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धोखाधड़ी केस में राहत: ढाई महीने बाद जेल से बाहर आए विक्रम भट्ट, आध्यात्मिक बयान से सुर्खियों में

मुंबई फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेताबंरी भट्ट को 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें गुरुवार, 19 फरवरी को रेगुलर बेल दे दी। विक्रम भट्ट और पत्नी करीब ढाई महीने से उदयपुर की सेंट्रल जेल में बंद थे। जेल से बाहर आने के बाद वह पहले भगवान शिव के मंदिर गए और मत्था टेककर आशीर्वाद लिया। इसके बाद वह मीडिया से मिले और बातचीत में कहा कि वह भगवान कृष्ण के भक्त हैं और जेल उनका पांचवा निवास है। मालूम हो कि विक्रम भट्ट की पत्नी को 13 फरवरी को अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया था, और अब दोनों को रेगुलर बेल मिली है। विक्रम भट्ट को धोखाधड़ी मामले में 7 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने अब दोनों पक्षों को आपसी समझौते से मामला सुलझाने को कहा है। पूरा मामला क्या है, यह जानने से पहले जानिए विक्रम भट्ट ने मीडिया से क्या कहा: जेल में बिताए ढाई महीनों पर यह बोले विक्रम भट्ट विक्रम भट्ट ने जेल में बिताए दो महीने और 11 दिन को लेकर 'न्यूज18' से बातचीत में कहा, 'मैंने ढाई महीने जेल में बिताए हैं। मुझे न केवल उम्मीद थी, बल्कि पूरा विश्वास था कि यहां की कानून व्यवस्था कायम रहेगी और सच्चाई जरूर सामने आएगी। जेल में मेरी एक दोस्त बनी, जिसने मुझे मेवाड़ की मिट्टी के बारे में बताया। उसने कहा कि मेवाड़ की मिट्टी में सच्चाई को भले ही परेशानी हो, पर उसे हराया नहीं जा सकता। मैं मेवाड़ की इसी मिट्टी का तिलक लगाकर यहां से विदा हो रहा हूं, यहां सच्चाई की हमेशा जीत होगी।' 'मैं उसी स्थान पर रहा, जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ' विक्रम भट्ट ने आगे कहा, 'यह मेरा पांचवा निवास है। मैं भगवान कृष्ण का भक्त हूं। मैं उसी स्थान पर रहा हूं, जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। समझ लीजिए कि मैं पहले से दोगुना बेहतर होकर लौट रहा हूं। भगवान कृष्ण की तरह मुझे भी एक नई लड़ाई लड़नी है। मैं कानून-व्यवस्था के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता। मुझे इस देश की न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है। जो भी न्याय होगा, वह सबके हित में होगा।' कोर्ट का विक्रम भट्ट को सुझाव वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने विक्रम भट्ट को सुझाव दिया कि वह और विपक्षी पार्टी दोनों मध्यस्थता केंद्र जाएं। दोनों पक्ष वहां उपस्थित होकर आपसी समझौते से मामले को सुलझाने की कोशिश करें। क्या है विक्रम भट्ट का 30 करोड़ की धोखाधड़ी मामला? मालूम हो कि नवंबर 2025 में, उदयपुर में फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी के खिलाफ एक फिल्म प्रोजेक्ट से संबंधित धोखाधड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया ने भूपालपुरा पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी दिवंगत पत्नी की याद में बायोपिक बनाने के लिए विक्रम भट्ट की कंपनी के साथ समझौता किया था। लेकिन पैसे देने और चार फिल्मों के कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करने के बाद विक्रम भट्ट की कंपनी ने फिल्में नहीं बनाईं और इसके बजाय पैसे का गलत इस्तेमाल किया। तब उन्होंने उदयपुर में विक्रम भट्ट समेत 8 लोगों के खिलाफ 30 करोड़ की धोखाधड़ी की FIR उदयपुर में दर्ज करवाई थी। विक्रम भट्ट पर लगाए गए ये आरोप डॉ. मुर्डिया ने आरोप लगाया था कि एक इवेंट में वह दिनेश कटारिया से मिले थे, जिसने उन्हें उनकी पत्नी पर बायोपिक बनाने का सुझाव दिया था। बाद में उसने उन्हें मुंबई स्थित वृंदावन स्टूडियो बुलाया और वहां विक्रम भट्ट से मिलवाया था। विक्रम भट्ट से डॉ. मुर्डिया की बायोपिक को लेकर बात हुई। दर्ज एफआईआर के मुताबिक, इसके बाद विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी ने डॉ. मुर्डिया को कथित तौर पर विश्वास दिलाया कि अगर वह 7 करोड़ रुपये और लगा दें, तो वो दोनों 4 फिल्में 47 करोड़ रुपये में बना सकते हैं। इन फिल्मों से 100 से 200 करोड़ रुपये तक की कमाई हो जाएगी। डॉ. मुर्डिया का आरोप है कि विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी ने झूठे वादे करके उनके 30 करोड़ रुपये का गलत इस्तेमाल किया। विक्रम भट्ट ने आरोपों का किया खंडन पुलिस की जांच में पता चला कि फर्जी नोटों और दस्तावेजों का इस्तेमाल करके विक्रम भट्ट ने पैसों का गलत इस्तेमाल किया था। इसके बाद 7 दिसंबर 2025 को उदयपुर पुलिस ने विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को उनके जुहू स्थित गंगाभवन कॉम्प्लेक्स के फ्लैट से गिरफ्तार किया और उदयपुर ले गई थी। हालांकि, विक्रम भट्ट ने आरोपों का खंडन किया, और कहा कि पुलिस को गलत जानकारी दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर का पता चलने से पहले उन्हें कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी।

विक्रम भट्ट को बड़ा झटका: 30 करोड़ की ठगी केस में दूसरी बार भी नहीं मिली जमानत

उदयपुर 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में जेल में बंद बॉलीवुड डायरेक्टर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को एक बार फिर अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। उदयपुर की महिला उत्पीड़न कोर्ट ने बुधवार को भट्ट दंपती की दूसरी जमानत याचिका भी खारिज कर दी। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि मामले में अभी अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और उनसे अहम पूछताछ बाकी है। ऐसे में इस स्तर पर आरोपियों को जमानत देना उचित नहीं होगा। कोर्ट का यह आदेश बुधवार को जारी किया गया। उदयपुर की दोनों निचली अदालतों से राहत न मिलने के बाद अब भट्ट दंपती को जमानत के लिए राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर बेंच का रुख करना पड़ेगा। हालांकि, हाईकोर्ट में अवकाश के चलते उन्हें नए साल के बाद तक भी जेल में रहना पड़ सकता है। भट्ट दंपती के अधिवक्ता कमलेश दवे ने बताया कि इससे पहले एसीजेएम कोर्ट-4 ने भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद सत्र न्यायालय में याचिका दायर की गई, लेकिन जज के अवकाश पर होने के कारण लगातार तीन बार सुनवाई टलती रही। अंततः मंगलवार को महिला उत्पीड़न कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसके बाद याचिका खारिज कर दी गई। एसीजेएम कोर्ट-4 ने अपने आदेश में कहा था कि यदि जमानत दी जाती है तो गवाहों के प्रभावित होने की आशंका है। साथ ही, मामला बीएनएस की धारा 338 के तहत गैर-जमानती होने के कारण भी जमानत देने से इनकार किया गया। 42 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट में धोखाधड़ी का आरोप मामले में इंदिरा ग्रुप कंपनीज के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया ने आरोप लगाया है कि उन्होंने फिल्म निर्माण के लिए विक्रम भट्ट से 42 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट किया था। बाद में उन्हें धोखाधड़ी का अहसास हुआ, जिसके बाद 17 नवंबर को विक्रम भट्ट सहित 8 लोगों के खिलाफ उदयपुर में एफआईआर दर्ज कराई गई। इस केस में उदयपुर पुलिस पहले ही भट्ट के को-प्रोड्यूसर महबूब अंसारी और फर्जी वेंडर संदीप को मुंबई से गिरफ्तार कर चुकी है। 7 दिसंबर को मुंबई से हुई थी गिरफ्तारी विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को 7 दिसंबर को मुंबई स्थित उनके फ्लैट से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 9 दिसंबर को दोनों को उदयपुर कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इससे पहले 9 दिसंबर को राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर बेंच) में विक्रम भट्ट की गिरफ्तारी पर रोक से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई थी। उस दौरान हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी में जल्दबाजी को लेकर आईजी, एसपी और जांच अधिकारी को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए थे। फिलहाल, दूसरी जमानत याचिका भी खारिज होने के बाद भट्ट दंपती की मुश्किलें और बढ़ गई हैं, और अब उनकी उम्मीदें राजस्थान हाईकोर्ट पर टिकी हुई हैं।