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सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई: मंत्री विजय शाह पर कर्नल कुरैशी के मामले में चार बार माफी की मांग

भोपाल  मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह द्वारा भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए विवादित बयान के मामले में आज, 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार पहले ही अपनी रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है। अब अदालत के समक्ष सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही आगे बढ़ाई जाए या नहीं। सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट के रुख और संभावित निर्देशों को देखते हुए कानूनी, राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर लगातार समन्वय किया जा रहा है। दिल्ली में मुख्यमंत्री की उच्चस्तरीय बैठक सुनवाई से ठीक पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार रात दिल्ली प्रवास पर थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में मंत्री विजय शाह को लेकर बने राजनीतिक और कानूनी हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार रात दिल्ली प्रवास के दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मिले थे। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान उन्होंने मंत्री शाह को लेकर बने हालात पर चर्चा की। सीनियर वकीलों से भी इस मामले में सलाह ली गई है, ताकि कोर्ट में सरकार अपना पक्ष मजबूती से रख सके। सरकार कुछ मामलों में जांच के आधार पर समय-सीमा बढ़ाने की मांग कोर्ट से कर सकती है। इस मुद्दे पर भी पार्टी और सरकार स्तर पर मंथन हुआ है। दो दिन पहले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी दिल्ली प्रवास के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन से मिले थे। इसके बाद ही मंत्री विजय शाह को फिर से माफी मांगने के लिए कहा गया था। इसके बाद 7 फरवरी को मंत्री शाह ने लिखित माफी पढ़कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी, जिसका वीडियो भी जारी किया गया। पूरे मामले में यह उनकी चौथी माफी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सुनवाई को देखते हुए सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और कोर्ट के रुख पर लगातार नजर बनाए हुए है। बता दें, मंत्री विजय शाह ने 11 मई 2025 को महू के रायकुंडा में ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने वरिष्ठ वकीलों से भी सलाह ली है, ताकि सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखा जा सके। सरकार यह भी विचार कर रही है कि कुछ बिंदुओं पर जांच के आधार पर समय-सीमा बढ़ाने की मांग अदालत से की जाए। इस पहलू पर पार्टी और सरकार, दोनों स्तरों पर मंथन हुआ है। प्रदेश अध्यक्ष की मुलाकात और माफी का दबाव इस पूरे घटनाक्रम से पहले, दो दिन पूर्व बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी दिल्ली प्रवास के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से मिले थे। इसके बाद ही मंत्री विजय शाह से एक बार फिर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा गया। इसी क्रम में 7 फरवरी को मंत्री विजय शाह ने लिखित माफी पढ़कर सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना की, जिसका वीडियो भी जारी किया गया। यह इस पूरे विवाद में उनकी चौथी माफी थी। क्या है पूरा विवाद? मामले की जड़ 11 मई 2025 की है, जब मंत्री विजय शाह ने महू के रायकुंडा क्षेत्र में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। यह बयान सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया हुई। इस बयान को सेना, महिलाओं और एक समुदाय के प्रति आपत्तिजनक बताते हुए विरोध दर्ज कराया गया, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। पहली और दूसरी माफी: विवाद बढ़ने पर मंत्री विजय शाह ने 13 मई 2025 को पहली बार माफी मांगी। उन्होंने कहा, “सोफिया बहन ने देश का मान-सम्मान बढ़ाया है। मैं उन्हें सैल्यूट करता हूं। दुखी मन से और इतनी विपरीत परिस्थितियों में अगर मेरे मुंह से कुछ गलत निकल गया है, तो मैं दस बार माफी मांगने को तैयार हूं।” अगले दिन, 14 मई 2025 को लगभग इसी शब्दों में उन्होंने दोबारा माफी दोहराई। हालांकि, इन दोनों माफियों को लेकर यह सवाल उठता रहा कि क्या वे पर्याप्त और बिना शर्त थीं। तीसरी माफी: 23 मई 2025 का विस्तृत बयान 23 मई 2025 को मंत्री विजय शाह ने एक लंबा बयान जारी करते हुए तीसरी बार माफी मांगी। उन्होंने कहा कि पहलगाम में हुए जघन्य हत्याकांड से उनका मन विचलित था और उसी मानसिक स्थिति में उनसे भाषाई भूल हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी भी धर्म, जाति या समुदाय को ठेस पहुंचाना नहीं था और वे भारतीय सेना, कर्नल सोफिया कुरैशी तथा देशवासियों से पूरी तरह क्षमा प्रार्थी हैं। चौथी माफी: 7 फरवरी 2026, कोर्ट की सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से ठीक पहले, 7 फरवरी को मंत्री विजय शाह ने चौथी बार सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनके शब्द देशभक्ति के उत्साह, उत्तेजना और आवेश में निकल गए थे, जो उनकी वास्तविक भावना के अनुरूप नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा और संवेदनशीलता अत्यंत आवश्यक है, इस घटना से उन्होंने आत्ममंथन किया है और भविष्य में ऐसी गलती दोहराई नहीं जाएगी। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजर अब पूरे मामले की दिशा सुप्रीम कोर्ट की आज की सुनवाई से तय होगी। अदालत यह निर्णय कर सकती है कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही आगे बढ़ेगी या राज्य सरकार की दलीलों और माफियों को देखते हुए कोई अन्य रास्ता अपनाया जाएगा।  

कर्नल सोफिया मामले पर विजय शाह ने मीडिया से की दूरी, भाजपा मुख्यालय में सवालों से भागे, 9 फरवरी को होगी सुनवाई

भोपाल  भाजपा प्रदेश मुख्यालय में  समस्याएं सुनने पहुंचे जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह उस वक्त असहज नजर आए, जब मीडिया ने उनसे सुप्रीम कोर्ट में लंबित प्रकरण को लेकर सवाल पूछ लिया. सवाल सुनते ही मंत्री विजय शाह बिना कोई प्रतिक्रिया दिए सीधे वाहन में बैठकर रवाना हो गए. हालांकि, इसके बाद स्वास्थ्य राज्य मंत्री शिवाजी पटेल को अकेले प्रेस ब्रीफिंग की. मंत्री शाह और पटेल ने सुनी समस्या भाजपा संगठन द्वारा कार्यकर्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से प्रदेश मुख्यालय में मंत्रियों की ड्यूटी तय की गई है. प्रतिदिन दोपहर 1 से 3 बजे तक प्रदेशभर से कार्यकर्ता अपनी शिकायतें लेकर पहुंचते हैं. जिन मामलों का तत्काल समाधान संभव होता है, उनका मौके पर निराकरण किया जाता है, जबकि अन्य मामलों को संबंधित विभागों को भेजा जाता है. शुक्रवार को यह जिम्मेदारी मंत्री विजय शाह और मंत्री शिवाजी पटेल को सौंपी गई थी. मीडिया के सवालों से बचते दिखे विजय शाह कार्यकर्ताओं की सुनवाई के बाद जैसे ही दोनों मंत्री कार्यालय से बाहर निकले, मीडिया ने जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह से उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले को लेकर सवाल किया. सवाल सुनते ही मंत्री बिना कुछ कहे वाहन में बैठकर निकल गए. विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यप्रदेश सरकार मंत्री विजय शाह के मामले में जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेना चाहती. इसलिए अभियोजन की मंजूरी को लेकर सरकार सुप्रीम कोर्ट से अतिरिक्त समय मांगने की तैयारी में है. सरकार को 3 दिन में देना होगा जबाव 20 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए विवादित बयान के मामले में सुनवाई करते हुए एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट देखने के बाद कहा था कि जांच पूरी हो चुकी है और मंत्री के खिलाफ अभियोजन की अनुमति मांगी गई है. कोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह में अभियोजन का निर्णय लेकर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे. अब इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 9 फरवरी को है, जबकि कार्यदिवसों के आधार पर सरकार के पास अभी लगभग तीन दिन का समय बचा है. सुप्रीम कोर्ट में सरकार को देना है जवाब मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन (प्रोसिक्यूशन) की मंजूरी के मामले में मध्यप्रदेश सरकार को 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना है। इससे पहले कोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। सरकारी और राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से और समय मांग सकती है। तर्क यह दिया जाएगा कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और विस्तृत परीक्षण जरूरी है। यही रुख शुरुआत से मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) का भी रहा है। पार्टी और विधि विशेषज्ञों से राय-मशविरा सूत्रों के अनुसार, इस मसले पर पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ-साथ अटार्नी जनरल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से भी सलाह ली गई है। लंबी चर्चा के बाद यह संकेत मिले हैं कि सरकार 9 फरवरी की सुनवाई में समय विस्तार की मांग कर सकती है, जिससे सुनवाई आगे बढ़ने की संभावना है। सरकार ने रिपोर्ट दिल्ली भेजी मध्यप्रदेश सरकार ने अपनी मंशा से जुड़ी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करने के लिए दिल्ली भेज दी है। इस संबंध में एसीएस गृह शिवशेखर शुक्ला, सचिव गृह कृष्णा वेणी देशावतु और अतिरिक्त सचिव मनीषा सेंतिया दिल्ली गए थे। मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, 9 फरवरी को अभियोजन से जुड़े बिंदु पर सुनवाई संभावित है, जबकि 11 फरवरी को मामले के अन्य पहलुओं पर सुनवाई हो सकती है। तीन सदस्यीय SIT कर रही जांच विजय शाह प्रकरण की जांच तीन सदस्यीय एसआईटी कर रही है, जिसमें प्रमोद वर्मा, कल्याण चक्रवर्ती और वाहिनी सिंह शामिल हैं। एसआईटी पहले भी विस्तृत जांच के लिए अतिरिक्त समय मांग चुकी है। विजय शाह ने पिछले साल महू में दिया था बयान 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विजय शाह संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था- 'उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।' शाह ने आगे कहा- 'अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।' बजट सत्र के बाद हो सकती है कार्रवाई एसआईटी छह माह पहले ही अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप चुकी है, जिसमें आरोपों की पुष्टि करते हुए मुकदमा चलाने की सिफारिश की गई है. अब अंतिम निर्णय सरकार और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के द्वारा लिया जाएगा. माना जा रहा है कि विधानसभा के बजट सत्र के बाद सरकार और पार्टी मंत्री विजय शाह के खिलाफ एकशन ले सकते हैं.

विजय शाह फंसे हुए, दिल्ली करेगी अंतिम फैसला; कर्नल सोफिया मामले में अभी तक कोई राहत नहीं

भोपाल  कर्नल सोफिया को लेकर बेशर्म बयान देने वाले मोहन सरकार के मंत्री विजय शाह को लेकर भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व निर्णय लेगा। माना जा रहा है कि सरकार फैसले के बाद 6 फरवरी तक कोर्ट को अपने निर्णय से अवगत कराएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि 9 फरवरी को उक्त मामले में सुनवाई होनी है। पूर्व में यह माना जा रहा था कि शाह के खिलाफ हुई एसआइटी जांच पर स़त्ता व संगठन द्वारा सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई दो हफ्ते की अवधि में निर्णय ले लिया जाएगा। मंत्री सांसत में, कहीं से नहीं मिली राहत मामला बुरी तरह फंसा है। उधर मंत्री शाह की जान सांसत में है, वे भोपाल से लेकर दिल्ली तक सभी स्तर पर अपना पक्ष रख चुके हैं। बताया जा रहा है कि  देर रात तक उन्हें किसी भी स्तर से कोई राहत नहीं मिली है। सूत्रों के मुताबिक उन्हें दो टूक कह दिया है कि जो कुछ होगा, वह दिल्ली नेतृत्व ही तय करेगा। उसके आधार पर अवगत कराया जाएगा।  वहीं, सामान्य प्रशासन विभाग के अफसरों का कहना है कि अभी तक उनके पास कोई निर्देश नहीं आए हैं। मामला कैबिनेट मंत्री की अभियोजन स्वीकृति का है, जिसके लिए मुख्यमंत्री का अनुमोदन जरूरी है। लेकिन अभी तक कोई भी दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि विजय शाह के विरुद्ध एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर लंबित अभियोजन स्वीकृति पर दो सप्ताह के अंदर निर्णय लिया जाए। यह अवधि 2 फरवरी को पूरी हो गई है। लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। सरकार के सूत्रों को कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 9 फरवरी को है, लेकिन कार्यदिवस के आधार पर 2 सप्ताह की मोहलत 5 फरवरी तक है। इसलिए सरकार के पास अभी 3 दिन का वक्त और है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआईटी 6 माह पहले ही अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज चुकी है। रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि के साथ ही मुकदमा चलाने की स्वीकृति देने की सिफारिश की गई है। क्यों फंसे मंत्री शाह चुनौती देकर फंसे मंत्री शाह ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद इंदौर में कर्नल सोफिया कुरैशी पर बेशर्म टिप्पणी(Minister Vijay Shah Statement Controversy) की। इस पर हाईकोर्ट के एफआइआर के आदेश को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। यहां राहत तो नहीं, उलटा एसआइटी गठित करने के आदेश हुए। कोर्ट ने सरकार से अभियोजन की स्वीकृति पर दो हफ्ते में निर्णय लेने को कहा है।

मंत्री विजय शाह का मामला: मध्यप्रदेश सरकार का असमंजस, आदिवासी वोट या कोर्ट का फैसला?

 भोपाल  मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए अमर्यादित बयान के मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश ने प्रदेश सरकार के लिए दुविधा की स्थिति बना दी है। एक तरफ आदिवासी वोट बैंक की चिंता हैं, जो सत्ता के समीकरण बनाने-बिगाड़ने में बड़ी भूमिका निभाता है, तो दूसरी तरफ न्यायपालिका के निर्देश हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार विधि विभाग और महाधिवक्ता से सलाह लेगी। आरोपित मंत्री भी सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू अपील कर सकते हैं। मंत्री को पार्टी ने फटकार भी लगाई बता दें कि विजय शाह ने ऑ परेशन सिंदूर में सेना के पराक्रम की जानकारी देश-दुनिया के सामने रखने वाली सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर अमर्यादित बयान दिया था। इससे भाजपा की किरकिरी हुई। मंत्री को पार्टी ने फटकार भी लगाई। उन्होंने पार्टी के निर्देश पर माफी भी मांग ली। हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था इस मामले का हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआइटी ने पूरे मामले की जांच की। अगस्त 2025 में रिपोर्ट सौंपी। एसआइटी की इसी रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह में अभियोजन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। सरकार के स्तर पर दुविधा की स्थिति इसके साथ ही शाह के अन्य विवादित बयानों की जांच करने के लिए भी कहा गया। सूत्रों का कहना है कि सरकार के स्तर पर अभी इस मामले में दुविधा की स्थिति है। कोर्ट के निर्देशानुसार यदि अभियोजन के मामले में कार्रवाई बढ़ाई जाती है तो सरकार के लिए अजीब स्थिति बन जाएगी। उन्हें मंत्रिमंडल में बनाए रखना परेशानी का कारण बनेगा, इसलिए इस संबंध में पहले सभी कानूनी पहलुओं को देखा जाएगा। यही कारण है कि कानूनी सलाह के लिए प्रकरण विधि विभाग और महाधिवक्ता के पास भेज रहा है। दोनों के अभिमत के आधार पर आगामी निर्णय लिया जाएगा। वहीं, आरोपित मंत्री मंत्री विजय शाह भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध अपील करने के लिए कानूनी मशविरा ले रहे हैं। महिलाओं के सम्मान से कोई समझौता स्वीकार नहीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर लिखा- सेना की अधिकारी, देश की बेटी और राष्ट्र के सम्मान पर हमला हुआ, लेकिन भाजपा सरकार महीनों तक SIT की रिपोर्ट दबाए बैठी रही। यह कोई एक बयान नहीं, बल्कि सत्ता संरक्षण में पनपती असंवेदनशील और घृणित मानसिकता का उदाहरण है। देश की सुरक्षा में तैनात हमारी बहन के प्रति ऐसी ओछी सोच रखने वाले मंत्री विजय शाह से मुख्यमंत्री को तत्काल इस्तीफा लेकर पार्टी के सभी दायित्वों से मुक्त करना चाहिए। देश की सेना और महिलाओं के सम्मान से कोई समझौता स्वीकार नहीं। कानून सबके लिए बराबर है, मंत्री के लिए भी। विजय शाह ने पिछले साल महू में दिया था बयान 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विजय शाह संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था- 'उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।' शाह ने आगे कहा- 'अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।' सत्ता के समीकरण साधने के लिए महत्वपूर्ण है आदिवासी वोट बैंक प्रदेश में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए विधानसभा की 47 सीटें और लोकसभा की चार सीटें सुरक्षित हैं। 2018 में जब आदिवासी मतदाताओं का झुकाव भाजपा के स्थान पर कांग्रेस की ओर हुआ था तो 15 वर्ष बाद कमल नाथ के नेतृत्व में सरकार बनी थी। भाजपा ने इस वर्ग को साधने के लिए काफी प्रयास किए और 2023 में यह भाजपा के पक्ष में लौटा तो पार्टी की सरकार बनी। छिंदवाड़ा जैसा कांग्रेस का किला भी भाजपा ने इन्हीं आदिवासी मतदाताओं के दम पर ढहाया। ऐसे में जब कांग्रेस ने दलित एजेंडे पर काम शुरू कर दिया है तो आदिवासी मंत्री विजय शाह के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर सत्ता और संगठन दुविधा में है। सरकार के पास कोई विकल्प नहीं पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता अजय मिश्रा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर रिव्यू अपील की जा सकती है, लेकिन इसमें राहत मिलने की संभावना नहीं है। सरकार के पास कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यदि कार्रवाई नहीं की जाती है तो अवमानना का मामला बन जाएगा। जहां तक अभियोजन की स्वीकृति पर मंत्री पद छोड़ने की है तो यह नैतिकता से जुड़ा मामला है। उन्होंने जो बयान दिया, वह मंत्री के तौर पर किए गए कार्य से इतर है। 

विजय शाह के मामले पर सीएम का बड़ा बयान, दावोस दौरे के बाद होगा फैसला

भोपाल  कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान देने वाले मंत्री विजय शाह की मुश्किलें बढ़ती जा रहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शाह के खिलाफ अभियोजन पर स्वीकृति देने के लिए सरकार को दो हफ्ते का वक्त दिया है। कानूनी जानकारों की मानें तो विजय शाह के इस केस का ट्रायल इंदौर एमपी-एमएलए कोर्ट में चल सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को अभियोजन पर फैसला लेने के लिए दो हफ्तों का वक्त दिया है। सीएम डॉ मोहन यादव 23 जनवरी तक स्विटजरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में शामिल होने के लिए गए हैं। ऐसे में सीएम के दावोस से लौटने के बाद विजय शाह के मामले में सरकार आगे निर्णय लेगी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई थी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में छह महीने बाद विजय शाह मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान विजय शाह की ऑनलाइन माफी पर सोमवार को कोर्ट ने कहा कि इसमें अब बहुत देर हो गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने पर 2 हफ्ते के भीतर फैसला लें। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि राज्य सरकार विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट पर कई महीनों से कोई फैसला नहीं ले रही है। जबकि विशेष जांच दल ने अपनी जांच पूरी कर ली है और अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी है। कोर्ट ने कहा- अब सरकार को फैसला लेना होगा सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश टिप्पणी करते हुए कहा- आप 19 अगस्त, 2025 से एसआईटी रिपोर्ट पर विचार कर रहे हैं। कानून आप पर दायित्व डालता है और आपको निर्णय लेना होगा। अब 19 जनवरी है। अदालत ने एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट खोली और पाया कि अलग-अलग पहलुओं की जांच के बाद, उसने उसके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार की मंजूरी मांगी है। कोर्ट ने कहा- हमें सूचित किया गया है कि मामला यहां लंबित होने के कारण राज्य द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हम मध्य प्रदेश राज्य को कानून के अनुसार मंजूरी हेतु उचित कदम उठाने का निर्देश देते हैं। कोर्ट ने माफी पर कहा- अब बहुत देर हो चुकी इससे पहले मप्र सरकार की ओर से यह बताया गया था कि उसने एसआईटी के अनुरोध पर कोई कार्रवाई नहीं की थी क्योंकि मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित था। जब शाह का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने पहले ही अपनी टिप्पणियों के लिए माफी मांग ली थी, तो अदालत ने कहा, "माफी कहां है? रिकॉर्ड में तो कुछ भी नहीं है। अब तो बहुत देर हो चुकी है।" एमपी हाईकोर्ट ने FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे सुप्रीम कोर्ट में वकील वरुण ठाकुर ने बताया कि विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया को लेकर दिए गए बयान के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) लेते हुए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि एफआईआर किस तरह दर्ज की जाए। इसके बाद विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (विशेष अनुमति याचिका) दायर की। उन्होंने कोर्ट में यह दलील दी कि बयान देने का उनका इरादा गलत नहीं था। उन्होंने माफी भी मांगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब माफी के लिए बहुत देर हो चुकी है और उनका बयान शपथ के विपरीत है। SIT रिपोर्ट में विजय शाह के पुराने बयानों का जिक्र इस मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत कर दी है। रिपोर्ट में न केवल मौजूदा घटना को शामिल किया गया, बल्कि जय ठाकुर द्वारा दायर एक याचिका का भी उल्लेख किया गया, जिसमें विजय शाह के पुराने बयानों का जिक्र था। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को निर्देश दिया था कि वह इन सभी घटनाओं और बयानों की जांच करे और रिपोर्ट दाखिल करे। एसआईटी की जांच के बाद चार्जशीट दाखिल कर दी गई है, लेकिन फिलहाल कोर्ट संज्ञान (कॉग्निज़ेंस) नहीं ले पा रहा है। इसकी वजह यह है कि मध्य प्रदेश सरकार अपने मौजूदा मंत्री के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति नहीं दे रही है। मामले की सुनवाई फरवरी के पहले सप्ताह में होगी सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर अभियोजन की मंजूरी देने का निर्देश दिया है। इस मामले की सुनवाई फरवरी के पहले सप्ताह में होगी। ऐसे में विजय शाह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि यह एक संवेदनशील बयान था और जिस समय यह दिया गया, उस वक्त माहौल भी बेहद संवेदनशील था। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। एसआईटी ने जांच के बाद अपराध मानते हुए चार्जशीट दाखिल कर दी है। अब राज्य सरकार को यह तय करना है कि मामले में आगे अभियोजन चलाया जाए या नहीं। पहले भी कई विवादित बयान दे चुके हैं विजय शाह मंत्री विजय शाह पहले भी कई विवादित बयान दे चुके हैं। तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान की पत्नी को लेकर एक बयान के कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। हाल ही में उन्होंने रतलाम जिले में लाड़ली बहनों को लेकर भी एक बयान दिया था। जिसके बाद कांग्रेस नेता उनका विरोध करते हुए पद से हटाने की मांग कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, विजय शाह केस में कर्नल सोफिया कुरैशी से जुड़े गंभीर आरोपों पर होगी चर्चा

भोपाल  सुप्रीम कोर्ट में आज मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह की FIR रद्द करने की याचिका पर सुनवाई होगी। यह याचिका उनके उस विवादित बयान से संबंधित है, जो उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ दिया था। मंत्री विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट में यह अपील की है कि मामले में दर्ज FIR को रद्द किया जाए। शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने तर्क दिया था कि मंत्री ने सार्वजनिक रूप से माफीनामा जारी किया है, जिसे ऑनलाइन साझा किया गया था और इसे अदालत के रिकॉर्ड में रखा जाएगा। शीर्ष अदालत ने तब कहा था, ऑनलाइन माफी क्या होती है? हमें उनकी मंशा और ईमानदारी पर संदेह होने लगा है। आप माफी को रिकॉर्ड पर रखें। हमें इसे देखना होगा। उसने मंत्री के बयानों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को 13 अगस्त 2025 तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। पीठ ने कहा था कि शाह के बयानों के बजाय उन लोगों के बयान दर्ज किए जाने चाहिए थे जिनकी भावनाएं आहत हुई थीं। उच्च न्यायालय ने कर्नल कुरैशी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने के लिए शाह को फटकार लगाई और पुलिस को उनके खिलाफ शत्रुता व नफरत को बढ़ावा देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। छह महीने बाद होगी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में विजय शाह के बयान मामले पर पिछले साल 28 जुलाई को सुनवाई हुई थी। इसके छह महीने बाद आज सुप्रीम कोर्ट में इस केस की सुनवाई होगी। जुलाई में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री विजय शाह की ऑनलाइन माफी पर फटकार लगाई थी महू में पिछले साल 11 मई को दिया था बयान 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम को मंत्री विजय शाह संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था- 'उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।' शाह ने आगे कहा- 'अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।' मंत्री शाह ने एफआईआर को सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती बता दें कि मंत्री विजय शाह ने 11 मई को महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकवादियों की बहन बताया था। इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर मंत्री के खिलाफ 14 मई को महू के मानपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। जिसके खिलाफ विजय शाह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। सोमवार 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान विजय शाह के वकील ने कहा कि उनके क्लाइंट ने माफी मांग ली है। इस पर कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि आप लोगों के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं। आप पब्लिक फिगर हैं। आपको बोलते समय अपने शब्दों पर विचार करना चाहिए। जुलाई में सुनवाई पर कोर्ट ने माफी पर जताई थी नाराजगी पिछले साल 28 जुलाई को ऑपरेशन सिंदूर की ब्रीफिंग करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी को लेकर भाजपा मंत्री विजय शाह की ऑनलाइन माफी पर सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की बेंच ने शाह के मामले में सुनवाई की थी। कोर्ट ने शाह द्वारा सार्वजनिक रूप से मांगी गई माफी को निष्ठाहीन बताते हुए खारिज कर दिया था। यह देखते हुए कि अपने माफीनामे वाले वीडियो में शाह ने जनभावनाओं को ठेस पहुंचाने की बात स्वीकार नहीं की। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा– वह आत्मचिंतन करें कि अपनी सजा कैसे चुकाएं। आपकी वह सार्वजनिक माफी कहां है? हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। बैंक खाते फ्रीज करने के नियमों पर आज सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने साइबर अपराध की जांच के दौरान बैंक खातों को फ्रीज और डी-फ्रीज करने की प्रक्रिया से जुड़ी एक अहम याचिका को चीफ जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष रखने का निर्देश दिया है। यह याचिका केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) से इस विषय पर एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने की मांग करती है। बिक्रम सिंह मजीठिया की जमानत याचिका पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में आज शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की याचिका पर सुनवाई होगी। मजीठिया ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें असमान संपत्ति मामले में जमानत नहीं दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले की समीक्षा करेगा और तय करेगा कि क्या उन्हें जमानत मिलनी चाहिए। इस सुनवाई पर राजनीतिक और कानूनी नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला नेताओं की संपत्ति और जवाबदेही के संबंध में अहम माना जाता है। बीएस येदियुरप्पा POCSO केस और चुनावी रजिस्टर सुधार पर भी सुनवाई कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा पर POCSO अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। बीएस येदियुरप्पा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है और आज कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगा।वहीं चुनाव आयोग से जुड़ा है। कुछ याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग के सारांश संशोधन प्रक्रिया को चुनौती दी है, जिसके तहत निर्वाचन रजिस्टर में सुधार किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट आज इस याचिका पर भी विचार करेगा।