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रात में किचन में रह गईं ये 5 चीजें बन सकती हैं कंगाली की वजह

भारतीय परंपरा और वास्तु शास्त्र में Kitchen को घर का सबसे पवित्र हिस्सा माना जाता है, क्योंकि यहां अन्नपूर्णा का वास होता है। वास्तु के अनुसार, रसोई की ऊर्जा सीधे तौर पर घर के सदस्यों की सेहत और आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है। अक्सर हम दिनभर की थकान के बाद कुछ चीजों को अनदेखा कर देते हैं, जो वास्तु दोष का कारण बन सकती हैं। तो आइए जानते हैं कि रात को सोने से पहले रसोई में किन चीजों को छोड़ना आपकी सुख-समृद्धि में बाधा डाल सकता है। जूठे बर्तन अक्सर लोग आलस्य के कारण रात के बर्तनों को सुबह धोने के लिए सिंक में ही छोड़ देते हैं। वास्तु के अनुसार, रात भर जूठे बर्तन रहने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और 'अलक्ष्मी' का प्रभाव बढ़ता है। इससे घर में क्लेश और धन की हानि होने की संभावना रहती है। खाली बाल्टी या बर्तन रसोई के सिंक या पीने के पानी वाली जगह पर कभी भी खाली बाल्टी या बर्तन नहीं रखने चाहिए। वास्तु शास्त्र कहता है कि रसोई में कम से कम एक बाल्टी या जग पानी भरकर जरूर रखना चाहिए। यह घर में धन के प्रवाह को निरंतर बनाए रखने का प्रतीक माना जाता है। चकला और बेलन रोटी बनाने के बाद कई लोग चकला और बेलन को बिना धोए ही रख देते हैं। ऐसा करना वास्तु की दृष्टि से बहुत बड़ा दोष माना जाता है। गंदे चकला-बेलन न केवल बीमारी का कारण बनते हैं, बल्कि इससे घर के सदस्यों के सम्मान में भी कमी आती है। इन्हें हमेशा धोकर और सुखाकर ही रखें। बिखरा हुआ कूड़ा-कचरा सोने से पहले सुनिश्चित करें कि रसोई का Dustbin खाली हो या ढका हुआ हो। रसोई में बिखरी हुई गंदगी रात भर नकारात्मकता फैलाती है, जिससे मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। रात भर खुला न छोड़ें दूध दूध का संबंध चंद्रमा से होता है। रात को रसोई में दूध को खुला छोड़ना या बिना ढके रखना चंद्र दोष उत्पन्न कर सकता है। इससे परिवार में बेवजह का तनाव और आर्थिक उतार-चढ़ाव आ सकते हैं।

सुख-शांति में डाल सकती है खलल बाथरूम की खाली बाल्टी, वास्तु शास्त्र से जानें सही उपाय

अक्सर हम घर की सजावट और मुख्य कमरों के वास्तु पर तो बहुत ध्यान देते हैं, लेकिन बाथरूम जैसी महत्वपूर्ण जगह को नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, बाथरूम का सीधा संबंध हमारी आर्थिक स्थिति और मानसिक शांति से होता है। कई बार हम अनजाने में बाथरूम में खाली बाल्टी छोड़ देते हैं, जिसे वास्तु में एक बड़ा दोष माना गया है। यह छोटी सी लापरवाही घर में कंगाली और नकारात्मकता का कारण बन सकती है। खाली बाल्टी क्यों है अशुभ? वास्तु विज्ञान में पानी को 'सम्पन्नता' और 'प्रवाह' का प्रतीक माना गया है। प्राचीन वास्तु शास्त्रों के अनुसार, बाथरूम में खाली बाल्टी रखना खालीपन और अभाव को दर्शाता है। जब बाल्टी खाली होती है, तो यह घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को रोकती है और आर्थिक तंगी का संकेत देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप रात के समय बाल्टी को खाली छोड़ देते हैं, तो इससे घर में तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी जल का संबंध चंद्रमा से है, और खाली बर्तन मानसिक अशांति का कारण बन सकते हैं। बाल्टी का रंग और दिशा भी है महत्वपूर्ण बाल्टी के इस्तेमाल में केवल उसका भरा होना ही काफी नहीं है, बल्कि उसका रंग भी मायने रखता है: नीले रंग का महत्व: वास्तु में नीले रंग की बाल्टी को सबसे शुभ माना गया है। नीला रंग जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है और इसे बाथरूम में रखने से राहु-केतु जैसे ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। सफाई का ध्यान: बाल्टी कभी भी टूटी हुई या बहुत पुरानी नहीं होनी चाहिए। गंदी बाल्टी घर में दरिद्रता लाती है।

सावधान! इस समय किया गया लेन-देन रोक सकता है आर्थिक प्रगति

हिंदू परंपरा में धन को मां लक्ष्मी की कृपा, शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, केवल धन कमाना ही नहीं बल्कि उसका सही समय पर आदान-प्रदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। मान्यता है कि सप्ताह के हर दिन की अपनी अलग ऊर्जा और ग्रहों का प्रभाव होता है, जो हमारे आर्थिक फैसलों और धन प्रवाह को प्रभावित करता है। वास्तु शास्त्र में कुछ दिन ऐसे बताए गए हैं, जब पैसों का लेन-देन समृद्धि और स्थिरता बढ़ाता है, जबकि कुछ दिन ऐसे भी होते हैं जब किया गया आर्थिक व्यवहार मां लक्ष्मी की नाराजगी का कारण बन सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि धन से जुड़े कार्यों के लिए कौन-से दिन शुभ और कौन-से अशुभ माने जाते हैं। धन के लेन-देन के लिए शुभ दिन शुक्रवार वास्तु शास्त्र के अनुसार शुक्रवार को पैसों के लेन-देन के लिए सबसे शुभ दिन माना गया है। यह दिन मां लक्ष्मी और शुक्र ग्रह से जुड़ा होता है। शुक्र ग्रह को ऐश्वर्य, सुख-सुविधा और आर्थिक समृद्धि का प्रतीक माना गया है। शुक्रवार को किया गया धन संबंधी लेन-देन आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और धन प्रवाह बढ़ाने में सहायक होता है। सोमवार सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन किया गया धन का आदान-प्रदान मानसिक शांति के साथ-साथ आर्थिक बाधाओं को भी दूर करता है। व्यापार या जरूरी आर्थिक लेन-देन के लिए यह दिन शुभ माना गया है। गुरुवार गुरुवार भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति का दिन होता है। वास्तु के अनुसार, इस दिन किया गया लेन-देन धन वृद्धि और स्थिरता लाने वाला माना जाता है। खासकर निवेश या उधार देने के लिए गुरुवार अनुकूल माना गया है। इन दिनों पैसों का लेन-देन करने से बचें शनिवार शनिवार शनि देव से संबंधित होता है, जिन्हें कर्म और न्याय का देवता माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पैसों का लेन-देन करने से आर्थिक अस्थिरता, देरी और रुकावटें आ सकती हैं। मंगलवार मंगलवार को धन उधार देना या लेना भी शुभ नहीं माना गया है। मान्यता है कि इस दिन दिया गया पैसा लंबे समय तक वापस नहीं आता, जिससे आर्थिक तनाव बढ़ सकता है। तिथियों का भी रखें विशेष ध्यान वास्तु शास्त्र के अनुसार केवल दिन ही नहीं, बल्कि तिथियों का भी धन के लेन-देन में विशेष महत्व होता है। अमावस्या के दिन पैसों का लेन-देन नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि अमावस्या तिथि नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है, जिससे धन हानि और अस्थिरता हो सकती है। वास्तु विशेषज्ञों की सलाह यदि आर्थिक मजबूती और मां लक्ष्मी की कृपा बनाए रखना चाहते हैं, तो धन से जुड़े हर निर्णय में शुभ दिन और तिथि का ध्यान अवश्य रखें। छोटे-छोटे वास्तु नियम अपनाकर भी जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

वास्तु के अनुसार बाथरूम का शीशा: ये 3 गलतियां बन सकती हैं गृह-क्लेश की वजह

आजकल हर घर के बाथरूम में शीशा लगा होता है। अपने होम डेकोर और इंटीयर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए लोग घर में किसी भी जगह शीशा लगा देते हैं। उन्हें वास्तु से कोई लेना-देना नहीं होता। लेकिन, वास्तु का लोगों के जीवन पर कितना असर पड़ता है इसका उन्हें अंदाजा भी नहीं होता। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का हर कोना हमारी उन्नति और स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है। बाथरूम एक ऐसी जगह है, जहां सबसे अधिक नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होने की संभावना रहती है। अगर यहां वास्तु के नियमों का पालन न किया जाए, तो यह घर की सुख-शांति को बिगाड़ सकता है। बाथरूम में लगे आईने (शीशे) का इसमें बहुत बड़ा योगदान होता है। आइए जानते हैं बाथरूम में शीशा लगाने के सही वास्तु नियम: सही दिशा का चुनाव वास्तु के अनुसार, बाथरूम में आईना हमेशा पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की दीवार पर लगाना चाहिए। इन दिशाओं को सकारात्मकता का केंद्र माना जाता है। उत्तर दिशा में लगा आईना धन और समृद्धि को आकर्षित करता है। वहीं, पूर्व दिशा स्वास्थ्य और मान-सम्मान में सुधार करती है। भूलकर भी दक्षिण या पश्चिम की दीवार पर आईना न लगाएं। आईने का आकार अपने बाथरूम में हमेशा चौकोर या आयाताकार आईना ही लगाएं। वास्तु में इन आकारों को संतुलन का प्रतीक और बेहद शुभ माना गया है। गोल या अंडाकार आईने बाथरूम में लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि ये ऊर्जा को अनियंत्रित तरीके से परावर्तित कर सकते हैं, जिससे मानसिक तनाव भी पैदा हो सकता है। कितनी ऊंचाई पर लगाएं शीशा? आईना लगाते समय ध्यान रखें कि यह न तो बहुत ऊपर हो और न ही बहुत नीचे। जब आप शीशे में देखें, तो आपका चेहरा पूरी तरह और स्पष्ट दिखना चाहिए। आधा या कटा हुआ चेहरा दिखना अशुभ माना जाता है और यह आत्मविश्वास में कमी ला सकता है। दरवाजे के ठीक सामने न लगा हो शीशा बाथरूम के दरवाजे के ठीक सामने कभी भी आईना नहीं लगाना चाहिए। वास्तु के अनुसार, जब बाथरूम का दरवाजा खुलता है, तो नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। अगर सामने आईना लगा होगा, तो वह उस नकारात्मक ऊर्जा को परावर्तित कर वापस पूरे घर में फैला देगा। शीशे की सफाई और स्थिति आईने पर धुंधलापन, पानी के निशान या गंदगी नहीं होनी चाहिए। गंदा आईना न केवल नकारात्मकता बढ़ाता है, बल्कि आर्थिक तंगी का कारण भी बनता है। साथ ही, यदि आईना कहीं से चटका या टूटा हुआ हो, तो उसे तुरंत हटा दें, क्योंकि टूटा हुआ शीशा गंभीर वास्तु दोष पैदा करता है।  

करोड़पति बनने का वास्तु मंत्र, बस ये एक बदलाव जरूरी

वास्तु शास्त्र केवल दिशाओं का ज्ञान नहीं है, बल्कि यह हमारे आसपास की ऊर्जा को संतुलित करने का एक प्राचीन विज्ञान है। कई बार हम कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन सफलता और पैसा हमारे हाथ नहीं लगता। वास्तु के अनुसार, इसका कारण घर में मौजूद ऊर्जा का अवरोध हो सकता है। आज हम बात करेंगे वास्तु के उस सबसे बड़े सीक्रेट की, जिसे अपनाकर आप अपने जीवन में धन के प्रवाह को बढ़ा सकते हैं। वास्तु का सबसे बड़ा सीक्रेट वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा माना गया है। इस दिशा का सीधा संबंध आपके करियर, नए अवसरों और पैसे की आवक से होता है। यदि आपके घर की उत्तर दिशा दोषपूर्ण है, तो पैसा आएगा तो सही लेकिन टिकेगा नहीं। वह एक बदलाव जो बदल सकता है आपकी किस्मत अगर आप करोड़पति बनने का सपना देखते हैं, तो अपने घर की उत्तर दिशा में नीले रंग के पानी का फव्वारा या बहते हुए पानी की तस्वीर लगाएं। यह एक छोटा सा बदलाव धन की ऊर्जा को चुंबक की तरह खींचता है। मुख्य द्वार घर का मुख्य द्वार वह स्थान है जहां से लक्ष्मी का आगमन होता है। मुख्य द्वार हमेशा साफ-सुथरा और चमकदार होना चाहिए। द्वार पर चांदी का स्वास्तिक लगाएं या दहलीज पर तांबे के सिक्के दबाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती। तिजोरी की सही दिशा आप अपना पैसा और गहने जहां रखते हैं, वह स्थान आपकी आर्थिक स्थिति तय करता है। अपनी तिजोरी या अलमारी को हमेशा घर के दक्षिण-पश्चिम  कोने में रखें लेकिन इसका मुंह उत्तर की ओर खुलना चाहिए। उत्तर की ओर खुलती हुई तिजोरी कुबेर के खजाने का स्वागत करती है। रसोई घर और अग्नि का संतुलन रसोई घर में अग्नि का वास होता है, जो समृद्धि का प्रतीक है। यदि आपकी रसोई दक्षिण-पूर्व में नहीं है, तो वहां एक लाल रंग का बल्ब जलाएं। कभी भी रसोई में जूठे बर्तन रात भर न छोड़ें क्योंकि यह लक्ष्मी को रुष्ट करता है। कबाड़ और मकड़ी के जाले वास्तु में राहु का वास गंदगी और कबाड़ में माना गया है। घर की उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहते हैं, उसे हमेशा खाली और साफ रखें। यहाँ भारी सामान या कूड़ा रखने से बुद्धि भ्रष्ट होती है और धन का नुकसान होता है। मनी प्लांट और धातु का कछुआ  इसे हमेशा घर के अंदर दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाएं। ध्यान रहे कि इसकी बेलें जमीन को न छुएं, उन्हें ऊपर की ओर सहारा दें। उत्तर दिशा में एक पीतल के बर्तन में पानी भरकर उसमें पीतल का कछुआ रखें। यह स्थिरता और निरंतर धन लाभ का प्रतीक है।

बेडरूम में भगवान की मूर्ति व तराजू और शीशा रखने से आती है घर में नेगेटिविटी

घर का वास्तु हमेशा सही होना चाहिए। वहीं बेडरूम में रखी हुई चीजों का प्लेसमेंट तो जरूर इसके हिसाब से होना चाहिए क्योंकि ऐसा ना करने पर पूरे घर का वास्तु खराब होता है। वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसे नियम हैं जो बहुत ही आसान हैं। अगर सलीके से इन नियमों का पालन कर लिया जाए तो घर की एनर्जी पल भर में बदल सकती है। कई बार ऐसा होता होगा ना कि बाहर से घर आने पर अचानक ही भारीपन सा लगने लगता है। या फिर मन करता है कि कहीं बाहर चला जाए। अगर आपको घर की दीवारें काटने को दौड़ती हैं तो कुछ बदलाव करके आप इन चीजों को पूरी तरह से पॉजिटिव कर सकते हैं। शास्त्र के कुछ नियम घर में रखी हुई चीजों के प्लेसमेंट के इर्द-गिर्द भी घूमती है। आज बात करेंगे बेडरूम की। वास्तु शास्त्र के हिसाब से यहां पर कुछ चीजें भूलकर भी नहीं रखनी चाहिए। बेडरूम में ना रखें ये चीजें वास्तु शास्त्र के अनुसार बेडरूम में कभी भी भूलकर भगवान की कोई भी मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। हालांकि कलात्मक मूर्तियां यहां पर रख सकते हैं। इसके अलावा कभी भी यहां पर अनाज नहीं रखना चाहिए। अगर ऐसा किया जाता है तो अन्न देवता नाराज होते है और इसका असर घर की सुख-समृद्धि पर पड़ता है। शास्त्र के अनुसार बेडरूम में कभी भी तराजू नहीं रखना चाहिए। ना ही यहां पर कभी किसी चीज को तौलना चाहिए। इन चीजों को बेडरूम में करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे घर का वास्तु कहीं ना कहीं जरूर प्रभावित होता है और नेगेटिविटी आती है। ध्यान में रखें ये बातें घर के बेडरूम का वास्तु हर मायने में सही होना चाहिए। कोशिश करनी चाहिए कि यहां पर कोई भी शीशा ना लगा हो। अगर आप इसे रखना चाहते हैं तो बेड से दूर ही रखें। बेड पर अगर कोई है तो शीशे में वो ना दिखें। शीशे की प्लेसमेंट ऐसे ही करें। साथ ही बेड के नीचे सामान ना इकट्ठा करें। आम तौर पर लोग बेड के नीचे कोई ना कोई सामान जरूर रख देते हैं जोकि सही नहीं है। साथ ही यहां पर कोई भी भारी इलेक्ट्रॉनिक सामान नहीं रखना चाहिए। वहीं बेडरूम की दीवारें हल्के और वाइब्रेंट कलर के होने चाहिए। नियमित रूप से यहां की सफाई जरूरी है। डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं।

करोड़पति बनने का वास्तु मंत्र! घर में ये एक बदलाव बदल सकता है किस्मत

वास्तु शास्त्र केवल दिशाओं का ज्ञान नहीं है, बल्कि यह हमारे आसपास की ऊर्जा को संतुलित करने का एक प्राचीन विज्ञान है। कई बार हम कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन सफलता और पैसा हमारे हाथ नहीं लगता। वास्तु के अनुसार, इसका कारण घर में मौजूद ऊर्जा का अवरोध हो सकता है। आज हम बात करेंगे वास्तु के उस सबसे बड़े सीक्रेट की, जिसे अपनाकर आप अपने जीवन में धन के प्रवाह को बढ़ा सकते हैं। वास्तु का सबसे बड़ा सीक्रेट वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा माना गया है। इस दिशा का सीधा संबंध आपके करियर, नए अवसरों और पैसे की आवक से होता है। यदि आपके घर की उत्तर दिशा दोषपूर्ण है, तो पैसा आएगा तो सही लेकिन टिकेगा नहीं। वह एक बदलाव जो बदल सकता है आपकी किस्मत अगर आप करोड़पति बनने का सपना देखते हैं, तो अपने घर की उत्तर दिशा में नीले रंग के पानी का फव्वारा या बहते हुए पानी की तस्वीर लगाएं। यह एक छोटा सा बदलाव धन की ऊर्जा को चुंबक की तरह खींचता है। धन वृद्धि के लिए 5 अचूक वास्तु नियम मुख्य द्वार घर का मुख्य द्वार वह स्थान है जहां से लक्ष्मी का आगमन होता है। मुख्य द्वार हमेशा साफ-सुथरा और चमकदार होना चाहिए। द्वार पर चांदी का स्वास्तिक लगाएं या दहलीज पर तांबे के सिक्के दबाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती। तिजोरी की सही दिशा आप अपना पैसा और गहने जहां रखते हैं, वह स्थान आपकी आर्थिक स्थिति तय करता है। अपनी तिजोरी या अलमारी को हमेशा घर के दक्षिण-पश्चिम  कोने में रखें लेकिन इसका मुंह उत्तर की ओर खुलना चाहिए। उत्तर की ओर खुलती हुई तिजोरी कुबेर के खजाने का स्वागत करती है। रसोई घर और अग्नि का संतुलन रसोई घर में अग्नि का वास होता है, जो समृद्धि का प्रतीक है। यदि आपकी रसोई दक्षिण-पूर्व में नहीं है, तो वहां एक लाल रंग का बल्ब जलाएं। कभी भी रसोई में जूठे बर्तन रात भर न छोड़ें क्योंकि यह लक्ष्मी को रुष्ट करता है। कबाड़ और मकड़ी के जाले वास्तु में राहु का वास गंदगी और कबाड़ में माना गया है। घर की उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहते हैं, उसे हमेशा खाली और साफ रखें। यहाँ भारी सामान या कूड़ा रखने से बुद्धि भ्रष्ट होती है और धन का नुकसान होता है। मनी प्लांट और धातु का कछुआ  इसे हमेशा घर के अंदर दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाएं। ध्यान रहे कि इसकी बेलें जमीन को न छुएं, उन्हें ऊपर की ओर सहारा दें। उत्तर दिशा में एक पीतल के बर्तन में पानी भरकर उसमें पीतल का कछुआ रखें। यह स्थिरता और निरंतर धन लाभ का प्रतीक है।

गलत दिशा में टंगा कैलेंडर रोक सकता है तरक्‍की! जानें वास्तु शास्त्र के 5 जरूरी नियम

वास्तु शास्त्र में घर की हर छोटी-बड़ी वस्तु की एक निश्चित दिशा और ऊर्जा बताई गई है। कैलेंडर हर घर में होता है। लेकिन, अक्सर हम कैलेंडर को खाली दीवार देखकर कहीं भी टांग देते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि कैलेंडर केवल तारीखें देखने का जरिया नहीं है। बल्कि, यह आपके समय और प्रगति का प्रतीक है? कैलेंडर आपके जीवन पर काफी हद तक असर डालता है। गलत दिशा में लगा कैलेंडर न केवल आपकी तरक्की को रोक सकता है, बल्कि घर में तनाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी ला सकता है। आइए जानते हैं कैलेंडर से जुड़े वास्तु के वो 5 नियम जो आपकी किस्मत बदल सकते हैं। दक्षिण दिशा है पूरी तरह वर्जित वास्तु शास्त्र के अनुसार, कैलेंडर को कभी भी दक्षिण दिशा (South) में नहीं लगाना चाहिए। दक्षिण दिशा को 'ठहराव' की दिशा माना जाता है और इसके स्वामी यमराज हैं। अगर, आप यहां कैलेंडर लगाते हैं, तो यह आपके परिवार के सदस्यों की प्रगति में बाधा उत्पन्न करने का काम करता है। इससे समय आपके पक्ष में नहीं रहता और घर के मुखिया के स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ सकता है। तरक्की के द्वार खोलती हैं ये दिशाएं पूर्व दिशा (East): पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य हैं, जो उदय और प्रगति के प्रतीक हैं। यहां कैलेंडर लगाने से जीवन में नए अवसर मिलते हैं और मान-सम्मान बढ़ता है। लाल या गुलाबी रंग के कैलेंडर यहाँ शुभ होते हैं। उत्तर दिशा (North): यह दिशा कुबेर देव की है। यहाँ कैलेंडर लगाने से धन लाभ और करियर में उन्नति होती है। उत्तर में हरे या नीले रंग के कैलेंडर का प्रयोग करना बेहतर होता है। पश्चिम दिशा (West): अगर आप अपने रुके हुए कामों को गति देना चाहते हैं, तो पश्चिम दिशा में कैलेंडर लगाना लाभप्रद होता है। मुख्य दरवाजे और दरवाजे के पीछे न लगाएं अक्सर जगह बचाने के लिए लोग कैलेंडर को दरवाजे के पीछे टांग देते हैं। वास्तु के अनुसार, यह एक गंभीर दोष माना जाता है। दरवाजे के पीछे कैलेंडर होने का मतलब है कि आप समय से पीछे चल रहे हैं। इसी तरह, मुख्य द्वार के सामने भी कैलेंडर नहीं होना चाहिए। क्योंकि, वहां से गुजरने वाली ऊर्जा समय चक्र से प्रभावित होकर घर में तनाव पैदा कर सकती है। पुराने कैलेंडर को तुरंत हटाएं नया साल शुरू होते ही पुराने कैलेंडर को घर से विदा कर देना चाहिए। कई लोग पुराने कैलेंडर के ऊपर ही नया कैलेंडर टांग देते हैं या पिछले साल का कैलेंडर दीवार पर लगा रहने देते हैं। वास्तु में इसे 'रुका हुआ समय' माना जाता है, जो आपकी पुरानी यादों और असफलताओं को वर्तमान से जोड़े रखता है और भविष्य के रास्ते बंद कर देता है। चित्रों का चुनाव सोच-समझकर करें कैलेंडर पर बने चित्र आपके अवचेतन मन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। कभी भी ऐसे कैलेंडर का प्रयोग न करें जिसमें हिंसक जानवर, युद्ध के दृश्य, पतझड़ या उदास करने वाले चित्र हों। घर में हमेशा उगते हुए सूरज, हरियाली, देवी-देवता या सकारात्मक दृश्यों वाले कैलेंडर ही लगाएं।  

घर में हाथी की मूर्ति रखने से क्या होते हैं फायदे? जानिए वास्तु के नियम

वास्तु में हाथी की मूर्तियों का क्या महत्व है? जानिये कैसे हाथी देता है शुभ परिणाम – वास्तु शास्त्र में जानवरों की मूर्तियों और तस्वीरों का अपना एक खास महत्व होता है। इनमें हाथी को बेहद शुभ और शक्तिशाली माना गया है। प्राचीन काल से ही हाथी को सौभाग्य, शक्ति, ज्ञान, स्थिरता और राजसी ठाट-बाट का प्रतीक माना जाता रहा है। वास्तु के अनुसार, घर या दफ्तर में हाथी की मूर्ति रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और कई तरह के शुभ परिणाम मिलते हैं। वास्तु में हाथी का महत्व समृद्धि और धन का प्रतीक: हाथी को देवी लक्ष्मी का वाहन माना जाता है। इसलिए घर में हाथी की मूर्ति, खासकर चांदी या पीतल की मूर्ति रखना धन और समृद्धि को आकर्षित करता है। इसे घर की उत्तर दिशा में रखने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। शक्ति और स्थिरता: हाथी अपनी विशालता और दृढ़ता के लिए जाना जाता है। इसकी मूर्ति घर में स्थिरता और शक्ति प्रदान करती है। यह परिवार के सदस्यों के बीच मजबूत रिश्ते बनाने में मदद करता है। इसे कार्यस्थल पर रखने से कार्यक्षमता और नेतृत्व क्षमता बढ़ती है। ज्ञान और बुद्धि: सफेद हाथी को ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक माना गया है। छात्रों या शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों को अपनी स्टडी टेबल पर सफेद हाथी की छोटी मूर्ति रखनी चाहिए। इससे एकाग्रता बढ़ती है और पढ़ाई में बेहतर परिणाम मिलते हैं। सौभाग्य और सुरक्षा: घर के मुख्य द्वार पर हाथी के जोड़े की मूर्ति लगाना शुभ माना जाता है। यदि उनकी सूंड ऊपर की ओर उठी हो तो यह सौभाग्य और सफलता का प्रतीक होता है। यह घर को नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है और सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है। पति-पत्नी के रिश्ते में मधुरता: बेडरूम में चांदी के हाथी का जोड़ा रखने से पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम और मधुरता आती है। यह उनके बीच के संबंधों को मजबूत करता है और आपसी समझ को बढ़ाता है। सही दिशा और सामग्री का चुनाव धातु: चांदी या पीतल के हाथी धन और समृद्धि के लिए उत्तम माने जाते हैं। लकड़ी: लकड़ी के हाथी शांति और स्थिरता के लिए अच्छे होते हैं। दिशा- उत्तर: धन और करियर में वृद्धि। मुख्य द्वार: सौभाग्य और सुरक्षा। बेडरूम: दांपत्य जीवन में सुख। स्टडी रूम: ज्ञान और एकाग्रता।

वास्तु शास्त्र: अलमारी के ऊपर रखा यह सामान बन सकता है परेशानी की वजह

वास्तु शास्त्र में घर की हर दिशा और हर कोने का अपना महत्व होता है। अक्सर हम अपने घरों में जगह की कमी के कारण या आलस में आकर अलमारी के ऊपर खाली जगह का इस्तेमाल फालतू सामान रखने के लिए करने लगते हैं। पुराने बक्से, सूटकेस, कबाड़ या धूल जमा सामान अलमारी के ऊपर रख दिया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह एक छोटी सी आदत आपके घर की सुख-शांति और आर्थिक उन्नति को रोक सकती है ? वास्तु के अनुसार, अलमारी के ऊपर सामान रखना न केवल नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है, बल्कि यह आपकी खुशियों को नजर लगाने जैसा काम करता है। भारी सामान और मानसिक तनाव का संबंध वास्तु शास्त्र के अनुसार, अलमारी का ऊपरी हिस्सा खाली और साफ होना चाहिए। जब आप अलमारी के ऊपर भारी सामान या अनावश्यक चीजें रखते हैं तो यह उस कमरे की सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को रोक देता है। इसका सीधा असर घर के मुखिया और सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। यह अनजाने में आपके दिमाग पर 'बोझ' की तरह काम करता है, जिससे बेवजह का तनाव, चिड़चिड़ापन और नींद न आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। नकारात्मक ऊर्जा का जमाव अलमारी के ऊपर रखा सामान अक्सर महीनों तक साफ नहीं किया जाता। वहां धूल-मिट्टी जमा होने लगती है। वास्तु में धूल और कबाड़ को राहु का प्रतीक माना जाता है। अलमारी के ऊपर जमा गंदगी और कबाड़ घर में नकारात्मक ऊर्जा का चक्र  बना देते हैं। इससे घर में अक्सर बीमारियां बनी रहती हैं और बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता। आर्थिक तरक्की में बाधा ज्यादातर घरों में अलमारी का उपयोग गहने, पैसे और कीमती दस्तावेज रखने के लिए किया जाता है। अलमारी को लक्ष्मी का स्थान माना जाता है।  यदि लक्ष्मी के स्थान के ऊपर ही गंदगी या फालतू सामान रखा हो, तो माँ लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। इससे घर में धन का आगमन रुक जाता है और बचत कम होने लगती है। मेहनत करने के बावजूद आपको उसका फल नहीं मिलता। रिश्तों में बढ़ती है कड़वाहट अलमारी के ऊपर सामान रखने से घर के वास्तु पुरुष के सिर पर दबाव पड़ता है । इसका परिणाम घर के सदस्यों के आपसी रिश्तों पर दिखता है। छोटी-छोटी बातों पर पति-पत्नी के बीच झगड़े होना या परिवार में मतभेद बढ़ना इसी वास्तु दोष का लक्षण हो सकता है।