samacharsecretary.com

वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में अरुणाचल पुरुष और असम महिला वर्ग ने जीते ओवरऑल चैम्पियन का खिताब

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026   वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में अरुणाचल पुरुष और असम महिला वर्ग में ओवरऑल चैम्पियन छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने भी लहराया परचम, रिशिका कश्यप ने रजत और लकी बाबू मरकाम ने जीता कांस्य रायपुर  इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता समापन के साथ ही चैम्पियनशिप टीम के परिणाम भी घोषित किए गए, जिसमें पुरुष वर्ग में अरुणाचल प्रदेश ने ओवरऑल चैम्पियन बनने का गौरव हासिल किया। वहीं मिजोरम फर्स्ट रनरअप और असम सेकंड रनरअप रहा। महिला वर्ग में असम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ओवरऑल चैम्पियन का खिताब अपने नाम किया, जबकि ओडिशा फर्स्ट रनरअप और छत्तीसगढ़ सेकंड रनरअप रहा। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिताओं का आज शानदार समापन हो गया। पूरे आयोजन के दौरान देशभर से आए खिलाड़ियों ने ताकत, तकनीक और आत्मविश्वास का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को रोमांचित किया। समापन समारोह के अवसर पर छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप और रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा विजेताओं को मेडल पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की। प्रतियोगिता के प्रमुख मुकाबलों की बात करें तो पुरुष 110 किलोग्राम भार वर्ग में अरुणाचल प्रदेश के साम्बो लापुंग ने 299 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मिजोरम के डेविड लालजाव्मडिका ने 270 किलोग्राम के साथ रजत और छत्तीसगढ़ के लकी बाबू मरकाम ने 261 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक जीता। लकी बाबू का यह प्रदर्शन घरेलू दर्शकों के लिए गर्व का क्षण रहा। वहीं पुरुष 110+ किलोग्राम वर्ग में मिजोरम के डेविड जोह्मिंगमाविया ने 290 किलोग्राम के साथ स्वर्ण पदक जीता। आंध्र प्रदेश के गुगुलोथु राजा शेखर (255 किग्रा) को रजत और असम के मनाश प्रतिम सोनवाल (223 किग्रा) वजन उठाकर कांस्य पदक जीता। इस वर्ग में खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। महिला वर्ग में भी मुकाबले बेहद रोमांचक रहे। 86 किलोग्राम वर्ग में महाराष्ट्र की साक्षी बंडु बुरकुले ने 150 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक हासिल किया। छत्तीसगढ़ की रिशिका कश्यप ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 121 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता और अपने मेडल का श्रेय अपने कोच को दिया। वहीं असम की बिटुपुना देओरी ने कांस्य पदक अपने नाम किया। एक अन्य महिला वर्ग के 86 किग्रा से अधिक के वर्ग में मिजोरम की जोसांगजुआली ने 140 किलोग्राम के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि असम की पिंकी बोरो और मध्यप्रदेश की गुंजन उइके ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक हासिल किया। छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने भी इस प्रतियोगिता में दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। लकी बाबू मरकाम ने अपने प्रदर्शन के बाद कहा कि ट्राइबल गेम्स 2026 का आयोजन छत्तीसगढ़ में होना प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी युवाओं के लिए बड़ा अवसर है। इससे उन्हें बड़े मंच को देखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। पूरे आयोजन के दौरान तकनीकी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रहीं और प्रतियोगिताएं पारदर्शी तरीके से संपन्न हुईं। दर्शकों का उत्साह भी खिलाड़ियों के प्रदर्शन में ऊर्जा भरता रहा। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 की वेटलिफ्टिंग स्पर्धाओं ने यह साबित कर दिया कि देश के जनजातीय अंचलों में अपार खेल प्रतिभाएं मौजूद हैं, जिन्हें सही मंच और अवसर मिलने पर वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने में सक्षम हैं।

ताकत, संतुलन और सम्मान: सैनिकों के खेल से ओलंपिक तक वेटलिफ्टिंग की कहानी

नई दिल्ली। वेटलिफ्टिंग ताकत, सहनशक्ति और संतुलन का खेल है, जिसमें स्नैच के अलावा, क्लीन एंड जर्क दो मुख्य तकनीकों के रूप में शामिल हैं। इस खेल के लिए आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता के साथ शरीर की मांसपेशियों को विकसित करना जरूरी है। ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग बेहद लोकप्रिय खेल है। एक दौर था, जब मनुष्य किसी कार्य को अंजाम देने के लिए भार को उठाकर यहां से वहां जाता था, लेकिन बाद में इसे शख्स के बलवान होने से जोड़कर देखा जाने लगा। धीरे-धीरे लोग एक-दूसरे से अधिक वजन उठाकर खुद को ज्यादा बलशाली साबित करने की होड़ में लग गए। यहीं से इस खेल का इजाद भी हुआ। ग्रीस, चीन, मिस्र और मेसोपोटामिया में योद्धा और सैनिक अपनी ताकत परखने के लिए भारी पत्थर या वस्तुएं उठाते थे, जिसने इस खेल की नींव रखी। धीरे-धीरे अन्य देशों में पहलवान शौक के साथ वेटलिफ्टिंग के खेल में हिस्सा लेने लगे। आलम ये रहा कि 19वीं शताब्दी के अंत तक वेटलिफ्टिंग एक अंतरराष्ट्रीय खेल के रूप में अपनी पहचान बना चुका था। 1896 एथेंस ओलंपिक में इस खेल को शामिल किया गया। हालांकि, यह 1900, 1908 और 1912 के संस्करणों का हिस्सा नहीं रहा। इन तीन संस्करणों को छोड़कर, वेटलिफ्टिंग का खेल प्रत्येक ओलंपिक का हिस्सा रहा है। साल 1935 में भारतीय भारोत्तोलन महासंघ की स्थापना हुई, जिसके बाद भारत ने 1936 बर्लिन ओलंपिक में पहली बार इस इवेंट में हिस्सा लिया। 2000 सिडनी ओलंपिक में इस खेल में महिलाओं ने भी हिस्सा लेना शुरू किया। इसी ओलंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने महिलाओं के 54 किलोग्राम भारवर्ग में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इसके बाद मीराबाई चानू ने 2020 टोक्यो ओलंपिक में 49 किलोग्राम भार वर्ग में देश को सिल्वर मेडल दिलाया। वेटलिफ्टिंग के खेल में वेटलिफ्टर्स अलग-अलग बॉडीवेट कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा करते हैं। ओलंपिक में इसके दो चरण होते हैं: 'स्नैच' और 'क्लीन एंड जर्क'। वेटलिफ्टर को दोनों कैटेगरी में तीन-तीन मौके दिए जाते हैं, जिसमें उसके सर्वश्रेष्ठ प्रयास को ही जोड़ा जाता है। दोनों कैटेगरी के वजन को जोड़कर विजेता घोषित किया जाता है। 'स्नैच' में वेटलिफ्टर बारबेल को उठाते हुए इसे अपने सिर के ऊपर सिंगुलर मोशन में लिफ्ट करता है, जबकि 'क्लीन एंड जर्क' में वेटलिफ्टर पहले बारबेल को उठाकर इसे अपनी छाती तक लेकर जाता है। उसे इसी पोजीशन पर कुछ देर रुकना होता है। इसके बाद वह अपनी बाहों और पैरों को फैलाकर बारबेल को सिर के ऊपर लेकर जाता है। इस दौरान उसकी कोहली बिल्कुल सीधी रहनी जरूरी है। बजर बजने तक वेटलिफ्टर को बारबेल सिर से ऊपर रखना होता है। भारत में सीनियर के साथ युवा और जूनियर स्तर पर वेटलिफ्टिंग तेजी से आगे बढ़ रही है। विश्व स्तर पर भारत के वेटलिफ्टर्स ने अपना नाम रोशन किया है। सीनियर्स के नक्शे कदम पर चलते हुए युवा खिलाड़ी और जूनियर स्तर के एथलीट इसमें शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, जो भविष्य के लिए अच्छा आधार है। कड़ी ट्रेनिंग, बेहतरीन संसाधन, अच्छी कोचिंग और सपोर्ट के साथ ओलंपिक में भारत को इस खेल में और भी अधिक मेडल मिलने की संभावना है।