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जगदलपुर में ‘सहकार से समृद्धि’ का राष्ट्रीय मंथन, दूरदराज के क्षेत्रों तक विकास पहुंचाने का संकल्प

बस्तर से सहकारिता का नया सूर्योदय जगदलपुर में सहकार से समृद्धि राष्ट्रीय वर्कशाॅप का शुभारंभ सहकार से समृद्धि के राष्ट्रीय विमर्श से दूरदराज के क्षेत्रों तक विकास पहुंचाने का शंखनाद अंतिम छोर तक जनमानस को लाभ पहुंचाना ही सहकारिता की सार्थकता-सचिव सहकारिता भारत सरकार डाॅ. आशीष भूटानी रायपुर मां दंतेश्वरी की पावन धरा बस्तर जिले के जगदलपुर में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सहकार से समृद्धि वर्कशाॅप का भव्य शुभारंभ गुरुवार को हुआ। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में आयोजित यह नौवां सम्मेलन ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि बस्तर में पहली बार किसी केंद्रीय मंत्रालय द्वारा इस स्तर का राष्ट्रीय विचार-मंथन आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का मुख्य ध्येय सहकारिता आंदोलन के माध्यम से देश के सबसे दूरदराज, आकांक्षी और जनजातीय अंचलों के अंतिम व्यक्ति तक आर्थिक समृद्धि और विकास का लाभ पहुंचाना है।         सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत सरकार के सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने रेखांकित किया कि सहकारिता की सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब इसका प्रभाव जमीनी स्तर पर अंतिम छोर तक दिखाई दे। असम में शांति बहाली के बाद आई विकास की गति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ठीक वैसा ही सकारात्मक और अभूतपूर्व बदलाव आज बस्तर की धरती पर भी महसूस किया जा रहा है। प्राथमिक कृषि साख समितियों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी बताते हुए उन्होंने देश भर में दो लाख नई बहुउद्देशीय पैक्स की स्थापना, उनके पूर्ण डिजिटलीकरण, कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में रूपांतरण और विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना को तेजी से लागू करने की आवश्यकता जताई। इसके साथ ही उन्होंने नाबार्ड, एनसीडीसी और एनडीडीबी जैसी शीर्ष संस्थाओं के सहयोग से पैक्स के विविधीकरण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में नए अवसर तलाशने और सहकारी बैंकिंग व्यवस्था के पारदर्शी व सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन पर विशेष बल दिया।          छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ते हुए सहकारिता को केवल पारंपरिक खाद व ऋण वितरण तक सीमित न रखकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विविधीकरण, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन का सशक्त माध्यम बनाने का रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में अब तक 500 से अधिक नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख समितियों का गठन हो चुका है और डेयरी, मत्स्य पालन तथा लघु वनोपज के क्षेत्रों में भी इसी तर्ज पर तेजी से कार्य जारी है। इन समितियों को डिजिटल करने के साथ-साथ माइक्रो-एटीएम और सीएससी सुविधाओं से लैस किया गया है, जिससे ग्रामीण आबादी को नागरिक सेवाएं मिलने के साथ समितियों की आय भी बढ़ी है। औद्योगिक विस्तार की चर्चा करते हुए उन्होंने कोंडागांव के मक्का आधारित और कवर्धा के गन्ना आधारित एथेनॉल संयंत्रों का उल्लेख किया और कहा कि गुजरात व महाराष्ट्र के सफल मॉडलों की तरह इकोनॉमिक्स ऑफ स्केल हासिल करने के लिए नेफेड, एनसीसीएफ और बीबीएसएसएल जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सप्लाई चेन को मजबूत किया जा रहा है।       सम्मेलन में अन्य राज्यों के अनुभवों को साझा करते हुए तमिलनाडु की अतिरिक्त मुख्य सचिव सहकारिता पी. अमुधा ने बताया कि उनके राज्य ने केंद्र के दिशा-निर्देशों के आधार पर एक, तीन और पांच वर्षीय विजन डॉक्यूमेंट तथा विस्तृत एक्शन प्लान तैयार कर उन्हें जमीन पर उतारा है। तमिलनाडु का सहकारी तंत्र राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर प्राथमिक समितियों के उत्पादों को एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बाजार उपलब्ध करा रहा है।      सत्र के शुभारंभ पर छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना ने बस्तर के जीवट और अदम्य इच्छाशक्ति का प्रभावशाली खाका खींचा। उन्होंने साझा किया कि मात्र पंद्रह दिन पहले ही यह पूरा क्षेत्र भारी जलभराव से जूझ रहा था और सम्मेलन का सभागार भी कई दिनों तक पानी में डूबा रहा, लेकिन जिला प्रशासन और पूरी टीम ने इस प्राकृतिक आपदा को चुनौती मानकर बहुत कम समय में परिसर का कायाकल्प कर इसे राष्ट्रीय स्तर के आयोजन के लिए तैयार कर दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि अतीत के संघर्षों को पीछे छोड़कर बस्तर अब विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ रहा है और यहां सहकारिता के क्षेत्र में मौजूद अपार संभावनाएं स्थानीय आजीविका को नई ऊंचाई देंगी। सम्मेलन के शुरूआत में देश में सहकारिता के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों को लघु फिल्म के द्वारा प्रदर्शित किया गया। साथ ही सम्मेलन स्थल पर विभिन्न सहकारी समितियों एवं संस्थाओं द्वारा अपने उत्पादों से संबंधित स्टाॅल लगाया गया है। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के अधिकारियों द्वारा अपने अनुभव साझा करने सहित सहकारिता के क्षेत्र में नवोन्मेषी प्रयासों के बारे में अवगत कराया जाएगा।          बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, कलेक्टर आकाश छिकारा, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न राज्यों के सहकारिता सचिवों और पंजीयकों तथा विभिन्न सहकारी संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में शुरू हुआ यह दो दिवसीय मंथन देश भर में सहकार से समृद्धि के राष्ट्रीय संकल्प को नई गति और दिशा प्रदान करने में मील का पत्थर साबित होगा।

सड़क दुर्घटनाओं में कमी और वाहन दुर्घटनाओं में मृत्युदर को कम करने कार्यशाला

भोपाल  विगत वर्ष प्रदेश में हुई सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में, सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर को कम करने एवं सड़क दुर्घटनाओं में पीडितों को शासन द्वारा लागू की गई विभिन्न प्रकार की शासकीय योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता, केशलेस उपचार सहायता उपलब्ध कराने के उ‌द्देश्य से मध्यप्रदेश की विभिन्न जिला इकाईयों के पुलिस अधिकारियों/ कर्मचारियों को प्रशिक्षित किये जाने हेतु अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  मोहम्मद शाहिद अबसार के निर्देशानुसार पुलिस परिवहन शोध संस्थान (पीटीआरआई) भोपाल में विषय "यातायात रिफ्रेशर कोर्स" पर 29 और 30 सितम्बर को दो दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण सत्र में मध्यप्रदेश के सभी जिला इकाईयों से रक्षित निरीक्षक से लेकर आरक्षक स्तर तक के पुलिस अधिकारियों को 2 दिवसीय आफलाइन प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ उप पुलिस महानिरीक्षक पीटीआरआई  टी. के. विद्यार्थी द्वारा किया गया।  टी.के. विद्यार्थी द्वारा विषय प्रदेश में होने वाली वाहन दुघटनाओं का विश्लेषण एवं उनकी रोकथाम करने के संबंध में कार्य योजना तैयार करना तथा शासन द्वारा प्रदेश में लागू की गयी विभिन्न प्रकार की शासकीय योजनाओं हिट एण्ड रन योजना, राहवीर योजना, पी. एम. राहत योजना आदि योजनाओं के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी जाकर योजनाओं के व्यापक रूप से प्रभावी प्रचार-प्रसार करने हेतु सभी पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया। इस प्रशिक्षण सत्र में व्याख्याता  देवेन्द्र सिंह यादव, एसीपी यातायात, भोपाल द्वारा वाहन पार्किंग के प्रकार एवं उनकी व्यवस्था, सडक उपयोगकर्ताओं का व्यवहार विषय पर, व्याख्याता डॉ. आशीष शर्मा द्वारा सड़क दुर्घटना में पीडितों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने संबंधी विषय पर,  एस.एस.लल्ली से.नि. अति.पु.अधी. द्वारा मोटरयान अधिनियम एवं केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम एवं नियम संबंधी विषय पर, व्याख्याता  रविशंकर ब‌ट्टी, उपनिरीक्षक यातायात पुलिस भोपाल द्वारा यातायात प्रवर्तन की नवीन तकनीकों, आधुनिक यातायात उपकरणों, नवीन टेक्नोलॉजी की जानकारी जैसे-POS, ITMS, E-CHALLAN इन्टरसेप्टर व्हीकल, स्पीड रडार गन, ब्रीथ एनालाइजर आदि जैसे नव प्रयोगों के बारे में व्यापक रूप से प्रशिक्षण में उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण सत्र के दौरान उमनि  टी. के. वि‌द्यार्थी, समनि  अभिजीत रंजन, समनि  राजेश कुमार मिश्र, समनि  मनोज कुमार शर्मा, उप पुलिस अधीक्षक  हिमांशु कार्तिकेय एवं प्रशिक्षण टीम के अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे। इस प्रशिक्षण सत्र के समापन के दौरान प्रशिक्षणार्थियों की पीटीआरआई द्वारा सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने पर प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया।  

नई दिल्ली में मध्यप्रदेश के अधिकारियों की सशक्त सहभागिता

भोपाल  आवास एवं शहरी विकास निगम (हडको) के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में नगरीय अधोसंरचना परियोजनाओं में निवेश, वित्तीय संसाधनों के संवर्धन तथा नगरीय कायाकल्प की संभावनाओं पर केंद्रित दो दिवसीय कार्यशाला ‘अर्बन चैलेंज फंड : निर्णय क्षमता, निवेश तत्परता एवं नगरीय परिवर्तन’ का शुभारंभ हुआ। 'साइटिस 2.0' (CITIIS 2.0) के अंतर्गत हडको के मानव बस्ती अध्ययन संस्थान (HSMI) द्वारा आयोजित कार्यशाला का आधिकारिक उद्घाटन हडको के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक  संजय कुलश्रेष्ठ द्वारा किया गया। नगरीय वित्तीय सुदृढ़ीकरण एवं निवेश तत्परता पर गहन मंथन कार्यशाला में नगरीय वित्त प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के लिए अर्बन चैलेंज फंड, बाजार-आधारित वित्त पोषण, पूंजी बाजार की सहभागिता, सार्वजनिक-निजी भागीदारी ,बहुपक्षीय वित्तीय संस्थाओं के सहयोग, परिसंपत्ति मुद्रीकरण तथा लैंड वैल्यू कैप्चर जैसे आधुनिक विषयों पर विषय-विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, नगरीय विकास की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को प्रारंभिक अवधारणा से वित्तीय समापन तक सफलतापूर्वक ले जाने के लिए निवेश तत्परता और परियोजना तैयारी पर व्यावहारिक केस स्टडीज के माध्यम से तकनीकी कौशल संवर्धन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों एवं निकायों का प्रतिनिधित्व प्रशिक्षण एवं संवाद कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के स्मार्ट सिटी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन एवं जबलपुर के साथ नगर निगम भोपाल एवं ग्वालियर, नगरीय विकास एवं आवास विभाग तथा मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी के अधिकारी सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से सक्षम, आत्मनिर्भर एवं निवेश-तत्पर बनाकर शहरों के सतत विकास को गति प्रदान करना है।  

आधार प्रमाणीकरण एवं सत्यापन विषय पर एक-दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आज गुरुवार को ‘आधार प्रमाणीकरण एवं सत्यापन’ विषय पर एक-दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य शासन के अधिकारियों- कर्मचारियों को आधार प्रमाणीकरण एवं सत्यापन की तकनीकी प्रक्रियाओं, ऑफलाइन सत्यापन, फेस ऑथेंटिकेशन तथा आधार सेवाओं के सुरक्षित उपयोग से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था। कार्यशाला की मुख्य अतिथि खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले रहीं। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ सही हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए आधार प्रमाणीकरण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन में कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने आती हैं। ऐसे में आधार की ऑफलाइन सत्यापन व्यवस्था की जानकारी अधिकारियों एवं संबंधित विभागों के लिए महत्वपूर्ण और उपयोगी है।  कंगाले ने हितग्राही सत्यापन से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि फिंगरप्रिंट आधारित आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से हितग्राहियों की पहचान सुनिश्चित करने से छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला से अधिकारियों एवं विभागीय प्रतिनिधियों को आधार प्रमाणीकरण एवं सत्यापन की प्रक्रियाओं की बेहतर समझ मिलेगी तथा वे निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप इसका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित कर सकेंगे।   33 जिलों में 1,100 से अधिक आधार सेवा केंद्र संचालित  कार्यशाला में छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसाइटी (चिप्स) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक अग्रवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में इन-हाउस मॉडल के तहत 1,100 से अधिक आधार सेवा केंद्र शासकीय परिसरों में संचालित किए जा रहे हैं । इन केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को आधार नामांकन एवं अद्यतन की सुरक्षित, सुगम और विश्वसनीय सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है । उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक 3 करोड़ 17 लाख 33 हजार से अधिक आधार पंजीकरण किए जा चुके हैं।  7 लाख से अधिक बच्चों का अनिवार्य बायोमेट्रिक अद्यतन अग्रवाल ने बताया कि नागरिकों तक आधार सेवाओं की सहज पहुँच सुनिश्चित करने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में विशेष आधार शिविरों का आयोजन किया गया है। विशेष रूप से 5-15 वर्ष तथा 15-17 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अद्यतन पर विशेष ध्यान देते हुए, इन शिविरों के माध्यम से अब तक 7 लाख से अधिक बच्चों का अनिवार्य बायोमेट्रिक अद्यतन सफलतापूर्वक किया जा चुका है। राज्य में 14 नये आधार सेवा केंद्र खोलने की अनुमति अग्रवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़़ राज्य के नागरिकों की सुविधा के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने राज्य में 14 नये आधार सेवा केंद्र खोलने की अनुमति प्रदान की है, जिसमें से 5 जिलों दुर्ग, महासमुंद, रायपुर, बिलासपुर और जांजगीर-चांपा में आधार सेवा केंद्र का संचालन भी प्रारम्भ कर दिया गया है शेष स्थानों पर कार्य प्रगतिरत है । चिप्स द्वारा इन 14 स्थानों के अतिरिक्त 7 अन्य जिलों में आधार सेवा केंद्र खोलने का प्रस्ताव भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण को प्रेषित किया है।   आधार के सुरक्षित उपयोग एवं निर्धारित प्रक्रियाओं की दी जानकारी   कार्यशाला में वक्ता के रूप में नई दिल्ली से आये भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के आधार उपयोग प्रभाग एवं मीडिया के  निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल प्रवीण चौधरी ने कहा कि आधार अधिनियम के प्रावधानों के तहत आधार से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए स्पष्ट नियम एवं निर्धारित व्यवस्थाएं लागू हैं। उन्होंने कहा कि आधार का उपयोग नागरिकों की पहचान के सत्यापन को सुगम और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। लेफ्टिनेंट कर्नल प्रवीण चौधरी ने बताया कि नागरिक स्वयं भी अपने आधार का सत्यापन कर सकते हैं, जिसके लिए ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन माध्यम की सुविधा भी उपलब्ध है। उन्होंने आधार के सुरक्षित उपयोग, सत्यापन की निर्धारित प्रक्रियाओं, नागरिक सुविधा तथा डेटा सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि आधार सेवाओं का उपयोग निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं के अनुरूप किया जाना आवश्यक है। लेफ्टिनेंट कर्नल प्रवीण चौधरी ने बताया कि ऑफलाइन आधार सत्यापन का उपयोग व्यवसायिक संस्थाएं, बैंक आदि निजी संस्थाओं द्वारा आधार के मोबाइल एप के माध्यम से भी किया जा सकेगा।  कार्यशाला में वक्ता के रूप में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, हैदराबाद के निदेशक  टी. रामकृष्ण उपस्थित रहे। उन्होंने देश में आधार व्यवस्था के क्रमिक विस्तार तथा इसके लिए विकसित की गई तकनीकी एवं संस्थागत अधोसंरचना की विस्तृत जानकारी दी । उन्होंने बताया कि आधार सेवा केंद्रों के निरंतर विस्तार के साथ नागरिकों के लिए नामांकन, अद्यतन एवं प्रमाणीकरण जैसी सेवाओं की पहुंच भी लगातार बढ़ी है। उन्होंने आधार की तकनीकी संरचना, सेवा वितरण तंत्र तथा इसके सुचारू संचालन के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्यरत व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं पर भी जानकारी दी। तकनीकी सत्रों में आधार सत्यापन की प्रक्रियाओं पर हुई विस्तार से चर्चा कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों को ऑफलाइन आधार सत्यापन, फेस ऑथेंटिकेशन तथा आधार सेवाओं के सुरक्षित उपयोग से संबंधित व्यावहारिक जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने सीमित नेटवर्क वाले क्षेत्रों में ऑफलाइन सत्यापन की उपयोगिता तथा फिंगरप्रिंट अथवा आइरिस प्रमाणीकरण में कठिनाई होने की स्थिति में फेस ऑथेंटिकेशन के उपयोग और लाभों के बारे में विस्तार से बताया।  150 से अधिक अधिकारियों ने लिया भाग कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक भास्कर विलास संदीपन, कोष एवं लेखा संचालनालय के संचालक एस. जयवर्धन, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय की संचालक डॉ. फरिहा आलम, चिप्स के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी शशांक पांडे, संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपम आशीष टोप्पो एवं आशीष जायसवाल सहित विभिन्न विभागों के 150 से अधिक अधिकारियों ने भाग लिया।

तीन दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन भौतिकी, रसायन, विष विज्ञान, डीएनए, क्राइम सीन किट एवं बैलिस्टिक्स साक्ष्य प्रबंधन पर विशेषज्ञों ने दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण

भोपाल  अपराधों की विवेचना को अत्याधुनिक, वैज्ञानिक और पुख्ता साक्ष्य-आधारित बनाने के उद्देश्य से अपराध अनुसंधान विभाग (CID), पुलिस मुख्यालय, भोपाल द्वारा आयोजित 03 दिवसीय विशेष फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन विभिन्न तकनीकी व वैज्ञानिक सत्रों का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कार्यशाला विशेष पुलिस महानिदेशक  पंकज वास्तव के निर्देशन में तथा पुलिस उप महानिरीक्षक  साकेत पाण्डेय,  प्रशांत खरे एवं सहायक पुलिस महानिरीक्षक  मनीष खत्री के सतत मार्गदर्शन में आयोजित की जा रही है। कार्यशाला के दूसरे दिन राज्य के क्षेत्रीय एवं राज्य फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारियों ने अलग-अलग विषयों पर गहन व्याख्यान और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। फॉरेंसिक भौतिकी एवं वॉयस साक्ष्य प्रबंधन क्षेत्रीय न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (RFSL), भोपाल की वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. पूनम सिंह ने फॉरेंसिक भौतिकी और वॉयस में भौतिक साक्ष्य प्रबंधन तथा FSL की भूमिका पर व्याख्यान दिया। उन्होंने ध्वनि नमूनों, भौतिक अवशेषों के वैज्ञानिक संकलन, उनके संरक्षण एवं प्रयोगशाला अग्रेषण की मानक कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया। फॉरेंसिक रसायन एवं विष विज्ञान (Toxicology) आरएफएसएल भोपाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. राजीव दुआ ने रासायनिक नमूनों, मादक पदार्थों, विषाक्त पदार्थों के संकलन तथा रखरखाव की बारीकियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विधिक साक्ष्य के रूप में रासायनिक नमूनों की शुद्धता बनाए रखना विवेचना की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है। फॉरेंसिक बायोलॉजी, सीरोलॉजी एवं डीएनए (DNA) साक्ष्य प्रबंधन आरएफएसएल भोपाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. कमलेश कैथोलिया ने जैविक साक्ष्यों—जैसे रक्त, वीर्य, बाल, लार व अन्य शारीरिक द्रव्यों के वैज्ञानिक संकलन, पैकेजिंग, चेन ऑफ कस्टडी तथा डीएनए प्रोफाइलिंग में फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की भूमिका पर विस्तृत तकनीकी जानकारी दी। अपराध स्थल अन्वेषण, प्रबंधन एवं क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन किट का उपयोग सत्र में जिला सीन क्राइम ऑफ मोबाइल यूनिट, भोपाल की वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. प्रीति गायकवाड ने क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन (CSI) किट के व्यावहारिक उपयोग, घटनास्थल के प्रबंधन, साक्ष्यों की प्राथमिकता आधारित पहचान और सुरक्षित जब्ती प्रक्रिया का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया। उन्होंने घटनास्थल को दूषित होने से बचाने और संकलित साक्ष्यों के सही प्रलेखन के व्यावहारिक गुर सिखाए। बैलिस्टिक्स शाखा एवं शंका समाधान सत्र अंतिम सत्र में राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला (SFSL), सागर के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी  रामदा कनेश ने बैलिस्टिक्स साक्ष्य प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया। इसमें आग्नेयास्त्रों, प्रयुक्त कारतूसों, गोलियों (बुलेट्स), गनशॉट रेजीड्यू (GSR) के संकलन, संरक्षण तथा एफएसएल परीक्षण की प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सत्र के अंत में प्रतिभागियों की व्यावहारिक शंकाओं का भी समाधान किया गया। कार्यशाला का समापन 03 सितंबर को विशेष पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान विभाग  पंकज वास्‍तव की उपस्थित में होगा। अंतिम दिन सीआईडी फोटोग्राफी शाखा के उप पुलिस अधीक्षक (फोटो)  अमिताभ तिवारी द्वारा अपराध घटना स्थल फोटोग्राफी, डिजिटल साक्ष्य प्रस्तुतीकरण और उसके न्यायालयीन प्रमाणीकरण पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।  

एम.पी. ट्रांसको में हुई सब स्टेशनों के संचालन एवं सुरक्षा से संबंधी प्रशिक्षण कार्यशाला

एम.पी. ट्रांसको में हुई सब स्टेशनों के संचालन एवं सुरक्षा से संबंधी प्रशिक्षण कार्यशाला भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी की जीरो एक्सीडेंट पॉलिसी के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर सब स्टेशन संचालन एवं सुरक्षा से संबंधित व्यापक प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में उज्जैन जिले के नागदा, धार जिले के बदनावर व राजगढ़ टेस्टिंग डिवीज़न मुख्यालयों मे प्रशिक्षण कार्यशाला अधीक्षण अभियंता शेखर फटाले के मार्गदर्शन में हुई। जिनमें सब स्टेशन मेंटेनेंस एवं ऑपरेशन कार्यों के दौरान अपनाई जाने वाली आवश्यक सुरक्षा प्रक्रियाओं को बिंदुवार समझाया गया एवं कार्यस्थल पर लापरवाही रोकने के महत्व पर विशेष जोर देते हुए दुर्घटनाओं से बचाव के लिये व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी, जिससे कार्मिकों एवं उपकरणों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। सुरक्षित कार्यशैली से कराया गया अवगत प्रशिक्षण में फटाले ने एम.पी. ट्रांसको की जीरो एक्सीडेंट पॉलिसी के अंतर्गत निर्धारित स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर(एसओपी) एवं सेफ्टी प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करने पर बल दिया। प्रतिभागियों को सुरक्षित कार्य पद्धतियों, सुरक्षा उपकरणों के उपयोग तथा निर्बाध एवं सुरक्षित विद्युत पारेषण बनाए रखने के लिये समन्वित टीमवर्क के रूप में कार्य करने के प्रति जागरूक भी किया गया। कार्यशालाओं में क्षेत्र के अभियंताओं एवं तकनीकी स्टाफ ने सक्रिय सहभागिता की।  

तेन्दूपत्ता संग्राहकों को साप्ताहिक खरीदी के तीसरे दिन किया जाएगा भुगतान

रायपुर तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन कार्य के लिए कार्यशाला तेन्दूपत्ता की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने के लिए संग्रहण (मार्च-अप्रैल) से पहले फरवरी-मार्च में वैज्ञानिक तरीके से शाखा-कर्तन किया जाता है। इस प्रक्रिया में झाड़ियों की कटाई-छंटाई की जाती है, जिससे नई कोमल पत्तियां (फड़) निकलती हैं, जो बीड़ी उद्योग के लिए उच्च गुणवत्ता वाली होती हैं।              वनमंडलाधिकारी कोरिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में तेन्दूपत्ता को हरा सोना कहा जाता है। यह कार्य ऐसे समय में होता है जब ग्रामीण और संग्राहकों के पास अन्य रोजगार कम होते हैं, इसलिए यह उनके लिए आय का महत्वपूर्ण साधन बनता है। उन्होंने निर्देश दिए कि तेन्दूपत्ता खरीदी का भुगतान साप्ताहिक खरीदी के तीसरे दिन तक अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि संग्राहकों को समय पर लाभ मिल सके। कोरिया वनमंडल अंतर्गत जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित बैकुंठपुर द्वारा तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य से पहले शाखा-कर्तन (बूटा कटाई) के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला बैकुंठपुर स्थित गेज रोपणी परिसर में आयोजित की गई। इसमें कोरिया वनमंडल के अंतर्गत आने वाली 17 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के 16 इकाइयों के फड़मुंशी, प्रबंधक, पोषक अधिकारी, फड़ अभिरक्षक सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।  तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन कार्य के लिए कार्यशाला             परिक्षेत्र अधिकारी सोनहत जिला कोरिया वनमंडल ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार तेन्दूपत्ता संग्रहण से पहले शाखा-कर्तन का कार्य कराया जाता है, जिससे बेहतर गुणवत्ता का पत्ता प्राप्त हो सके। यह कार्य प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से मार्च के प्रथम और द्वितीय सप्ताह में अनिवार्य रूप से पूरा किया जाएगा। साथ ही फड़मुंशी और फड़ अभिरक्षकों को उनके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों की जानकारी भी दी गई। शाखा-कर्तन कार्य के लिए निर्धारित राशि के अनुसार 70 रुपये प्रति मानक बोरा भुगतान किया जाएगा, जिसका भुगतान समिति के पोषक अधिकारी और प्रबंधक द्वारा संयुक्त रूप से कार्य पूरा होने के तुरंत बाद किया जाएगा। परिक्षेत्र अधिकारी देवगढ़ ने तेन्दूपत्ता बूटा कटाई की तकनीकी जानकारी देते हुए फड़ों के चयन, शाखा-कर्तन की प्रक्रिया, तेन्दूपत्ता तोड़ाई, गड्डी बांधने तथा संग्रहण केंद्र में खरीदी की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति पटना के प्रबंधक ने भी तेन्दूपत्ता संग्रहण से लेकर क्रेता को पत्ता सुपुर्द करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। कार्यक्रम में जिला यूनियन कोरिया के अध्यक्ष ने अधिकारियों और कर्मचारियों को उच्च गुणवत्ता का तेन्दूपत्ता संग्रहित करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर परिक्षेत्र अधिकारी सोनहत अजीत सिंह ने कोरिया वनमंडल की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 के तेन्दूपत्ता सीजन के लिए वनमंडल की सभी लॉट अग्रिम निवर्तन में पहले ही विक्रय हो चुकी हैं इस अवसर पर उप प्रबंध संचालक अखिलेश मिश्रा, तकनीकी अधिकारी सी.पी. पटेल सहित वनमंडल के अधिकारी-कर्मचारी, फड़ अभिरक्षक, फड़मुंशी, समिति के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, अग्रिम क्रेता के प्रतिनिधि और स्व.सहायता समूहों के सदस्य उपस्थित रहे।

सतत जीवन शैली की ओर अग्रसर महाविद्यालय: ‘वेस्ट टू वेल्थ’ कार्यशाला में नवाचारों की गूंज

भोपाल आज दिनांक 23 फरवरी 2026 को महाविद्यालय में इको क्लब के तत्वावधान में पर्यावरण शिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय “सतत जीवन शैली : वेस्ट टू वेल्थ” रहा। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधनों के पुनः उपयोग एवं सतत विकास की दिशा में प्रेरित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. उमेश कुमार धुर्वे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने छात्राओं को शोध, नवाचार एवं सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही इको क्लब द्वारा आयोजित इस सार्थक पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने की बात कही। इसके पश्चात इको क्लब प्रभारी डॉ. सतीश बालापुरे ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरणीय उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है। उन्होंने अपशिष्ट प्रबंधन, वृक्षारोपण एवं जैव विविधता संरक्षण से जुड़े आगामी कार्यक्रमों की जानकारी भी साझा की। मुख्य वक्ता एवं पर्यावरणविद डॉ. आनंद पटेल हेक्सा हिवा इंटरनेशनल (HHI), भोपाल ने अपने उद्बोधन में “वेस्ट टू वेल्थ” की अवधारणा को व्यवहारिक रूप से समझाते हुए अनेक नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संतरे एवं नींबू के छिलकों से बायो-एंज़ाइम तैयार कर घरेलू स्वच्छता एवं जैविक उपयोग में लाया जा सकता है। साथ ही प्लास्टिक कचरे के पुनः उपयोग हेतु इको ब्रिक निर्माण की प्रक्रिया समझाई, जिसमें खाली प्लास्टिक बोतलों में अपशिष्ट प्लास्टिक भरकर उपयोगी निर्माण सामग्री तैयार की जाती है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण हेतु मल्टी लेयर सीड बॉल की तकनीक समझाई, जिसके माध्यम से बीजों को मिट्टी, खाद एवं सुरक्षात्मक परतों के साथ तैयार कर बड़े स्तर पर हरितावरण बढ़ाया जा सकता है। डॉ. पटेल ने सर्कुलर इकॉनॉमी के विचार को स्पष्ट करते हुए बताया कि संसाधनों का पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग ही सतत विकास का आधार है। उन्होंने “मिशन लाइफ” की 7 थीम के आधार पर दैनिक जीवन में अपनाए जा सकने वाले 70 व्यवहारिक उपायों की जानकारी भी दी। अंत में उन्होंने महाविद्यालय को एक इको-फ्रेंडली सोलर लैंप भेंट स्वरूप प्रदान किया, जो ऊर्जा संरक्षण एवं हरित जीवन शैली का प्रेरणादायी प्रतीक रहा। द्वितीय वक्ता एवं विषय विशेषज्ञ उषा दुबे नर्मदापुरम ने अपने संबोधन में दैनिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक परिवर्तनों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्राओं को सिंगल यूज़ प्लास्टिक से बचने, रसोई अपशिष्ट से कंपोस्ट तैयार करने तथा कपड़े एवं कागज़ के पुनः उपयोग के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक विद्यार्थी अपने घर और समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाए, तो “वेस्ट टू वेल्थ” एक जन आंदोलन का रूप ले सकता है। अंत में इको क्लब सह-प्रभारी डॉ. रजनीकांत वर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि “वेस्ट टू वेल्थ” केवल एक विचार नहीं, बल्कि व्यवहार में अपनाई जाने वाली जीवन शैली है। उन्होंने छात्राओं से घर एवं परिसर में कचरे का पृथक्करण, जैविक खाद निर्माण एवं पुनर्चक्रण की आदत विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस परिवर्तन संभव है। मंच संचालन डॉ. मनीष दीक्षित ने किया तथा डॉ. रजनीकांत वर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्राध्यापकगण रजनीश जाटव, मनोज कुमार प्रजापति, धीरेंद्र दुबे, डॉ. दुर्गा मीना, प्रवीण साहू, मयंक गौर, रजनी हरियाले, नीलम दुबे,  नीलू लोवंशी, राहुल मालवीय एवं इको क्लब इकाई की छात्राएँ तथा महाविद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।