samacharsecretary.com

पति-पत्नी के सोने की सही दिशा: वास्तु के अनुसार कौन किस साइड सोए?

हमारे सोने का तरीका और बिस्तर पर हमारी स्थिति न केवल हमारी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करती है, बल्कि यह पति-पत्नी के रिश्ते की ऊर्जा और सामंजस्य को भी निर्धारित करती है। वास्तु शास्त्र और ज्योतिष विज्ञान में इस विषय को लेकर स्पष्ट नियम बताए गए हैं कि पति को पत्नी की किस तरफ सोना चाहिए, वरना रिश्ते में अनबन और दूरियां बढ़ सकती हैं। रिश्ते में प्यार बनाए रखने के लिए आइए जानते हैं पति को पत्नी की किस तरफ सोना चाहिए। वास्तु और ज्योतिष के अनुसार सही दिशा वास्तु और ज्योतिष में, पति-पत्नी के रिश्ते में संतुलन बनाए रखने के लिए पुरुषों को हमेशा अधिक भारी या रक्षक की भूमिका दी जाती है, जबकि महिलाओं को पोषणकर्ता या ग्रहणकर्ता की भूमिका में देखा जाता है। वास्तु शास्त्र और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, पति को हमेशा पत्नी के दाई ओर सोना चाहिए। दाईं ओर सोने का आध्यात्मिक और ऊर्जा संबंधी कारण यह नियम केवल परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे ऊर्जा और शारीरिक संतुलन से जुड़े गहरे कारण हैं। भारतीय दर्शन में, शिव को शक्ति की दाईं ओर स्थान दिया गया है। पति को दाईं ओर सोने से रिश्ते में पुरुष ऊर्जा का संतुलन और नियंत्रण बना रहता है, जो घर के मुखिया के लिए आवश्यक है। यह भी माना जाता है कि पुरुष का दाईं ओर सोना पत्नी के हृदय को पति की भुजाओं या शरीर के नज़दीक रखता है, जिससे भावनात्मक जुड़ाव और सुरक्षा की भावना मजबूत होती है। वास्तु के अनुसार, पति के दाईं ओर सोने से दोनों की ऊर्जाएँ संतुलित रहती हैं, जिससे अनावश्यक बहस, अनबन और वैचारिक मतभेद कम होते हैं। बाईं ओर सोने के परिणाम यदि पति अपनी पत्नी की बाईं ओर सोता है, तो रिश्ते में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। वास्तु के अनुसार, यह स्थिति रिश्ते में असंतुलन पैदा करती है। पुरुष ऊर्जा दबने लगती है। अनावश्यक खर्च और विवाद: कई ज्योतिषीय मतों के अनुसार, यह स्थिति आर्थिक अस्थिरता और पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों पर बड़े विवाद पैदा कर सकती है, जिससे दूरियां बढ़ने लगती हैं। यदि पत्नी हर बार दाईं ओर सोती है, तो रिश्ते में उसकी ऊर्जा का प्रभुत्व बढ़ जाता है, जिससे पति को निर्णय लेने में कठिनाई हो सकती है। रिश्ते में बराबर का सामंजस्य बनाए रखने के लिए यह संतुलन आवश्यक है। सोने की दिशा का वास्तु नियम सोने के दौरान यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पति-पत्नी का सिर किस दिशा में हो। पति-पत्नी को हमेशा दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोना चाहिए। इससे प्रेम, स्थिरता और स्वास्थ्य बना रहता है। उत्तर दिशा की ओर सिर करके सोने से बचें, क्योंकि यह स्वास्थ्य और रिश्तों में चुम्बकीय अशांति पैदा करता है।

इन जगहों पर भूलकर भी न पहनें चप्पल, नहीं तो घर में आती है नकारात्मक ऊर्जा

वास्तु शास्त्र में घर के हर कोने की अपनी ऊर्जा और पवित्रता होती है। जिस तरह हम कुछ जगहों पर जूते-चप्पल उतारकर प्रवेश करते हैं, उसी तरह वास्तु में घर के भीतर भी कुछ ऐसे स्थान बताए गए हैं जहां चप्पल या जूते पहनकर जाना अशुभ माना जाता है। इन स्थानों पर जूते-चप्पल पहनने से न सिर्फ वहां की पवित्रता भंग होती है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है, जिसका सीधा असर घर की सुख-समृद्धि पर पड़ता है। तो आइए जानते हैं कौन से स्थानों पर जूते-चप्पल पहनने नहीं चाहिए। रसोई घर रसोई घर को अन्नपूर्णा देवी का स्थान और घर का सबसे पवित्र हिस्सा माना जाता है। यहां भोजन तैयार होता है, जो ब्रह्म या ऊर्जा का स्रोत है। बाहर से लाई गई चप्पलें अशुद्ध होती हैं और उनमें गंदगी लगी होती है। रसोई में इन्हें पहनकर प्रवेश करने से अन्न का अपमान होता है और नकारात्मक ऊर्जा भोजन में प्रवेश कर सकती है। माना जाता है कि रसोई में चप्पल पहनने से घर की आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। तिजोरी या धन रखने का स्थान तिजोरी वह स्थान है जहां धन, आभूषण और महत्वपूर्ण कागजात रखे जाते हैं। यह साक्षात देवी लक्ष्मी का निवास माना जाता है। धन के स्थान पर चप्पल पहनकर जाने से धन की देवी लक्ष्मी का अपमान होता है। इस स्थान पर अशुद्धता लाने से घर में धन की बरकत रुक सकती है और आर्थिक तंगी आ सकती है। पूजा घर या मंदिर पूजा घर घर का सबसे पवित्र और शांत स्थान होता है, जहां देवी-देवताओं का वास होता है और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होता है। यह स्पष्ट रूप से धर्म और स्वच्छता से जुड़ा है। जूते-चप्पल गंदे होते हैं, और इन्हें पहनकर पूजा घर में प्रवेश करना अत्यंत अशुभ माना जाता है। ऐसा करने से पूजा का फल नहीं मिलता और घर में नकारात्मकता का संचार होता है। अन्न भंडारण या अनाज रखने का स्थान चाहे वह किचन से अलग कोई स्टोररूम हो या घर का कोई कोना जहां अनाज, चावल, दालें आदि संग्रहित किए जाते हैं, यह स्थान भी अन्नपूर्णा देवी से जुड़ा माना जाता है। अनाज को कभी भी पैरों से छूना या उसके पास जूते-चप्पल पहनकर जाना उचित नहीं माना जाता है, क्योंकि अन्न का सम्मान करना ज़रूरी है। अन्न के भंडार के पास चप्पल पहनकर जाने से घर में अन्न की कमी या अन्न की बरकत में बाधा आ सकती है।

जानें: वास्तु शास्त्र के अनुसार ये 9 गिफ्ट्स क्यों बिगाड़ते हैं किस्मत

वास्तु शास्त्र के अनुसार कुछ उपहार अशुभ माने जाते हैं। जानिए कौन सी 9 चीजें गिफ्ट में नहीं देनी चाहिए, वरना भाग्य हो सकता है नाराज़। वास्तु शास्त्र और उपहार का आपस में गहरा संबंध हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र के अनुसार हर उपहार शुभ नहीं होता। कई बार हम अनजाने में ऐसी चीजें गिफ्ट कर देते हैं जो देखने में सुंदर तो लगती हैं, लेकिन वास्तु दृष्टि से अशुभ मानी जाती हैं। ऐसी वस्तुएं आपके जीवन में नकारात्मक ऊर्जा, आर्थिक संकट और रिश्तों में दूरी ला सकती हैं। इसलिए शुभता बनाए रखने के लिए इन 9 चीजों को कभी गिफ्ट में न दें। वास्तु टिप्स अगर किसी कारणवश ये वस्तुएं गिफ्ट करनी ही हों तो प्रतीकात्मक रूप से रुपए 1 देकर उनका दोष कम किया जा सकता है।  इन 9 चीजों को कभी न करें गिफ्ट, नहीं तो रूठ जाएगा भाग्य चमड़े या हड्डी से बनी वस्तुएं वास्तु के अनुसार, जानवर की चमड़ी या हड्डी से बने सामान अशुद्ध माने जाते हैं। इन्हें गिफ्ट करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और भाग्य कमजोर होता है। देवी-देवताओं की मूर्तियां या शिवलिंग ईश्वर की मूर्तियां, शिवलिंग या पवित्र प्रतीक गिफ्ट करना शुभ नहीं होता। अगर सामने वाला व्यक्ति उनकी उचित देखभाल न करे तो उसका दोष दान करने वाले को लगता है। कांटेदार या मनी प्लांट पौधा कांटेदार पौधे विवाद का प्रतीक माने जाते हैं। वहीं मनी प्लांट गिफ्ट करना अपनी समृद्धि दूसरों को सौंपने के समान माना गया है। धारदार वस्तुएं जैसे चाकू या कैंची वास्तु के अनुसार, ऐसी चीजें रिश्तों में कटाव और मनमुटाव का कारण बनती हैं। इसलिए इन्हें गिफ्ट में देने से बचना चाहिए। काले रंग की वस्तुएं काला रंग राहु का प्रतीक है और यह नकारात्मकता को आकर्षित करता है। काले कपड़े, जूते या छाता गिफ्ट करना अशुभ होता है। गणेश-लक्ष्मी छवि वाले सिक्के या वस्तुएं ऐसे गिफ्ट से घर की लक्ष्मी और शुभ लाभ ऊर्जा दूसरे को चली जाती है। यह आर्थिक हानि का कारण बन सकता है। परफ्यूम या सुगंधित वस्तुएं मान्यता है कि परफ्यूम गिफ्ट करने से व्यक्ति के बीच दूरी और गलतफहमियां बढ़ती हैं। घड़ी घड़ी गिफ्ट करने का अर्थ है अपना शुभ समय किसी और को दे देना। वास्तु में इसे अशुभ माना गया है। जल तत्व से जुड़ी चीजें एक्वेरियम, झरना, पानी के जग या महाभारत जैसे चित्र नकारात्मक प्रभाव डालते हैं और आर्थिक रुकावटें बढ़ाते हैं।

घर में रोज कपूर जलाने से मिलते हैं ये 5 शुभ परिणाम, वास्तु शास्त्र में बताया गया है खास कारण

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान कई चीजों का इस्तेमाल जरूरी होता है। इनमें से एक है कपूर। आरती के समय कपूर जलाना शुभ माना जाता है। कपूर जलाने के कई फायदे हैं। वहीं शास्त्रों में भी इस बात का जिक्र है कि कपूर से नकारात्मक ऊर्जा जल्दी खत्म हो जाती है। मेडिकल साइंस की ओर से भी कपूर के कई फायदे बताए जाते हैं। कुल मिलाकर कपूर को रोजाना घर में जलाने से कई फायदे मिलते हैं। आज जानते हैं कुछ ऐसे फायदों के बारे में जो हमारे घर के वास्तु के हिसाब से भी काफी सही है। 1. खत्म होता है वास्तु दोष अगर आप घर में रोजाना कपूर की लौ प्रज्जवलित करना शुरू कर देंगे तो इससे घर में लगा हुआ वास्तु दोष धीरे-धीरे खत्म होने लगता है। वास्तु दोष के खत्म होते ही घर में सुख-शांति फिर से आने लगती है। साथ ही घर में सौभाग्य भी लौटकर वापस आता है। ऐसे में रोजाना कपूर जलाना बेहद ही जरूरी है। 2. घर में आती है सकारात्मक ऊर्जा पूजा-पाठ के दौरान रोजाना कपूर जलाकर आरती करने से आपका मन शांत रहेगा। साथ ही घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। इससे घर के सदस्यों की जिदंगी में ग्रोथ होती हैं साथ में और भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। 3. आर्थिक समृद्धि में वृद्धि कपूर की ऊर्जा काफी पावरफुल होती है। इसकी महक से घर के हर एक कोने में ये ऊर्जा जाती है। इसे रोजाना जलाने से आर्थिक संकट दूर होता है। ऐसे में धन-धान्य में वृद्धि होती है। 4. बुरी नजर करता है दूर बुरी नजर हटाने के लिए कपूर सबसे सही चीज है। बस इसके साथ आप लौंग भी ले लेंगे तो इसकी ऊर्जा और भी बढ़ जाती है, जोकि बुरी नजर हटाने के लिए जरूरी है। आप चाहे तो रोज कपूर जलाकर अपने घर को क्लींज कर सकते हैं ताकि किसी भी तरह की बुरी ऊर्जा और नजर दूर की जा सके। 5. खत्म होता है ग्रहों का बुरा प्रभाव जिन लोगों को किसी ग्रह का दोष है वो लोग भी कपूर जलाकर अपनी मुश्किलों को काफी हद तक कम कर सकते हैं। ग्रहों के दोष के चलते जीवन में कई काम बनते-बनते बिगड़ जाते है। ऐसे में बाकी उपायों के साथ-साथ घर में रोजाना कपूर जलाने से इस मामले में शांति मिलेगी।

वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा क्यों मानी जाती है सुख-समृद्धि की कुंजी

वास्तु शास्त्र में घर की प्रत्येक दिशा का विशेष महत्व बताया गया है लेकिन उत्तर दिशा को अत्यंत शुभ और समृद्धि देने वाली दिशा माना गया है। यह दिशा न केवल धन के देवता कुबेर जी का स्थान है, बल्कि अवसरों, सकारात्मक ऊर्जा और विकास का भी प्रतीक है। सही तरीके से इस दिशा का उपयोग करने पर घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। उत्तर दिशा में उचित वस्तुएं रखने और ऊर्जा संतुलन बनाए रखने से जीवन में आर्थिक उन्नति, स्थायित्व और सफलता के नए द्वार खुलते हैं। यही कारण है कि वास्तु में उत्तर दिशा को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। घर में उत्तर दिशा का महत्व वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा को शुभता और अवसरों की दिशा कहा गया है। यह दिशा सूर्य की किरणों और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार मानी जाती है। इस दिशा में प्रकाश, हवा और ऊर्जा का प्रवाह सबसे संतुलित होता है, जो घर के वातावरण को जीवंत और ऊर्जावान बनाता है। मान्यता है कि यदि इस दिशा को साफ-सुथरा, खुला और अवरोध रहित रखा जाए, तो घर में धन, सौभाग्य और खुशहाली स्वतः प्रवेश करती है। उत्तर दिशा का वास्तु अनुकूल होना व्यक्ति के करियर और व्यवसाय में स्थिरता लाता है और घर के सदस्यों के बीच सामंजस्य बढ़ाता है। कुबेर जी की प्रतिमा का महत्व वास्तु शास्त्र में धन के देवता कुबेर जी को उत्तर दिशा का स्वामी माना गया है। यदि घर की उत्तर दिशा में कुबेर जी की सुंदर, स्वर्ण या चांदी की प्रतिमा स्थापित की जाए, तो यह धन वृद्धि और सफलता का सूचक बनती है। मान्यता है कि इससे घर में अटका हुआ पैसा लौट आता है और नए आय स्रोत खुलते हैं। कुबेर जी की प्रतिमा को हमेशा साफ, सुगंधित और प्रकाशमान स्थान पर रखें। प्रतिमा के पास कपूर या घी का दीपक जलाने से घर में धन की आवक बढ़ती है और आर्थिक समस्याएं धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं। घर की उत्तर दिशा में श्रीयंत्र का प्रभाव श्रीयंत्र को मां लक्ष्मी का प्रतीक और धन आकर्षण का शक्तिशाली साधन माना गया है। वास्तु के अनुसार इसे घर की उत्तर दिशा में स्थापित करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है। यह घर के वातावरण को पवित्र करता है और आर्थिक स्थिरता प्रदान करता है। श्रीयंत्र को रोजाना जल, पुष्प और अगरबत्ती से पूजन करने से जीवन में तरक्की के अवसर बढ़ते हैं। ध्यान रहे कि श्रीयंत्र को हमेशा साफ और ऊर्जावान रखें। नियमित साधना से यह न केवल धन-समृद्धि लाता है बल्कि मानसिक शांति और आत्मविश्वास में भी वृद्धि करता है।

जानिए वास्तु शास्त्र में बेड के पास पानी की बोतल न रखने की वजह

वास्तु शास्त्र में कई ऐसे नियम हैं जिन्हें अपनाने से जिंदगी की मुश्किलें थोड़ी कम हो सकती हैं। रोजमर्रा की भागदौड़ भरी लाइफ में हर एक चीज को परफेक्ट तरीके से करना थोड़ा मुश्किल है लेकिन कुछ छोटी-छोटी चीजों को अमल में लाकर अपनी चीजों को ठीक किया जा सकता है। जहां कई लोग इन नियमों को जानते हैं और उसे अपनी रोजाना की जिंदगी में अपनाते भी हैं। बता दें कि ये नियम कठिन नहीं होते हैं। कुछ ऐसी चीजें हैं जो हम जाने-अनजाने में करते रहते हैं लेकिन उसका सीधा ताल्लुक घर के वास्तु से जुड़ा होता है। आम तौर पर आपने देखा होगा कि लोग सोते समय पानी की बोतल अपने साथ लेकर सोते हैं। उसे या तो बगल के ड्रॉवर पर रख दिया जाता है और या तो नीचे जमीन पर ताकि बीच रात में जरूरत पड़ने पर पानी पिया जा सकते लेकिन क्या ये सही तरीका है? जानते हैं कि आखिर ऐसा करना सही है या नहीं? लगता है चंद्र दोष शास्त्र की मानें तो ऐसा करना सही नहीं है। वैसे देखा जाए तो आम तौर पर लोगों की आदत है कि सोने से पहले बेड के पास पानी रखने की लेकिन ये सही तरीका नहीं है। शास्त्र के हिसाब से सिर के नीचे या आसपास पानी रखने से चंद्र दोष लगता है। इसके चलते मानसिक तनाव और नींद ना आने जैसी समस्या होने लगती है। साथ ही जिंदगी में धीरे-धीरे नकारात्मकता जगह बनाने लगती है। चंद्र दोष के चलते घर में कलेश होने शुरू हो जाते हैं। इस वजह से बेड के आसपास कभी भी पानी नहीं रखना चाहिए। ऐसे खत्म करें चंद्र दोष अगर आपकी कुंडली में चंद्र दोष है तो आप इसे आसान तरीके से दूर भी कर सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र के हिसाब से चंद्र दोष के प्रभाव को कम करने के लिए हर सोमवार को भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। उन्हें गाय का दूध अर्पित करने से फायदे मिलेंगे। साथ ही इस दिन सफेद रंग की चीजों का दान करने से भी लाभ मिलेंगे। इस दिन चीनी, चावल, सफेद मिठाई या फिर सफेद कपड़ों को दान करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से धीरे-धीरे चंद्रदोष खत्म होता है।  

वास्तु टिप्स: इस दिशा में लगाएं केले का पेड़, दूर होंगे कष्ट और बढ़ेगी सुख-समृद्धि

हिंदू धर्म में केले के पेड़ की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। कहते हैं गुरुवार के दिन जो भी इंसान केले के पेड़ की पूजा करता है उसके घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। ये ही नहीं ज्योतिषाचार्य भी उपाय के तौर पर केले के पेड़ की पूजा करने की सलाह देते हैं। लेकिन कई लोगों के मन में उलझन होती है कि केले का पेड़ घर में लगाना चाहिए या नहीं। वैसे तो केले का पेड़ घर लगाने को मना किया जाता है लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर हम कुछ नियमों का पालन करें, तो इससे शुभ फल भी मिलते हैं। तो आइए जानते हैं कि केले का पेड़ घर में लगाते समय किन नियमों का पालन करना चाहिए और इसके फायदे के बारे में- वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तर दिशा में देवी-देवताओं का वास माना गया है। इसलिए अगर आप केले के पेड़ को घर में लगाने की योजना बना रहे हैं तो इसके लिए उत्तर दिशा सबसे उत्तम मानी जाती है। इसके अलावा, वास्तु शास्त्र में पश्चिम दिशा में भी केले का पेड़ लगाना सही नहीं माना गया है। इससे आपको धन हानि होने की संभावना बढ़ जाती है। केले के पेड़ को कभी भी पूर्व या दक्षिण दिशा के आग्नेय कोण में भी नहीं लगाना चाहिए। साथ ही घर के मुख्य द्वार के सामने नहीं लगाना चाहिए क्योंकि इससे घर में आने वाली सकारात्मक ऊर्जा अवरुद्ध हो सकती है। वास्तु के अनुसार केले के पेड़ के आसपास कोई कांटेदार पौधे जैसे गुलाब आदि नहीं लगाना चाहिए। इससे घर में लड़ाई-झगड़े की स्थिति उत्पन्न होती है। केले के पेड़ को कभी सूखने न दें। इसके अलावा, केले के पेड़ में कभी भी गंदा पानी नहीं डालना चाहिए। केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना गया है और तुलसी को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। इसलिए केले के पेड़ के पास तुलसी का पौधा ज़रूर रखना चाहिए। इससे नारायण और माता लक्ष्मी दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही हर गुरुवार को केले के पेड़ पर हल्दी लगाकर पूजा करें और दीपक जलाएं। केले के पेड़ के तने के चारों ओर हमेशा लाल या पीले रंग का धागा बांधना चाहिए। अगर आप घर में केले का पेड़ लगाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखते हैं यानि कि ज्योतिषीय नियमानुसार लगाते हैं, तो आपके परिवार में सुख, समृद्धि, आरोग्य के साथ खुशियां आती हैं। वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। जिन लोगों के विवाह में बाधा आ रही है, उनकी बाधा दूर होती है। कुंडली में बृहस्पति की स्थिति मजबूत होती है और धन संकट दूर होता है।

वास्तु के अनुसार इस दिशा में लगाएं पारिजात, जीवन में आएगी तरक्की और सकारात्मक ऊर्जा

 हिंदू धर्म में पारिजात के पौधे का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है. सफेद-नारंगी रंग के पारिजात के इन फूलों को हरसिंगार या रात की रानी के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, पारिजात के फूल माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय हैं. यही कारण है कि इसे घर में लगाने से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है. वास्तु शास्त्र में भी इस पौधे का खास महत्व है. यह पौधा नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और घर में सुख, समृद्धि और शांति लाता है, लेकिन इसे लगाते समय सही दिशा और शुभ दिन का ध्यान रखना जरूरी होता है, नहीं तो इसके विपरीत परिणाम भी मिल सकते हैं. कब लगाएं पारिजात का पौधा पारिजात के पौधे को घर में लगाने के लिए सोमवार या शुक्रवार और गुरुवार का दिन शुभ माना गया है. सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है, वहीं शुक्रवार का दिन धन की देवी माता लक्ष्मी का माना गया है, गुरुवार  का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है. इन दिनों में पौधा लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य बना रहता है. किस दिशा में लगाएं पारिजात का पौधा वास्तु शास्त्र के अनुसार, पारिजात के पौधे को घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में लगाना सबसे शुभ माना गया है. यह दिशा देवताओं की दिशा कही जाती है और यहां पौधा लगाने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है. आप उत्तर दिशा भी इस पौधे को लगा सकते हैं. माना जाता है कि इस दिशा में पारिजात लगाने से घर से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मकता बढ़ती है. ध्यान रहे कि पौधे को कभी भी घर के दक्षिण-पश्चिम कोने में न लगाएं, क्योंकि वास्तु के अनुसार  यह दिशा स्थिरता की होती है और यहां पौधा लगाने से उन्नति रुक सकती है. पारिजात के फायदे   1. धन और समृद्धि की प्राप्ति: पारिजात का पौधा घर में धन और समृद्धि लाने वाला माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब पारिजात का पौधा घर में लगाया जाता है, तो माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है. इसके आसपास की ऊर्जा सकारात्मक रहती है, जिससे घर के सदस्यों के व्यवसाय और आर्थिक मामलों में लाभ होता है.  2. वास्तु दोष से मुक्ति: पारिजात का पौधा सिर्फ सुंदर नहीं है, बल्कि वास्तु दोष दूर करने वाला भी माना जाता है. घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा और अशुभ प्रभावों को यह पौधा कम करता है. इसके लगाने से घर का वातावरण स्वच्छ, शांत और सकारात्मक बनता है.  3. संतान और पारिवारिक सुख: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पारिजात का पौधा परिवार में प्रेम और सौहार्द बनाए रखने में मदद करता है. इसे लगाने से परिवार के सदस्यों के बीच मेलजोल और सामंजस्य बढ़ता है. साथ ही, इसे घर में लगाने से संतान सुख की प्राप्ति होती है.  4. पूजा में महत्व: पारिजात के फूल केवल सुंदर नहीं, बल्कि पूजा में अत्यंत शुभ माने जाते हैं. इन फूलों से देवी-देवताओं की आराधना करने पर विशेष कृपा प्राप्त होती है.  पारिजात के फूल भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को प्रिय हैं. इसलिए यह पूजा और हवन में विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाता है, जिससे घर में आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्यता बनी रहती है. 

दीपक कहाँ जलाएँ? वास्तु के हिसाब से सही जगह जानें और पाएँ सकारात्मक ऊर्जा

दीपक (दीया) को घर में जलाना न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार यह सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और सुख-शांति लाने का एक सशक्त उपाय है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में दीपक जलाना सिर्फ धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि घर में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा लाने का एक शक्तिशाली उपाय है। सही दिशा, सही समय और सही प्रकार का दीपक जलाकर आप अपने घर और परिवार को नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षित रख सकते हैं। दीपक और सकारात्मक ऊर्जा वास्तु शास्त्र में माना जाता है कि दीपक घर में सकारात्मक ऊर्जा (प्राण ऊर्जा) का संचार करता है। घर के मुख्य प्रवेश द्वार या पूजा स्थान में दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा, रोग और तनाव दूर होते हैं। दीपक की लौ सकारात्मक कंपन पैदा करती है, जिससे परिवार में खुशहाली और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। घर में दीपक जलाने का सही स्थान उत्तर और पूर्व दिशा: वास्तु अनुसार, घर के उत्तर या पूर्व दिशा में दीपक जलाना शुभ होता है। यह धन, सफलता और उन्नति को आकर्षित करता है। पूजा स्थान: मंदिर या पूजा स्थल में दीपक जलाना सर्वोत्तम माना गया है। मुख्य द्वार के पास: घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर दीपक रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं। दीपक के प्रकार और उनका महत्व तिल का दीपक: समृद्धि और आर्थिक स्थिरता लाता है। घी का दीपक: स्वास्थ्य, मानसिक शांति और परिवार में सौहार्द बढ़ाता है। मिट्टी का दीपक: साधारण घरों में शुभता और सकारात्मक वातावरण के लिए उत्तम। दीपक जलाने का समय सुबह और संध्या: घर के उत्तर या पूर्व दिशा में दीपक सुबह और संध्या के समय जलाना शुभ होता है। त्योहार और व्रत: देव दिवाली, कार्तिक पूर्णिमा या किसी भी धार्मिक अवसर पर दीपक जलाना अत्यंत फलदायी माना गया है। वास्तु और आध्यात्मिक लाभ घर में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य बढ़ता है। परिवार में सकारात्मक संबंध और मन की शांति बनी रहती है। नकारात्मक ऊर्जा और अशुभ प्रभावों से सुरक्षा मिलती है।

वास्तु शास्त्र की चेतावनी: शाम को इन वस्तुओं का उधार देना बढ़ा सकता है आर्थिक और पारिवारिक संकट

वास्तु शास्त्र में ऐसे कई नियम बताए गए हैं, जिनका ध्यान रखने पर व्यक्ति को जीवन में अच्छे परिणाम मिलने लगते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आपको वास्तु के अनुसार,  किन चीजों को शाम के समय किसी को भी उधार के रूप में नहीं देना चाहिए, चाहे वह आपका कितना ही करीबी क्यों न हो।  चलिए जानते हैं इस बारे में। इन चीजों का न करें दान वास्तु शास्त्र में शाम के नियमों के अनुसार, सूर्योदय के बाद आपको किसी सफेद वस्तु जैसे नमक, दही, चीनी आदि किसी को भी उधार के रूप में नहीं देना चाहिए। शाम के समय दही का दान करने से कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति कमजोर हो सकती है। जिससे घर में सुख और वैभव की कमी हो सकती है। वहीं अगर शाम के समय किसी को नमक दिया जाए, तो इससे भी आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा असर शाम के समय आपको किसी को हल्दी भी दान के रूप में नहीं देनी चाहिए। इससे कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति पर प्रभाव पड़ सकता है और आपकी सुख-समृद्धि पर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं हिंदू धर्म में तुलसी को बहुत ही पूजनीय माना गया है। ऐसे में अगर आप शाम के समय किसी को तुलसी के पौधे का दान करते हैं, तो इससे भी आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। मां लक्ष्मी हो सकती है नाराज वास्तु शास्त्र में शाम के समय किसी को पैसे उधार देना शुभ नहीं माना गया और न ही इस समय में पैसों से जुड़ा लेन-देन करना शुभ माना जाता है। इसके पीछे यह मान्यता है कि सूर्यास्त के बाद घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है। ऐसे में अगर आप इस समय पैसों से जुड़ा लेन-देन या दान करते हैं, तो लक्ष्मी जी घर से जा सकती हैं। जिससे आपको आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। बढ़ सकती हैं परेशानियां कभी-कभी जरूरत पड़ने पर हम शाम के समय किसी से सुई आदि मांग लेते हैं या फिर किसी और को जरूरत पड़ने पर हम भी शाम के समय सुई आदि दे देते हैं। लेकिन वास्त शास्त्र की मानें, तो ऐसा करने से आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।