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कल बन रहा है नवपंचम राजयोग: शुक्र और गुरु मिलकर बदलेंगे इन राशियों की तकदीर

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों की चाल का सीधा असर व्यक्ति के जीवन, करियर, धन और भाग्य पर पड़ता है. 6 फरवरी 2026 को आकाश में एक बेहद शुभ और शक्तिशाली योग बनने जा रहा है. इस दिन धन और वैभव के कारक ग्रह शुक्र और देवगुरु बृहस्पति के बीच नवपंचम राजयोग का निर्माण होगा. ज्योतिष में इस योग को बेहद फलदायी और शुभ परिणाम देने वाला माना जाता है. इस योग के प्रभाव से कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. यह राजयोग इतना शक्तिशाली माना जाता है कि इसे कई राशियों के लिए बंद किस्मत के ताले खोलने वाला और गोल्डन टाइम की शुरुआत माना जा रहा है. क्या होता है नवपंचम राजयोग? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब दो शुभ ग्रह एक-दूसरे से पंचम (5वें) और नवम (9वें) भाव में स्थित होते हैं, तब नवपंचम राजयोग बनता है. पंचम भाव बुद्धि, संतान और शिक्षा का प्रतीक माना जाता है, जबकि नवम भाव भाग्य, धर्म और सौभाग्य का प्रतिनिधित्व करता है. ऐसे में यह योग व्यक्ति के जीवन में उन्नति, धन लाभ और भाग्य वृद्धि के संकेत देता है. कैसे बनेगा यह राजयोग? ज्योतिष गणना के मुताबिक 6 फरवरी 2026 को शुक्र ग्रह मकर राशि से निकलकर शनि की राशि कुंभ में प्रवेश करेंगे. वहीं देवगुरु बृहस्पति पहले से ही मिथुन राशि में स्थित हैं. कुंभ राशि में स्थित शुक्र और मिथुन राशि में स्थित गुरु के बीच त्रिकोण संबंध (120 डिग्री) बनेगा, जिससे नवपंचम राजयोग का निर्माण होगा. यह योग कई लोगों के लिए सफलता और तरक्की के नए रास्ते खोल सकता है. इन 5 राशियों की लगेगी लॉटरी!     मेष: अचानक धन लाभ हो सकता है. कोई बड़ी बिजनेस डील फाइनल होने और निवेश से मोटा मुनाफा मिलने के योग हैं.     मिथुन: बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होगी. खासकर छात्रों के लिए यह समय वरदान जैसा है, परीक्षा में अच्छे परिणाम मिलेंगे.     सिंह: : समाज में आपका दबदबा बढ़ेगा. नौकरी में पद-प्रतिष्ठा और मान-सम्मान की प्राप्ति होगी. अटके हुए काम गति पकड़ेंगे.     तुला: पुराने दोस्तों या संपर्कों से लाभ मिलेगा. बैंक बैलेंस बढ़ेगा और आर्थिक परेशानियां दूर होंगी.     कुंभ: चूंकि शुक्र आपकी ही राशि में आ रहे हैं, इसलिए करियर में नई और बड़ी जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. आय के नए स्रोत बनेंगे. शुभ फल पाने के लिए क्या करें? ज्योतिषियों के अनुसार, शुक्रवार के दिन सफेद वस्तुओं का दान करें और गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करें. यह समय नई शुरुआत और बड़े निवेश के लिए सबसे शुभ माना जाता है.

शुक्र का धनु में गोचर बना रहा है 100 साल बाद का दुर्लभ समसप्तक योग, इन 4 राशियों की खुलेंगी किस्मत

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के विशेष संयोग और गोचर को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी कड़ी में एक बार फिर दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है. करीब 100 वर्षों बाद समसप्तक योग का निर्माण हुआ है, जो कई राशियों के जीवन में बड़े बदलाव ला सकता है. सुख, ऐश्वर्य, प्रेम, सौंदर्य और विलासिता के कारक शुक्र ग्रह 20 दिसंबर की सुबह 7 बजकर 45 मिनट पर धनु राशि में प्रवेश कर चुके हैं. इस स्थिति में शुक्र अब 13 जनवरी 2026 तक धनु राशि में ही विराजमान रहेंगे, इसके बाद वे मकर राशि में गोचर करेंगे. अब तक शुक्र मंगल की राशि वृश्चिक में गोचर कर रहे थे, जहां उनका प्रभाव अपेक्षाकृत कम था. लेकिन धनु राशि में आते ही शुक्र का प्रभाव अधिक खुले, सकारात्मक और विस्तार देने वाला माना जा रहा है. खास बात यह है कि सूर्य और मंगल पहले से ही धनु राशि में मौजूद हैं, जिससे यह गोचर और अधिक शक्तिशाली बन गया है. धनु राशि में शुक्र का महत्व ज्योतिषी शास्त के अनुसार, धनु राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं, जिन्हें ज्ञान, धर्म, भाग्य, नीति और विस्तार का कारक माना जाता है. वहीं शुक्र ग्रह प्रेम, आकर्षण, सौंदर्य, कला, ऐश्वर्य और भौतिक सुखों का प्रतिनिधित्व करता है. जब बृहस्पति की राशि में शुक्र प्रवेश करता है, तो व्यक्ति के जीवन में संतुलन, विवेक और सुख-साधनों की वृद्धि देखी जाती है. हालांकि यह भी ध्यान देने वाली बात है कि 15 दिसंबर से शुक्र अस्त अवस्था में हैं, और वे 3 फरवरी 2026 को उदित होंगे. अस्त अवस्था के कारण शुक्र के फल में थोड़ी कमी हो सकती है, लेकिन शुभता पूरी तरह समाप्त नहीं होगी. समसप्तक योग का दुर्लभ संयोग शनिवार को शुक्र के धनु राशि में प्रवेश करते ही एक खास ज्योतिषीय स्थिति बनी है. इस समय गुरु मिथुन राशि में विराजमान हैं और शुक्र धनु में. दोनों ग्रह एक-दूसरे से सप्तम भाव में स्थित हैं, जिससे समसप्तक राज योग का निर्माण हो रहा है. यह योग अत्यंत दुर्लभ माना जाता है और लंबे समय बाद बनता है. इन 4 राशि वालों पर पड़ेगा विशेष प्रभाव! इस समसप्तक योग और शुक्र गोचर का सबसे अधिक लाभ मिथुन, धनु, वृषभ और तुला राशि के जातकों को मिलने की संभावना है. मिथुन राशि शुक्र की सीधी दृष्टि मिथुन राशि पर पड़ेगी. इससे करियर में नए अवसर, संवाद कौशल में वृद्धि और व्यापार में लाभ के योग बनेंगे. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह समय अनुकूल रहेगा. धनु राशि स्वयं की राशि में शुक्र, सूर्य और मंगल की उपस्थिति आत्मविश्वास को बढ़ाएगी. भाग्य का साथ मिलेगा, रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं और सामाजिक मान-सम्मान में वृद्धि होगी. वृषभ राशि आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं. आय के नए स्रोत बन सकते हैं. पारिवारिक सुख, वाहन और संपत्ति से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं. तुला राशि शुक्र की स्वामित्व वाली राशि होने के कारण तुला राशि पर इसका विशेष प्रभाव पड़ेगा. प्रेम संबंधों में मजबूती, दांपत्य जीवन में मधुरता और कला से जुड़े लोगों के लिए सफलता के योग हैं.

शुक्र ग्रह पर भरे एसिड के बीच भारतवंशी शोधकर्ताओं को मिली पानी की प्रचुरता

नई दिल्ली शुक्र ग्रह के बादल हमेशा से वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बने हुए हैं. क्या वहां जीवन हो सकता है? ये सवाल सालों से चर्चा में है. अब अमेरिकी वैज्ञानिकों की एक टीम ने 50 साल पुराने डेटा को दोबारा जांचा है. नतीजा चौंकाने वाला है – शुक्र के बादल ज्यादातर पानी से बने हैं.  ये पानी साफ-सुथरे बूंदों के रूप में नहीं, बल्कि हाइड्रेटेड सामग्री (जिसमें पानी बंधा हुआ हो) के रूप में मौजूद है. पुरानी सोच थी कि बादल ज्यादातर सल्फ्यूरिक एसिड से बने हैं, लेकिन अब पता चला है कि पानी का हिस्सा 62 प्रतिशत है. ये खोज नासा के पायनियर मिशन के पुराने आंकड़ों से आई है.  शुक्र के बादल: पृथ्वी जैसे हालात, लेकिन रहस्यमयी शुक्र सूर्य का सबसे करीब ग्रह है. इसका वातावरण बहुत गर्म और जहरीला है. सतह पर तापमान 460 डिग्री सेल्सियस तक जाता है. लेकिन उसके ऊपरी बादलों की परतें? वहां दबाव और तापमान पृथ्वी जैसे हैं – करीब 50 डिग्री सेल्सियस और सामान्य हवा का दबाव. इसलिए वैज्ञानिक सोचते हैं कि कहीं वहां सूक्ष्म जीवन (माइक्रोब्स) हो सकता है. लेकिन समस्या ये थी कि हम मानते थे बादल सल्फ्यूरिक एसिड (एक तेजाब) से भरे हैं. ये एसिड इतना जहरीला है कि जीवन की कल्पना मुश्किल लगती थी. पानी की कमी भी बड़ी बाधा थी. अब ये नया अध्ययन कहता है कि पानी बहुत ज्यादा है – बस वो हाइड्रेटेड रूप में बंधा हुआ है. कैसे हुई दोबारा जांच? पुराने डेटा की खोज ये खोज कैलिफोर्निया पॉलिटेक्निक स्टेट यूनिवर्सिटी (कैल पॉली पॉमोना), विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी, एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी और नासा के वैज्ञानिकों ने की. आइडिया आया डॉ. राकेश मोगुल (कैल पॉली पॉमोना) और डॉ. संजय लिमाये (विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी) की बातचीत से. वे शुक्र के बादलों की रचना पर चर्चा कर रहे थे. उन्होंने सोचा कि 1978 के नासा पायनियर वीनस मिशन के डेटा को दोबारा देखना चाहिए. पायनियर वीनस मिशन में एक बड़ा प्रोब (साउंडर) शुक्र के वातावरण में उतरा था. उस पर दो उपकरण थे – न्यूट्रल मास स्पेक्ट्रोमीटर (LNMS) और गैस क्रोमैटोग्राफ (LGC)। ये गैसों को मापने के लिए बने थे. लेकिन डेटा नासा के आर्काइव में माइक्रोफिल्म पर दबा था. पहले इसे डिजिटाइज करना पड़ा. ये काम आसान नहीं था – जैसे पुरानी किताबों को स्कैन करना. डेटा में क्या छिपा था? उपकरणों की 'जाम' से राज खुला वैज्ञानिकों ने पाया कि प्रोब जब बादलों वाली मोटी हवा में उतरा, तो उपकरणों के इनलेट (छेद) बादलों के कणों से जाम हो गए. इससे CO2 (कार्बन डाइऑक्साइड) का स्तर अचानक गिर गया. पहले इसे खराबी समझा गया, लेकिन अब इसे मौका माना गया.  प्रोब नीचे उतरता गया. गर्मी से जाम कण पिघले. अलग-अलग तापमान पर अलग-अलग गैसें निकलीं. इससे पता चला कि कण क्या बने हैं. मुख्य बातें…      पानी की भारी मौजूदगी: 185 डिग्री सेल्सियस और 414 डिग्री सेल्सियस पर पानी की बड़ी मात्रा निकली. ये हाइड्रेटेड फेरिक सल्फेट (लोहे का हाइड्रेटेड यौगिक) और हाइड्रेटेड मैग्नीशियम सल्फेट जैसे यौगिकों से आई. कुल कणों का 62 प्रतिशत पानी था – ज्यादातर बंधा हुआ.     सल्फ्यूरिक एसिड भी है: 215 डिग्री सेल्सियस पर SO2 (सल्फर डाइऑक्साइड) निकला, जो सल्फ्यूरिक एसिड के पिघलने से होता है. इसका हिस्सा 22 प्रतिशत.     एक और रहस्य: 397 डिग्री सेल्सियस पर फिर SO2 निकला, साथ ही लोहे के आयनों का स्पाइक. ये फेरिक सल्फेट (लोहे का सल्फेट) का संकेत है. इसका अनुमान 16 प्रतिशत. ये यौगिक ज्यादा गर्मी सहन करता है. लोहा कहां से आया? वैज्ञानिकों का मानना है कि अंतरिक्ष की धूल (कॉस्मिक डस्ट) शुक्र के वातावरण में आती है. ये एसिड बादलों से रिएक्ट होकर फेरिक सल्फेट बनाती है. पुरानी भूल क्यों हुई? दूर से जांच vs करीब से जांच पहले दूरबीनों से स्पेक्ट्रोस्कोपी (रंगों से विश्लेषण) की जाती थी. ये सिर्फ हवा में घुला पानी दिखा सकती थी, न कि हाइड्रेटेड पानी. लेकिन प्रोब ने सीधे बादलों के कणों को मापा, इसलिए सही नतीजा मिला. ये रहस्य सुलझ गया. जीवन की संभावना पर क्या असर? नई उम्मीदें शुक्र के बादलों में जीवन का सबसे बड़ा तर्क पानी की कमी था. अब पता चला कि पानी बहुत है – 62 प्रतिशत. लेकिन ये तेजाबी पानी है, जो पृथ्वी के जीवों के लिए कठिन. एसिड-सहने वाले माइक्रोब्स (जैसे पृथ्वी के एसिड झीलों में) वहां जी सकते हैं. ये खोज एस्ट्रोबायोलॉजी (ग्रहों पर जीवन की खोज) को नई दिशा देगी.