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यूपी पंचायत चुनाव 2026 की मतदाता सूची में बड़े बदलाव, 1.41 करोड़ नाम हटाए और 15 लाख युवा जुड़े

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए वर्ष 2025 के बाद कराए गए मतदाता सूची के वृहद पुनरीक्षण में राज्य में मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के परिणामस्वरूप मतदाता सूची में 40.19 लाख नए मतदाता जुड़े हैं। अब राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर 12.69 करोड़ हो गई है, जबकि वर्ष 2021 में यह संख्या 12.29 करोड़ थी। 18 वर्ष के 15 लाख युवा शामिल राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि नए मतदाताओं में लगभग 15 लाख ऐसे युवा शामिल हैं, जिन्होंने हाल ही में 18 वर्ष की आयु पूर्ण की है। उन्होंने बताया कि 18 से 23 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं की कुल संख्या अब 1.05 करोड़ तक पहुंच गई है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में युवाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है। कुल 1.41 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए निर्वाचन आयुक्त ने जानकारी दी कि पुनरीक्षण के दौरान कुल 1.41 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इनमें वे नाम शामिल हैं जो दोहराव वाले पाए गए, स्थानांतरित हो चुके थे या फिर मृत्यु के कारण अमान्य हो गए थे। उन्होंने बताया कि पुनरीक्षण से पूर्व वर्ष 2021 की मतदाता सूची में शामिल सभी 12.29 करोड़ मतदाताओं को स्टेट वोटर नंबर (एसवीएन) आवंटित किया गया था। इसके बाद ईबीएलओ ऐप और गणना प्रपत्रों के माध्यम से घर-घर जाकर मतदाताओं का भौतिक सत्यापन किया गया। एसवीएन प्रत्येक मतदाता को केवल एक बार राज प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि एसवीएन प्रत्येक मतदाता को केवल एक बार ही दिया जाएगा। यदि किसी मतदाता का नाम सूची से हटाया जाता है, तो उसका एसवीएन स्थायी रूप से फ्रीज कर दिया जाएगा और भविष्य में किसी अन्य मतदाता को आवंटित नहीं किया जाएगा। इससे मतदाता सूची की पारदर्शिता और शुद्धता सुनिश्चित होगी। मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन 23 दिसंबर को राज प्रताप सिंह ने बताया कि दावे और आपत्तियों के लिए मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन 23 दिसंबर को किया जाएगा, जबकि सभी आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 6 फरवरी को होगा।  

वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव: यूपी में 50 लाख लोग हो सकते हैं हटाए जाने वाले

यूपी पंचायत चुनाव: 50 लाख नाम हो सकते हैं वोटर लिस्ट से बाहर, जानें कौन प्रभावित होंगे वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव: यूपी में 50 लाख लोग हो सकते हैं हटाए जाने वाले यूपी पंचायत चुनाव 2025: 50 लाख नामों के कटने की संभावना, किसका होगा असर लखनऊ  यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले मतदाता सूची की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है.  राज्य निर्वाचन आयोग को कई जिलों में हजारों-लाखों ऐसे मतदाता दर्ज हैं जिनका नाम एक ही सूची में दो या तीन बार मौजूद है.  पता चला है कि पीलीभीत, वाराणसी, बिजनौर और हापुड़ जैसे जिलों में इस तरह के दोहराव सबसे ज्यादा हैं. केवल पीलीभीत जिले के पूरनपुर ब्लॉक में ही करीब 97 हजार मतदाता ऐसे मिले हैं, जिनके नाम एक से अधिक बार सूची में दर्ज हैं. यानी एक व्यक्ति अलग-अलग वार्डों में मतदाता के रूप में दिख रहा है. गहन पुनरीक्षण अभियान की जरूरत  आयोग ने माना है कि यह समस्या इतनी बड़ी है कि इसे ठीक करने के लिए एक गहन पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision – SIR) चलाना पड़ेगा. राज्य निर्वाचन आयोग ने ब्लॉकवार डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची तैयार कर जिलाधिकारियों को भेज दी है ताकि तुरंत सुधार कार्य शुरू किया जा सके. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे घर-घर जाकर जांच करें और जिन नामों की पुनरावृत्ति है, उन्हें सूची से हटाएं. बड़े जिलों में भारी गड़बड़ी आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 826 विकास खंडों में से 108 ब्लॉकों में 40 हजार से अधिक डुप्लीकेट मतदाता दर्ज हैं. इनमें सबसे ज्यादा नाम वाराणसी के आराजीलाइन ब्लॉक (77,947), गाजीपुर के सैदपुर (71,170), वाराणसी के पिंडरा (70,940) और जौनपुर के शाहगंज सोंधी (62,890) में पाए गए हैं. इन जिलों के अधिकारियों को विशेष निगरानी में रखा गया है.  50 लाख नाम हटने की संभावना एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगर सभी जिलों में सही जांच की जाए, तो करीब 50 लाख डुप्लीकेट नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं. उनका कहना है कि पहले भी ऐसे प्रयास किए गए थे, लेकिन इतने व्यापक स्तर पर जांच पहली बार की जा रही है. इस बार आयोग चाहता है कि पंचायत चुनाव से पहले ही मतदाता सूची पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाई जाए. आयोग की कार्रवाई राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे जल्द से जल्द अपने जिले की मतदाता सूची का सत्यापन करें. निर्देशों में यह भी कहा गया है कि किसी भी कीमत पर डुप्लीकेट नाम चुनावी प्रक्रिया में बाधा नहीं बनने चाहिए. जिलाधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष टीम बनाएं, जो मतदाताओं की पहचान और उनके दस्तावेजों की दोबारा जांच करे. खंडवार और ब्लॉकवार रिपोर्ट तैयार कर आयोग को भेजने की अंतिम तारीख भी तय कर दी गई है.