samacharsecretary.com

डाटा सेंटर, फिल्म सिटी और मैन्युफैक्चरिंग हब से यीडा क्षेत्र बन रहा मल्टी-इंडस्ट्री कॉरिडोर

एयरपोर्ट, औद्योगिक निवेश और मेगा प्रोजेक्ट्स से बदल रही जेवर-यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की तस्वीर डाटा सेंटर, फिल्म सिटी और मैन्युफैक्चरिंग हब से यीडा क्षेत्र बन रहा मल्टी-इंडस्ट्री कॉरिडोर एयरपोर्ट के चलते जमीन की मांग और कीमतों में उछाल, रियल एस्टेट निवेशकों के लिए उभर रहा हॉटस्पॉट गौतमबुद्धनगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यीडा) क्षेत्र उत्तर प्रदेश के सबसे तेजी से विकसित होते औद्योगिक और रियल एस्टेट हब के रूप में उभर रहा है। बड़े पैमाने पर निवेश, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और मेगा प्रोजेक्ट्स के चलते यह क्षेत्र अब देश के प्रमुख विकास केंद्रों में शामिल होने की ओर अग्रसर है। डाटा सेंटर से फिल्म सिटी तक, मल्टी-सेक्टर ग्रोथ यमुना औद्योगिक क्षेत्र में डाटा सेंटर पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स हब और वेयरहाउसिंग सेक्टर में तेजी से निवेश बढ़ रहा है। इसके साथ ही नोएडा फिल्म सिटी इस क्षेत्र को मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का भी बड़ा केंद्र बनाने जा रही है। फिल्म सिटी का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है और जल्द ही यहां 'मॉम 2'  फिल्म की शूटिंग भी शुरू होने वाली है। फिल्म सिटी में फिल्म इंस्टीट्यूट के निर्माण का भी प्रस्ताव है, जिसका लाभ हजारों युवाओं को मिलेगा जो इस क्षेत्र में भविष्य बनाना चाहते हैं। इसी तरह, डाटा सेंटर हब बनने से इस क्षेत्र में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हो रहा है।  नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बना सबसे बड़ा गेमचेंजर इस पूरे क्षेत्र के विकास में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। एयरपोर्ट के निर्माण और संचालन से न केवल कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि यह क्षेत्र एक बड़े लॉजिस्टिक्स और ट्रांजिट हब के रूप में विकसित होगा। एयरपोर्ट के कारण आसपास के इलाकों में जमीन की मांग तेजी से बढ़ी है और प्रॉपर्टी की कीमतों में लगातार उछाल देखा जा रहा है। रियल एस्टेट सेक्टर में जबरदस्त उछाल यमुना औद्योगिक क्षेत्र में रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बड़े डेवलपर्स टाउनशिप, प्लॉटिंग स्कीम और ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट लॉन्च कर रहे हैं। निवेशकों के लिए यह क्षेत्र “फ्यूचर ग्रोथ जोन” बन चुका है, जहां बेहतर रिटर्न की संभावनाएं जताई जा रही हैं। खासकर एयरपोर्ट और औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के आसपास के क्षेत्रों में निवेश की मांग सबसे अधिक है। बेहतर कनेक्टिविटी से बढ़ी रफ्तार यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली, नोएडा, आगरा और अन्य प्रमुख शहरों से उत्कृष्ट कनेक्टिविटी इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत है। इसके अलावा प्रस्तावित मेट्रो विस्तार, नई सड़क परियोजनाएं और फ्रेट कॉरिडोर इस क्षेत्र को और अधिक सुगम और निवेश के अनुकूल बना रहे हैं। सरकारी नीतियों का मिल रहा पूरा लाभ प्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई औद्योगिक नीतियां, सिंगल विंडो सिस्टम और निवेशकों को दी जा रही रियायतें इस क्षेत्र में निवेश को आकर्षित कर रहीं हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली, पानी, सुरक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे उद्योगों को अनुकूल वातावरण मिल रहा है। रोजगार और शहरीकरण का नया केंद्र डाटा सेंटर, फिल्म सिटी, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और एयरपोर्ट जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स के चलते लाखों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। तेजी से हो रहा शहरीकरण इस क्षेत्र को आने वाले वर्षों में उत्तर भारत का सबसे बड़ा औद्योगिक और रीयल एस्टेट हब बना सकता है।

यमुना के तट पर नया पब्लिक प्लाजा पार्क: भारतीय और जापानी संस्कृति का बेजोड़ नमूना

प्रयागराज   संगम नगरी प्रयागराज की पहचान धार्मिक ,साहित्यिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में जानी जीती है। योगी सरकार द्वारा महाकुंभ 2025 के भव्य और दिव्य आयोजन ने इसकी समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को दुनिया भर में पहुंचाया। इस भव्य आयोजन के बाद अब कुंभ नगरी में जापानी और सनातन संस्कृति का मेल भी होगा।  हजारों किलोमीटर की दूरी और भाषा का अंतर होने के बावजूद भारत की सनातन संस्कृति और जापान की पारंपरिक शिन्तो संस्कृति में अद्भुत समानताएँ दिखाई देती हैं। दोनों ही सभ्यताएं प्रकृति को देवतुल्य मानती हैं, आत्मसंयम को सर्वोच्च मूल्य और शांति को जीवन का आधार मानती हैं। इन दोनों संस्कृतियों के मेल की झलक की साक्षी बनने जा रही है कुंभ नगरी प्रयागराज। यहां जापानी स्थापत्य और सांस्कृतिक प्रतीकों से प्रेरित पब्लिक प्लाजा पार्क का निर्माण किया जा रहा है। नगर विकास की तरफ से इसका निर्माण किया जा रहा है, जिसकी कार्यदायी संस्था सीएनडीएस है। सीएनडीएस के प्रोजेक्ट मैनेजर रोहित कुमार राणा बताते हैं कि प्रयागराज में यमुना किनारे अरैल क्षेत्र में शिवालय पार्क के नजदीक 3 हेक्टेयर में इसका निर्माण किया जाएगा। नगर निगम प्रयागराज को इसका आकलन भेजा गया है। इसमें भारतीय और जापानी संस्कृति के साझा स्थापत्य के प्रतीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। प्रयागराज महाकुंभ के समय धार्मिक और आध्यात्मिक पार्कों का हब बनकर सामने आया। अरैल क्षेत्र में पहले शिवालय पार्क और अब साहित्य पार्क के निर्माण के क्रम में एक नई उपलब्धि जुड़ने जा रही है। यमुना नदी के किनारे पब्लिक प्लाजा पार्क का निर्माण हो रहा है। कार्यदायी संस्था सीएनडीएस के प्रोजेक्ट मैनेजर रोहित कुमार राणा का कहना है कि पार्क में 5 जोन बनाए जाएंगे। पार्क के चप्पे-चप्पे में जापान की शिंटो संस्कृति और भारतीय सनातन संस्कृति के साझा मूल्यों की झलक मिलेगी। पार्क में प्रवेश द्वार के स्थान पर टोरी गेट का निर्माण किया जाएगा जो शिंटो संस्कृति का प्रतीक है। पार्क में जापानी गार्डन बनेगा जिसमें मियावाकी वन भी विकसित किया जाएगा। पार्क में योग और भारतीय मंदिर वास्तुकला, नृत्य और संगीत की तरह जापान की टी सेरेमनी, इकेबाना और ज़ेन गार्डन में भी आध्यात्मिक भाव झलकता है। इस पार्क के अंदर भी जेन पार्क का निर्माण किया जायेगा। दोनों देशों की कला केवल सजावट नहीं, बल्कि आत्म-अनुशासन और साधना का माध्यम है। समरसता, शांति और विश्व बंधुत्व भारत के “वसुधैव कुटुम्बकम्” और जापान के “वा” दर्शन में एक ही संदेश निहित है जिसकी झलक भी यहां स्थापित होने वाले प्रतीकों में दिखेगी।

यमुना का पानी बढ़ा, दिल्ली के 8 इलाके जलमग्न – रिंग रोड और NH-154A पर रोक

नई दिल्ली दिल्‍ली-एनसीआर में गुरुवार 4 सितंबर 2025 को झमाझम बारिश हुई है. खासकर राष्‍ट्रीय राजधानी के संगम विहार, कालकाजी समेत महानगर के कई हिस्‍सों में बारिश हुई है. दिल्‍ली के सोनिया विहार इलाके में जमीन धंसने की घटना समने आई है. ऊपरी इलाकों में लगातार बारिश की वजह से यमुना का जलस्‍तर खतरे के निशान को पार कर गया है. कई इलाकों में पानी भर गया है. सैकड़ों की संख्‍या में लोगों को सुरक्षित जगहों पर आश्रय लेना पड़ा है. हथिनी बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने की वजह से हालात और भी बिगड़ रहे हैं. पंजाब और जम्‍मू-कश्‍मीर में भी बाढ़ से स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है. पंजाब का हर जिला बाढ़ से प्रभावित है, जिसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने पूरे राज्‍य को आपदा प्रभावित घोषित कर दिया है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कई राज्‍यों के लिए भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. जम्‍मू-कश्‍मीर में मूसलाधार बारिश, बाढ़, लैंडस्‍लाइड और फ्लैश फ्लड के चलते हालात बेहद गंभीर हो गया है. पंपोर में बारिश से हालात इस कदर खराब हो चुके हैं कि राहत-बचाव के लिए सेना को उतरना पड़ा है. झेलम नदी लगातार खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिसके कारण बाढ़ का पानी लगातार नए इलाकों में घुस रहा है. इस वजह से आमलोगों की परेशानियां काफी बढ़ गई हैं. लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के साथ ही आर्मी के जवान झेलम के पानी को रोकने का प्रयास भी कर रहे हैं, ताकि हालात बिगड़े नहीं. राजस्‍थान में मूसलाधार बारिश से हालात खराब राजस्थान में जयपुर समेत कई जिले में भारी बारिश से हालात खराब है. जयपुर के पास कोटखावदा गांव भी सड़कों के दरिया बनने से टापू बन गया है. गांव के कई इलाके पानी में डूबे हैं. इस गांव की आस पास के छोटे गांव यानी ढाणियों के टापू बनने से ग्रामीण संकट में फंसे है. पानी की निकासी की कोशिश जारी है, इसके बावजूद संकट बना हुआ है. कोट खावदा गांव टापू में तब्‍दील हो गया है. कोट खावदा गांव की संपर्क सड़क पूरी तरह पानी में डूब गई है. प्रभावित पीड़ितों को ट्रैक्टरों की मदद से बाहर निकाला जा रहा है. पंजाब सरकार ने आवंटित किया करोड़ों का फंड पंजाब सरकार ने आपदा की स्थिति से निपटने के लिए कुल 71 करोड़ रुपये का फंड जारी किया है. सभी जिलों को पहले ही 35.50 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं. वित्त आयुक्त (माल) ने बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित 12 जिलों को 35.50 करोड़ रुपये के अतिरिक्त फंड जारी किए. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा कि वह प्रदेशवासियों के नुकसान की भरपाई के लिए वचनबद्ध है और उसके लिए प्रयास करेगी.  चंबा में आपदा के बाद राहत कार्य तेज़, भरमौर एनएच की बहाली में जुटा प्रशासन आज का मौसम लाइव: हाल ही में हुई मूसलधार बारिश के चलते चंबा ज़िले की अधिकांश सड़कों पर यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया है. खासकर चंबा से भरमौर को जोड़ने वाला राष्ट्रीय उच्च मार्ग 154-A बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है. इस आपदा के चलते जहां मणिमहेश यात्रा के अधिकतर श्रद्धालु सुरक्षित रूप से अपने घरों को लौट चुके हैं, वहीं कुछ यात्री अब भी फंसे हुए हैं. उन्हें निकालने के लिए सरकार द्वारा हेलीकॉप्टर सेवाएं चलाई जा रही हैं. प्रशासन ने राहत और पुनर्बहाली कार्यों में तेजी लाने के लिए विशेष प्रयास शुरू कर दिए हैं. इसी कड़ी में बिलासपुर से एससी वर्ग के वरिष्ठ अधिकारी जीत सिंह ठाकुर को विशेष रूप से चंबा भेजा गया है. उन्हें इस मार्ग की बहाली की जिम्मेदारी सौंपी गई है और वे दिन-रात मौके पर निगरानी रख रहे हैं.  

उफान पर यमुना: खतरे का निशान पार, दिल्ली में चारों ओर पानी ही पानी

नई दिल्ली दिल्ली में यमुना का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है। लोहा पुल से लिए गए ड्रोन वीडियो में नदी का सैलाब साफ नजर आ रहा है, मानो पूरा शहर समुद्र में डूबने को तैयार हो। बारिश और हरियाणा के वजीराबाद और हथनीकुंड बांधों से पानी छोड़े जाने की वजह से यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। अधिकारियों ने निचले इलाकों को खाली करा लिया है, जहां जलभराव की स्थिति बन गई है। स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है, लेकिन अगर जलस्तर और बढ़ा तो बाढ़ का खतरा और गहरा सकता है। नोएडा-गाजियाबाद में भी यमुना का कहर नोएडा और गाजियाबाद के कई गांवों में भी यमुना का पानी पहुंच गया है, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है। यमुना के किनारे स्थित गाजियाबाद के कुछ गांव जलमग्न हो गए हैं, जबकि नोएडा के डूब क्षेत्र में बने कई फार्म हाउस तक यमुना का पानी पहुंच चुका है। स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। बचाव टीमें अलर्ट पर हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं। दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान (205.33 मीटर) को पार कर 205.50 मीटर तक पहुंच गया है। पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों में भी बारिश जारी रहने की संभावना है, जिससे यमुना का जलस्तर और बढ़ सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि वो हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है। 2023 की बाढ़ की याद यमुना नदी का यह उफान दिल्ली के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। 2023 में नदी का जलस्तर 208.66 मीटर तक पहुंच गया था, जो अब तक का अधिकतम स्तर था। इस बार भी अगर जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है।