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यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री की जगह ओपन थिएटर बनाने की योजना, 400 करोड़ से होगा विकास

भोपाल दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदियों में शुमार 1984 की गैस त्रासदी का साक्षी रहा भोपाल का यूनियन कार्बाइड परिसर अब नए स्वरूप में विकसित किए जाने की तैयारी में है। राज्य सरकार यहां ओपन थिएटर, रिहायशी और व्यावसायिक परिसर के साथ एक अत्याधुनिक अनुसंधान केंद्र विकसित करने की योजना बना रही है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि परिसर में लगभग सात से 10 एकड़ क्षेत्र में गैस त्रासदी पीड़ितों की स्मृति में भव्य स्मारक बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 17 जनवरी को स्थल का निरीक्षण कर इस दिशा में संकेत दिए थे। हालांकि, स्मारक निर्माण का प्रस्ताव पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल से लंबित है, जिसे अब नए सिरे से आगे बढ़ाया जा रहा है।   पुनर्घनत्वीकरण के तहत विकास सरकार अब इस परियोजना को पुनर्घनत्वीकरण (रीडेंसिफिकेशन) योजना के तहत विकसित करने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव को मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिलने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। स्मारक निर्माण के लिए आवश्यक धनराशि परिसर में प्रस्तावित आवासीय और व्यावसायिक विकास से जुटाई जाएगी। मिट्टी का दोबारा परीक्षण स्मारक निर्माण से पहले परिसर की मिट्टी का परीक्षण राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी), नागपुर से पुनः कराया जाएगा। करीब 10 वर्ष पूर्व भी यहां परीक्षण हो चुका है। जनवरी 2025 में हाईकोर्ट के निर्देश पर 337 टन जहरीले कचरे को पीथमपुर भेजकर वैज्ञानिक तरीके से नष्ट किया गया था। आधारभूत ढांचे पर जोर परिसर में पहले सड़क, ड्रेनेज और जल प्रदाय व्यवस्था विकसित की जाएगी। वर्तमान में यहां फैक्ट्री का लोहे का ढांचा और प्रशासनिक भवन मौजूद हैं, जिन्हें हटाया जाना है। प्रस्तावित स्मारक में संग्रहालय, कांच से सुरक्षित प्रदर्शनी स्थल और प्रशासनिक भवन शामिल होंगे, जबकि अनुसंधान केंद्र में लैब, सभागार और छात्रावास जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

छह माह पहले भस्म हुआ जहरीला कचरा, अब 900 टन राख को सुरक्षित दफन कर पर्यावरण की रक्षा

पीथमपुर 42 साल पहले भोपाल में पांच हजार लोगों को मौत की नींद सुलाने वाली यूनियन कार्बाइड फैक्टरी का 337 टन विषैला कचरा तो इंदौर के समीप पीथमपुर में दफन हो गया। अब उसकी बची 900 टन राख को भी हमेशा-हमेशा के लिए दफन कर दिया गया है। फैक्टरी से निकली गैस के कारण हजारों प्रभावित हुए थे। जिन गर्भवतियों की सांसों में यह गैस गई थी, उनकी संतानों पर भी इसका असर देखने को मिला था। इस त्रासदी के अवशेष राख के रूप में जिंदा थे और हाईकोर्ट के निर्देश पर राख को लैंडफिल किया गया है। यह हिस्सा आबादी क्षेत्र से आधा किलोमीटर दूर है। पीथमपुर में रामकी कंपनी ने अपने प्लांट में 337 टन जहरीला कचरा छह माह में जलाया। उसके बाद बची राख को जुलाई माह से कंपनी के परिसर में एक प्लेटफॉर्म पर रखा गया है। उस राख की भी विशेषज्ञों ने जांच की। राख को दफनाने के लिए एक तालाबनुमा गड्ढा खोदा गया था। जमीन से चार फीट ऊंचाई पर एक प्लेटफॉर्म बनाया गया है। उस पर एचडीपीई लाइनर बिछाया गया। उसमें राख के विशेष पैकेट को रखा गया है। अब उसे मिट्टी से ढक दिया जाएगा और उस पर पौधारोपण किया जाएगा। बची हुई राख में मरकरी, निकल, जिंक, कोबाल्ट, मैंगनीज सहित अन्य तत्व हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा कि यह राख पानी के संपर्क में नहीं आएगी और भूजल इससे प्रभावित नहीं होगा। सोलह साल पहले भी 30 टन से ज्यादा राख पीथमपुर में लैंडफिल की गई थी। उस कारण भस्मक के समीप से निकलने वाली नदी का पानी काला हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उस पानी का उपयोग खेतों में नहीं करते, इससे फसल खराब हो जाती है। अब उसी फैक्टरी की 900 टन राख को भी पीथमपुर में दफन किया गया है। अब इसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की जाएगी।  

यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री फिर चर्चा में, CM मोहन यादव ने लिया स्थल का दौरा

भोपाल  सीएम मोहन यादव शनिवार को अचानक यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री पहुंच गए। ठीक उसी स्थान पर जहां दुनिया की भीषण त्रासदी लोगों को झेलना पड़ी थी। सीएम ने उस फैक्ट्री का निरीक्षण किया। इस मौके पर गैस राहत विभाग से जुड़े अधिकारी भी मौजूद थे, सीएम ने उनसे काफी देर तक चर्चा की। यह फैक्ट्री 85 एकड़ जमीन पर बनी है। इससे एक दिन पहले शुक्रवार को भोपाल जिला प्रशासन, गैस राहत विभाग के अधिकारी इस फैक्ट्री और जमीन से जुड़ी फाइलों को देख रहे थे। पिछले साल पीथमपुर पहुंचा था 337 टन कचरा यूनियन कार्बाइड में 40 सालों से पड़ा कचरा पिछले साल जनवरी में पीथमपुर भेजा गया था, जहां उस जहरीले कचरे के नष्ट कर दिया गया। 12 कंटेनरों में भरकर इस कचरे को पीथमपुर ले जाया गया था। इस कचरे को पीथमपुर में नष्ट करने का जमकर विरोध भी देखने को मिला था, अंततः कचरा नष्ट कर दिया गया और उसकी राख तक को दफन कर दिया गया। गौरतलब है कि भोपाल गैस त्रासदी दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी में से एक थी। 41 साल पहले 2 और 3 दिसंबर 1984 की रात को यह भीषण घटना हुई थी। जेपी नगर क्षेत्र में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के टैंक नंबर 610 में से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस लीक हुई थी। आज भी उस रात की तस्वीरें रूह कंपा देती है। इस घटना के चश्मदीद और उस दौर के पत्रकार बताते हैं कि हर तरफ लाशें ही लाशें बिछ गई थी। उन्हें ढोने के लिए गाड़ियां कम पड़ गई थी, लाशों को जलाने के लिए लकड़ियां कम पड़ गई थी। CM डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को अचानक यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री पहुंचकर स्थल का निरीक्षण किया और गैस राहत विभाग के अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की। यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री 85 एकड़ जमीन पर फैली हुई है, जिसकी फाइलों की समीक्षा एक दिन पहले ही जिला प्रशासन और गैस राहत विभाग ने की थी। 40 सालों से फैक्ट्री में पड़ा 337 टन जहरीला कचरा जनवरी 2025 में पीथमपुर भेजकर नष्ट किया गया, जिसे 12 कंटेनरों में भरकर ले जाया गया था। पीथमपुर में जहरीले कचरे के निपटान का कड़ा विरोध हुआ, लेकिन अंततः कचरा और उसकी राख को सुरक्षित तरीके से दफन कर दिया गया। भोपाल गैस त्रासदी दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक आपदाओं में से एक है, जिसमें 2-3 दिसंबर 1984 की रात मिथाइल आइसोसाइनेट गैस लीक होने से हजारों लोगों की मौत हुई थी।