोशल मीडिया के उपयोग की दिशा में भी समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाकर क्षमतावर्धन एवं सामुदायिक संगठन में नेतृत्व विकास का कार्य किया गया है। इसका परिणाम है कि पर्यटन ग्रामों के होम-स्टे को ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों से बुकिंग मिल रही है। सीहोर का ग्राम खारी बना मॉडल पर्यटन ग्राम भोपाल से लगे सीहोर जिले का ग्राम खारी ने मॉडल पर्यटन ग्राम के रूप में अपनी पहचान बनाई है। यहां लगभग 209 राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय सरकारी एवं गैर-सरकारी प्रतिनिधियों द्वारा समुदाय आधारित ग्रामीण अर्थव्यव्या में पर्यटन ग्रामों के योगदान का अध्ययन किया गया है। बैतूल जिले के घोड़ा डोंगरी तहसील के "बाचा'' गांव में गणेश उइके एक-डेढ़ साल से ताप्ती विहार होम-स्टे चला रहे हैं। उन्हें ₹2 लाख रूपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है। होम-स्टे चलाने का उन्हें अच्छा अनुभव हो गया है। देखते ही देखते "बाचा'' गांव में 8 होम-स्टे खुल गये हैं। सभी में स्थानीय पर्यटकों के अलावा विदेशी पर्यटक भी आने लगे हैं। ग्रामीण संस्कृति के दर्शन करते हुए आराम से रहना और देशी खाना पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण होता है। ज्वार-बाजरे की रोटियां, टमाटर की चटनी, भटे का भरता, देशी सब्जियों के व्यंजन, कोदो-कुटकी की खीर जैसा ग्रामीण खाना, भजन व नृत्य मंडलियों के साथ सहभागिता करना, गायों को चारा खिलाना, दूध दुहना, कुएं से पानी भरना, बैलगाड़ी हांकना जैसी ग्रामीण गतिविधियां पर्यटकों को बहुत लुभाती हैं और हमेशा के लिए सुखदायी स्मृतियां बन जाती हैं। "बाचा'' के  गणेश उइके बताते हैं कि अब तक 500 से ज्यादा परिवार होम-स्टे के लिये आ चुके हैं। इनमें 5 दुबई से आये विदेशी मेहमान भी थे। "बाचा'' की आदर्श पर्यटक समिति के अध्यक्ष  अनिल धुर्वे ने बताया कि "बाचा'' गांव नागपुर हाइ-वे से लगा है। यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। हम चाहते हैं कि हमारा स्वागत सत्कार का व्यवसाय और आगे बढ़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सोच की तारीफ करते हुए  धुर्वे बताते हैं कि इससे हमारी रोजगार की समस्या हल हो रही है। आदर्श पर्यटक समिति के अन्य सदस्यों के भी अपने होम-स्टे हैं। जैसे  रामदास उइके शिवगंगा होम-स्टे,  अंकित का गुलमोहन होम-स्टे,  राजेश कुमरे का जयसेवा होम-स्टे,  सुधीर ठाकरे का सतपुड़ा होम-स्टे और सु मीनाक्षी धुर्वे का आशीर्वाद होम-स्टे है। सभी में पर्यटकों का आगमन हो रहा है। एक ही गांव में इतने सारे होम-स्टे शायद "बाचा'' में ही हैं। भोपाल से नागपुर हाइ-वे पर होने से यहां पहुंचना आसान है। ऐतिहासिक देवगढ़ का किला है। यहां  कैलाश सरके 2023 होम-स्टे चला रहे हैं। अब तक करीब 100 परिवार आ चुके हैं। इनमें फ्रांस के पर्यटक भी शामिल हैं। होटल और बाचा बैतूल बस स्टेंड और रेल्वे स्टेशन से 25 किमी, और भोपाल से 165 किमी है। इसी प्रकार छिंदवाड़ा में नागपुर रोड में उमरानाला से 25 दूर गोंड राजाओं का होम-स्टे का फर्क समझाते हुए  कैलाश बताते हैं कि एकमात्र फर्क है वातावरण का। होटल की सुविधाओं का हम मुकाबला नहीं कर सकते लेकिन देशी खाना, व्यंजन, गांव का शांत माहौल, सूर्यादय, सूर्यास्त दर्शन, पक्षियों का कलरव होम-स्टे में मन को खुश करने वाला होती हैं। ऐसी योजना बनाने के लिए हम मुख्यमंत्री डॉ. यादव को धन्यवाद देते हैं। घर बैठे आमदनी का जरिया मिल गया है। होम-स्टे चलाने के लिए हम और भी काम करते हैं। अच्छी बागवानी कर रहे हैं, जिससे ताजा सब्जी मिलती रहे। खेतों को संवार रहे हैं। गांव को स्वच्छ रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते। उन्होंने बताया कि हाल में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह जिले के दौरे पर थे और यहां हमारे गाँवों में भी आये थे। होम-स्टे पर रूके और इसके संचालन और प्रबंधन संबंधी जानकारी ली। उन्होने चाय पी और देवगढ़ का किला देखा। होम-स्टे चलाने की बधाई दी और किसी प्रकार की परेशानी होने पर बेझिझक बताने को भी कहा। छिन्दवाड़ा जिले में ही तामिया … Read more