samacharsecretary.com

वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा क्यों मानी जाती है सुख-समृद्धि की कुंजी

वास्तु शास्त्र में घर की प्रत्येक दिशा का विशेष महत्व बताया गया है लेकिन उत्तर दिशा को अत्यंत शुभ और समृद्धि देने वाली दिशा माना गया है। यह दिशा न केवल धन के देवता कुबेर जी का स्थान है, बल्कि अवसरों, सकारात्मक ऊर्जा और विकास का भी प्रतीक है। सही तरीके से इस दिशा का उपयोग करने पर घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। उत्तर दिशा में उचित वस्तुएं रखने और ऊर्जा संतुलन बनाए रखने से जीवन में आर्थिक उन्नति, स्थायित्व और सफलता के नए द्वार खुलते हैं। यही कारण है कि वास्तु में उत्तर दिशा को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। घर में उत्तर दिशा का महत्व वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा को शुभता और अवसरों की दिशा कहा गया है। यह दिशा सूर्य की किरणों और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार मानी जाती है। इस दिशा में प्रकाश, हवा और ऊर्जा का प्रवाह सबसे संतुलित होता है, जो घर के वातावरण को जीवंत और ऊर्जावान बनाता है। मान्यता है कि यदि इस दिशा को साफ-सुथरा, खुला और अवरोध रहित रखा जाए, तो घर में धन, सौभाग्य और खुशहाली स्वतः प्रवेश करती है। उत्तर दिशा का वास्तु अनुकूल होना व्यक्ति के करियर और व्यवसाय में स्थिरता लाता है और घर के सदस्यों के बीच सामंजस्य बढ़ाता है। कुबेर जी की प्रतिमा का महत्व वास्तु शास्त्र में धन के देवता कुबेर जी को उत्तर दिशा का स्वामी माना गया है। यदि घर की उत्तर दिशा में कुबेर जी की सुंदर, स्वर्ण या चांदी की प्रतिमा स्थापित की जाए, तो यह धन वृद्धि और सफलता का सूचक बनती है। मान्यता है कि इससे घर में अटका हुआ पैसा लौट आता है और नए आय स्रोत खुलते हैं। कुबेर जी की प्रतिमा को हमेशा साफ, सुगंधित और प्रकाशमान स्थान पर रखें। प्रतिमा के पास कपूर या घी का दीपक जलाने से घर में धन की आवक बढ़ती है और आर्थिक समस्याएं धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं। घर की उत्तर दिशा में श्रीयंत्र का प्रभाव श्रीयंत्र को मां लक्ष्मी का प्रतीक और धन आकर्षण का शक्तिशाली साधन माना गया है। वास्तु के अनुसार इसे घर की उत्तर दिशा में स्थापित करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है। यह घर के वातावरण को पवित्र करता है और आर्थिक स्थिरता प्रदान करता है। श्रीयंत्र को रोजाना जल, पुष्प और अगरबत्ती से पूजन करने से जीवन में तरक्की के अवसर बढ़ते हैं। ध्यान रहे कि श्रीयंत्र को हमेशा साफ और ऊर्जावान रखें। नियमित साधना से यह न केवल धन-समृद्धि लाता है बल्कि मानसिक शांति और आत्मविश्वास में भी वृद्धि करता है।

जानिए वास्तु शास्त्र में बेड के पास पानी की बोतल न रखने की वजह

वास्तु शास्त्र में कई ऐसे नियम हैं जिन्हें अपनाने से जिंदगी की मुश्किलें थोड़ी कम हो सकती हैं। रोजमर्रा की भागदौड़ भरी लाइफ में हर एक चीज को परफेक्ट तरीके से करना थोड़ा मुश्किल है लेकिन कुछ छोटी-छोटी चीजों को अमल में लाकर अपनी चीजों को ठीक किया जा सकता है। जहां कई लोग इन नियमों को जानते हैं और उसे अपनी रोजाना की जिंदगी में अपनाते भी हैं। बता दें कि ये नियम कठिन नहीं होते हैं। कुछ ऐसी चीजें हैं जो हम जाने-अनजाने में करते रहते हैं लेकिन उसका सीधा ताल्लुक घर के वास्तु से जुड़ा होता है। आम तौर पर आपने देखा होगा कि लोग सोते समय पानी की बोतल अपने साथ लेकर सोते हैं। उसे या तो बगल के ड्रॉवर पर रख दिया जाता है और या तो नीचे जमीन पर ताकि बीच रात में जरूरत पड़ने पर पानी पिया जा सकते लेकिन क्या ये सही तरीका है? जानते हैं कि आखिर ऐसा करना सही है या नहीं? लगता है चंद्र दोष शास्त्र की मानें तो ऐसा करना सही नहीं है। वैसे देखा जाए तो आम तौर पर लोगों की आदत है कि सोने से पहले बेड के पास पानी रखने की लेकिन ये सही तरीका नहीं है। शास्त्र के हिसाब से सिर के नीचे या आसपास पानी रखने से चंद्र दोष लगता है। इसके चलते मानसिक तनाव और नींद ना आने जैसी समस्या होने लगती है। साथ ही जिंदगी में धीरे-धीरे नकारात्मकता जगह बनाने लगती है। चंद्र दोष के चलते घर में कलेश होने शुरू हो जाते हैं। इस वजह से बेड के आसपास कभी भी पानी नहीं रखना चाहिए। ऐसे खत्म करें चंद्र दोष अगर आपकी कुंडली में चंद्र दोष है तो आप इसे आसान तरीके से दूर भी कर सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र के हिसाब से चंद्र दोष के प्रभाव को कम करने के लिए हर सोमवार को भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। उन्हें गाय का दूध अर्पित करने से फायदे मिलेंगे। साथ ही इस दिन सफेद रंग की चीजों का दान करने से भी लाभ मिलेंगे। इस दिन चीनी, चावल, सफेद मिठाई या फिर सफेद कपड़ों को दान करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से धीरे-धीरे चंद्रदोष खत्म होता है।  

वास्तु टिप्स: इस दिशा में लगाएं केले का पेड़, दूर होंगे कष्ट और बढ़ेगी सुख-समृद्धि

हिंदू धर्म में केले के पेड़ की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। कहते हैं गुरुवार के दिन जो भी इंसान केले के पेड़ की पूजा करता है उसके घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। ये ही नहीं ज्योतिषाचार्य भी उपाय के तौर पर केले के पेड़ की पूजा करने की सलाह देते हैं। लेकिन कई लोगों के मन में उलझन होती है कि केले का पेड़ घर में लगाना चाहिए या नहीं। वैसे तो केले का पेड़ घर लगाने को मना किया जाता है लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर हम कुछ नियमों का पालन करें, तो इससे शुभ फल भी मिलते हैं। तो आइए जानते हैं कि केले का पेड़ घर में लगाते समय किन नियमों का पालन करना चाहिए और इसके फायदे के बारे में- वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तर दिशा में देवी-देवताओं का वास माना गया है। इसलिए अगर आप केले के पेड़ को घर में लगाने की योजना बना रहे हैं तो इसके लिए उत्तर दिशा सबसे उत्तम मानी जाती है। इसके अलावा, वास्तु शास्त्र में पश्चिम दिशा में भी केले का पेड़ लगाना सही नहीं माना गया है। इससे आपको धन हानि होने की संभावना बढ़ जाती है। केले के पेड़ को कभी भी पूर्व या दक्षिण दिशा के आग्नेय कोण में भी नहीं लगाना चाहिए। साथ ही घर के मुख्य द्वार के सामने नहीं लगाना चाहिए क्योंकि इससे घर में आने वाली सकारात्मक ऊर्जा अवरुद्ध हो सकती है। वास्तु के अनुसार केले के पेड़ के आसपास कोई कांटेदार पौधे जैसे गुलाब आदि नहीं लगाना चाहिए। इससे घर में लड़ाई-झगड़े की स्थिति उत्पन्न होती है। केले के पेड़ को कभी सूखने न दें। इसके अलावा, केले के पेड़ में कभी भी गंदा पानी नहीं डालना चाहिए। केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना गया है और तुलसी को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। इसलिए केले के पेड़ के पास तुलसी का पौधा ज़रूर रखना चाहिए। इससे नारायण और माता लक्ष्मी दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही हर गुरुवार को केले के पेड़ पर हल्दी लगाकर पूजा करें और दीपक जलाएं। केले के पेड़ के तने के चारों ओर हमेशा लाल या पीले रंग का धागा बांधना चाहिए। अगर आप घर में केले का पेड़ लगाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखते हैं यानि कि ज्योतिषीय नियमानुसार लगाते हैं, तो आपके परिवार में सुख, समृद्धि, आरोग्य के साथ खुशियां आती हैं। वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। जिन लोगों के विवाह में बाधा आ रही है, उनकी बाधा दूर होती है। कुंडली में बृहस्पति की स्थिति मजबूत होती है और धन संकट दूर होता है।

वास्तु के अनुसार इस दिशा में लगाएं पारिजात, जीवन में आएगी तरक्की और सकारात्मक ऊर्जा

 हिंदू धर्म में पारिजात के पौधे का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है. सफेद-नारंगी रंग के पारिजात के इन फूलों को हरसिंगार या रात की रानी के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, पारिजात के फूल माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय हैं. यही कारण है कि इसे घर में लगाने से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है. वास्तु शास्त्र में भी इस पौधे का खास महत्व है. यह पौधा नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और घर में सुख, समृद्धि और शांति लाता है, लेकिन इसे लगाते समय सही दिशा और शुभ दिन का ध्यान रखना जरूरी होता है, नहीं तो इसके विपरीत परिणाम भी मिल सकते हैं. कब लगाएं पारिजात का पौधा पारिजात के पौधे को घर में लगाने के लिए सोमवार या शुक्रवार और गुरुवार का दिन शुभ माना गया है. सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है, वहीं शुक्रवार का दिन धन की देवी माता लक्ष्मी का माना गया है, गुरुवार  का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है. इन दिनों में पौधा लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य बना रहता है. किस दिशा में लगाएं पारिजात का पौधा वास्तु शास्त्र के अनुसार, पारिजात के पौधे को घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में लगाना सबसे शुभ माना गया है. यह दिशा देवताओं की दिशा कही जाती है और यहां पौधा लगाने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है. आप उत्तर दिशा भी इस पौधे को लगा सकते हैं. माना जाता है कि इस दिशा में पारिजात लगाने से घर से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मकता बढ़ती है. ध्यान रहे कि पौधे को कभी भी घर के दक्षिण-पश्चिम कोने में न लगाएं, क्योंकि वास्तु के अनुसार  यह दिशा स्थिरता की होती है और यहां पौधा लगाने से उन्नति रुक सकती है. पारिजात के फायदे   1. धन और समृद्धि की प्राप्ति: पारिजात का पौधा घर में धन और समृद्धि लाने वाला माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब पारिजात का पौधा घर में लगाया जाता है, तो माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है. इसके आसपास की ऊर्जा सकारात्मक रहती है, जिससे घर के सदस्यों के व्यवसाय और आर्थिक मामलों में लाभ होता है.  2. वास्तु दोष से मुक्ति: पारिजात का पौधा सिर्फ सुंदर नहीं है, बल्कि वास्तु दोष दूर करने वाला भी माना जाता है. घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा और अशुभ प्रभावों को यह पौधा कम करता है. इसके लगाने से घर का वातावरण स्वच्छ, शांत और सकारात्मक बनता है.  3. संतान और पारिवारिक सुख: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पारिजात का पौधा परिवार में प्रेम और सौहार्द बनाए रखने में मदद करता है. इसे लगाने से परिवार के सदस्यों के बीच मेलजोल और सामंजस्य बढ़ता है. साथ ही, इसे घर में लगाने से संतान सुख की प्राप्ति होती है.  4. पूजा में महत्व: पारिजात के फूल केवल सुंदर नहीं, बल्कि पूजा में अत्यंत शुभ माने जाते हैं. इन फूलों से देवी-देवताओं की आराधना करने पर विशेष कृपा प्राप्त होती है.  पारिजात के फूल भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को प्रिय हैं. इसलिए यह पूजा और हवन में विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाता है, जिससे घर में आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्यता बनी रहती है. 

दीपक कहाँ जलाएँ? वास्तु के हिसाब से सही जगह जानें और पाएँ सकारात्मक ऊर्जा

दीपक (दीया) को घर में जलाना न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार यह सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और सुख-शांति लाने का एक सशक्त उपाय है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में दीपक जलाना सिर्फ धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि घर में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा लाने का एक शक्तिशाली उपाय है। सही दिशा, सही समय और सही प्रकार का दीपक जलाकर आप अपने घर और परिवार को नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षित रख सकते हैं। दीपक और सकारात्मक ऊर्जा वास्तु शास्त्र में माना जाता है कि दीपक घर में सकारात्मक ऊर्जा (प्राण ऊर्जा) का संचार करता है। घर के मुख्य प्रवेश द्वार या पूजा स्थान में दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा, रोग और तनाव दूर होते हैं। दीपक की लौ सकारात्मक कंपन पैदा करती है, जिससे परिवार में खुशहाली और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। घर में दीपक जलाने का सही स्थान उत्तर और पूर्व दिशा: वास्तु अनुसार, घर के उत्तर या पूर्व दिशा में दीपक जलाना शुभ होता है। यह धन, सफलता और उन्नति को आकर्षित करता है। पूजा स्थान: मंदिर या पूजा स्थल में दीपक जलाना सर्वोत्तम माना गया है। मुख्य द्वार के पास: घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर दीपक रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं। दीपक के प्रकार और उनका महत्व तिल का दीपक: समृद्धि और आर्थिक स्थिरता लाता है। घी का दीपक: स्वास्थ्य, मानसिक शांति और परिवार में सौहार्द बढ़ाता है। मिट्टी का दीपक: साधारण घरों में शुभता और सकारात्मक वातावरण के लिए उत्तम। दीपक जलाने का समय सुबह और संध्या: घर के उत्तर या पूर्व दिशा में दीपक सुबह और संध्या के समय जलाना शुभ होता है। त्योहार और व्रत: देव दिवाली, कार्तिक पूर्णिमा या किसी भी धार्मिक अवसर पर दीपक जलाना अत्यंत फलदायी माना गया है। वास्तु और आध्यात्मिक लाभ घर में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य बढ़ता है। परिवार में सकारात्मक संबंध और मन की शांति बनी रहती है। नकारात्मक ऊर्जा और अशुभ प्रभावों से सुरक्षा मिलती है।

वास्तु शास्त्र की चेतावनी: शाम को इन वस्तुओं का उधार देना बढ़ा सकता है आर्थिक और पारिवारिक संकट

वास्तु शास्त्र में ऐसे कई नियम बताए गए हैं, जिनका ध्यान रखने पर व्यक्ति को जीवन में अच्छे परिणाम मिलने लगते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आपको वास्तु के अनुसार,  किन चीजों को शाम के समय किसी को भी उधार के रूप में नहीं देना चाहिए, चाहे वह आपका कितना ही करीबी क्यों न हो।  चलिए जानते हैं इस बारे में। इन चीजों का न करें दान वास्तु शास्त्र में शाम के नियमों के अनुसार, सूर्योदय के बाद आपको किसी सफेद वस्तु जैसे नमक, दही, चीनी आदि किसी को भी उधार के रूप में नहीं देना चाहिए। शाम के समय दही का दान करने से कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति कमजोर हो सकती है। जिससे घर में सुख और वैभव की कमी हो सकती है। वहीं अगर शाम के समय किसी को नमक दिया जाए, तो इससे भी आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा असर शाम के समय आपको किसी को हल्दी भी दान के रूप में नहीं देनी चाहिए। इससे कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति पर प्रभाव पड़ सकता है और आपकी सुख-समृद्धि पर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं हिंदू धर्म में तुलसी को बहुत ही पूजनीय माना गया है। ऐसे में अगर आप शाम के समय किसी को तुलसी के पौधे का दान करते हैं, तो इससे भी आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। मां लक्ष्मी हो सकती है नाराज वास्तु शास्त्र में शाम के समय किसी को पैसे उधार देना शुभ नहीं माना गया और न ही इस समय में पैसों से जुड़ा लेन-देन करना शुभ माना जाता है। इसके पीछे यह मान्यता है कि सूर्यास्त के बाद घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है। ऐसे में अगर आप इस समय पैसों से जुड़ा लेन-देन या दान करते हैं, तो लक्ष्मी जी घर से जा सकती हैं। जिससे आपको आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। बढ़ सकती हैं परेशानियां कभी-कभी जरूरत पड़ने पर हम शाम के समय किसी से सुई आदि मांग लेते हैं या फिर किसी और को जरूरत पड़ने पर हम भी शाम के समय सुई आदि दे देते हैं। लेकिन वास्त शास्त्र की मानें, तो ऐसा करने से आपको कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।  

सावधान! घर में रखी ये मूर्तियां कर सकती हैं आपकी खुशियों को खराब

घर में छोटे-छोटे वास्तु नियमों का ध्यान रखने से आपको जीवन में कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। साथ ही आपको वास्तु दोष का भी सामना नहीं करना पड़ता। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार, आपको अपने घर में किन मूर्तियों को रखने से बचना चाहिए, वरना आपकी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। मंदिर में न रखें ऐसी मूर्ति घर में कभी भी नटराज, शनिदेव, राहु-केतु और उग्र रूप वाले देवी-देवताओं जैसे मां काली, काल भैरव देव की मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। ऐसा करने से घर में नकारात्मकता और अशांति फैल सकती है। इसके स्थान पर भगवान की शांत और सौम्य रूप वाली मूर्तियां ही मंदिर में रखनी चाहिए। इसके साथ ही आपके मंदिर में एक से अधिक शिवलिंग भी नहीं होने चाहिए, वरना आपको शुभ परिणाम नहीं मिलते। वास्तु शास्त्र में माना गया है कि आपको अपने घर के मंदिर ऐसी मूर्तियां बिल्कुल भी नहीं रखनी चाहिए, जो खंडित हो, क्योंकि इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ने लगता है, जिससे घ में लड़ाई-झगड़े की स्थिति बनने लगती है। ऐसे में आप इन मूर्तियों को क्षमायाचना करते हुए किसी बहते हुए जल में प्रवाहित कर सकते हैं, इससे आपको दोष नहीं लगता। या फिर इन मूर्तियों को किसी पीपल के पेड़ के नीचे भी रख सकते हैं। ऐसी मूर्तियां रखना भी है अशुभ वास्तु शास्त्र में माना गया है कि घर के मंदिर में ऐसी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए, जो युद्ध या हिंसा को दर्शाती हैं। इन मूर्तियों से घर में नकारात्मक ऊर्जा फैल सकती है, जिससे जीवन में कई तरह की परेशानियां आ सकती हैं। ऐसे में अगर आप अपने घर में मूर्ति से संबंधित इन नियमों का ध्यान रखते हैं, तो इससे जीवन में सुख-शांति का वास बना रहता है।  

वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन में ये चीजें गलत तरीके से रखने से बढ़ती है कलह

वास्तु शास्त्र में घर के हर एक हिस्से का बहुत महत्व है। उसी तरह ही किचन केवल खाना बनाने की जगह नहीं, बल्कि घर में ऊर्जा और सुख-शांति का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, किचन में रखे सामान की सही दिशा और स्थिति सीधे तौर पर घर के माहौल और परिवार के रिश्तों पर असर डालती है। अगर कुछ चीज़ें उल्टी या गलत दिशा में रख दी जाएं, तो यह न केवल घर में नकारात्मक ऊर्जा ला सकती हैं बल्कि घरेलू झगड़े और तनाव को भी बढ़ा सकती है। तो आइए जानते हैं कि वो कौन सी वस्तुएं हैं, जिन्हें उल्टा करके नहीं रखना चाहिए। गैस और चूल्हा वास्तु के अनुसार, गैस या चूल्हा कभी भी उत्तर या पश्चिम दिशा की ओर नहीं रखना चाहिए। चूल्हे की दिशा और स्थिति परिवार की ऊर्जा पर गहरा असर डालती है। इसे हमेशा दक्षिण-पूर्व दिशा में ही रखें। बर्तन और कटोरे वास्तु के अनुसार, किचन के बर्तन, खासकर तांबे और स्टील के बर्तन, उल्टे या किसी अनियमित जगह पर रखने से घरेलू ऊर्जा प्रभावित हो सकती है। बर्तन हमेशा साफ और व्यवस्थित रखें। किचन शेल्फ और अलमारी किचन की अलमारी या शेल्फ में अगर खाना उल्टा या अव्यवस्थित रखा हो तो यह परिवार में विवाद और असंतोष को बढ़ा सकता है। प्रत्येक सामान को उसकी जगह पर व्यवस्थित रखें। पानी और मीठे पदार्थ पानी की बोतलें या शक्कर जैसी चीजें कभी भी दक्षिण-पश्चिम दिशा में उल्टा न रखें। इससे धन और सुख-शांति पर असर पड़ सकता है।

वास्तु के अनुसार घर में कौन-सा स्थान कैसा होना चाहिए

कहा जाता है कि वास्तु नियमों का ध्यान रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और व्यक्ति को नेगेटिव एनर्जी से छुटकारा मिलता है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि वास्तु के मुताबिक घर की किस दिशा में कौन-सी चीजें रखनी चाहिए।  उत्तर दिशा में रखें ये चीजें वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा में पानी से संबंधित चीजें रखना शुभ माना जाता है। ऐसे में आप इस दिशा में पानी के स्त्रोत जैसे बोरिंग, छोटा-सा फाउंटेन या फिर पानी की टंकी रख सकते हैं। उत्तर दिशा में मंदिर रखना भी शुभ होता है। इसी के साथ इस दिशा में धन या तिजोरी आदि रखने से भी आपको लाभ मिल सकता है। पूर्व दिशा के नियम वास्तु के मुताबिक इस दिशा को जितना हो सके हमेशा खाली रखना चाहिए। ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। इसके साथ ही वास्तु के अनुसार इस दिशा में खिड़की होना बेहतर होता है। वहीं घर का दरवाजा भी पूर्व दिशा में होना भी वास्तु की दृष्टि से ठीक माना गया है। इन चीजों को रखने से मिलेगा लाभ वास्तु शास्त्र के अनुसार, पश्चिम दिशा में किचन का निर्माण करवाना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही इस दिशा में आप अपने घर का टॉयलेट भी बनवा सकते हैं, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि किचन और टॉयलेट पास-पास नहीं होना चाहिए। दक्षिण दिशा के वास्तु नियम दक्षिण दिशा में भारी सामान जैसे तिजोरी, मशीनें, आदि रखी जा सकती हैं। इसके साथ ही वास्तु शास्त्र में यह माना गया है कि यह दिशा जितनी ढकी हुई होती है उतना अच्छा होता है। इस दिशा में दीवार होना भी बेहतर माना जाता है। रखें इन दिशाओं का भी रखें ध्यान इसके साथ ही वास्तु शास्त्र में आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व दिशा), वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम दिशा), ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) और नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) के नियम भी बताए गए हैं। ईशान कोण में पूजा घर, वाटर टैंक या बोरिंग रखना शुभ होता है। वहीं आग्नेय कोण में इलेक्ट्रॉनिक सामान रखा जा सकता है। वास्तु के अनुसार, वायव्य कोण में बेडरूम या गैरेज होना शुभ माना जाता है। वहीं अगर नैऋत्य कोण की बात करें, तो इस दिशा में कैश काउंटर, या मशीनें रखी जा सकती हैं।